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भवन क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता हेतु नई पहलें

  • 22 Jul 2021
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो

मेन्स के लिये

ऊर्जा दक्षता में सुधार की आवश्यकता और चुनौतियाँ  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' (Azadi Ka Amrut Mahotsav) के हिस्से के रूप में भवन क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता की दिशा में सरकार द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों की घोषणा की।

  • इन पहलों की शुरुआत "स्थायी आवास के लिये लक्ष्य: ऊर्जा दक्षता निर्माण में नई पहल 2021" (Aiming for Sustainable Habitat: New Initiatives in Building Energy Efficiency 2021) का उद्घाटन करते हुए की गई, जिसे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) द्वारा लॉन्च किया गया।

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो

  • इस ब्यूरो को विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था।
  • यह भारतीय अर्थव्यवस्था के ऊर्जा आधिक्य को कम करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ विकासशील नीतियों और रणनीतियों में सहायता करता है।
  • यह अपने कार्यों को करने में मौजूदा संसाधनों एवं बुनियादी ढाँचे की पहचान तथा उपयोग करने के लिये नामित उपभोक्ताओं, एजेंसियों व अन्य संगठनों के साथ समन्वय करता है।

प्रमुख बिंदु

शुरू की गई पहलें:

  • ईको निवास संहिता:
    • भारत के ऊर्जा संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने हेतु आवासीय भवनों (Energy Conservation Building Code for Residential- ECBC-R) के लिये यह एक ऊर्जा संरक्षण भवन कोड है।
    • यह ईको निवास संहिता 2021 के साथ कोड अनुपालन दृष्टिकोण और भवन सेवाओं के लिये न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन आवश्यकताओं एवं सत्यापन ढाँचें को निर्दिष्ट करता है।
  • हैंडबुक फॉर लर्निंग:
    • वेब आधारित एक मंच “द हैंडबुक ऑफ रेप्लिकेबल डिज़ाइन फॉर एनर्जी एफिसिएंट रेज़िडेन्शियल बिल्डिंग्स” उपलब्ध होगा जिसका उपयोग भारत में कम ऊर्जा खपत वाले भवनों के निर्माण में एक उपयोगी और अपनाई जा सकने योग्य सूचनाओं एवं जानकारियों के स्रोत के रूप में किया जा सकेगा।
  •  निर्माण सामग्री की ऑनलाइन डॉयरेक्टरी:
    • ऊर्जा दक्षता वाले भवन निर्माण हेतु भवन निर्माण सामग्री के लिये मानकीकरण की प्रक्रिया को पूर्ण करने के उद्देश्य से भवन निर्माण सामग्री की एक ऑनलाइन डॉयरेक्टरी तैयार की जाएगी।
  • निर्माण पुरस्कार:
    • निर्माण पुरस्कार (NEERMAN यानी नेशनल एनर्जी एफिसिएन्सी रोडमैप फॉर मूवमेंट टूवर्ड्स एफोर्डेबल एंड नेचुरल हैबीटेट) की घोषणा की जाएगी जिसका उद्देश्य BEE की ऊर्जा बचत भवन संहिता के अनुरूप तैयार असाधारण रूप से ऊर्जा बचत भवन प्रारूपों को प्रोत्साहित करना है।
  • ऑनलाइन स्टार रेटिंग टूल:
    • यह पेशेवरों को अपने घरों में ऊर्जा दक्षता के सबसे उन्नत विकल्पों को अपनाने के लिये निर्णय करने में मदद करेगा।
    • व्यक्तिगत उपयोग वाले भवनों में ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा बचत को बेहतर करने के लिये ऊर्जा दक्षता वाले घरों की रेटिंग हेतु ऑनलाइन स्टार रेटिंग टूल तैयार किया जा चुका है। 
  • प्रशिक्षण:
    • ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC) 2017 और इको निवास संहिता (ENS) 2021 के अंतर्गत 15000 वास्तुकारों, अभियंताओं एवं सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

महत्त्व:

