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DJB की बैठक में लिये गए महत्त्वपूर्ण फैसले

  • 30 May 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board-DJB) ने चंद्रावल में एक पेयजल उपचार संयंत्र (Drinking Water Treatment Plant) तथा ओखला में मल-जल उपचार संयंत्र (Sewage Treatment Plant) के निर्माण के साथ ही एक जल संग्रहालय (Water Museum) की स्थापना को मंज़ूरी दी है।

पेयजल उपचार संयंत्र (Drinking Water Treatment Plant)

प्रमुख बिंदु

  • इस संयंत्र के निर्माण में लगभग 598 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
  • लगभग तीन साल में पूरा होने वाले इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता 477 मिलियन लीटर प्रतिदिन (Millions of Liters Per Day-MLD) होगी।
  • यह संयंत्र कुल पेयजल उत्पादन क्षमता में 11% की वृद्धि करेगा।
  • DJB के अनुसार, नए संयंत्र से लगभग 22 लाख लोग लाभान्वित होंगे।

संयंत्र में उन्नत तकनीक का होगा प्रयोग

संयंत्र का निर्बाध कार्य सुनिश्चित करने के लिये ओज़ोनेशन (Ozonation) और एक्टिवेटेड कार्बन की उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह पानी में 4 PPM (Parts Per Million) की सीमा तक उच्च अमोनिया का शोधन करने में सक्षम होगा जो वर्तमान संयंत्र की अमोनिया शोधन क्षमता (0.8 PPM) का पाँच गुना है।

pollution

  • ओज़ोन में कीटाणुशोधन (Disinfection) प्रभाव क्लोरीनीकरण (Chlorination) की तुलना में अधिक होता है। इसके अलावा इसके ऑक्सीकारक गुण लौह (Iron), मैंगनीज़ (Manganese), सल्फर (Sulfur) की सांद्रता को भी कम कर सकते हैं और स्वाद एवं गंध की समस्याओं को हल कर सकते हैं।

जल संग्रहालय (Water Museum)

  • दिल्ली जल बोर्ड ने 12 करोड़ रुपए की लागत से किलोकरी में एक जल संग्रहालय, प्रशिक्षण केंद्र और एक जल निकाय (Waterbody) के निर्माण को भी मंज़ूरी दी है।
  • इसमें स्कूली बच्चों, पेशेवरों, रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), गैर सरकारी संगठनों (NGO) और जनता के लिये जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार, जल संरक्षण और झीलों के कायाकल्प और भूजल पुनर्भरण हेतु एक समर्पित प्रशिक्षण केंद्र भी होगा।

मल-जल उपचार संयंत्र (Sewage Treatment Plant)

दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड  द्वारा इस परियोजना को मंज़ूरी देने का उद्देश्य यमुना को प्रदूषणमुक्त करना है।

  • यह मल-जल उपचार संयंत्र (STP) देश में सबसे बड़ा तथा विश्व के कुछ सबसे बड़े STP में से एक होगा।
  • इस संयंत्र के निर्माण पर लगभग 1161 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
  • इसका निर्माण यमुना एक्शन प्लान-3 के तहत किया जाएगा।
  • संयंत्र प्रतिदिन 124 मिलियन गैलन अपशिष्ट जल का उपचार करने में सक्षम होगा।
  • नया संयंत्र यमुना से प्रतिदिन लगभग 41,200 किलोग्राम जैविक प्रदूषक भार (Organic Polluted Load) और 61,600 किलोग्राम ठोस भार (Solid Load) को हटाने का कार्य करेगा।
  • यह संयंत्र यमुना नदी से गंदगी कम करने, नदी के जल में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (Biochemical Oxygen Demand-BOD) की मात्रा को बेहतर करने के साथ ही कुल निलंबित ठोस (Total Suspended Solids-TSS) के स्तर में भी सुधार करेगा।
  • यह संयंत्र पूरी तरह से स्वचालित होगा।
  • इस संयंत्र से न केवल मल-जल का शोधन/उपचार किया जाएगा, बल्कि कीचड़ का भी निस्तारण किया जाएगा।

स्रोत: द हिंदू एवं इकोनॉमिक टाइम्स

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