उत्तराखंड Switch to English
उत्तराखंड में लॉन्च किया गया 'प्रज्ञानम्' AI चैटबॉट
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने लोक भवन, देहरादून में श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 'प्रज्ञानम्' AI चैटबॉट लॉन्च किया।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: ‘प्रज्ञानम्’ एक AI-आधारित चैटबॉट है, जिसे भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिये विकसित किया गया है।
- यह प्लेटफॉर्म वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, दर्शन, गणित और पारंपरिक विज्ञान सहित भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न स्रोतों से सामग्री ग्रहण करता है।
- लॉन्च: इस चैटबॉट को 25 मार्च, 2026 को देहरादून के लोक भवन में लॉन्च किया गया।
- विकासकर्त्ता: इसे ‘वन यूनिवर्सिटी–वन रिसर्च’ पहल के अंतर्गत श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
- उद्देश्य:
- छात्रों, शोधकर्त्ताओं और आम जनता को भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली तक आसान पहुँच प्रदान करना।
- डिजिटल माध्यमों के ज़रिये युवा पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से जोड़ना।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण: यह चैटबॉट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल डाटाबेस को एकीकृत कर उपयोगकर्त्ताओं के प्रश्नों के सटीक उत्तर प्रदान करता है।
- NEP के अनुरूप: यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को आधुनिक शिक्षा में समाहित करने पर बल देती है।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
विश्व की सबसे बड़ी और भारत की पहली डिजिटल जनगणना शुरू
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने जनगणना 2027 के चरण-I — हाउसलिस्टिंग एवं आवास जनगणना (HLO) की शुरुआत कर दी है, जो डिजिटल डेटा संग्रहण और स्व-गणना की शुरुआत के साथ विश्व की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया का आरंभ है।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: जनगणना 2027 भारत की देशव्यापी जनसंख्या गणना प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य नीतिगत योजना और शासन के लिये जनसांख्यिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक आँकड़ों का संग्रह करना है।
- यह देश की 16वीं जनगणना है तथा स्वतंत्रता के बाद आयोजित होने वाली 8वीं जनगणना है।
- डिजिटल जनगणना: जनगणना 2027 भारत की पहली जनगणना होगी, जिसमें डिजिटल डेटा संग्रहण और ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी।
- पहली बार गणनाकर्त्ता स्मार्टफोन पर मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से डेटा एकत्रित और प्रस्तुत करेंगे।
- स्व-गणना सुविधा:
- नागरिक एक सुरक्षित वेब पोर्टल (se.census.gov.in) के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं।
- विवरण जमा करने के बाद सत्यापन हेतु एक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) उत्पन्न होगी, जिसे गणनाकर्त्ता के दौरे के समय उपयोग किया जाएगा।
- शुरुआत: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जनगणना 2027 के लिये स्व-गणना प्रक्रिया पूरी करने वाली पहली नागरिक बन गईं।
- पहले ही दिन लगभग 55,000 परिवारों ने इस सुविधा का लाभ उठाया।
- भाषाएँ: स्व-गणना सुविधा 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे यह प्रक्रिया देशभर के लोगों के लिये सुलभ बनती है।
- प्रारंभिक क्रियान्वयन क्षेत्र: यह प्रक्रिया प्रारंभ में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिज़ोरम, ओडिशा, सिक्किम तथा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के क्षेत्रों में शुरू की गई।
- चरण-I – हाउसलिस्टिंग एवं आवास जनगणना:
- यह 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 के बीच आयोजित की जा रही है।
- प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश इस अवधि में 30 दिनों का निरंतर क्षेत्रीय कार्य करेगा।
- पहली बार घर-घर सर्वेक्षण शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिये प्रदान की जाएगी।
- संग्रहित जानकारी: चरण-I के दौरान आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित विवरण 33 अधिसूचित प्रश्नों के माध्यम से एकत्र किये जाएंगे।
- कानूनी ढाँचा: जनगणना के दौरान एकत्रित आँकड़े जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत संरक्षित होते हैं, जो व्यक्तिगत जानकारी की कड़ी गोपनीयता सुनिश्चित करता है।
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और पढ़ें: जनगणना अधिनियम, 1948, जनगणना 2027 शुभंकर |



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