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स्वामित्व योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड

  • 10 Oct 2020
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

स्वामित्व योजना, प्रॉपर्टी कार्ड

मेन्स के लिये:

ग्रामीण भारत के रूपांतरण में स्वामित्व योजना की भूमिका एवं महत्त्व

चर्चा में क्यों?

ग्रामीण भारत में परिवर्तन लाने और लाखों भारतीयों को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 11अक्तूबर, 2020 को स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड के वितरण की शुरूआत की जाएगी।

प्रमुख बिंदु

  • प्रॉपर्टी कार्ड के भौतिक वितरण की शुरूआत के साथ लगभग एक लाख संपत्ति धारक अपने मोबाइल फोन पर भेजे गए SMS लिंक के माध्यम से संपत्ति कार्ड डाउनलोड करने में सक्षम होंगे। इसके बाद संबंधित राज्य सरकारों द्वारा संपत्ति कार्डों का भौतिक रूप से वितरण किया जाएगा। 
  • ये लाभार्थी छः राज्यों के 763 गाँवों (उत्तर प्रदेश के 346, हरियाणा के 221, महाराष्ट्र के 100, मध्य प्रदेश के 44, उत्तराखंड के 50 और कर्नाटक के 2) से हैं। 
  • महाराष्ट्र के अलावा अन्य सभी राज्यों के लाभार्थियों को एक दिन के भीतर प्रॉपर्टी कार्ड की भौतिक प्रतियाँ प्राप्त होंगी। 
    • चूँकि महाराष्ट्र में प्रॉपर्टी कार्ड की मामूली लागत वसूलने की प्रणाली है, इसलिये यहाँ कार्ड के वितरण में लगभग एक महीने का समय लगेगा।
  • यह पहली बार है जब तकनीक के सबसे आधुनिक साधनों को शामिल करने वाली इस तरह की बड़े पैमाने की प्रणाली का अभ्यास लाखों ग्रामीण संपत्ति मालिकों को लाभ पहुँचाने के लिये किया जा रहा है।
  • प्रॉपर्टी कार्ड के लिये अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम दिये गए हैं। उदाहरण के लिये हरियाणा में ‘टाइटल डीड’ (Title Deed), ‘कर्नाटक में रूरल प्रॉपर्टी ओनरशिप रिकॉर्ड्स’ (Rural Property Ownership Records- RPOR), मध्य प्रदेश में ‘अधिकार अभिलेख’ (Adhikar Abhilekh), महाराष्ट्र में ‘सनद’ (Sannad), उत्तराखंड में ‘स्वामित्व अभिलेख’ (Svamitva Abhilekh) तथा उत्तर प्रदेश में ‘घरौनी’ (Gharauni)।

लाभ:

  • इस कदम से ग्रामीणों को ऋण तथा अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिये वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में संपत्ति का उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

स्वामित्व (SVAMITVA) योजना

  • SVAMITVA का पूर्ण रूप “Survey of Villages And Mapping with mprovised Technology In Village Areas” है।
  • स्वामित्व योजना पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इसकी शुरूआत 24 अप्रैल, 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर की गई थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घर के मालिक को 'अधिकार अभिलेख' (Record of Rights) उपलब्ध कराना और प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना है।
  • इस योजना को चार वर्षों (2020-2024) की अवधि में पूरे देश में लागू किया जा रहा है और अंततः इसके तहत देश के लगभग 6.62 लाख गाँवों को कवर किया जाएगा। 
  • योजना के पायलट चरण (2020-21) में 6 प्रमुख राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक) के लगभग 1 लाख गाँवों और पंजाब तथा राजस्थान के कुछ सीमावर्ती गाँवों को कवर किया जाएगा। इसके अलावा पंजाब और राजस्थान में सतत् संचालन संदर्भ प्रणाली (Continuous Operating System- CORS) स्टेशनों के नेटवर्क की स्थापना की जाएगी।
  • इन सभी छह राज्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों के ड्रोन सर्वेक्षण और योजना के कार्यान्वयन के लिये भारत के सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। इन राज्यों ने डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड/संपत्ति कार्ड प्रारूप और गाँवों को ड्रोन आधारित सर्वेक्षण के लिये अंतिम रूप दिया है। 
  • पंजाब और राजस्थान राज्यों ने भविष्य के ड्रोन उड़ान गतिविधियों में सहायता के लिये CORS नेटवर्क की स्थापना हेतु सर्वेक्षण विभाग के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं।

सतत् संचालन संदर्भ प्रणाली-कोर्स

(Continuous Operating Reference System- CORS)

  • सतत् संचालन संदर्भ प्रणाली (कोर्स) संदर्भ स्टेशनों का एक नेटवर्क है जो एक आभासी आधार स्टेशन प्रदान करता है जिससे लंबी दूरी की उच्च सटीकता वाले नेटवर्क सुधारों का अभिगम प्राप्त होता है। कोर्स नेटवर्क भूमि नियंत्रण बिंदुओं की स्थापना में सहायता करता है, जो कि भू-संदर्भ, भू-सत्यता और भूमि सीमांकन के लिये एक महत्त्वपूर्ण कार्यकलाप है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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