IAS प्रिलिम्स ऑनलाइन कोर्स (Pendrive)
ध्यान दें:
65 वीं बी.पी.एस.सी संयुक्त (प्रारंभिक) प्रतियोगिता परीक्षा - उत्तर कुंजी.बी .पी.एस.सी. परीक्षा 63वीं चयनित उम्मीदवारअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.63 वीं बी .पी.एस.सी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा - अंतिम परिणामबिहार लोक सेवा आयोग - प्रारंभिक परीक्षा (65वीं) - 2019- करेंट अफेयर्सउत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) मुख्य परीक्षा मॉडल पेपर 2018यूपीएससी (मुख्य) परीक्षा,2019 के लिये संभावित निबंधसिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा, 2019 - मॉडल पेपरUPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़Result: Civil Services (Preliminary) Examination, 2019.Download: सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा - 2019 (प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजी).

डेली अपडेट्स

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

  • 17 Jun 2019
  • 12 min read

संदर्भ

डिजिटल अर्थव्यवस्था के युग में डेटा को हम 21वीं सदी की ‘मुद्रा (Currency) की संज्ञा दे सकते हैं। बहुत से एप्स के पास कोई आय का कोई ज़रियानहीं है, लेकिन उनका एकमात्र लाभ डेटा है। इंटरनेट आधारित इस व्यवसाय मॉडल को निगरानी पूंजीवाद (Surveillance Capitalism) कहा जाता है, जहाँ सभी सोशल मीडिया एप्स और अन्य ऐसे प्लेटफॉर्म उपयोगकर्त्ताओं (Users) से पैसे एकत्र वाले अपने-अपने डेटा का इस्तेमाल करते हैं और उससे आय प्राप्त करते हैं। Google, Facebook और Amazon जैसी कंपनियों ने डेटा अर्थव्यवस्था के ज़रिये ही अपने साम्राज्यों का निर्माण किया है।

  • निगरानी पूंजीवाद के अलावा दुनिया का अधिकांश उपभोक्ता डेटा गूगल, फेसबुक और एमेज़ोन जैसी कुछ डिजिटल कंपनियों के हाथों में हैं, जो क्रमशः ऑनलाइन सर्च, सोशल मीडिया और ऑनलाइन रिटेल की क दिग्गज कंपनियाँ मानी जाती हैं...और इनकी यह ताकत यानी उनकी बाज़ार शक्ति बाज़ार के नए खिलाड़ियों के लिये असंतुलित और असहज स्थिति पैदा कर देती है। ऐसे में डेटा के उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान होता है और इसी की वज़ह से डेटा गोपनीयता (Data Privacy) और नेट तटस्थता (Net Neutrality) की जुड़वाँ समस्या उत्पन्न हुई है।

बाज़ार अर्थव्यवस्था के विरोधी हैं डेटा गोपनीयता और नेट तटस्थता

  • सर्वप्रथम हमें यह ध्यान रखना होगा कि बिग डेटा एनालिटिक्स के ज़रिये डेटा प्राइवेसी और नेट न्यूट्रैलिटी के बीच सामंजस्य या कहें कि समझौता किया गया है।

डेटा गोपनीयता क्या है?

  • डेटा गोपनीयता को हम सूचना या जानकारी संबंधी गोपनीयता भी कह सकते हैं, जो डेटा सुरक्षा की एक शाखा है और इसमें सहमति, नोटिस तथा नियामक दायित्वों के माध्यम से डेटा की उचित हैंडलिंग की जाती है।
  • यह मुद्दा विशेष रूप से तब चर्चा में आया जब कैंब्रिज एनालिटिका नाम की एक एनालिटिक्स फर्म द्वारा लगभग 50 मिलियन फेसबुक उपयोगकर्त्ताओं के पहचान योग्य डेटा को पब्लिक डोमेन में डाल दिया गया था यानी सार्वजनिक कर दिया गया था।
  • गोपनीयता मनुष्य के मूल अधिकारों में से एक है और आज के डिजिटल युग में जहाँ जीवन का लगभग पूरी तरह डिजिटलीकरण हो चुका है, वहाँ डेटा गोपनीयता भी एक मानव अधिकार बन गया है।

नेट तटस्थता क्या है?

