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एडिटोरियल

  • 18 Mar, 2020
  • 14 min read
शासन व्यवस्था

महिला पुलिस का प्रतिनिधित्व: विचारणीय तथ्य

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में महिला पुलिस के प्रतिनिधित्व और उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

देश में कानून व्यवस्था लागू करवाने और अमन-चैन को बनाए रखने के लिये पुलिस की भूमिका बेहद अहम होती है। दुर्भाग्य यह है कि जब आपका और हमारा सामना पुलिस से होता है तो ज़्यादातर लोग पुलिस की कार्यशैली और उसके व्यवहार पर सवाल खड़े करते हैं या फिर संतुष्ट नज़र नहीं आते हैं। पुलिस की इसी कार्यशैली और व्यवहार को संवेदनशील व जन अनुकूल बनाने के लिये पुलिस विभाग में महिला कर्मियों की अधिक से अधिक नियुक्ति करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में कार्य करते हुए सरकार ने वर्ष 2009 में केंद्रीय पुलिस बल व राज्य पुलिस बल में स्वीकृत कुल पदों में 33% पद महिला पुलिस कर्मियों द्वारा भरे जाने का निर्देश दिया। आज हम देख रहे हैं कि महिलाएँ प्रत्येक क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, परंतु पुरुष प्रतिनिधित्व वाले पुलिस बल में वर्ष 2019 तक 10% से भी कम महिला पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की गई है। आशाजनक बात यह है कि सात राज्यों तमिलनाडु, बिहार, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और सिक्किम में महिला पुलिस कर्मियों का प्रतिनिधित्व 10% से अधिक है।

पुलिस विभाग में महिला पुलिस कर्मियों की संख्या में वृद्धि नि:संदेह पुलिस सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस आलेख में महिला पुलिस कर्मियों की भूमिका को केंद्र में रखते हुए पुलिस सुधार की आवश्यकता व सरकार द्वारा इस संबंध में किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा की जाएगी।

पुलिस व्यवस्था से तात्पर्य

  • पुलिस बल राज्य द्वारा गठित आधिकारिक व्यक्तियों का एक निकाय है, जो राज्य द्वारा निर्मित कानूनों को लागू करने, संपत्ति की रक्षा और नागरिक अव्यवस्था को सीमित रखने का कार्य करता है
  • पुलिस को प्रदान की गई शक्तियों में बल का वैध उपयोग भी शामिल है। पुलिस बल को राज्य की रक्षा में शामिल सैन्य या अन्य संगठनों से अलग बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि वर्तमान समय में पुलिस व्यवस्था अपना उदात्त स्वरूप खो चुकी है।

पुलिस सुधार महिलाओं के अनुकूल आवश्यक क्यों?

  • महिला पुलिसकर्मियों को मुख्य रूप से महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से निपटने के लिये नियुक्त किया जाता है। इसके साथ ही इन्हें महिला कैदियों से जुड़े दायित्वों के लिये नियुक्त करने की अवधारणा भी इनके हितों के विरुद्ध काम करती है क्योंकि यह उन्हें पुलिसिंग के मुख्य कार्यों से अलग करती है।
  • महिला पुलिसकर्मियों के लिये अलग शौचालयों की व्यवस्था न होना, महिलाओं के लिये पृथक आरामगृह की कमी, महिलाओं के लिये अलग आवास और अन्य सुविधाओं एवं बच्चे की देखभाल की उचित व्यवस्था का अभाव आदि के कारण पुलिस विभाग निरंतर और व्यापक रूप से लैंगिक पूर्वाग्रह के साथ-साथ लैंगिक उदासीनता से भी ग्रस्त है।
  • वर्तमान आँकड़ों से पता चलता है कि पुलिस में ज्यादातर महिलाएँ निचले पायदान पर कार्यरत हैं जो मुख्य कार्यकारी पदों पर महिलाओं की कमी को दर्शाता है।
  • महिलाओं की तैनाती के निर्णय लैंगिक रूढ़िवाद से युक्त हैं जो महिलाओं को अग्रणी भूमिका निभाने से रोकते हैं। यह पूर्वाग्रह केवल पुरुष सहकर्मियों तक ही सीमित नहीं है अपितु कभी-कभी वरिष्ठ महिला अधिकारी भी उन्हें कमज़ोर, काम करने के कम इच्छुक और कम कठोर मानती हैं।
  • महिलाओं को शारीरिक रूप से कम दुष्कर या डेस्क ड्यूटी के कार्य स्थानांतरित कर अथवा केवल महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर कार्यवाही के लिये नियुक्त कर उन्हें दरकिनार करने की प्रवृत्ति परिलक्षित होती है।
  • किसी भी प्रगतिशील और आधुनिक पुलिस एजेंसी में सभी स्तरों पर महिलाओं का निम्न प्रतिनिधित्व कानून प्रवर्तन एजेंसियों की संस्कृति और परिचालन दक्षता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है विशेष रूप से उस समुदाय या देश में जहाँ यह व्यापक स्तर पर है।

