प्रारंभिक परीक्षा
चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) प्रोग्राम
- 20 Jan 2026
- 32 min read
चर्चा में क्यों?
हाल ही में सरकार ने चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) प्रोग्राम के प्रदर्शन परिणाम जारी किये हैं, जिनमें उच्च नामांकन, साझा वेफर रन, छात्र-निर्मित चिप्स और पेटेंट निर्माण को उजागर किया गया है।
चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) प्रोग्राम क्या है?
- परिचय: C2S प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा वर्ष 2022 में शुरू की गई एक व्यापक क्षमता-विकास पहल है। यह भारत भर के शैक्षणिक संस्थानों को कवर करती है और इसका कुल बजट पाँच वर्षों में ₹250 करोड़ निर्धारित किया गया है।
- लक्ष्य: C2S प्रोग्राम का उद्देश्य स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के 85,000 उद्योग-तैयार पेशेवरों का विकास करना है।
- विस्तार: कौशल विकास के अतिरिक्त, यह कार्यक्रम 25 स्टार्ट-अप्स को इनक्यूबेट करने, 10 तकनीकी हस्तांतरण को सक्षम करने, SMART लैब सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करने, एक लाख छात्रों को प्रशिक्षित करने, 50 पेटेंट उत्पन्न करने और कम-से-कम 2,000 लक्षित शोध प्रकाशनों का समर्थन करने का प्रयास करता है।
- प्रभाव: इस समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से यह कार्यक्रम नवाचार को प्रोत्साहित करता है, रोज़गार योग्यताओं को बढ़ाता है, भारत के सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को सुदृढ़ करता है और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता के लिये दृढ़ आधार तैयार करता है।
- प्रोग्राम एप्रोच: C2S प्रोग्राम एक कॉम्प्रिहेंसिव, हैंड्स-ऑन मॉडल को फॉलो करता है, जो एकेडमिक इंस्ट्रक्शन को उद्योग-आधारित ट्रेनिंग, मेंटरशिप और कई वर्षों के R&D प्रोजेक्ट्स के साथ इंटीग्रेट करता है।
- एक समन्वित संस्थागत पारिस्थितिक तंत्र के माध्यम से, जिसमें शैक्षणिक संस्थान, C-DAC बंगलूरू में चिप-इन सेंटर और NIELIT SMART लैब शामिल हैं, यह कार्यक्रम साझा बुनियादी ढाँचा, केंद्रीकृत प्रशिक्षण और चिप डिज़ाइन, निर्माण और परीक्षण के लिये उन्नत EDA उपकरणों और वास्तविक दुनिया के सेमीकंडक्टर वर्कफ्लो का उपयोग करते हुए एंड-टू-एंड संपर्क प्रदान करता है, जिसमें ASIC, SoC और IP कोर डेवलपमेंट शामिल है।
- निर्माण: C2S कार्यक्रम के तहत केंद्र प्रतिभागी संस्थानों से प्रत्येक तिमाही में छात्रों द्वारा डिज़ाइन किये गए चिप्स को एकत्र करता है, डिज़ाइन अनुपालन की जाँच करता है, और अनुमोदित लेआउट्स को साझा वेफर्स पर संकलित करता है। इन वेफर्स को सेमीकंडक्टर लैब (SCL), मोहाली में 180 nm तकनीक का उपयोग कर निर्मित किया जाता है, जिसके बाद चिप्स की पैकेजिंग कर छात्रों को वितरित किया जाता है।
- सहायता: चिप-इन सेंटर भाग लेने वाले संस्थानों को केंद्रीकृत तकनीकी सहायता की सुविधा भी प्रदान करता है, 4,855 से अधिक सहायता अनुरोधों का समाधान करता है और निरंतर डिज़ाइन सुधार और सेमीकंडक्टर निर्माण एवं परीक्षण के लिये बड़े पैमाने पर प्रयोगात्मक अनुभव को सक्षम बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) कार्यक्रम क्या है?
C2S कार्यक्रम भारतीय शिक्षा मंत्रालय (MeitY) की एक पहल है जिसे वर्ष 2022 में भारतीय शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षमता विकसित करने के लिये शुरू किया गया था।
2. C2S के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य कुशल सेमीकंडक्टर पेशेवरों को प्रशिक्षित करना, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को समर्थन देना और चिप डिज़ाइन में पेटेंट और अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
3. चिपइन सेंटर क्या है?
C-DAC बंगलूरू में स्थित चिप-इन सेंटर एक राष्ट्रीय साझा डिज़ाइन सुविधा है जो उपकरण, IP लाइब्रेरी, मेंटरिंग और फैब्रिकेशन एग्रीगेशन प्रदान करती है ।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स:
प्रश्न. निम्नलिखित में से किस प्रकार के लेज़र का उपयोग लेज़र प्रिंटर में किया जाता है? (2008)
(a) डाई लेज़र
(b) गैस लेज़र
(c) सेमीकंडक्टर लेज़र
(d) एक्साइमर लेज़र
उत्तर: (c)
प्रश्न. भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन के संदर्भ में, नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये: (2018)
- भारत प्रकाश-वोल्टीय इकाइयों में प्रयोग में आने वाले सिलिकॉन वेफर्स का दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
- सौर ऊर्जा शुल्क का निर्धारण भारतीय सौर ऊर्जा निगम के द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (d)