  • इसका आशय उस सिद्धांत से है जो किन्हीं विशेष उत्पादों या वेबसाइटों का पक्ष लिये बिना तथा स्रोत की परवाह किये बिना इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को सभी सामग्री और अनुप्रयोगों तक निर्बाध सार्वभौमिक पहुँच सुलभ कराता है।

बिग डेटा क्या है?

  • बिग डेटा एक वाक्यांश है जिसका उपयोग बहुत भारी मात्रा में संरचित और असंरचित डेटा के लिये किया जाता है, जो इतना बड़ा होता है कि पारंपरिक डेटाबेस और सॉफ़्टवेयर तकनीकों का उपयोग करके इसकी प्रोसेसिंग करना बेहद मुश्किल होता है।
  • बेहद उन्नत किस्म के कंप्यूटिंग और एल्गोरिदम के उपयोग द्वारा सोशल मीडिया से प्राप्त डेटा के माध्यम से ग्राहक का व्यवहार विश्लेषण और उसकी रुचि-अरुचि का अनुमान लगाकर उद्योगों में बिग डेटा का उपयोग किया जाता है।
  • ऐसी विषम बाज़ार परिस्थितियों को हल करने में सरकार की अक्षमता के कारण इसके परिणामस्वरूप डिजिटल बाज़ार पर गूगल, फेसबुक और एमेज़ोन आदि जैसी चंद कंपनियों का वर्चस्व कायम हो गया है...और यही कंपनियाँ इस बाज़ार के नियम-कायदे तय करती हैं, जिसे अंग्रेज़ी में Digital Market Oligarchy कहा गया है।
  • ऐसे में प्रतिस्पर्द्धा नीति के लिये डिजिटल अर्थव्यवस्था एक बड़ी समस्या बन गई है, जबकि उत्पादकता और दीर्घकालिक विकास को बढ़ाने के लिये प्रतिस्पर्द्धा बेहद महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्षम उत्पादकों को बाहर निकालकर नवाचार को प्रोत्साहित करती है।
  • इसलिये विशिष्ट डिजिटल बाज़ारों के कारण अल्पकालिक लाभों का आकलन करने के बजाय एक नए प्रतिस्पर्द्धी डिजिटल बाज़ार में प्रवेश करने में आ रही बाधाओं से उत्पन्न संभावित दीर्घकालिक लागतों का अनुमान लगाने की आवश्यकता है।

डिजिटल बाज़ार में संतुलन साधने के उपाय

  • इस डिजिटल युग में प्रासंगिक बने रहने के लिये आर्थिक नीतियाँ स्वयं डिजिटलीकरण की ओर बढ़ने वाली होनी चाहिये। निम्नलिखित प्रयास करके इसे हासिल किया जा सकता है:
  • भारत को अपने स्टार्टअप को विदेशी ब्रांडों के स्वामित्व (टेकओवर के माध्यम से) में जाने से बचाना चाहिये और प्रेफर्रेंशियल शेयरों को अनुमति देकर ऐसा आसानी से किया जा सकता है। जैसा कि हाल ही में वालमार्ट ने फ्लिपकर्ट का अधिग्रहण करके किया।
  • इसके हाई-टाइम डेटा को डेटा सब्जेक्ट्स के हिस्से पर मौद्रीकृत (Monetised) किया जाना चाहिये, डेटा सब्जेक्ट्स को उनका डेटा इस्तेमाल करने के एवज़ में रॉयल्टी का भुगतान करना चाहिये। आपको बता दें कि डेटा सब्जेक्ट्स से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है, जिसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पहचाना जा सकता है। जैसे किसी पहचानकर्ता के माध्यम से- नाम, ID नंबर, डेटा की लोकेशन या व्यक्ति के शारीरिक, आनुवंशिक, मानसिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक पहचान आदि विशिष्ट कारकों के माध्यम से पहचाना जा सकता है।
  • सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिये जो इन डिजिटल कंपनियों की प्रतिस्पर्द्धी-विरोधी नीतियों पर निगरानी रख सकें। ई-कॉमर्स नीति के मसौदे में इसका ध्यान रखा गया है।

