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जैव विविधता और पर्यावरण

ई-अपशिष्ट प्रबंधन के लिये ड्राफ्ट अधिसूचना

  • 26 May 2022
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

ई-अपशिष्ट, एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक, ईपीआर।

मेन्स के लिये:

ई-अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 के लिये मसौदा अधिसूचना।

चर्चा में क्यों? 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने इलेक्ट्रॉनिक कचरा प्रबंधन के ड्राफ्ट पर जनता की प्रतिक्रिया जानने के लिये एक अधिसूचना जारी की है।

  • भारत में इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिये औपचारिक नियमों की एक सूची विद्यमान है, इन नियमों की घोषणा पहली बार वर्ष 2016 में की गई और वर्ष 2018 में इसमें संशोधन किया गया था।  ई-अपशिष्ट प्रबंधन ड्राफ्ट के नवीनतम नियमों के अगस्त 2022 तक लागू होने की उम्मीद है।
  • इससे पहले मंत्रालय ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 को अधिसूचित किया था। इसमें वर्ष 2022 तक विशिष्ट एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है, जिनकी "कम उपयोगिता और उच्च अपशिष्ट क्षमता" है।

इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिये ड्राफ्ट अधिसूचना:

  • इलेक्ट्रॉनिक वस्तु: अधिसूचना में लैपटॉप, लैंडलाइन और मोबाइल फोन, कैमरा, रिकॉर्डर, म्यूज़िक सिस्टम, माइक्रोवेव, रेफ्रिजरेटर और चिकित्सा उपकरण सहित इलेक्ट्रॉनिक सामानों की एक विस्तृत शृंखला निर्दिष्ट की गई है।
  • ई-अपशिष्ट संग्रह लक्ष्य: उपभोक्ता वस्तुओं का निर्माण करने वाली कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वर्ष 2023 तक उनके इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट के  कम-से-कम 60% को एकत्र किया जाए और इस लक्ष्य को वर्ष 2024 तथा वर्ष 2025 में क्रमशः 70% और 80% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा जाए।
    • कंपनियों को एक ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा और अपने वार्षिक उत्पादन और ई-अपशिष्ट संग्रह लक्ष्य को निर्दिष्ट करना होगा।
  • EPR प्रमाणपत्र: नियम कार्बन क्रेडिट के समान प्रमाणपत्रों में व्यापार की एक प्रणाली को लागू करते हैं, जो कंपनियों को अस्थायी रूप से कमी को पूरा करने की अनुमति देगा।
    • नियम विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (EPR) प्रमाणपत्र हासिल करने वाली कंपनियों की एक ढाँचागत प्रणाली तैयार करते हैं।
    • ये प्रमाणपत्र कंपनी द्वारा एक विशेष वर्ष में एकत्र और पुनर्चक्रित किये गए ई-कचरे की मात्रा को प्रमाणित करते हैं तथा एक संगठन अपने दायित्वों को पूरा करने में मदद करने के लिये किसी अन्य कंपनी को इसकी अधिशेष मात्रा को बेच सकता है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था पर फोकस: नए EPR नियम, पुनर्चक्रण और व्यापार पर ज़ोर देते हैं। 
  • ज़ुर्माना: जो कंपनियांँ अपने वार्षिक लक्ष्यों को पूरा नहीं करती हैं, उन्हें ज़ुर्माना या 'पर्यावरण मुआवज़ा' देना होगा, लेकिन मसौदा इस ज़ुर्माने की मात्रा को निर्दिष्ट नहीं करता है।
  • कार्यान्वयन प्राधिकरण: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) इन नियमों के समग्र कार्यान्वयन की देखरेख करेगा।
  • राज्य सरकारों की ज़िम्मेदारी: राज्य सरकारों को ई-कचरे को हटाने और पुनर्चक्रण सुविधाओं के लिये औद्योगिक स्थान निर्धारित करने, औद्योगिक कौशल विकास करने तथा ई-कचरे के निराकरण और पुनर्चक्रण सुविधाओं में लगे श्रमिकों हेतु स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। 

