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भारत-विश्व

वर्ष 2021 में पीसा (PISA) में भाग लेगा भारत

  • 30 Jan 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?


भारतीय छात्र पढ़ाई के मामले में दुनिया के अन्य देशों के छात्रों से पीछे नहीं हैं। यही दर्शाने के लिये केंद्र सरकार ने 2021 में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (Program for International Student Assessment-PISA) में भाग लेने का फैसला लिया है। इसके लिये भारत सरकार और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (Organisation for Economic Cooperation and Development-OECD) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) वर्ष 2021 में अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (Program for International Student Assessment-PISA) का आयोजन करेगा।
  • इस कार्यक्रम में भारत की तरफ से केंद्रीय विद्यालय संगठन (Kendriya Vidyalaya Sangathan-KVS), नवोदय विद्यालय समिति (Navodaya Vidyalaya Samiti-NVS) द्वारा संचालित विद्यालय तथा केंद्रशासित क्षेत्र चंडीगढ़ के विद्यालय भाग लेंगे।
  • PISA के तहत मूल्यांकन के लिये किसी देश (बड़े देशों के मामले में विशिष्ट भौगौलिक क्षेत्र) के 15 साल की आयु के छात्रों को शामिल किया जाता है जो स्कूली शिक्षा के सभी रूपों अर्थात् सार्वजनिक, निजी, निजी-सहायता प्राप्त आदि का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • PISA सामग्री-आधारित मूल्यांकन के विपरीत एक सक्षमता आधारित मूल्यांकन है, जो यह मापता है कि छात्रों ने वे महत्त्वपूर्ण दक्षताएँ हासिल की हैं अथवा नहीं जो आधुनिक समाज में पूर्ण भागीदारी के लिये आवश्यक हैं।
  • यह भारतीय छात्रों के विवेक और उनकी ग्राह्यता का मार्गदर्शन कर उन्हें 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये तैयार करेगा।
  • केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education-CBSE) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training-NCERT) वास्तविक परीक्षा की प्रक्रिया और उससे संबंधित गतिविधियों का हिस्सा होंगे।
  • वर्ष 2000 में आयोजित परीक्षण के पहले दौर के बाद से 44 मध्यम आय वाले देशों सहित 80 से अधिक देशों ने इस मूल्यांकन में भाग लिया है।
  • वर्ष 2021 में आयोजित होने वाले PISA हेतु पंजीकृत देशों की सूची में ब्राज़ील, चीन (शंघाई और बीजिंग जैसे कुछ क्षेत्र), तथा दक्षिण एशिया के थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (Program for International Student Assessment-PISA)

  • अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (PISA) का आयोजन पहली बार वर्ष 2000 में किया गया था। 
  • आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) द्वारा समन्वित यह एक त्रैवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण है जिसमें दुनिया भर की शैक्षिक प्रणाली की गुणवत्ता का आकलन विज्ञान, गणित और पठन संबंधी क्षेत्रों में छात्रों का मूल्यांकन करके किया जाता है।
  • भारत में अधिकांश स्कूली परीक्षाओं के विपरीत, यह छात्र की स्मृति और पाठ्यचर्या आधारित ज्ञान का परीक्षण नहीं करता है। उदाहरण के लिये, PISA का विज्ञान परीक्षण तीन दक्षताओं को मापता है- वैज्ञानिक घटनाओं को समझने की क्षमता, डेटा एवं साक्ष्यों की वैज्ञानिक व्याख्या तथा वैज्ञानिक जिज्ञासाओं को डिज़ाइन और मूल्यांकन करने की क्षमता।

PISA और भारत

  • अब तक भारत ने PISA में केवल एक बार ही भाग लिया है। भारत ने 2009 के परीक्षण के "विस्तारित चक्र" में अपनी शुरुआत की, जिसमें हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के 400 स्कूलों के 16,000 छात्रों ने भाग लिया। तब भारत को भाग लेने वाले 74 देशों में 72वें स्थान पर रखा गया था।

आलोचना

  • PISA के नतीजों ने भाग लेने वाले देशों में शिक्षा नीतियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है, शिक्षाविदों ने ऐसी रैंकिंग के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है। आलोचकों का मानना है कि PISA ने मानक परीक्षण के साथ एक स्थिर विचार में योगदान दिया है जो मात्रात्मक उपायों पर अत्यधिक निर्भर करता है।
  • अमेरिका के 'रेस टू द टॉप' कार्यक्रम को अक्सर इस संदर्भ में एक उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जाता है क्योंकि यह छात्रों, शिक्षकों और प्रशासकों का मूल्यांकन करने के लिये मानकीकृत परीक्षण का उपयोग करता है।
  • इस त्रैवार्षिक सर्वेक्षण की भी कामचलाऊ उपायों को रोकने हेतु दीर्घकालिक और स्थायी समाधानों से ध्यान हटाने के लिये आलोचना की गई है। बाद में आलोचकों ने दावा किया कि देशों द्वारा अपनी रैंकिंग में सुधार के लिये इसे तेज़ी से अपनाया जा रहा है।
  • लेकिन OECD के अनुसार, ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि PISA या किसी अन्य शैक्षिक तुलना ने अल्पकालिक सुधारों में बदलाव किया है बल्कि PISA ने नीति निर्माताओं और हितधारकों के लिये सीमा-पार सहयोग के अवसर पैदा किये हैं।

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD)

oecd


स्थापना- 1961

मुख्यालय- पेरिस (फ्राँस)

सदस्य देशों की संख्या- 36


निष्कर्ष

  • PISA में भाग लेने से भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने छात्रों की शैक्षणिक क्षमता का पता चलेगा जिससे अपनी शिक्षा नीति को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी साथ ही आधुनिक वैज्ञानिक युग में देश को अन्य देशों के साथ मुकाबला करने के लिये नवाचारी कार्यक्रमों के संचालन की प्रेरणा मिलेगी। PISA रैंकिंग में एशियाई देशों का हमेशा से वर्चस्व रहा है, अतः भले ही भारत का प्रदर्शन 2009 में संतोषजनक न रहा हो लेकिन भविष्य में भारत से बेहतर प्रदर्शन की आशा की जा सकती है।

स्रोत : पी.आई.बी

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