रैपिड फायर
कोंडागई झील से मिले जलवायु संबंधी रिकॉर्ड
- 19 Jan 2026
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हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने कोंडागई झील, शिवगंगा से प्राप्त तलछट के माध्यम से भारत के सबसे विस्तृत अंतर्देशीय जलवायु रिकॉर्डों में से एक का पुनः आकलन किया है। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर मानसून के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
- मुख्य निष्कर्ष: इस अध्ययन में कोंडागई झील से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर लेट होलोसीन काल के 4,500 वर्षों के जलवायु का पुनः आकलन किया गया। इसके लिये मल्टी-प्रॉक्सी तकनीकों, जैसे– स्थिर समस्थानिक विश्लेषण, पराग अध्ययन, कण आकार माप और रेडियोकार्बन डेटिंग का उपयोग किया गया।
- इस अध्ययन में तीन अलग-अलग जलवायु चरणों की पहचान की गई, इसने 4.2 हज़ार वर्ष पहले की शुष्क घटना, 3.2 हज़ार वर्ष पहले के शुष्क चरण और रोमन उष्ण काल का दस्तावेज़ीकरण किया है और इस क्षेत्र में मानसून की परिवर्तनशीलता, झील जल-विज्ञान और मानव गतिविधियों से उनके प्रत्यक्ष संबंधों को स्थापित किया है।
- यह दीर्घकालिक जलवायु अभिलेख पूर्वोत्तर मानसून के व्यवहार को समझने के लिये एक सुदृढ़ आधार प्रदान करता है, वैगई बेसिन में बाढ़ जोखिम मानचित्रण को समर्थन देता है, झील-स्तर और भूजल परिवर्तनों की जानकारी के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन का मार्गदर्शन करता है तथा आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन एवं जैव विविधता संरक्षण योजना को सशक्त बनाता है।
- होलोसीन युग: होलोसीन वर्तमान भूवैज्ञानिक युग है, जिसकी शुरुआत लगभग 11,700 वर्ष पूर्व अंतिम प्रमुख हिमयुग के अंत में हुई थी। यह अपेक्षाकृत स्थिर एवं गर्म जलवायु के साथ-साथ मानव सभ्यता के विकास की विशेषता है। होलोसीन प्लेइस्टोसिन युग का अनुसरण करता है, जो बड़े चतुर्धातुक युग का हिस्सा है।
- कोंडागई झील: कोंडागई तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले में स्थित एक अंतर्देशीय झील है। यह कीलाडी (Keeladi) पुरातात्त्विक स्थल के निकट स्थित है, जो संगमकालीन सभ्यता से संबंधित है और जिसकी तिथि लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व मानी जाती है।
- यह झील प्राचीन बसाहट क्षेत्र में स्थित है और अतीत की मानसून परिवर्तनशीलता, पारिस्थितिक तंत्र की प्रतिक्रियाओं तथा मानव–पर्यावरण अंतःक्रिया के सबंध में महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करती है।
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