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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

कतर प्रतिबंध और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय

  • 20 Jul 2020
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ), अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO)

मेन्स के लिये

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के हालिया निर्णय का कतर और अन्य देशों पर प्रभाव 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of justice-ICJ) ने बहरीन, सऊदी अरब, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक अपील को खारिज़ कर दिया है, जिसमें चारों देशों द्वारा कतर (Qatar) पर अधिरोपित प्रतिबंधों की वैधता पर निर्णय देने के अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (International Civil Aviation Organization- ICAO) के अधिकार को चुनौती दी गई थी।

प्रमुख बिंदु

  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) को इस मामले की सुनवाई करने का पूरा अधिकार है।
  • ध्यातव्य है कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के इस निर्णय को कतर और उसके विमानन उद्योग के लिये काफी बड़ी जीत माना जा रहा है।

क्या है विवाद?

  • उल्लेखनीय है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई जब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने 5 जून, 2017 को कतर के साथ अपने सभी प्रकार के आर्थिक और राजनयिक संबंध समाप्त करते हुए समुद्री और हवाई मार्गों पर प्रतिबंध लगा दिये।
    • साथ ही इन देशों ने कतर के नागरिकों को भी देश को छोड़ने के लिये 14 दिन का समय दिया गया और उन्होने अपने नागरिकों पर भी कतर की यात्रा या निवास करने संबंधी प्रतिबंध लगा दिये।
  • उपरोक्त तीन देशों का अनुसरण करते हुए मिस्र ने भी कतर के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त कर दिये, किंतु मिस्र ने कतर में रह रहे अपने 180,000 नागरिकों पर प्रतिबंध नहीं लगाए।
  • ध्यातव्य है कि कतर केवल सऊदी अरब के साथ ही भू-सीमा साझा करता है और इन प्रतिबंधों के बाद इस भू-सीमा को भी बंद कर दिया, साथ ही कतर के जहाज़ों पर इन देशों के बंदरगाहों में डॉकिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।

प्रतिबंधों का कारण

  • कतर के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंध समाप्त करने वाले चारों देशों ने दावा किया कि कतर क्षेत्र विशिष्ट में ‘आतंकवाद’ समर्थक के रूप में कार्य कर रहा है।
    • साथ ही इन देशों ने दावा किया कि कतर ने इनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है।
  • हालाँकि कतर ने इस्लामी चरमपंथ का समर्थन करने से स्पष्ट तौर पर इनकार कर दिया है और चारों देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की व्यापक आलोचना की।
    • कतर ने चारों देशों द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में कहा कि इसका कोई भी ‘वैध औचित्य नहीं’ है।
  • इससे पूर्व इन देशों के बीच वर्ष 2014 में तब राजनयिक तनाव पैदा हुआ था, जब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने यह दावा करते हुए कतर से अपने राजनयिकों को वापस बुला दिया था कि कतर सशस्त्र समूहों का समर्थन कर रहा है।
    • हालाँकि उस समय न तो सऊदी अरब ने कतर के साथ अपनी सीमा को बंद किया था और न ही कतर के निवासियों को देश से बाहर किया गया था।

वित्तीय प्रभाव

  • आँकड़ों के अनुसार, प्रतिबंधों के समय कतर अधिकांशतः अपने नागरिकों की बुनियादी ज़रूरतों के लिये भू और समुद्री आयात पर निर्भर करता है और इसका लगभग 40 प्रतिशत खाद्य सऊदी अरब के साथ भूमि सीमा के माध्यम से आता था।
    • हालाँकि इन प्रतिबंधों के कुछ समय पश्चात् ही तुर्की और ईरान ने कतर को बुनियादी वस्तुओं की पूर्ति करना शुरू कर दिया था।
  • चारों देशों के इन प्रतिबंधों का सबसे अधिक प्रभाव कतर की राष्ट्रीय विमानन कंपनी कतर एयरवेज़ (Qatar Airways) पर देखने को मिला, जिसे इन प्रतिबंधों के बाद कुल 18 क्षेत्रीय शहर के लिये उड़ानों को रद्द करना पड़ा और कई उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े।

चारों देशों की मांग

  • कतर पर प्रतिबंध अधिरोपित करने वाले चारों देशों ने संबंधों को बहाल करने के लिये मांगों की एक 13 सूत्रीय सूची जारी की।
  • इस सूची में अल-जज़ीरा जैसे समाचार वेबसाइटों को बंद करना, मुस्लिम ब्रदरहुड (Muslim Brotherhood) जैसे कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के साथ अपने संबंधों को समाप्त करना, शिया-बहुसंख्यक ईरान के साथ संबंधों को कम करना और अपने देश में तैनात तुर्की सैनिकों को हटाना शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में विवाद

  • कतर ने, यह आरोप लगाते हुए कि नागरिक उड्डयन पर वर्ष 1944 के कन्वेंशन में दिये गए उसके अधिकारों का उल्लंघन किया गया, इसी कन्वेंशन के तहत बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के समक्ष इस मुद्दे को प्रस्तुत किया।
  • अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के समक्ष सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों ने तर्क दिया कि विवाद को निपटाने का अधिकार केवल अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के पास है क्योंकि यह मामला सिर्फ विमानन से संबंधित नहीं है, बल्कि इसमें आतंकवाद जैसे कई विषय भी शामिल हैं।
  • हालाँकि वर्ष 2018 में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने सऊदी और उसके सहयोगी देशों के विरुद्ध फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि संगठन को इस मामले पर सुनवाई करने का अधिकार है।
  • जिसके बाद चारों देश इस मामले को ICJ के समक्ष ले गए और हाल ही में ICJ ने अपना निर्णय सुनाते हुए अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के निर्णय को सही ठहराया है।
  • चूँकि अब यह तय हो गया है कि इस मामले की सुनवाई का अधिकार अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) को है, इसलिये अब अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) जल्द ही कतर पर लगे प्रतिबंधों को लेकर अपना निर्णय सुनाएगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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