ई-अपशिष्ट के बारे में:

  • परिचय:
    • ई-अपशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक-अपशिष्ट का संक्षिप्त नाम है और यह पुराने, अप्रचलित, या छोड़े गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को संदर्भित करता है। इसमें उनके हिस्से, उपभोग्य वस्तुएंँ और पुर्जे शामिल हैं।
    • भारत में ई-अपशिष्ट के प्रबंधन के लिये कानून 2011 से लागू हैं। यह अनिवार्य करते हुए कि केवल अधिकृत विघटनकर्त्ता और पुनर्चक्रणकर्त्ता ही ई-अपशिष्ट एकत्र करेंगे। ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2016 को वर्ष 2017 में अधिनियमित किया गया था। 
    • घरेलू और वाणिज्यिक इकाइयों से कचरे को अलग करने, प्रसंस्करण तथा निपटान के लिये भारत का पहला ई-अपशिष्ट क्लिनिक भोपाल, मध्य प्रदेश में स्थापित किया गया है।
    • मूल रूप से बेसल अभिसमय (1992) में ई-अपशिष्ट का उल्लेख नहीं किया गया था लेकिन बाद में इसने वर्ष 2006 (COP8) में ई-कचरे के मुद्दों को शामिल किया।
      • नैरोबी घोषणा को खतरनाक कचरे के ट्रांसबाउंडरी मूवमेंट के नियंत्रण पर बेसल कन्वेंशन के COP9 में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य ई-अपशिष्ट के पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन के लिये अभिनव समाधान तैयार करना है।
  • भारत में ई-अपशिष्ट के प्रबंधन से संबंधित चुनौतियाँ:
    • लोगों की कम भागीदारी:
      • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण नहीं होने का एक प्रमुख कारण यह था कि उपभोक्ताओं ने उन्हें पुनर्चक्रित नहीं किया।
    • बाल श्रम की भागीदारी:
      • भारत में 10-14 आयु वर्ग के लगभग 4.5 लाख बाल श्रमिक विभिन्न ई-अपशिष्ट गतिविधियों में लगे हुए हैं और वह भी विभिन्न यार्डों व पुनर्चक्रण कार्यशालाओं में पर्याप्त सुरक्षा और सुरक्षा उपायों के बिना।
    • अप्रभावी विधान:
      • अधिकांश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs)/PCC वेबसाइटों पर सार्वजनिक सूचना का अभाव है।
    • स्वास्थ्य संबंधी खतरा: 
      • ई-कचरे में 1,000 से अधिक ज़हरीले पदार्थ होते हैं, जो मिट्टी और भूजल को दूषित करते हैं। 
    • प्रोत्साहन योजनाओं का अभाव:
      • असंगठित क्षेत्र के लिये ई-कचरे के निपटान हेतु कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। 
      • साथ ही ई-कचरे को प्रबंधित करने के लिये औपचारिक कदम उठाने हेतु इस कार्य में लगे लोगों को लुभाने के लिये भी किसी प्रोत्साहन का उल्लेख नहीं किया गया है। 
    • ई-कचरा आयात:
      • विकसित देशों द्वारा 80% ई-कचरा रीसाइक्लिंग के लिये भारत, चीन, घाना और नाइजीरिया जैसे विकासशील देशों को भेजा जाता है।
    • शामिल अधिकारियों की अनिच्छा: 
      • नगरपालिकाओं की गैर-भागीदारी सहित ई-अपशिष्ट प्रबंधन और निपटान के लिये ज़िम्मेदार विभिन्न प्राधिकरणों के बीच समन्वय का अभाव। 
    • सुरक्षा के निहितार्थ:
      • कंप्यूटरों में अक्सर संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी और बैंक खाते के विवरण आदि होते हैं, इस प्रकार की जानकरियों को रिमूव न किये जाने की स्थिति में धोखाधड़ी की संभावना रहती है। 

