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वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट, 2021

  • 02 Apr 2021
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

विश्व आर्थिक मंच ( World Economic Forum’s- WEF) द्वारा जारी वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट, 2021 में भारत 28 पायदान नीचे आ गया है।

  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर (OSC) योजना, उज्ज्वला योजना लैंगिक असमानता से संबंधित मुद्दे को संबोधित करने हेतु सरकार द्वारा शुरू की गई कुछ पहलें हैं।
  • इसके अलावा लैंगिक समानता के सिद्धांत को भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य तथा नीति निर्देशक सिद्धांतों में भी जोड़ा गया है।

प्रमुख बिंदु:

वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट:

  • वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट के बारे में:
    • इसे पहली बार वर्ष 2006 में WEF द्वारा प्रकाशित किया गया था।
    • इसमें निम्नलिखित चार आयामों के मद्देनज़र 156 देशों द्वारा लैंगिक समानता की दिशा में की गई प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है: 
      • आर्थिक भागीदारी और अवसर।
      • शिक्षा का अवसर।
      • स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता।
      •  राजनीतिक सशक्तीकरण।
    • इंडेक्स में 1 उच्चतम स्कोर होता है जो समानता की स्थिति तथा 0 निम्नतम स्कोर होता है जो असमानता की स्थिति को दर्शाता है।  
  • उद्देश्य:
    • स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों के मध्य सापेक्ष अंतराल में हुई प्रगति का आकलन करने हेतु एक सीमा का निर्धारण करना। वार्षिक मानदंड के माध्यम से प्रत्येक देश के हितधारकों द्वारा विशिष्ट आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संदर्भ में अपनी प्राथमिकताओं को निर्धारित किया जा सकता है 

भारत की स्थिति: 

  • ओवरऑल रैंकिंग:
    • दक्षिण एशियाई देशों में भारत का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है, भारत रैंकिंग में 156 देशों में 140वें स्थान पर है।
      • दक्षिण एशिया के देशों में बांग्लादेश 65वें, नेपाल 106वें, पाकिस्तान 153वें, अफगानिस्तान 156वें, भूटान 130वें और श्रीलंका 116वें स्थान पर है।
      • वैश्विक लैंगिक अंतराल इंडेक्स, 2020 में भारत 153 देशों में 112वें स्थान पर था।
  • राजनीतिक  सशक्तीकरण:
    • भारत के राजनीतिक सशक्तीकरण सूचकांक में 13.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। महिला मंत्रियों की संख्या वर्ष 2019 में 23.1% थी जो वर्ष 2021 में घटकर 9.1% रह गई है।
    • हालांँकि अन्य देशों की तुलना में भारत द्वारा अच्छा प्रदर्शन किया गया है और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में यह 51वें स्थान पर है। 
  • शिक्षा तक पहुँच: 
    •  शिक्षा प्राप्ति सूचकांक में भारत को 114वें स्थान पर रखा गया है।
  • आर्थिक भागीदारी:
    • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस वर्ष आर्थिक भागीदारी में अंतर 3% बढ़ा है। 
    • पेशेवर और तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 29.2% तक घट गई है। 
    • उच्च और प्रबंधकीय पदों पर भी महिलाओं की हिस्सेदारी 14.6% है तथा देश में केवल 8.9% फर्मों में ही शीर्ष पर महिला प्रबंधक हैं।
    • भारत में महिलाओं की अनुमानित आय पुरुषों की केवल 1/5 है, जो इस संकेतक पर देश को वैश्विक स्तर पर 10 पायदान नीचे रखता है।
      • पाकिस्तान और अफगानिस्तान में एक महिला की औसत आय पुरुष की औसत आय से 16% से भी कम है, जबकि भारत में यह 20.7% है।
  • स्वास्थ्य और उत्तरजीविता सूचकांक:
    • इस पर भारत द्वारा खराब प्रदर्शन किया गया तथा भारत रैंकिंग में 155वें स्थान  पर रहा है।
      • इस सूचकांक में सबसे खराब प्रदर्शन चीन का रहा है। 
    • रिपोर्ट प्रमुख कारक के रूप में एक विषम लिंग अनुपात (Skewed Sex Ratio) की ओर इशारा करती है।
      • लड़कों की चाह में प्रसव पूर्व पक्षपातपूर्ण तरीके से लिंग चयन को इसके लिये ज़िम्मेदार ठहराया गया है। 
      • प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण जैसी प्रथाओं के चलते प्रतिवर्ष गायब होने वाली बालिकाओं के 1.2 से 1.5 मिलियन मामलों में से 90-95% मामले केवल भारत और चीन में देखने को मिलते हैं।  

Rift-widens

वैश्विक परिदृश्य:

  • क्षेत्रवार रैंक:
    • दक्षिण एशिया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में से एक है, जिसके बाद मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका का स्थान है।
  • राजनीतिक सशक्तीकरण में सर्वाधिक लैंगिक अंतराल:
    • राजनीतिक सशक्तीकरण में लैंगिक अंतराल सबसे अधिक है, वैश्विक स्तर पर संसद की कुल 35,500 सीटों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 26.1 प्रतिशत है, कुल 3,400 से अधिक मंत्रियों में से केवल 22.6 प्रतिशत ही महिलाएँ हैं।
    • 15 जनवरी, 2021 तक 81 देशों में से किसी में भी महिला प्रमुख की नियुक्ति नहीं हुई है।
    • बांग्लादेश एकमात्र ऐसा देश है जहांँ पिछले 50 वर्षों में पुरुषों की तुलना में ऐसी महिलाओं की संख्या अधिक है जो राज्य के प्रमुख पदों पर नियुक्त हुईं।
  • आर्थिक भागीदारी:
    • आर्थिक भागीदारी के मामले में सर्वाधिक लैंगिक अंतराल वाले देशों में ईरान, भारत, पाकिस्तान, सीरिया, यमन, इराक और अफगानिस्तान शामिल हैं।
  • अंतराल को भरने हेतु समयसीमा: 
    • लैंगिक अंतराल को समाप्त करने में दक्षिण एशिया में 195.4 वर्ष तथा पश्चिमी यूरोप में 52.1 वर्ष का समय लगेगा।

विश्व आर्थिक मंच:

  • विश्व आर्थिक मंच सार्वजनिक-निजी सहयोग हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है।
  • इसकी स्थापना 1971 में गैर-लाभकारी संगठन के रूप में हुई। इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थिति है। यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संगठन है।
  • फोरम अपने सभी प्रयासों में शासन के उच्चतम मानकों को कायम रखते हुए जनहित में वैश्विक उद्यमिता का प्रदर्शन करने का प्रयास करता है।

WEF द्वारा प्रकाशित कुछ प्रमुख रिपोर्ट:

  • ऊर्जा संक्रमण सूचकांक।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता सूचकांक।
  • वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी रिपोर्ट। 
  • इस रिपोर्ट का प्रकाशन WEF द्वारा INSEAD और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर किया जाता है।
  •  वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट।
  • वैश्विक जोखिम रिपोर्ट। 
  • यात्रा और पर्यटन प्रतिस्पर्द्धात्मकता रिपोर्ट।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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