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COVID- 19: स्वास्थ्य कर्मियों के लिये निवारक दवा को मंज़ूरी

  • 24 Mar 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

हाइड्रॉक्सिल क्लोरोक्वीन, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, USFDA

मेन्स के लिये:

भारत में दवा एवं औषधि विनियमन 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Medical Research’s- ICMR) की राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने ‘SARS-CoV-2’ (Severe Acute Respiratory Syndrome Coronavirus 2) संक्रमण के उच्च जोखिम वाली आबादी के लिये प्रोफिलैक्सिस (Prophylaxis) के रूप में ‘हाइड्रॉक्सिल क्लोरोक्विनॉन’ (Hydroxyl Chloroquine) का उपयोग करने की सिफारिश की है।

मुख्य बिंदु:

  • नेशनल टास्क फोर्स (National Task Force) द्वारा अनुशंसित प्रोटोकॉल को भारत के ‘ड्रग्स कंट्रोलर जनरल’ (Drug Controller General of India- DCGI) द्वारा आपातकालीन स्थितियों में प्रतिबंधित रूप से उपयोग (Restricted Use) करने की अनुमति प्रदान की गई है।
  • ICMR इस दवा का उपयोग COVID-19 के संदिग्ध या पुष्ट मामलों की देखभाल में शामिल एसिम्पटोमेटिक (Asymptomatic- जिनमें अभी बीमारी के लक्षण प्रकट नहीं हुए हैं) वाले स्वास्थ्य तथा प्रयोगशाला कर्मियों पर करने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है।
  • ICMR के अनुसार जिन मेडिकल किट्स के निर्माण के लिये अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US Food and Drug Administration- USFDA) के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है, उन्हें ICMR के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी,’ पुणे (National Institute of Virology, Pune) के अनुमोदन की आवश्यकता होगी। 

भारत में प्रमुख दवा एवं औषध विनियमन निकाय:

  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organization- CDSCO): 
    • CDSCO, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य महानिदेशालय के तहत भारत सरकार का राष्ट्रीय नियामकीय प्राधिकरण (National Regulatory Authority- NRA) है, जिसके निम्नलिखित कार्य हैं-
    • देश में औषधि, प्रसाधनों, नैदानिकी एवं उपकरणों की सुरक्षा, प्रभावकारिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये मानदंड व उपाय निर्धारित करना। 
    • नई औषधियों के बाज़ार अनुमोदन और नैदानिक परीक्षण मानकों को नियंत्रित करना। 
    • आयात होने वाली औषधियों की निगरानी करना एवं उपरोक्त उत्पादों के निर्माण के लिये लाइसेंस की मंज़ूरी देना।
  • राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority- NPPA):
    • NPPA का गठन 29 अगस्त, 1997 को रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल विभाग के संलग्न कार्यालय के रूप में की गई थी। 
    • विनियंत्रित थोक औषधियों व फॉर्मूलों का मूल्य निर्धारित व संशोधित करना। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप औषधियों के समावेशन व बहिर्वेशन के माध्यम से समय-समय पर मूल्य नियंत्रण सूची को अद्यतन करना। 
    • दवा कंपनियों के उत्पादन, आयात-निर्यात और बाज़ार हिस्सेदारी से जुड़े डेटा का रखरखाव। दवाओं के मूल्य निर्धारण से संबंधित मुद्दों पर संसद को सूचनाएँ प्रेषित करने के साथ-साथ दवाओं की उपलब्धता का अनुपालन व निगरानी करना।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत औषधि मूल्य नियंत्रण:

  • भारत सरकार दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (Drug Price Control Orders- DPCO) तथा NPAA के माध्यम से आवश्यक औषधियों का मूल्य नियमन करती है। 
  • इस दिशा में अनिवार्य औषधियों की राष्ट्रीय सूची स्वास्थ्य एवं  परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा तैयार की जाती है, जिसे भारत में स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिये अनिवार्य माना जाता है।
  • आर्थिक समीक्षा के अनुसार पूर्व स्थापित धारणा के विपरीत, नियमित औषधियों के मूल्य में अनियमित औषधियों के मूल्य की तुलना अधिक वृद्धि हुई है। 

आर्थिक समीक्षा ने आवश्यक वस्तु अधिनियम को निरस्त कर बाजार अनुकूल उपायों, यथा- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, बाजार का एकीकरण आदि की वकालत की है। 

यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (Food and Drug Administration- FDA) ने वर्ष 2008 में भारत में अपना कार्यालय खोला, ताकि वह यह सुनिश्चित कर सके कि भारत से अमेरिका को निर्यात किये जाने वाले खाद्य और चिकित्सा उत्पाद सुरक्षित, अच्छी गुणवत्ता वाले एवं प्रभावी हैं।
  • भारत में FDA की गतिविधियों में शामिल हैं-
    • ऐसे चिकित्सा उत्पादों एवं खाद्य पदार्थों के निरीक्षण का संचालन करना जो यू.एस. को निर्यात किये जाते हैं।
    • एक दूसरे पर विश्वास बहाली तथा गुणवत्ता मानकों को विकसित करने के लिये भारतीय नियामक अधिकारियों के साथ जुड़ना।
    • द्विपक्षीय पहलों के माध्यम से भारतीय समकक्ष एजेंसियों के साथ साझेदारी करना। 

स्रोत: द हिंदू

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