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हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल

  • 08 Sep 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

एयर-ब्रीदिंग इंजन, मैक संख्या 

मेन्स के लिये:

रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी विकास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation- DRDO) ने ‘हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल’ (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle- HSTDV) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 

प्रमुख बिंदु:

  • HSTDV एक मानव रहित स्क्रैमजेट प्रमाणित विमान है जो हाइपरसोनिक गति से यात्रा कर सकता है।
  • इसमें ‘हाइपरसोनिक एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट’ (Hypersonic Air-breathing Scramjet) तकनीक का उपयोग किया गया है।
  • यह विमान ध्वनि की गति से 6 गुना अर्थात् मैक-6 के वेग से अपने इच्छित उड़ान पथ पर यात्रा कर सकता है।

मैक संख्या (Mach Number): 

  • यह हवा में ध्वनि की गति की तुलना में एक विमान की गति का वर्णन करता है, जिसमें मैक-1 ध्वनि की गति के बराबर होता है यानि प्रति सेकंड 343 मीटर।

 एयर-ब्रीदिंग इंजन (Air-breathing Engines):

  • एयर-ब्रीदिंग इंजन ईंधन के दहन के लिये वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करता है। इनमें टर्बोजेट (Turbojet), टर्बोप्रॉप (Turboprop), रैमजेट (Ramjet) और पल्स-जेट (Pulse-jet) शामिल हैं।
  • यह प्रणाली उपयोग की दृष्टि से अन्य प्रणालियों की तुलना में हल्की, कुशल एवं लागत प्रभावी है।
  • गौरतलब है कि उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के लिये एयर-ब्रीदिंग इंजन हेतु प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिये विश्वव्यापी प्रयास जारी है।
  • वर्तमान में उपग्रहों को मल्टी-स्टेज उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों द्वारा कक्षा में प्रक्षेपित किया जाता है जिनका उपयोग केवल एक बार किया जा सकता है।
    • ये प्रक्षेपण यान दहन के लिये ईंधन के साथ ऑक्सीडाइज़र भी ले जाते हैं ताकि उसे प्रेरित किया जा सके।
  • एक प्रणोदन प्रणाली जो अपनी उड़ान के दौरान वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग कर सकती है, एक उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के लिये आवश्यक कुल प्रणोदक को कम कर देगी।
  • यदि उन वाहनों को पुन: प्रयोज्य बनाया जाता है तो उपग्रहों को लॉन्च करने की लागत में काफी कमी आएगी।

एयर-ब्रीदिंग इंजन के प्रकार:

1. रैमजेट (Ramjet): एक रैमजेट एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन का एक रूप है जो घूर्णन कंप्रेसर के बिना आने वाली वायु को संपीडित करने के लिये वाहन की अग्रिम गति का उपयोग करता है।

  • रैमजेट सुपरसोनिक गति पर सबसे कुशलता से कार्य करते हैं किंतु वे हाइपरसोनिक गति में कुशल नहीं हैं। 

2. स्क्रैमजेट (Scramjet): स्क्रैमजेट इंजन रैमजेट इंजन का ही एक अपडेटेड रूप है क्योंकि यह हाइपरसोनिक गति में कुशलता से संचालित होता है और सुपरसोनिक दहन की अनुमति देता है।

3. डुअल-मोड रैमजेट (Dual Mode Ramjet- DMRJ): एक डुअल-मोड रैमजेट एक प्रकार का जेट इंजन है जहाँ एक रैमजेट मैक 4-8 रेंज में एक स्क्रैमजेट में बदल जाता है जिसका अर्थ है कि यह सबसोनिक एवं सुपरसोनिक दहन मोड दोनों में कुशलता से कार्य कर सकता है।

Index

  • यह परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (APJ Abdul Kalam Island) के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लॉन्च कॉम्प्लेक्स (Dr APJ Abdul Kalam Launch Complex) से किया गया था।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत इस तकनीक को विकसित करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है।
    • चीन ने वर्ष 2018 में अपने पहले ‘वेवराइडर हाइपरसोनिक फ्लाइट व्हीकल’ (Waverider Hypersonic Flight Vehicle) का सफल परीक्षण किया था।
  • उल्लेखनीय है कि DRDO ने वर्ष 2010 की शुरुआत में HSTDV इंजन के विकास पर कार्य करना शुरू कर दिया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भी इस प्रौद्योगिकी के विकास पर कार्य किया है और वर्ष 2016 में इससे संबंधित एक प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।
    • DRDO ने जून 2019 में भी इस प्रणाली का परीक्षण किया था।

लाभ:

  • स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास से भविष्य में हाइपरसोनिक वाहनों के साथ निर्मित प्रणालियों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • इसे रक्षा क्षेत्र में लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों के लिये एक वाहक के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसमें आक्रामक एवं रक्षात्मक दोनों हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल प्रणाली शामिल हैं।
    • इसकी उच्च गति के कारण अधिकांश रडार (RADAR) इसका पता लगाने में असमर्थ होंगे। 
    • यह अधिकांश मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने में भी सक्षम होगी।
  • यह तकनीक अंतरिक्ष क्षेत्र में कम लागत, उच्च दक्षता वाले पुन: प्रयोज्य उपग्रहों के विकास में सहायक होगी। 

स्रोत: द हिंदू

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