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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी

  • 18 Oct 2021
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल, मिशन शक्ति, वायु श्वास प्रणोदन प्रणाली

मेन्स के लिये:

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी विकसित करने में भारत की प्रगति

चर्चा में क्यों?

नवीनतम रिपोर्टों के मुताबिक, चीन ने हाल ही में एक ‘परमाणु-सक्षम हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ का परीक्षण किया, जिसने अपने लक्ष्य की ओर जाने से पूर्व पृथ्वी का चक्कर लगाया।

  • अमेरिका, रूस और चीन सहित कई देश हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित कर रहे हैं, जो ध्वनि से पाँच गुना तेज़ गति से यात्रा करती हैं।
  • हालाँकि बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में इनकी गति धीमी होती है, किंतु इन्हें अवरोधित करना और ट्रैक करना अपेक्षाकृत कठिन होता है

प्रमुख बिंदु

  • भारत के लिये निहितार्थ:
    • अमेरिका-चीन की बढ़ती प्रतिद्वंद्विता और पूर्वी लद्दाख में एक वर्ष से चल रहे गतिरोध की पृष्ठभूमि में हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी का विकास निश्चित रूप से भारत के लिये चिंताजनक विषय है।
    • इन गतियों पर चलने वाली हथियार प्रणाली का अर्थ होगा कि भारत को भी इन्हीं गतियों पर रक्षा प्रणालियों का विकास करना होगा।
  • हाइपरसोनिक गति और प्रौद्योगिकी:
    • परिचय:
      • हाइपरसोनिक गति ‘मैक या ध्वनि की गति’ से 5 गुना ज़्यादा या इससे भी अधिक होती है।
      • मैक नंबर: यह हवा में ध्वनि की गति की तुलना में एक विमान की गति का वर्णन करता है, जिसमें मैक 1 ध्वनि की गति यानी 343 मीटर प्रति सेकंड के बराबर होता है।
    • प्रकार:
      • हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें: ये वे मिसाइलें हैं, जो अपनी उड़ान के दौरान रॉकेट या जेट प्रणोदक का उपयोग करती हैं और इन्हें मौजूदा क्रूज़ मिसाइलों का तीव्र संस्करण माना जाता है।
      • हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV): ये मिसाइलें लक्ष्य की ओर लॉन्च होने से पूर्व एक पारंपरिक रॉकेट के माध्यम से पहले वायुमंडल में जाती हैं।
    • प्रयुक्त प्रौद्योगिकी: अधिकांश हाइपरसोनिक वाहन मुख्य रूप से स्क्रैमजेट तकनीक का उपयोग करते हैं, जो एक प्रकार का वायु श्वास प्रणोदन प्रणाली है।
      • यह अत्यंत जटिल तकनीक है, जिसमें उच्च तापमान सहन करने की भी क्षमता होती है, जिसके कारण हाइपरसोनिक सिस्टम बेहद महँगा होता है। 

बैलिस्टिक मिसाइल बनाम क्रूज़ मिसाइल

बैलिस्टिक मिसाइल

क्रूज़ मिसाइल

इसमें प्रक्षेप्य गति और प्रक्षेपवक्र में यात्रा गुरुत्वाकर्षण, वायु प्रतिरोध और कोरिओलिस बल पर निर्भर करती है।

यह तुलनात्मक रूप से गति के लिये सीधे प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करता है।

पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर जाता है और पुनः उसमें प्रवेश करता है।

इसका उड़ान पथ पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर ही होता है।

लंबी दूरी की मिसाइलें (300 किमी. से 12,000 किमी. तक)

कम दूरी की मिसाइलें (1000 किमी. तक की रेंज)

उदाहरण: पृथ्वी-I, पृथ्वी-II, अग्नि-I, अग्नि-II और धनुष मिसाइलें।

उदाहरण: ब्रह्मोस मिसाइल

गति के आधार पर मिसाइलों का वर्गीकरण

गति सीमा

मैक नंबर

वेग (m/s)

सबसोनिक

< 0.8

< 274

ट्रांसोनिक

0.8–1.2

274–412

सुपरसोनिक 

1.2–5

412–1715

हाइपरसोनिक

5–10

1715–3430

हाई-हाइपरसोनिक

10–25

3430–8507

  • भारत में हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी का विकास:
    • भारत भी हाइपरसोनिक तकनीक पर काम कर रहा है।
      • जहाँ तक अंतरिक्ष परिसंपत्तियों का संबंध है, तो भारत पहले ही मिशन शक्ति के तहत ‘ASAT’ के परीक्षण के माध्यम से अपनी क्षमताओं को साबित कर चुका है।
    • हाइपरसोनिक तकनीक का विकास और परीक्षण DRDO एवं ISRO दोनों ने किया है।
    • हाल ही में DRDO ने ‘हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल’ (HSTDV) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है, जिसमें ध्वनि की गति से 6 गुना गति से यात्रा करने की क्षमता है।
    • इसके अलावा हैदराबाद में DRDO की एक ‘हाइपरसोनिक विंड टनल’ (HWT) परीक्षण सुविधा का भी उद्घाटन किया गया है। यह एक दबाव वैक्यूम-चालित संलग्न मुक्त जेट सुविधा है जो मैक 5 से 12 तक की गति प्राप्त कर सकती है।

