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जीव विज्ञान और पर्यावरण

पहली बार बंधक हाथियों का सर्वेक्षण

  • 30 Jan 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?


हाल ही में वन और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा देश में हाथियों का सर्वेक्षण कराया गया। इसमें स्वामित्व प्रमाणपत्र रहित/सहित दोनों को शामिल किया गया।


महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • भारत में पहली बार सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे के अनुसार, बंदी हाथियों के सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके अनुसार सिर्फ केरल और असम में ही देश भर (2,454) के हाथियों की संख्या के आधे हैं, इनमें लगभग एक-तिहाई संख्या ऐसे हाथियों की है जो कानून द्वारा अनिवार्य किसी भी स्वामित्व प्रमाणपत्र के बिना निजी संरक्षण में तथा चिड़ियाघर, सर्कस और मंदिरों में हैं जो कि लगभग 207 हैं।
  • यह रिपोर्ट पर्यावरण और वन मंत्रालय (Ministry of Environment and Forests-MoEF) ने सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी है जो खासकर केरल और असम में हाथियों की बढ़ती मौत तथा मानव-हाथी संघर्ष के चलते आई है।
  • कुछ दिन पहले न्यायालय ने वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) को सभी बंदी हाथियों (स्वामित्व प्रमाणपत्र रहित/सहित) की पहचान करने का निर्देश दिया गया था।
  • हाल ही में जस्टिस ए. के. सीकरी और एस. अब्दुल नजीर की पीठ द्वारा राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रबंधकों को सभी बंदी हाथियों की उम्र का पता लगाने का निर्देश दिया गया है, इस मामले की सुनवाई 12 फरवरी को सुनिश्चित की गई है।

पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) की रिपोर्ट

  • हलफनामे में 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आँकड़े शामिल किये गए हैं।
  • इसके अनुसार, बंदी 2,454 हाथियों में से 560 वन विभाग के संरक्षण में हैं और 1,687 हथियों को लोगों ने अपने पास रखा है।
  • हालाँकि, देश में कुल बंदी हाथियों में से 664 को मालिकाना हक के बिना रखा गया है, जबकि चिड़ियाघरों में 85, सर्कस में 26 और मंदिरों/धार्मिक संस्थानों में 96 हाथी हैं।
  • महाराष्ट्र (13 बंदी हाथी) ने वन विभाग के साथ अपने हाथियों की संख्या को हलफनामे में शामिल नहीं किया है।
  • इसमें 664 हाथियों के लिये कोई स्वामित्व प्रमाणपत्र नहीं है, या प्रमाणपत्र प्रक्रियाधीन हैं।
  • 469 में असम से (335) और केरल (134) में इनकी ऐसी संख्या है जिसके लिये मालिकों के पास प्रमाणपत्र नहीं है। असम में 752 और केरल में 479 ऐसे हाथी हैं जो निजी स्वामित्व में हैं।
  • पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) ने शीर्ष अदालत को बताया कि सभी बंदी हाथियों में से 58 प्रतिशत दो राज्यों में केंद्रित हैं - असम में 905 और केरल में 518।

assam

  • हलफनामे में बिहार द्वारा प्रस्तुत बंदी हाथियों के आँकड़ों में विसंगतियों को दर्शाया गया है जिनकी संख्या 66 है। सात ही पिछले दो सालों में 73 लोगों के खिलाफ निजी हिरासत में 59 हाथियों को रखने का आरोप सामने आया है।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस

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