रैपिड फायर
मकड़ियों में लैंगिक द्विरूपता और रेशमी धागे की गुणवत्ता
- 24 Jan 2026
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एक अध्ययन से पता चलता है कि केवल बड़ी वयस्क मादा डार्विन की बार्क मकड़ियाँ ही अब तक प्रकृति में दर्ज किया गया सबसे मज़बूत रेशमी धागा बनाती हैं, जो यह दर्शाता है कि उत्क्रांति ऊर्जा उपयोग, शरीर के आकार और पारिस्थितिक आवश्यकताओं को किस प्रकार अनुकूलित करती है।
- मेडागास्कर की मूल प्रजाति डार्विन की बार्क मकड़ी (Caerostris darwini) ऐसा रेशमी धागा उत्पन्न करती है जिसकी तन्य शक्ति लगभग 1.6 गीगापास्कल होती है, जिससे यह लोहे की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक मज़बूत बनता है।
- हालाँकि यह क्षमता केवल बड़ी वयस्क मादाओं तक सीमित है, न कि नर या किशोर मकड़ियों में।
- मकड़ियों में लैंगिक द्विरूपता और रेशमी धागे की गुणवत्ता: अध्ययन में पाया गया कि लैंगिक द्विरूपता और रेशमी धागे की गुणवत्ता के बीच स्पष्ट संबंध है, क्योंकि मादाएँ नर की तुलना में 3-5 गुना बड़ी होती हैं तथा उन्हें अधिक पारिस्थितिक आवश्यकताओं का सामना करना पड़ता है।
- शोधकर्त्ताओं ने ड्रैगलाइन (मेजर एम्पुलेट) सिल्क जो ऑर्ब जालों का मुख्य संरचनात्मक रेशमी धागा होता है, का विश्लेषण किया और पाया कि इसकी असाधारण प्रबल प्रोलाइन नामक अमीनो अम्ल की उच्च मात्रा से आती है, जो लोच (Elasticity) एवं कठोरता (Toughness) के लिये महत्त्वपूर्ण है, जिससे रेशमी धागा बनाना चयापचय की दृष्टि से महँगा पड़ता है।
- इस ऊर्जा लागत को संतुलित करने के लिये वयस्क मादाएँ केवल आवश्यकता पड़ने पर ही अत्यंत मज़बूत रेशम बनाती हैं और कम लेकिन अधिक मज़बूत धागों वाले विरल जाल तैयार करती हैं, जबकि नर एवं वयस्क मकड़ियाँ कम गुणवत्ता वाले रेशम का उपयोग करके घने और कमज़ोर जाल बुनती हैं
- यह असाधारण रूप से मज़बूत रेशम नदियों और झीलों के ऊपर फैले विशाल जालों को सँभालता है, जिससे मादा मकड़ियाँ उन शिकारों को पकड़ सकती हैं जो अन्य मकड़ियों की पहुँच से बाहर होते हैं। अध्ययन का निष्कर्ष है कि रेशम की गुणवत्ता अनुकूलन के अनुसार नियंत्रित होती है और इसकी असाधारण मज़बूती तभी विकसित होती है जब वह जीवित रहने के लिये स्पष्ट लाभ प्रदान करती है।
- विशेष रूप से, रेशम की लोच सभी व्यक्तियों में समान पाई जाती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक आनुवंशिक रूप से संरक्षित गुण है।
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