आगे की राह 

  • भारत में कई स्टार्टअप और कंपनियों द्वारा अब इलेक्ट्रॉनिक कचरे को इकट्ठा करने के साथ ही  रीसाइक्लिंग का कार्य शुरू किया गया है। हमें ऐसे बेहतर कार्यान्वयन पद्धतियों एवं समावेशन नीतियों की आवश्यकता है जो अनौपचारिक क्षेत्र को आगे बढ़ने के लिये आवास व मान्यता प्रदान करें तथा पर्यावरण की दृष्टि से रीसाइक्लिंग लक्ष्य को पूरा करने में हमारी सहायता करें।
  • साथ ही संग्रह दर को सफलतापूर्वक बढ़ाने के लिये उपभोक्ताओं सहित प्रत्येक भागीदार को शामिल करना आवश्यक है।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न:

प्रश्न. पुराने और प्रयुक्त कंप्यूटरों या उनके पुर्जों के असंगत/अव्यवस्थित निपटान के कारण निम्नलिखित में से कौन-से ई-अपशिष्ट के रूप में पर्यावरण में निर्मुक्त होते हैं?

1- बेरिलियम
2- कैडमियम
3- क्रोमियम
4- हेप्टाक्लोर
5- पारद
6- सीसा
7- प्लूटोनियम

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1, 3, 4, 6 और 7
(b) केवल 1, 2, 3, 5 और 6
(c) केवल 2, 4, 5 और 7
(d) 1, 2, 3, 4, 5, 6 और 7

उत्तर: (b) 

व्याख्या:

  • कंप्यूटर सिस्टम में ज़हरीले रसायन- सीसा, कैडमियम, मरकरी, बेरिलियम, ब्रोमिनेटेड फ्लेम रिटार्डेंट्स (बीएफआर), पॉलीविनाइल क्लोराइड और फास्फोरस यौगिक होते हैं। इनके अनुचित संचालन और दहन से हाइड्रोकार्बन मुक्त होता है जो जल निकायों को प्रदूषित करता है।
  • सर्किट बोर्ड में पाए जानी वाली धातुएँ कैडमियम, एंटीमनी, सीसा/लेड और क्रोमियम हैं। कई फोटोकॉपियर, स्कैनर तथा फैक्स मशीनों के स्विच एवं लैंप में पारा मौजूद होता है। मॉनिटर में लेड भी पाया जा सकता है। अत: 2, 3, 5 और 6 सही हैं।
  • कॉपर बेरिलियम मिश्र धातु का उपयोग "स्प्रिंग मेमोरी" प्रदान करने के लिये किया जाता है जो निरंतर, अबाधित विद्युत कनेक्शन सुनिश्चित करता है, जिसका अर्थ है उच्च प्रसंस्करण गति व व्यक्तिगत कंप्यूटर, राउटर तथा इंटरनेट के साथ-साथ रडार, एवियोनिक्स और रक्षा प्रणाली के लिये बेहतर प्रदर्शन। अत: 1 सही है।
  • प्लूटोनियम एक्टिनाइड परिवार का एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील सिंथेटिक तत्त्व है जो यूरेनियम अयस्कों में उपस्थित होता है और परमाणु विखंडन की प्रक्रिया से गुज़रने की क्षमता के कारण इसका उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में ईंधन के रूप में किया जाता है।
  • प्लूटोनियम के लगभग 15 समस्थानिक मौजूद हैं और ये सभी समस्थानिक रेडियोधर्मी हैं। इसका उपयोग कंप्यूटर या उनके पुर्जों में नहीं किया जाता है। अत: 7 सही नहीं है।
  • हेप्टाक्लोर एक ऑर्गेनोक्लोरिन (साइक्लोडीन) कीटनाशक है जिसे पहली बार वर्ष 1946 में तकनीकी क्लोर्डन से अलग किया गया था और इसका उपयोग मुख्य रूप से किसानों द्वारा बीज अनाज तथा फसलों पर कीटों को मारने के लिये किया जाता था, साथ ही घर के मालिकों द्वरा इसका उपयोग  दीमक को मारने/भगाने के लिये भी किया जाता था। अत: 4 सही नहीं है।

स्रोत: द हिंदू

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