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नए पैटर्न्स और सिलेबस: UPSC परीक्षा के नवीनतम बदलावों का सामना कैसे करें?

हर युवा कम से कम उम्र में एक ऐसा स्थायी करियर बनाना चाहता है, जिसमें बेहतर ज़िंदगी जीने हेतु न सिर्फ संतोषजनक सैलरी हो, बल्कि अपने कार्यक्षेत्र के माध्यम से वह समाज के लिए कुछ रचनात्मक कार्य भी कर सके। अपने कार्य और विचारों के माध्यम से समाज के ज़रूरतमंद व परेशान लोगों के जीवन में कुछ सुधार ला सके। ऐसे में सिविल सेवा उन्हें एक बेहतर करियर के रूप में दिखाई देता है। किंतु सिविल सेवा में जाने का मार्ग इतना आसान भी नहीं होता है। जिस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए लाखों की संख्या में अभ्यर्थी हर वर्ष आवेदन करते हों और रिक्तियों की संख्या कुछ सौ मात्र होती हो, उसमें करियर बनाने के लिए चयनित होने के मार्ग में कितनी मेहनत की ज़रूरत होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

केंद्रीय स्तर पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी-सीएसई) द्वारा आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा की सबसे खास बात यह भी है कि यूपीएससी अपनी नब्ज़ किसी को पकड़ने नहीं देता। हर वर्ष प्रारंभिक परीक्षा बीतने के बाद परीक्षार्थियों के होश उड़े-उड़े रहते हैं। क्योंकि हर बार यूपीएससी प्रश्नों को कुछ इस तरह से घुमा-फिराकर पूछ लेता है कि अभ्यर्थी चौंक जाते हैं। किसी भी अभ्यर्थी ने कितनी भी अच्छी तैयारी की हो, वह परीक्षा से पहले कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं होता है। यही वजह है कि प्रतियोगी युवाओं की दुनिया में यूपीएससी का फुल फॉर्म “यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन” की जगह कभी-कभी “अन-प्रेडिक्टेबल सर्विस कमीशन” भी कह दिया जाता है।

ऐसे में प्रतियोगी विद्यार्थियों के लिए यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में बदलावों और प्रश्नों की प्रकृति को समझकर सफल हो पाना हमेशा से एक कड़ी चुनौती रही है। परीक्षार्थियों की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए हम यहाँ कुछ ऐसी टिप्स लेकर आए हैं, जिससे न सिर्फ़ आपको इस परीक्षा को समझने में मदद मिल सकती है बल्कि इसकी तैयारी करने में भी आप भटकने से बच सकते हैं।

यूपीएससी की तैयारी के शुरुआती चरण में सबसे पहले दिन जो सबसे पहला काम आपको करना चाहिए, वह यह है कि आप किसी कोचिंग अथवा यूपीएससी की वेबसाइट से यूपीएससी सीएसई परीक्षा के अपडेटेड सिलैबस का प्रिंट आउट निकलवा लें। ध्यान रहे कि यह सबसे पहला काम है, जो आपको करना है। अगर सिलैबस ब्रीफ में लेने की बजाय सभी विषयों के एक-एक माइक्रो टॉपिक्स का संकलन ले लें तो यह सर्वोत्तम होगा। यह मार्केट में आसानी से उपलब्ध है। इसके साथ ही आप प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में पूर्व वर्षों में पूछे गये प्रश्नों के संकलन (प्रीवियस ईयर्स क्विश्चिन पेपर्स) की कोई किताब भी खरीद लें। आप हड़बड़ी में आँख मूंदकर तैयारी शुरु करने की बजाय इत्मिनान से कम-से-कम एक हफ्ते का समय सिलैबस व प्रश्नों की प्रकृति को समझने में दें।

सिलैबस देखकर पढ़ने के लिए टॉपिक्स की सीमाएँ निर्धारित करें:

