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संगे ज्वालामुखी

  • 15 Mar 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में इक्वाडोर स्थित संगे ज्वालामुखी में हुए विस्फोट के बाद इससे निकले राख के बादल आकाश में 8,500 मीटर (लगभग 28, 890 फीट) की ऊँचाई तक पहुँच गए।

प्रमुख बिंदु: 

संगे ज्वालामुखी:   

  • संगे ज्वालामुखी इक्वाडोर के साथ-साथ विश्व के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
  • संगे एंडीज़ के उत्तरी ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित सबसे दक्षिणी मिश्रित ज्वालामुखी (लावा और राख की वैकल्पिक परतों से बना एक ज्वालामुखी) है। यह 5230 मीटर ऊँचा है।
    • एंडीज़ विश्व की सबसे लंबी पर्वत शृंखला (जल के ऊपर) है और इसमें विश्व की कुछ सबसे ऊँची चोटियाँ शामिल हैं।
    • संगे राष्ट्रीय उद्यान एंडीज़ पर्वतों के पूर्वी हिस्से में इक्वाडोर के मध्य भाग में स्थित है। यह एक विश्व धरोहर स्थल है।

Quito

विस्फोट:

  • इस ज्वालामुखी में विस्फोट का सबसे पुराना मामला वर्ष 1628 में दर्ज किया गया है। वर्ष 1728 से वर्ष 1916 के बीच तथा पुनः वर्ष 1934 से वर्तमान तक कमोबेश निरंतर विस्फोट के मामले देखे गए थे।  

इक्वाडोर के अन्य प्रमुख ज्वालामुखी: 

  • इक्वाडोर, पैसिफिक रिम के "रिंग ऑफ फायर" क्षेत्र का हिस्सा है और इस देश में आठ ज्वालामुखी हैं, जैसे- कोटोपेक्सी (5,897 मी.), कैम्बे (5,790 मी.), पिचिंचा (4,784 मी.) आदि। 

ज्वालामुखी विस्फोट: 

परिचय: 

  • ज्वालमुखी क्रिया के अंतर्गत पृथ्वी के आतंरिक भाग में मैग्मा व गैस के उत्पन्न होने से लेकर भू-पटल के नीचे व ऊपर लावा के प्रकट होने तथा शीतल व ठोस होने तक की समस्त प्रक्रियाएँ शामिल की जाती हैं।
  •  इसका सबसे आम परिणाम आबादी का स्थानांतरण है, क्योंकि अक्सर लावा के प्रवाह से बचने के लिये बड़ी संख्या में लोगों को भागने के लिये विवश होना पड़ता है।

प्रकार: ज्वालामुखीय गतिविधि और ज्वालामुखी क्षेत्रों को आमतौर पर छह प्रमुख प्रकारों में विभाजित किया जाता है:

  • आइसलैंडिक (Icelandic)
    • इसमें पिघला हुआ बेसाल्टी लावा लंबे और समानांतर दरार  (Parallel Fissure) से बहता है। इस प्रकार का बहाव अक्सर लावा पठारों का निर्माण करता है।
  • हवाईयन (Hawaiian): 
    • यह आइसलैंडिक ज्वालामुखी के समान ही होता है। हालाँकि इसमें ज्वालामुखी के शिखर व त्रिज्यीय दरारों से तरल लावा का प्रवाह होता है, इससे शील्ड ज्वालामुखी का निर्माण होता है, जो काफी बड़े होते हैं और मंद ढलान वाले होते हैं।
  • स्ट्राम्बोलियन (Strombolian): 
    • इनमें गर्म गैसों के मध्यम विस्फोट शामिल होते हैं जो चक्रीय या लगभग निरंतर छोटे विस्फोटों में तापदीप्त लावा को थक्के के रूप में बाहर निकालते हैं।
    • इस तरह के कम अंतराल वाले निरंतर विस्फोटों के कारण इटली के उत्तर-पूर्वी तट से दूर स्ट्रॉमबोली द्वीप पर स्थित स्ट्रोम्बोली ज्वालामुखी को "भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ" कहा गया है।
  • वल्कैनियन (Vulcanian): 
    • इसका नाम स्ट्रोमबोली के पास वल्केनो द्वीप से प्रेरित है, इस ज्वालामुखी में आमतौर पर ज्वालामुखी की राख से भरे गैस के विस्फोट होते हैं। यह मिश्रण गहरे, अशांत बादलों का निर्माण करता है जो तेज़ी से ऊपर उठते है और घुमावदार आकार में फैल जाते हैं।
  • पिलियन:
    • इसका अभिप्राय ऐसे विस्फोट से है, जो पाइरोक्लास्टिक प्रवाह उत्पन्न करते हैं, यह गर्म गैस और ज्वालामुखीय पदार्थ का एक घना मिश्रण होता है।
    • इन विस्फोटों द्वारा उत्पन्न द्रवीय मिश्रण (fluidized slurries) हवा की तुलना में भारी होते हैं, किंतु इनमें कम श्यानता होती है और ये तीव्र वेग के साथ ढलानों से नीचे गिरते हैं, नतीजतन ये बेहद विनाशकारी होते हैं।
  • पीनियन:
    • यह तीव्र ज्वालामुखी विस्फोट का एक प्रकार है। इस प्रकार के विस्फोट में गैस युक्त मैग्मा से निकलने वाली गैसें तीव्र विस्फोट उत्पन्न करती हैं, जिसके माध्यम से मैग्मा बाहर निकलता रहता है।

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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