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भारतीय अर्थव्यवस्था

FPIs लाभांश पर उच्च प्रतिधारण/विथहोल्डिंग कर

  • 13 Apr 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

विथहोल्डिंग कर, वित्त विधेयक, आयकर अधिनियम धारा 196D तथा धारा 195, लाभांश वितरण कर 

मेन्स के लिये:

लाभांश वितरण कर

चर्चा में क्यों?

बजट 2020-21 में ‘विथहोल्डिंग कर’ (Withholding Tax) के भुगतान के संबंध में उत्पन्न अनिश्चितता को हाल ही में संसद द्वारा पास किये गए ‘वित्त अधिनियम’, वर्ष 2020 (Finance Act, 2020) माध्यम से दूर किया गया। 

मुख्य बिंदु:

  • वित्त अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि गैर-निवासियों के लाभांश पर 20% कर की दर (प्लस अधिभार तथा उपकर) लागू होगी।  
  • निवासियों पर न्यून कर की दर लागू की जा सकती है यदि भारत तथा ‘विदेशी पोर्टफोलियो निवेश’ (Foreign portfolio investment- FPIs) निवेशक देशों के मध्य ‘दोहरा कराधान अपवंचन समझौता' (Double Taxation Avoidance Agreement- DTAA) संधि है।

विथहोल्डिंग कर: 

  • एक ऐसी राशि है जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारी की आय से सीधे काटी जाती है और सरकार को व्यक्तिगत कर देयता के हिस्से के रूप में भुगतान की जाती है। 

लाभांश वितरण कर

(Dividend Distribution Tax):

  • लाभांश वितरण कर वह कर है जो कॉर्पोरेट द्वारा अपने शेयरधारकों को दिये गए लाभांश पर देय होता है।
  •  एक कॉर्पोरेट इकाई के लिये उच्च लाभांश का मतलब होता है कर का अधिक बोझ।

क्यों थी अनिश्चितता की स्थिति?

  • बजट 2020-21 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के DDT भुगतान के मामलें में अनिश्चितता थी। आयकर अधिनियम की धारा 195; जो स्रोत में कटौती कर (Tax Deducted at Source- TDS) या गैर-निवासियों के विथहोल्डिंग कर से संबंधित है, के तहत कर की दर को सही से निर्दिष्ट नहीं किया गया है।  
  • धारा 196D केवल FPIs से संबंधित है। FPIs को गैर-निवासियों के रूप में भी वर्गीकृत किया जाता है तथा इन पर आयकर अधिनियम की धारा 196D के तहत विथहोल्डिंग कर की दर निर्धारित की जाती है।
  • धारा 196D के अनुसार लाभांश भुगतान पर 20% (प्लस अधिभार और उपकर) की दर लागू होती है तथा कर संधि के कारण FPIs की कर देयता कम होने पर भी विथहोल्डिंग कर की दर में कमी का प्रावधान नहीं है।
  • जबकि FPIs के अलावा अन्य गैर- निवासियों के कर प्रावधानों को धारा 195 में संहिताबद्ध किया गया है। DTAA कर संधि के तहत FPIs की देनदारी 5, 10 या 15 प्रतिशत है, तो वैचारिक रूप से, कंपनियों को इसी दर पर कर भुगतान करना होता है।
  • सवाल यह है कि क्या धारा 196D तथा धारा 195 को एक साथ पढ़ना चाहिये या केवल धारा 196D को जो केवल FPIs से संबंधित है। 

संशोधन का महत्त्व:

  • ऐसी संभावना थी कि गैर-निवासियों (FPIs के अलावा) के लिये TDS कर संधि की व्यवस्था नहीं होने पर यह 30-40 प्रतिशत तक हो सकता है। वित्त अधिनियम में संशोधन द्वारा इस मुद्दे का समाधान करने का प्रयास किया गया है। 

वित्त विधेयक:

  • संसद के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करते समय संविधान के अनुच्छेद 110(1)(क) की अपेक्षा को पूरा करने के लिये वित्त विधेयक प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें बजट में प्रस्तावित कर लगाने, हटाने, माफ करने अथवा विनियमन का ब्यौरा दिया जाता है। 
  • इसमें बजट संबंधी अन्य उपबंध भी होते हैं जिन्हे धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 110 में परिभाषित है, वित्त विधेयक एक धन विधेयक है। 

स्रोत: द हिंदू 

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