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भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित BSL-4 लैब

  • 19 Jan 2026
  • 19 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

केंद्रीय गृहमंत्री ने गुजरात के गांधीनगर में भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित बायो-सेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) लैब का शिलान्यास किया, यह कदम देश की स्वास्थ्य सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और घातक रोगजनकों से निपटने की तैयारियों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

  • BSL-4 लैबोरेटरी: BSL-4 जैविक संरक्षण का उच्चतम स्तर है, जिसे प्रायः प्रभावी वैक्सीन या उपचारों से रहित अत्यधिक संक्रामक और घातक रोगजनकों का अध्ययन करने के लिये डिज़ाइन किया गया है, जो सख्त अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होता है।
  • भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित BSL-4 सुविधा: यह भारत में दूसरी नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला होगी।
    • इसे गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) के तहत विकसित किया गया है और गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसने सर्वप्रथम SARS-CoV-2 जीनोम को डीकोड किया था।
    • इस परिसर में BSL-4, BSL-3, BSL-2, ABSL-4 और ABSL-3 जैसी विभिन्न मॉड्यूल इकाइयाँ शामिल होंगी, साथ ही उन्नत श्रेणी की उपयोगिताएँ और अत्याधुनिक जैव-नियंत्रण (कंटेनमेंट) प्रणालियाँ भी स्थापित की जाएँगी।
  • एनिमल बायो-सेफ्टी (ABSL-4): ABSL-4 इकाई जूनोटिक रोगों पर राज्य के भीतर परीक्षण और वैक्सीन रिसर्च की अनुमति देगी।
  • राष्ट्रीय सुविधा का दर्जा: जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने इसे एक राष्ट्रीय सुविधा घोषित करते हुए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं, जिससे संपूर्ण भारत के विशेषज्ञों और संस्थानों तक पहुँच संभव होगी।
  • भारत की मौज़ूदा हाई सिक्योरिटी लैब:
    • नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला: राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे।
    • डिफेंस BSL-4 प्रयोगशाला: DRDO, ग्वालियर।
    • भारत के पास वर्तमान में VRDL नेटवर्क के अंतर्गत 154 BSL-2 लैबोरेटरी और 11 BSL-3 लैबोरेटरी हैं (मार्च 2025 तक)।
  • भारत के लिये रणनीतिक महत्त्व: यह सीमित केंद्रीय सुविधाओं पर निर्भरता कम करते हुए घातक रोग प्रकोपों के प्रति त्वरित और वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रदान करता है।
    • इससे भोपाल स्थित ICAR-NIHSAD को पशुओं के सैंपल भेजने पर निर्भरता कम होती है, साथ ही घरेलू क्षमता भी सुदृढ़ होती है।
    • यह पशुओं से संबंधित मॉडलों का उपयोग करके वैक्सीन और चिकित्सकीय विकास का समर्थन करता है, जो भविष्य की महामारियों के लिये महत्त्वपूर्ण है।

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