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भारत-विश्व

RCEP में कृषि और औषधि से संबंधी प्रावधान रद्द

  • 01 Jul 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों ?

भारत और अन्य विकासशील देशो के लिये राहत के तौर पर औषधि और कृषि से संबंधित तीन हानिकारक प्रावधानों को RCEP से बाहर कर दिया गया है।

प्रावधान के रद्द होने के कारण

  • भारत के नेतृत्व में RCEP देशों के पेटेंट के विस्तृत नियमों और डाटा विशिष्टता संबंधी प्रावधानों को हटाने के लिये प्रस्ताव लाया गया था क्योकि यह प्रावधान विकासशील देशो में सस्ती दवाओ के प्रसार पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार की स्थापना करता है।
  • इस प्रावधान के कारण विकासशील देशों की घरेलू औषधीय कंपनियां विश्व में सस्ती जीवनरक्षक दवाओं के निर्यात में पीछे रह जाती हैं। बीज और रोपण सामग्री से संबंधित कठोर बौद्धिक संपदा अधिकार नियम जो विकासशील देशों के कृषि क्षेत्र के लिये हानिकारक हैं, को भी वापस ले लिया गया है।

प्रावधान के रद्द होने से लाभ

  • डाटा की विशिष्टता और पेटेंट अवधि के विस्तार जैसे प्रावधानों को हटाने से वैश्विक स्तर पर दवाओं की आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

नये प्रकार के पौधों की सुरक्षा हेतु अंतर्राष्ट्रीय संघ (UPOV)

  • नये प्रकार के पौधों की सुरक्षा हेतु अंतर्राष्ट्रीय संघ (International Union for the Protection of New Varieties of Plants -UPOV) के अंतर्गत भारत ने RCEP के उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रावधानों को रद्द करने की बात कही थी क्योंकि ये प्रावधान WTO के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। चूँकि UPOV 91 के प्रावधानो को अपनाना भागीदार देशो के लिये ‘स्वैच्छिक’ है इसलिये भारत ने इसे नहीं अपनाया है।
  • UPOV 91 के प्रावधान पूरी तरह बहुर्राष्ट्रीय कंपनियो के पक्ष में है क्योंकि इसको अपनाने से किसानों के बीज संग्रहण और उपयोग की स्वतंत्रता सीमित होगी।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP)

  • क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) एक प्रस्तावित मेगा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) है, जो आसियान के दस सदस्य देशों तथा छह अन्य देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूज़ीलैंड) के बीच किया जाना है।
  • ज्ञातव्य है कि इन देशों का पहले से ही आसियान से मुक्त व्यापार समझौता है।
  • वस्तुतः RCEP वार्ता की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2012 में कंबोडिया में आयोजित 21वें आसियान शिखर सम्मेलन में हुई थी।
  • RCEP को ट्रांस पेसिफिक पार्टनरशिप (Trans Pacific Partnership- TPP) के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
  • RCEP के सदस्य देशों की कुल जीडीपी लगभग 21.3 ट्रिलियन डॉलर और जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का 45 प्रतिशत है।
  • सदस्य देश: ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्याँमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम। इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूज़ीलैंड सहभागी (Partner) देश हैं।

विश्व व्यापार संगठन

  • विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) विश्व में व्यापार संबंधी अवरोधों को दूर कर वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में है। वर्तमान में विश्व के 164 देश इसके सदस्य हैं।
  • 29 जुलाई, 2016 को अफगानिस्तान इसका 164वाँ सदस्य बना।
  • सदस्य देशों का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन इसके निर्णयों के लिये सर्वोच्च निकाय है, जिसकी बैठक प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित की जाती है।

निष्कर्ष: मेलबर्न में RCEP को लागू करने के संबंध में हो रही वार्ता के इस वर्ष पूर्ण होने की संभावना है। RCEP समझौते के लागू हो जाने के बाद यह विश्व का सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लाक होगा जो विश्व की 50% जनसंख्या और 30% व्यापार का प्रतिनिधित्व करेगा।

स्रोत : TOI

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