इस दौरान आप सिलैबस के एक-एक माइक्रो टॉपिक्स को अच्छे से ध्यान में रख लें। इससे आपको यह अंदाज़ा हो जाएगा कि तैयारी के दौरान कौन-सी चीज़ आपके काम की है और कौन-सी नहीं। हमेशा ध्यान रखें कि तैयारी के दौरान, “क्या पढ़ना है?” से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण होता है, “क्या नहीं पढ़ना है!” क्योंकि किसी भी विषय में ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है। इसलिए आपको किसी भी विषय को केवल उतना ही पढ़ना है, जितना यूपीएससी आपसे अपेक्षा करता है। और ध्यान रहे, यूपीएससी किसी भी विषय के किसी भी टॉपिक या किसी भी सबटॉपिक में एक सफल प्रतियोगी से विषय विशेषज्ञता की अपेक्षा बिल्कुल भी नहीं करता है। इसकी बजाय यूपीएससी आपसे केवल “सामान्य ज्ञान” की अपेक्षा ही करता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हर वर्ष कुछ प्रश्न ऐसे भी होते हैं, जिनके जवाब विषय विशेषज्ञ भी दे पाने में एक बार चकरा जाएं किंतु ऐसे प्रश्न एक, दो या तीन जैसी संख्या मात्र में ही होते हैं। इसलिए उस पक्ष को ध्यान में रखकर विषय विशेषज्ञ बनने से बचें। यूपीएससी की मेरिट आमतौर पर 50 प्रतिशत के इर्दगिर्द ही रह जाती है। इसलिए किसी भी विषय को बहुत गहराई में जाकर रिसर्च करने की गलती ना करें। वह ज्ञान आपकी परीक्षा में आपकी सफलता के लिहाज़ से न सिर्फ़ अनुत्पादक होगा बल्कि आप बेवजह समय भी खर्च करेंगे। इसलिए बहुत ज़्यादा अनुत्पादक अध्ययन से भी बचें। ध्यान रहे कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है। किसी एक विषय के किसी एक टॉपिक के किसी एक सब-टॉपिक मात्र पर रिसर्च करने में लोगों के कई वर्ष गुज़र जाते हैं। फिर आपको तो ढेरों विषय पढ़ने हैं। इसलिए केवल उतना ही पढ़ें जितना आवश्यक है। क्योंकि आपका लक्ष्य परीक्षा पास करके नौकरी और ज़िम्मेदारी हासिल करना है।

सभी विषयों के प्रत्येक टॉपिक व सब-टॉपिक पर समझ विकसित करें :

हमेशा ध्यान रखें कि भले ही यूपीएससी हर साल प्रश्नों की प्रकृति बदलकर चौका देता है लेकिन वो प्रश्न कभी भी सिलैबस से बाहर के नहीं होते हैं। वो हमेशा सिलैबस से ही संबंधित होते हैं। इसका सीधा तात्पर्य है कि अगर आप सिलैबस को बारीकी से समझे हैं और विषयों के टॉपिक्स व सब-टॉपिक्स पर आपकी अच्छी समझ विकसित है तो फिर आप यूपीएससी के बदलते पैटर्न का सामना बहुत आसानी से कर लेंगे। इसलिए किसी भी विषय के किसी भी टॉपिक को पढ़ते समय उस पर अपनी समझ विकसित करें। इसके लिए आप इंटरनेट समेत एनीमेशन वीडियोज का भी सहारा ले सकते हैं।

करेंट से रहें अपडेट :

