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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल: रूस

  • 23 Nov 2021
  • 4 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल, स्क्रैमजेट तकनीक, हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी

मेन्स के लिये:

हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रूस ने देश के उत्तर में एक युद्धपोत से अपनी सिरकॉन (ज़िरकोन) हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल दागी है।

  • इससे पहले यह बताया गया था कि चीन ने एक परमाणु-सक्षम हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का परीक्षण किया है, जिसने अपने लक्ष्य की ओर गति करने से पहले दुनिया का चक्कर लगाया।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • सिरकॉन क्रूज़ मिसाइल रूस के हाइपरसोनिक शस्त्रागार में अवांगार्ड ग्लाइड वाहनों और हवा से लॉन्च किंजल (डैगर) मिसाइलों में शामिल हो जाएगी।
      • क्रूज़ मिसाइलें बैलिस्टिक मिसाइलों से इस मायने में भिन्न होती हैं कि वे कम ऊँचाई पर अपने लक्ष्य की ओर उड़ती हैं, अपने पूरे प्रक्षेपवक्र के दौरान पृथ्वी के वायुमंडल में  रहती हैं।
    • यह रूस में विकसित की जा रही कई मिसाइलों में से एक है जो रूसी पनडुब्बियों, फ्रिगेट और क्रूज़र को हथियार देगी।
    • हाइपरसोनिक हथियारों को पारंपरिक प्रोजेक्टाइल की तुलना में ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना बहुत कठिन होता है।
  • हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी:
    • गति: इसकी गति ‘मैक या ध्वनि की गति’ से 5 गुना ज़्यादा या इससे भी अधिक होती है।
    • मैक नंबर: यह हवा में ध्वनि की गति की तुलना में एक विमान की गति का वर्णन करता है, जिसमें मैक 1 ध्वनि की गति यानी 343 मीटर प्रति सेकंड के बराबर होती है।
    • प्रयुक्त प्रौद्योगिकी: अधिकांश हाइपरसोनिक वाहन मुख्य रूप से स्क्रैमजेट तकनीक का उपयोग करते हैं, जो एक प्रकार का वायु श्वास प्रणोदन प्रणाली है।
      • यह अत्यंत जटिल तकनीक है, जिसमें उच्च तापमान सहन करने की भी क्षमता होती है, जिसके कारण हाइपरसोनिक सिस्टम बेहद महँगा होता है। 
    • प्रकार: 
      • हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें: ये वे मिसाइलें हैं, जो अपनी उड़ान के दौरान रॉकेट या जेट प्रणोदक का उपयोग करती हैं तथा इन्हें मौजूदा क्रूज़ मिसाइलों का तीव्र संस्करण माना जाता है।
      • हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV): ये मिसाइलें लक्ष्य की ओर लॉन्च होने से पूर्व एक पारंपरिक रॉकेट के माध्यम से पहले वायुमंडल में जाती हैं।
  • भारत में हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी का विकास:
    • भारत भी हाइपरसोनिक तकनीक पर काम कर रहा है।
      • जहाँ तक अंतरिक्ष परिसंपत्तियों का संबंध है, तो भारत पहले ही मिशन शक्ति के तहत ‘ASAT’ के परीक्षण के माध्यम से अपनी क्षमताओं को साबित कर चुका है।
    • हाइपरसोनिक तकनीक का विकास और परीक्षण DRDO एवं ISRO दोनों ने किया है।
    • हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research & Development Organization- DRDO) ने ‘हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है, जिसमें ध्वनि की गति से 6 गुना गति से यात्रा करने की क्षमता है।
    • इसके अलावा हैदराबाद में DRDO की एक ‘हाइपरसोनिक विंड टनल’ (HWT) परीक्षण सुविधा का भी उद्घाटन किया गया है। यह एक दबाव वैक्यूम-चालित संलग्न मुक्त जेट सुविधा है जो मैक 5 से 12 तक की गति प्राप्त कर सकती है।
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