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गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस

  • 03 Feb 2023
  • 4 min read

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने 1.5 लाख करोड़ रुपए का ग्रॉस मर्चेंडाइज़ वैल्यू (GMV) हासिल किया।

  • GeM "न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन" की सरकार की प्रतिबद्धता में प्रभावी रूप से योगदान दे रहा है। 

ग्रॉस मर्चेंडाइज़ वैल्यू (GMV):

  • GMV ‘ग्राहक-से-ग्राहक’ या ई-कॉमर्स प्लेटफाॅर्मों के माध्यम से बेचे जाने वाले सामानों के मूल्य को संदर्भित करता है।   
  • इसकी गणना किसी भी शुल्क या खर्च की कटौती से पूर्व की जाती है।  
  • यह व्यवसाय के विकास या खेप (प्रेषित माल) के माध्यम से दूसरों के स्वामित्त्व वाले उत्पादों को फिर से बेचने के लिये साइट के उपयोग का एक उपाय है।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM):  

  • परिचय:  
    • GeM विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों द्वारा वस्तुओं तथा सेवाओं की खरीद की सुविधा के लिये वर्ष 2016 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक ऑनलाइन मंच है।  
    • यह सभी सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्वायत्त निकायों और अन्य संगठनों के लिये खुला है। 
    • वर्तमान में GeM सिंगापुर के GeBIZ के बाद तीसरे स्थान पर है। 
      • दक्षिण कोरिया का KONEPS दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है
  • महत्त्व:  
    • डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा:  
      • ई-मार्केटप्लेस सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित कर सकता है, जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ने में मदद करेगा।
        • GeM ने पिछले 6.5 वर्षों में प्रौद्योगिकी, प्रक्रिया डिजिटलीकरण, सभी हितधारकों के डिजिटल एकीकरण और विश्लेषण के उपयोग के माध्यम से देश के सार्वजनिक खरीद पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांति ला दी है। 
      • बेहतर विक्रेता भागीदारी: 
        • GeM छोटे और मध्यम उद्यमों सहित अधिक विक्रेताओं को सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि होगी एवं सरकार के लिये बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। 
      • पारदर्शिता और दक्षता:  
        • गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस भ्रष्टाचार और मानवीय त्रुटि की गुंजाइश को कम करके प्रक्रियाओं को मानकीकृत एवं स्वचालित कर खरीद प्रक्रियाओं की पारदर्शिता तथा दक्षता में सुधार कर सकता है।
      • लास्ट माइल आउटरीच: GeM ने 1.5 लाख से अधिक भारतीय डाकघरों और 5.2 लाख से अधिक ग्रामीण स्तर के उद्यमियों (Village Level Entrepreneurs- VLEs) को कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से लास्ट-माइल आउटरीच और सर्विस डिलीवरी के लिये एकीकृत किया है।
  • बदलाव:  
    • उत्पत्ति का देश सूचित करना अनिवार्य: हर बार जब कोई नया उत्पाद GeM पर पंजीकृत होता है, तो विक्रेताओं को मूल देश को सूचीबद्ध करने की आवश्यकता होती है।
    • बंबू मार्केट विंडो: राष्ट्रीय बाँस मिशन और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने बाँस के सामान (बाँस आधारित उत्पादों और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री) के विपणन के लिये GeM पोर्टल पर एक समर्पित विंडो बनाने हेतु सहयोग किया है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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