सिलैबस को अच्छे से समझ लेने और स्टडी मैटेरियल्स का चयन कर लेने के बाद अब करेंट अफेयर्स की ओर भी धीरे-धीरे फोकस करना शुरू करें। करेंट अफेयर्स को पढ़ते समय इस बात का ध्यान रखें कि स्टेट पीसीएस की तरह यूपीएससी करेंट अफेयर्स से डायरेक्ट प्रश्न पूछने की बजाय उससे जुड़ी हुई दूसरी चीज़े पूछ लेता है। प्रतियोगी यहीं पर धोखा खा जाते हैं। उन्हें लगता है कि हमने तो करेंट अफेयर्स को अच्छे से पढ़ा था किंतु प्रश्न उसमें से नहीं आया। इसकी वज़ह यही है कि यूपीएससी डायरेक्ट करेंट अफेयर्स से जुड़ी बातें पूछने की बजाय उनसे जुड़ी अन्य चीज़ें भी घुमा-फिराकर पूछ लेता है। उदाहरण के लिए, रूस-यूक्रेन युद्ध अथवा डोकलाम विवाद या फिर जी-20 शिखर सम्मेलन जैसे करेंट अफेयर्स को पढ़ते समय केवल उन घटनाओं मात्र को ही न पढ़ें बल्कि उन घटनाओं के पीछे की पूरी पृष्ठभूमि की सुलझी हुई समझ व जानकारी रखें। भ्रम या अधूरी जानकारी से बचें। इसी तरह से अगर यूक्रेन या फिर नामिबियाई चीते करेंट अफयेर्स में रहे हैं तो फिर केवल उतनी ही जानकारी रखने की बजाय यूक्रेन की भौैगोलिक, राजनीतिक, आर्थिक, सीमा विवादों समेत सैन्य संगठन की जानकारी भी हासिल कर लें। इसी क्रम में नामीबिया के चीतों को भारत में लाए जाने के अलावा भारत में चीतों के इतिहास, वन्य अभ्यारण समेत उन सारी प्रजातियों की जानकारी से अपडेट होते जाएँ, जो भारत में संकटग्रस्त, गंभीर रूप से संकटग्रस्त अथवा सुभेद्य श्रेणी में आती हैं। साथ ही साथ भारत में पशु-पक्षियों के संरक्षण समेत इतिहास में घटी इस तरह की सभी घटनाओं को पढ़कर साथ में नोट्स बनाते चलें। इसके लिए आप इंटरनेट या किसी कोचिंग के नोट्स की मदद ले सकते हैं।

अभ्यास करते रहें :

“प्रैक्टिस मेक्स ए मैन परफेक्ट” यह सर्वकालीन सत्य बात है। इस बात का ख़्याल रखें कि आप कितना भी पढ़ लें, अगर उन्हें अभ्यास में नहीं लाएँगे तो न सिर्फ आप इग्ज़ाम में बेहतर परफॉर्म करने से चूक जाएँगे बल्कि पढ़ी हुई चीज़ें भी आप भूल जाएँगे। इसलिए कोचिंग करने अथवा सेल्फ स्टडी के दौरान मैटेरियल्स जैसे-जैसे पढ़ते जाएँ, उनसे संबंधित टेस्ट सीरीज़ अथवा प्रीवियस ईयर्स क्विश्चन पेपर्स हल करते चलें। इससे आपको अपनी तैयारी की दशा और स्तर का अंदाज़ा होता जाएगा। साथ ही आपको अपने कमज़ोर पक्ष भी पता चलते जाएँगे। इसी तरह से थोड़ा-थोड़ा करके मेंस की आंसर राइटिंग का भी अभ्यास करते रहना आवश्यक है।

मेंस आंसर राइटिंग कैसे करें:

मेंस की आंसर राइटिंग के लिए चार चीज़ों की ज़रूरत होती है, पहली- विषय की स्पष्ट समझ, दूसरी- प्रभावशाली भाषा, तीसरी- प्रामाणिक तथ्य और चौथा- समय का प्रबंधन। अर्थात आपका उत्तर लिखने का अभ्यास सुलझी हुई स्पष्ट समझ के साथ अच्छी भाषा में, उपयुक्त तथ्यों के साथ तय समय सीमा में होना चाहिए। विषय की समझ के लिए न सिर्फ सभी विषयों की बेसिक्स को अच्छे से क्लीयर करते चलें बल्कि समसामयिक दौर में उनका महत्त्व भी आपको पता होना चाहिए। इसके साथ में उत्तर पुस्तिका में प्रासंगिक और प्रमाणिक तथ्यों के माध्यम से अपने उत्तर को स्कोरिंग बना सकते हैं। बिना प्रमाणिक व प्रासंगिक तथ्यों के आपका उत्तर हल्का रहेगा।

बेसिक्स क्लीयर करने के लिए अध्ययन सामग्री कौन सी उपयुक्त होगी?