पुलिस विभाग में महिलाओं की स्थिति

  • भारत में राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस बलों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है परंतु यह पुलिस विभाग की कुल संख्या बल का केवल 7% तक सीमित है।
  • राज्य पुलिस विभाग में महिलाओं की नियुक्ति के लिये आरक्षण की व्यवस्था अपनाते हैं, जो पर्याप्त नहीं है क्योंकि विभाग में सृजित सभी स्तर के पदों के लिये यह व्यवस्था प्रयोग में नहीं लाई जाती है।
  • केरल व कर्नाटक जैसे राज्यों में आरक्षण की व्यवस्था केवल कांस्टेबल के पद तक तो वहीं आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और झारखंड में यह कांस्टेबल और उपनिरीक्षक के पद तक सीमित है।
  • इसके साथ ही प्रत्येक राज्य में बहुत कम महिलाएँ राजपत्रित अधिकारी की रैंक पर नियुक्त हैं।
  • राज्यों के मध्य व्यापक रूप से भिन्नता है जिसमें तमिलनाडु पुलिस बल में 12 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जबकि असम में यह 1 प्रतिशत से भी कम है। यह स्थिति इस तथ्य के बावजूद बनी हुई है जब 12 राज्यों के पुलिस बल में महिलाओं के लिये 30% या अधिक का आरक्षण निर्धारित करने वाले नियम वर्षों से हैं।
  • भारतीय पुलिस में महिलाओं की भागीदारी 70 के दशक की शुरुआत में प्रारंभ हुई जब महिलाएँ सुरक्षा बलों में शामिल होने लगीं। उस दशक के दौरान हजारों महिलाएँ कांस्टेबल से लेकर उच्चाधिकारी रैंक तक सभी स्तरों पर सुरक्षा बलों में नियुक्त हुईं।
  • पिछले दशक में भारत में पुलिस बलों द्वारा महिलाओं की एक अच्छी संख्या में भर्ती की गई है लेकिन व्यावसायिक परिधि के भीतर महिलाओं को पुरुषों के ‘समान भागीदार’ के रूप में स्वीकार्यता और आत्मसात करने की दिशा में वांछित कार्य नहीं किये गए हैं।
  • यदि इसी दर से पुलिस विभाग में महिला पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की जाती रही तो गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित 33% के लक्ष्य को प्राप्त करने में 50 वर्ष से भी अधिक समय लग जाएगा।