  • निर्माण क्षेत्र, उद्योग के बाद विद्युत का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन वर्ष 2030 तक इसके सबसे बड़े ऊर्जा खपत वाले क्षेत्र बनने की उम्मीद है।
  • ऐसी पहलों से देश भर में आवासीय भवनों में ऊर्जा दक्षता के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो सतत् आवास की ओर अग्रसर करेगा।
    • भारत को अधिक ऊर्जा कुशल बनाने के लिये यह पहल एक लंबा सफर तय करेगी।

भारत में ऊर्जा दक्षता

ऊर्जा दक्षता:

  • ऊर्जा दक्षता का अर्थ है किसी कार्य को करने के लिये कम ऊर्जा का उपयोग करना अर्थात् ऊर्जा की बर्बादी को समाप्त करना।
  • ऊर्जा दक्षता कई तरह के लाभ प्रदान करती है जैसे- ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को कम करना, ऊर्जा आयात की मांग को कम करना और घरेलू तथा अर्थव्यवस्था-व्यापी स्तर पर लागत को कम करना।

ट्रांज़ीसन: 

  • भारत का ऊर्जा क्षेत्र सरकार की हाल की विकासात्मक महत्त्वाकांक्षाओं के साथ परिवर्तन के लिये तैयार है, उदाहरण के लिये वर्ष 2022 तक अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 175 गीगावाट, सभी के लिये 24X7 बिजली, वर्ष 2022 तक सभी के लिये आवास, 100 स्मार्ट सिटी मिशन, ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देना, रेलवे क्षेत्र का विद्युतीकरण, घरों का 100% विद्युतीकरण, कृषि पंप सेटों का सौरीकरण और स्वच्छ भोजन पकाने की स्थितियों को बढ़ावा देना।

ऊर्जा दक्षता की संभावना: 

  • वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक (WEO 2010) के अनुसार, ऊर्जा दक्षता में लगभग 51% की अधिकतम ग्रीनहाउस गैस (GHG) के न्यूनीकरण की क्षमता है, इसके बाद नवीकरणीय (32%), जैव ईंधन (1%), परमाणु (8%), कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (8%) है। 
  • भारत महत्त्वाकांक्षी ऊर्जा दक्षता नीतियों (IEA-भारत 2020) के कार्यान्वयन के साथ वर्ष 2040 तक बिजली उत्पादन हेतु 300 गीगावाट के नए निर्माण से बच सकता है।

सकारात्मक: 

  • ऊर्जा दक्षता उपायों के सफल कार्यान्वयन ने 2017-18 के दौरान देश की कुल बिजली खपत में 7.14% की बिजली बचत और 108.28 मिलियन टन CO2 के उत्सर्जन में कमी लाने में योगदान दिया।

ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने संबंधी अन्य पहलें:

  •  प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार (PAT): 
  • मानक और लेबलिंग:
    • यह योजना वर्ष 2006 में लॉन्च की गई थी और वर्तमान में रूम एयर कंडीशनर (फिक्स्ड/वेरिएबल स्पीड), सीलिंग फैन, रंगीन टेलीविज़न, कंप्यूटर, डायरेक्ट कूल रेफ्रिजरेटर, वितरण ट्रांसफार्मर, घरेलू गैस स्टोव, औद्योगिक मोटर, एलईडी लैंप तथा कृषि पम्पसेट जैसे उपकरणों पर लागू होती है।
  • ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ECBC):
    • इसे वर्ष 2007 में नए वाणिज्यिक भवनों के लिये विकसित किया गया था।
    • यह 100kW (किलोवाट) के कनेक्टेड लोड या 120 KVA (किलोवोल्ट-एम्पीयर) और उससे अधिक की अनुबंध मांग वाले नए वाणिज्यिक भवनों के लिये न्यूनतम ऊर्जा मानक निर्धारित करता है।
  • मांग पक्ष प्रबंधन (DSM):
    • इसका आशय विद्युत मीटर की मांग या ग्राहक-पक्ष पर प्रभाव डालने के उद्देश्य से उपायों के चयन, नियोजन और कार्यान्वयन से है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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