इसके लिए एनसीईआरटी की किताबें बहुत उपयोगी हो सकती हैं। खासतौर से एनसीईआरटी की ग्यारहवीं की विजुअल आर्ट, भूगोल की कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक की किताब, अर्थव्यवस्था की 9वीं व 10वीं की किताब आपके लिए काफी उपयोगी हो सकती है। इन किताबों के अलावा आप इतिहास, राजनीति, संविधान, पर्यावरण व अर्थव्यवस्था के लिए किसी अच्छी कोचिंग के मार्गदर्शन अथवा किसी स्टैंडर्ड बुक को अच्छे से पढ़ सकते हैं। इनसे आपकी अच्छी समझ विकसित हो पायेगी।

उत्तर लेखन में प्रामाणिक तथ्यों का स्रोत क्या है?

इसके लिए आप विषय से जुड़े आँकड़े जारी करने वाली संस्थाओं ( जैसे -एनएसएसओ, नीति आयोग, निर्वाचन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय, गृह मंत्रालय, संसदीय समितियाँ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापार संगठन, सिप्री, कैग की रिपोर्ट, संयुक्त राष्ट्र इत्यादि तमाम) भारत सरकार व वैश्विक स्तर के संगठनों, संस्थाओं तथा भारत के संवैधानिक व गैर-संवैधानिक निकायों की वेबसाइट्स, उनकी रिपोर्ट इत्यादि के आँकड़े मेंशन कर सकते हैं। ये आँकड़े विश्वसनीय और प्रामाणिक होते हैं। इसके अलावा आप किसी अच्छी मासिक पत्रिका का भी नियमित अध्ययन करते रहें। उनमें सभी संस्थाओं द्वारा जारी रिपोर्ट्स समय-समय पर आती रहती हैं। आप नोट्स बनाते समय उनका बिंदुवार संकलन करके स्टडी टेबल पर चिपकाकर उन्हें स्मरण में रख सकते हैं।

अगर आप इतना करते हैं और समय-समय पर टेस्ट सीरीज़ देते रहते हैं तो इस परीक्षा से संबंधित सभी पेपर्स के सभी सेक्शन्स की न सिर्फ आपकी तैयारी अच्छी-खासी हो जाएगी बल्कि धीरे-धीरे आपके भीतर खुद भी आत्मविश्वास भर जाएगा। एक महत्त्वपूर्ण बात पर विशेष ध्यान दें कि बड़े युद्ध की तैयारियाँ कभी भी पूरी नहीं हो पातीं। अपने मानकों पर कुछ-न-कुछ कसर रह ही जाती है। इसलिए उन्हें ध्यान में रखकर आत्मविश्वास कमज़ोर न करें। आप ही की तरह किसी भी मेधावी से भी मेधावी विद्यार्थी की तैयारी उसके मानकों पर कभी शतप्रतिशत पूरी नहीं हो पाती है और न ही ऐसी किसी परीक्षा की मेरिट 80%, 90% या 99% जैसी छलांग लगाती है। इसलिए आत्मविश्वास बनाए रखें और खुद को प्रेरित रखें। साथ ही जो भी पढ़ें, उन्हें ठीक से पढ़ें। अच्छी समझ विकसित करें। ऐसी परीक्षाओं के लिए निरंतरता, धैर्य और आत्मविश्वास की भी बहुत ज़रूरत होती है। इसलिए खुद पर आत्मविश्वास बनाए रखें और थोड़ा-थाड़ा ही सही किंतु निरंतर अध्ययन व अभ्यास के माध्यम से अपनी तैयारी को उत्थान पर ले जाते रहें। धीरे-धीरे आपको आभास होने लगेगा कि आप सफलता के काफी नज़दीक पहुँच रहे हैं और फिर आप खुद ही खुद को प्रेरित करने लायक हो जाएंगे और आत्मविश्वासी भी महसूस करेंगे।

  अजय सिंह  

अजय सिंह आईआईएमसी, नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। वर्तमान में सिविल सर्विसेज परीक्षा के प्रतियोगी छात्र हैं।

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