पुलिस विभाग में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने हेतु उपाय

  • भौगोलिक व क्षेत्रीय विविधता को सुनिश्चित करने के लिये पुलिस/ सुरक्षा विभाग को प्रत्येक ज़िले में विशेष भर्ती अभियान चलाना चाहिये जिसमें महिलाओं के न्यूनतम 33 प्रतिशत स्थान का आरक्षित होना आवश्यक है।
  • वर्ष 2013 में गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक थाने में तीन महिला पुलिस उप निरीक्षकों की नियुक्ति जाँच अधिकारी के रूप में करना आवश्यक है।
  • पुलिस को मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से महिलाओं के लिये पुलिस विभाग में उपलब्ध अवसरों के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिये।
  • पुलिस में महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों के साथ प्रत्येक प्रकार से समानता बनाए रखने के लिये आवश्यक प्रशिक्षण, समर्थन और विश्वास प्राप्त करना चाहिये।
  • एक सामान्य लैंगिक-तटस्थ कैडर को सभी रैंकों के लिये बनाने की आवश्यकता है जिससे उन्नति के अवसर समान रूप से उपलब्ध हों।
  • परामर्श के लिये संसाधन केंद्र, अवसरों और संभावनाओं के बारे में जागरूकता फैलाना, कॅरियर योजना और प्रशिक्षण तथा कार्यस्थल पर चुनौतियों का सामना करने में मदद करना आवश्यक है।
  • महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिये प्रशिक्षण की कमी और सामान्य रूप से पुलिस बल के संवेदीकरण हेतु महिला पुलिस कर्मियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है इसलिये उन्हें केवल महिला अपराधों से निपटने तक ही सीमित नहीं होना चाहिये।
  • अधिकांश राज्य पुलिस विभागों ने महिलाओं के लिये अलग शौचालय और चेंजिंग रूम उपलब्ध कराने, सभी पुलिस स्टेशनों और इकाइयों में महिलाओं के लिये संलग्न शौचालय युक्त अलग आवास बनाने हेतु राज्य पुलिस बल आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत धन प्राप्त किया है। पुलिस विभागों को इस कोष का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना चाहिये।
  • महिलाओं की कुछ विशेष आवश्यकताएँ होती हैं जैसे गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद की स्थिति, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। उन्हें गैर-कार्यकारी पोस्टिंग के लिये नहीं हटाया जाना चाहिये। पुलिस बल को अधिक महिलाओं को क्षेत्र में नियुक्त करने के लिये प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय शोध से पता चलता है कि महिला पुलिस और प्रवर्तन अधिकारी एक अलग स्त्री सुलभ पुलिसिंग शैली का उपयोग करते हैं जैसे- शारीरिक बल प्रयोग पर कम निर्भरता और संचार कौशल पर अधिक जोर। इस शैली को अपनाने से संभावित हिंसक या संघर्ष की स्थितियों को नियंत्रित करने की संभावना बढ़ जाती है।
  • महिला पुलिस माॅडल का निर्माण महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

महिला पुलिस माॅडल

  • संगठन में बेहद अहम भूमिका रखने वाली महिला पुलिस कर्मियों को पुलिस सुधार की मुख्यधारा में लाने का एक तरीका ‘महिला पुलिस मॉडल’ नीति विकसित करना है जो इस संस्था में गहरी जड़ें ज़मा चुके पितृसत्तात्मक वर्चस्व को चुनौती देगा।
  • मॉडल नीति में यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि महिलाओं की तैनाती पर निर्णय लिंग रूढ़िता से मुक्त हो, ताकि महिलाओं को अग्रणी, मुख्य एवं नेतृत्वकारी भूमिका में लाया जा सके।
  • महिला पुलिस मॉडल के द्वारा पुलिस विभाग के प्रत्येक स्तर पर लैंगिक समानता लाने हेतु महिला पुलिस कर्मियों के लिये कार्य के समान अवसर सृजित करने का प्रयास किया जाएगा।
  • माॅडल नीति के अंतर्गत पुलिस विभाग को महिलाओं के लिये सुरक्षित कार्य स्थान सुनिश्चित करना होगा। साथ ही विभाग से यह अपेक्षा की जाती है कि महिलाओं के लिये पुलिसिंग को एक व्यवहार्य कैरियर विकल्प बनाने के लिये भेदभाव और उत्पीड़न के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनानी चाहिये।

आगे की राह

  • विभाग को कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का कड़ाई से पालन करना चाहिये।
  • पुलिस बल में महिलाओं का एकीकरण करना भारत में पुलिस सुधार की प्रक्रिया का एक अनिवार्य घटक होना चाहिये जिससे वे परिवर्तन के अग्रदूत बन सकें।

प्रश्न- ‘भारत में बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था का सपना महिला पुलिस कर्मियों के बिना एक कोरी कल्पना है।’ विश्लेषण कीजिये।


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