फिलहाल नहीं है कोई विशिष्ट कानून

  • भारत में फिलहाल ऐसा कोई कानून नहीं है जो एप्स को डेटा ब्रोकरों या डेटा एनालिटिक्स फर्मों के साथ डेटा साझा करने से रोक सके। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले को एक आदर्श डेटा सुरक्षा कानून बनाने का आधार बनाया जा सकता है: निजता के अधिकार के साथ सभी हस्तक्षेप आवश्यक और समानुपातिक होने चाहिये। (All interference with the right to privacy must be necessary and proportionate.) इसके अलावा देश में डेटा सुरक्षा कानून बनाते समय यूरोपीय संघ के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन के कार्यान्वयन पर नज़र रखते हुए बी.एन. श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों को भी संज्ञान में लेना चाहिये। यह कानून ऐसा होना चाहिये कि डिजिटल तकनीक की दिग्गज कंपनियाँ भी जवाबदेही के मानदंडों का पालन कर सकें। इसके अलावा आधार संख्या को लेकर व्याप्त विभिन्न भ्रांतियों को भी सरकार को दूर करना होगा।

क्या है डेटा अर्थव्यवस्था?

देश में बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए डिजिटल अर्थव्यवस्था को तीन मुख्य घटकों में बाँटा जा सकता है:

  1. भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने वित्तीय समावेशन के साथ-साथ डिजिटल आधारभूत संरचना के उपयोग को बढ़ावा दिया है। हाई स्पीड वाईफाई सहित डिजिटल बुनियादी ढाँचे तक देशव्यापी पहुँच प्रदान करने की योजना ने भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत हुए उल्लेखनीय सुधारों में से एक सरकारी ई-मार्केटप्लेस है, जो सरकारी खरीद के लिये एक पोर्टल है, जहाँ MSME को खरीद गतिविधियों में भाग लेने की सुविधा प्रदान की जाती है।
  2. डिजिटल अर्थव्यवस्था का दूसरा चरण भारत में इलेक्ट्रॉनिक और मोबाइल कॉमर्स में वृद्धि है। तकनीकी रूप से समझदार युवा पीढ़ी वस्तुओं की खरीद का सबसे सरल माध्यम ऑनलाइन खरीद को मानती है। इससे देश में ई-कॉमर्स और एम-कॉमर्स का विस्तार हुआ है।
  3. डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रत्येक स्तर पर डेटा की मात्रा बढ़ती जाती है। हमारी अर्थव्यवस्था इस तरह के डेटा को समझने और विश्लेषण करने के दौर से गुज़र रही है। इसी के मद्देनज़र भारत सरकार ने अपना स्वयं का खुला डेटा पोर्टल लॉन्च किया है जहां विश्लेषण के लिये डेटा उपलब्ध है। डेटा की निरंतर बढ़ती जा रही मात्रा और रणनीतिक महत्त्व को देखते हुए डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिये सरकार डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण और अनुसंधान प्रदान करने में सहायता कर रही है।

आज के डिजिटल युग में डेटा गोपनीयता तथा इंटरनेट तक सभी की समान पहुँच स्वच्छ हवा या स्वच्छ पेयजल की तरह है। यह समाज के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक गतिशीलता का एक केंद्रीय स्तंभ बन गया है। जनता के हित में बेहतर होगा कि इस स्तंभ को कानूनों के माध्यम से एक सामूहिक अधिकार के रूप में सुरक्षा दी जाए और बिग डेटा पर कब्ज़ा जमाए बैठी दिग्गज कंपनियों को जवाबदेह बनाया जाए।

भ्यास प्रश्न: डिजिटलाइज़ेशन से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए यह स्पष्ट कीजिये कि भारत जैसे देश को उनसे निपटने के लिये क्या कदम उठाने चाहिये?

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close