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ऊर्जा दक्षता उद्यम (E3) प्रमाणपत्र कार्यक्रम

  • 15 Mar 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) ने "ईंट निर्माण क्षेत्र के लिये ऊर्जा दक्षता उद्यम (E3) प्रमाणपत्र कार्यक्रम" (Energy Efficiency Enterprise (E3) Certifications Programme for the Brick Manufacturing Sector) शुरू किया है।

  • E3 प्रमाणन योजना का उद्देश्य इस क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता क्षमता का अधिक दोहन करना है।

प्रमुख बिंदु

ऊर्जा दक्षता उद्यम (E3) प्रमाणपत्र कार्यक्रम के विषय में:

  • E3 प्रमाणन ईंट उद्योग पर केंद्रित एक मान्य प्रक्रिया है। यह प्रमाणन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) द्वारा प्रदान किया जाएगा।
    • यह ऊर्जा-कुशल विनिर्माण को अपनाने वाले ईंट निर्माताओं को पहचानने और ग्राहकों को ऐसी E3 प्रमाणित विनिर्माण इकाइयों से ईंट खरीदने के लिये प्रोत्साहित करने की पहल है।
    • यह प्रमाणपत्र उन ईंट निर्माण उद्यमों को प्रदान किया जाएगा जो इस योजना में निर्दिष्ट न्यूनतम विशिष्ट ऊर्जा खपत (Specific Energy Consumption) मानदंडों को पूरा करते हैं।
    • यह उद्यम ऊर्जा अनुकूल ईंट निर्माण प्रक्रिया और प्रौद्योगिकी तथा निम्न घनत्व वाली ईंटों (छिद्रित या छिद्रपूर्ण ईंटों) के उत्पादन को अपनाकर E3 प्रमाणन के योग्य हो सकता है।
    • E3 प्रमाणन को अपनाना वर्तमान में ईंट उद्योग के लिये स्वैच्छिक है।

ईंट विनिर्माण क्षेत्र:

  • सकल घरेलू उत्पादन में योगदान: ईंट क्षेत्र का देश की जीडीपी में लगभग 0.7% का योगदान है, जो 1 करोड़ से अधिक श्रमिकों को मौसमी रोज़गार प्रदान करता है, साथ ही परिवहन एवं निर्माण जैसे अन्य आर्थिक क्षेत्रों पर भी इसका गहरा प्रभाव है।
  • बाज़ार का आकार: भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा ईंट उत्पादक देश है और  E20 प्रमाणन कार्यक्रम के माध्यम से यह मांग अगले 20 वर्षों में तीन से चार गुना होने की उम्मीद है।
  • ऊर्जा की खपत: ईंट निर्माण उद्योग में सालाना लगभग 45-50 मिलियन टन कोयले की खपत होती है, जो देश में कुल ऊर्जा खपत का 5-15% है।
    • ईंट क्षेत्र में स्टील और सीमेंट के बाद भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता के लिये दूसरी सबसे बड़ी क्षमता मौजूद है।

E3 प्रमाणन के लाभ:

  • E3 प्रमाणन के कार्यान्वयन से निम्नलिखित लाभ होंगे:
    • ईंट निर्माण प्रक्रिया में ऊर्जा की बचत।
    • ईंटों की गुणवत्ता में सुधार।
    • घरों की लागत में कमी।
    • ऐसी इमारतों के मालिकों को बेहतर तापीय सुविधा (Better Thermal Comfort) और बेहतर तापरोधी गुणों (Improve Insulation Property) के कारण ऊर्जा की बचत।
  • यह प्रतिवर्ष 7 मिलियन टन तेल और कार्बन मोनोआक्साइड (CO) की ऊर्जा बचत के बराबर है तथा वर्ष 2030 तक 7500 ईंट निर्माण इकाइयों द्वारा E3 प्रमाणन को अपनाने से लगभग 25 मिलियन टन की बचत अनुमानित है। 
  • क्षेत्र का आधुनिकीकरण: E3 प्रमाणन योजना ईंट क्षेत्र के आधुनिकीकरण में तेज़ी लाने का प्रयास के साथ ही बाज़ार में उपलब्ध लाभ का उपयोग करके ग्राहकों की मांग को पूरा करके आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) के विज़न को पूरा करने का काम कर रही है।
  • ECBC का अनुपालन: ऊर्जा कुशल ईंटें ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (Energy Conservation Building Code- ECBC) की आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी होंगी। 

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो

  • यह ब्यूरो विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, जिसे वर्ष 2002 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था।
    • ऊर्जा दक्षता और संरक्षण के क्षेत्र में इन नीतियों तथा कार्यक्रमों को लागू करना अनिवार्य है।
  • यह भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा आधिक्य को कम करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ विकासशील नीतियों और रणनीतियों में सहायता करता है।
  • प्रमुख कार्यक्रम: राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक, प्रदर्शन और व्यापार योजना, मानक तथा लेबलिंग कार्यक्रम, ऊर्जा संरक्षण भवन कोड आदि।

ऊर्जा संरक्षण भवन कोड

  • इस कोड को नए व्यावसायिक भवनों में न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानकों को स्थापित करने के लिये वर्ष 2007 में विकसित किया गया था। 
    • इमारतों द्वारा ऊर्जा संसाधनों के एक महत्त्वपूर्ण अनुपात का उपभोग किया जाता है और ECBC इन इमारतों की ऊर्जा खपत को कम करने वाला एक आवश्यक नियामक उपकरण है।
  • ECBC 100 किलोवाट (kW) के संयोजित लोड या 120 kVA (किलोवोल्ट-एम्पीयर) और उससे अधिक की अनुबंधित मांग वाले नए वाणिज्यिक भवनों के लिये न्यूनतम ऊर्जा मानक निर्धारित करता है।  
  • BEE ने इमारतों के लिये एक स्वैच्छिक स्टार रेटिंग कार्यक्रम भी विकसित किया है जो एक इमारत के वास्तविक प्रदर्शन [इमारत के अपने क्षेत्रफल में ऊर्जा के उपयोग के संदर्भ में kWh/sq. m/year में व्यक्त)] पर आधारित है। 

स्रोत: पी.आई.बी.

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