वायु श्वास प्रणोदन प्रणाली:  

  • परिचय: यह प्रणाली वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करती है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 50 किमी. की ऊँचाई तक उपलब्ध है, इसमें ऑन-बोर्ड संग्रहीत ईंधन का उपयोग किया जाता है जिससे सिस्टम बहुत हल्का, अधिक कुशल और लागत प्रभावी हो जाता है। 
  • वायु श्वास प्रणोदन प्रणाली ( Air Breathing Propulsion System ) के उदाहरणों में रैमजेट, स्क्रैमजेट, डुअल मोड रैमजेट (DMRJ) शामिल हैं।
  • रैमजेट (Ramjet):
    • रैमजेट इंजन, एयर ब्रीदिंग इंजन का ही एक रूप है जो वाहन की अग्र गति (Forward Motion) का उपयोग कर आने वाली हवा को बिना घूर्णन संपीडक (Rotating Compressor) के दहन (combustion) के लिये संपीड़ित करता है।
    • ईंधन को दहन कक्ष में अंतक्षेपण किया जाता है जहाँ वह गर्म संपीड़ित हवा के साथ मिलकर प्रज्वलित होता है।
    • रैमजेट ज़ीरो एयरस्पीड पर थ्रस्ट उत्पन्न नहीं कर सकते; वे एक स्थिर विमान को स्थानांतरित नहीं कर सकते। 
    • एक रैमजेट-संचालित वाहन को भी रॉकेट की भाँति टेक-ऑफ करने की आवश्यकता होती है इसलिये रैमजेट इंजन इस वाहन को त्वरित गति प्रदान करने में मदद करता है। 
    • रैमजेट सुपरसोनिक गति पर सबसे कुशलता से काम करते हैं और जब वाहन हाइपरसोनिक गति पर पहुँच जाता है तो रैमजेट इंजन की दक्षता कम होने लगती है। 
  • स्क्रैमजेट (Scramjet):
    • स्क्रैमजेट इंजन, रैमजेट इंजन की तुलना में अत्यधिक कुशल है क्योंकि यह हाइपरसोनिक गति से कुशलतापूर्वक संचालित होता है और सुपरसोनिक गति से ईधन के दहन की अनुमति देता है। इसलिये इसे सुपरसोनिक दहन रैमजेट (Supersonic Combustion Ramjet) या स्क्रैमजेट कहते है।
    • स्क्रैमजेट तीन बुनियादी घटकों से बना है:
      • एक अभिसरण इनलेट जहाँ आने वाली हवा संपीड़ित होती है।
      • एक दहन क्षेत्र जहाँ ऊष्मा उत्पन्न करने के लिये वायुमंडलीय ऑक्सीजन के साथ गैसीय ईंधन को जलाया जाता है।
      • एक डायवर्जिंग नोज़ल जहाँ थ्रस्ट उत्पन्न करने के लिये गर्म हवा को तेज़ किया जाता है। डायवर्जेंट नोज़ल का उपयोग करके शेष गैसों को हाइपरसोनिक गति में त्वरित किया जाता है।
    • जिस गति से वाहन वायुमंडल से होकर गुज़रता है, उसके कारण हवा इनलेट के भीतर संकुचित हो जाती है। जैसे- स्क्रैमजेट में किसी हिलने-डुलने वाले उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है, जो इंजन में वज़न और विफलता बिंदुओं की संख्या को कम करता है।
  • डुअल मोड रैमजेट (DMRJ):
    • तीसरी अवधारणा रैमजेट और स्क्रैमजेट का मिश्रण है, जिसे डुअल मोड रैमजेट (DMRJ) कहा जाता है।
    • ऐसे इंजन की ज़रूरत है जो सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक दोनों गति से काम कर सके।
    • डुअल मोड रैमजेट (DMRJ) एक जेट इंजन है, जिसमें  रैमजेट मैक 4-8 की गति के बाद स्क्रैमजेट में परिवर्तित हो जाता है, जिसका अर्थ है कि यह इंजन सबसोनिक और सुपरसोनिक मोड दोनों में कुशलतापूर्वक काम कर सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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