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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

  • 06 Feb 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

मेन्स के लिये:

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिये गए आदेश के निहितार्थ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board- CPCB) ने 6 राज्यों के 14 थर्मल पावर प्लांटस (Thermal Power Plants) को बंद करने की चेतावनी दी है।

मुख्य बिंदु:

  • CPCB ने इन 14 थर्मल पॉवर प्लांट को यह चेतावनी सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 31 दिसंबर, 2019 की समयसीमा तक सीमित नहीं करने के संदर्भ में दी है।
  • इन थर्मल पॉवर प्लांट में हरियाणा के 5, पंजाब के 3, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के दो-दो संयत्र और तमिलनाडु का 1 संयत्र शामिल है।
  • इन 14 थर्मल पॉवर प्लांटस की कुल क्षमता लगभग 15 गीगावाट है।
  • थर्मल पावर प्लांट्स द्वारा नियमों का अनुपालन नहीं करने के संबंध में अप्रैल 2017 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण में एक याचिका दायर की गई थी।

पृष्ठभूमि:

  • केंद्र सरकार ने देश के 166,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने वाले 440 थर्मल प्लांट्स से पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन को सीमित करने के लिये दिसंबर 2022 तक का समय निर्धारित किया है।
  • दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित 11 प्लांट्स को 31 दिसंबर, 2019 तक उत्सर्जन को कम करने के लिये निर्देशों का पालन करना था क्योंकि इन संयत्रों के कारण न केवल दिल्ली शहर बल्कि गंगा के मैदानी क्षेत्र भी खराब वायु गुणवत्ता के शिकार हो रहे हैं।

CPCB का आदेश:

  • CPCB ने इन 14 प्लांट्स को इस महीने के अंत तक इस संबंध में जवाब देने के लिये कहा है कि उन्होंने मानदंडों का अनुपालन क्यों नहीं किया और उनके ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिये?
  • CPCB द्वारा दिये गए आदेश के जवाब में इन थर्मल प्लांट्स के प्रबंधन ने फ्लू-गैस डिसल्फराइजे़शन तकनीक (Flu-Gas Desulphurisation Technology) अपनाने को दावा किया था हालाँकि कुछ प्लांट्स के प्रबंधन का कहना था कि अभी उन्हें इस तकनीक को अपनाने के लिये टैंडर जारी करवाने हैं।
  • इनमें से केवल एक ही थर्मल प्लांट वास्तव में SO2 उत्सर्जन को सीमित करने के लिये प्रौद्योगिकी को लागू कर पाया है।

अन्य बिंदु:

  • CPCB को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) के प्रावधानों के तहत कठोर जुर्माना लगाने या इकाई को बंद करने की शक्ति है।
  • सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट (Centre for Science and Environment-CSE) के अनुमान के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियों से संबंधित मानदंडों को लागू करके वर्ष 2026-27 तक PM उत्सर्जन में लगभग 35%, NOx उत्सर्जन में लगभग 70% और SO2 उत्सर्जन को 85% से अधिक घटाया जा सकता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड:

(Central Pollution Control Board):

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन एक सांविधिक संगठन के रूप में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अंतर्गत सितंबर 1974 को किया गया।
  • इसके पश्चात् केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत शक्तियाँ व कार्य सौंपे गए।
  • यह बोर्ड पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को तकनीकी सेवाएँ भी उपलब्ध कराता है।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख कार्यों को जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत वर्णित किया गया है।

आगे की राह:

CPCB द्वारा उठाए गए इस कदम के साथ-साथ भारत में वायु प्रदूषण सहित अन्य सभी प्रकार के प्रदूषणों से स्थायी तौर पर राहत प्रदान करने वाले वाले उपायों को अपनाए जाने की आवश्यकता है। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने का काम केवल सरकार पर न छोड़कर इसमें प्रत्येक नागरिक को अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन करते हुए सहयोग देना होगा क्योंकि बिना जन-सहयोग के इसे नियंत्रित कर पाना संभव नहीं है।

स्रोत- द हिंदू

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