रैपिड फायर
दूरसंचार विभाग ने 6 गीगाहर्ट्ज़ बैंड का आधा हिस्सा किया अनलाइसेंस्ड
- 24 Jan 2026
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दूरसंचार विभाग (DoT) ने आधिकारिक रूप से 6GHz फ्रीक्वेंसी बैंड के निचले हिस्से को इंडोर उपयोग के लिये डी-लाइसेंस कर दिया है, जिससे भारत में WiFi 6E और WiFi 7 तकनीकों को अपनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
- स्पेक्ट्रम: ये अदृश्य रेडियो फ्रीक्वेंसी हैं जो वायरलेस संचार के लिये उपयोग की जाती हैं, जिनकी सीमा 20 KHz से 300 GHz तक (व्यापक विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम का एक उपसमुच्चय) होती है।
- 2.4 GHz: यह विस्तृत कवरेज (दीवारों से गुज़रता है) प्रदान करता है हालाँकि इसकी डेटा स्पीड सीमित होती है।
- 5 GHz: यह उच्च गति प्रदान करता है हालाँकि इसकी सीमा कम होती है।
- WiFi 6: अधिक दक्षता के लिये यह 2.4 GHz और 5 GHz दोनों का एक साथ उपयोग करता है।
- 6 GHz: यह 5,925–7,125 MHz की रेंज में संचालित होता है, जो 9.6 Gbps की अल्ट्रा-हाई स्पीड प्रदान करता है।
- स्पेक्ट्रम आवंटन: 5,925–6,425 MHz की 6GHz आवृति सीमा अब लाइसेंस-मुक्त है। इससे राउटर के लिये स्पेक्ट्रम की एक "एक्स्ट्रा स्ट्रैंड" उपलब्ध होगा, जिससे पारंपरिक 2.4GHz और 5GHz बैंड पर भीड़ कम होगी।
- यह कदम "मल्टी-लिंक ऑपरेशन" (MLO) को सक्षम करेगा, जो WiFi 7 की एक प्रमुख विशेषता को दर्शाता है, जो डिवाइसों को कई बैंड (2.4GHz, 5GHz, और 6GHz) पर एक साथ डेटा प्रसारित करने की अनुमति देती है, जिससे उच्च गति और कम विलंबता सुनिश्चित होती है।
- महत्त्वपूर्ण उपयोग के मामले: 6GHz बैंड वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और हाई-फिडेल्टी क्लाउड गेमिंग जैसे हाई-बैंडविड्थ अनुप्रयोगों के लिये आवश्यक है, क्योंकि यह न्यूनतम विलंब के साथ बड़े पैमाने पर डेटा प्रवाह की अनुमति देता है।
- वैश्विक संदर्भ: भारत ने यूरोप के समान एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें 6GHz बैंड को अनलाइसेंस्ड उपयोग (WiFi के लिये) और लाइसेंस्ड उपयोग (संभावित रूप से 5G/6G के लिये) के बीच विभाजित किया गया है। यह अमेरिका (पूरी तरह से डी-लाइसेंस्ड) या चीन (मोबाइल के लिये आरक्षित) से भिन्न है।
- संचालनात्मक प्रतिबंध: डी-लाइसेंस्ड का उपयोग केवल इंडोर वातावरण के लिये स्ट्रिक्ट है।
- यह अन्य महत्त्वपूर्ण सेवाओं के साथ हस्तक्षेप को रोकने के लिये चलते हुए वाहनों (कार, ट्रेन) और ऑइल रिग (oil rig) पर प्रतिबंधित है।
- बाज़ार का प्रभाव: इस निर्णय से नियामक अनिश्चितता दूर हो गई है, जिससे उन्नत हार्डवेयर (जैसे- सोनी का PlayStation 5 Pro) लॉन्च करने की अनुमति मिलती है, जो पूर्व में स्पेक्ट्रम प्रतिबंधों के कारण भारतीय बाज़ार से पृथक रखे गए थे।
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