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हिमाचल प्रदेश में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन
चर्चा में क्यों?
पहाड़ी पर्यटन और पुष्पोत्पादन को एक महत्त्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए, CSIR–हिमालयी जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (IHBT) ने काँगड़ा ज़िले के पालमपुर में स्थित अपना ट्यूलिप गार्डन आधिकारिक रूप से आम जनता के लिये खोल दिया है।
मुख्य बिंदु:
- दूसरा ट्यूलिप गार्डन: यह देश का दूसरा प्रमुख ट्यूलिप गार्डन है, जो श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर) स्थित इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन के बाद आता है, जो एशिया का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध ट्यूलिप गार्डन है।
- रणनीतिक स्थान: लगभग 1,290 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह उद्यान धौलाधार पर्वतमाला की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाता है।
- विविधता और विस्तार: उद्यान में 50,000 से अधिक ट्यूलिप हैं, जो लाल, पीले, गुलाबी और सफेद सहित कई किस्मों तथा रंगों में हैं।
- अनुसंधान एकीकरण: यह केवल एक वाणिज्यिक उद्यान नहीं है, बल्कि CSIR-IHBT, पालमपुर द्वारा प्रबंधित एक अनुसंधान-सह-प्रदर्शन प्लॉट है।
- यह स्वदेशी बल्ब उत्पादन के परीक्षण का केंद्र है, जिससे नीदरलैंड से आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है।
- पुष्पोत्पादन को बढ़ावा: यह उद्यान स्थानीय किसानों के लिये एक ‘तकनीकी केंद्र’ के रूप में कार्य करता है और हिमाचल प्रदेश में ट्यूलिप की कृषि को एक उच्च-मूल्य नकदी फसल के रूप में उसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता प्रदर्शित करता है।
- पर्यटन परिपथ: यह उद्यान काँगड़ा पर्यटन परिपथ में एक नया आयाम जोड़ता है और ‘शोल्डर सीज़न’ (देर शीतकाल/प्रारंभिक वसंत) के दौरान पर्यटकों को आकर्षित करता है, जब पारंपरिक हिम-पर्यटन धीरे-धीरे कम होने लगता है।
- जैव-विविधता संरक्षण: संस्थान इस मंच का उपयोग आगंतुकों को हिमालयी पुष्प विविधता के महत्त्व के बारे में जागरूक करने के लिये करता है।
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लिम्फैटिक फाइलेरिया के उन्मूलन हेतु राष्ट्रव्यापी अभियान
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने भारत के 12 स्थानिक राज्यों में लिम्फैटिक फाइलेरिया (LF) के उन्मूलन हेतु वार्षिक राष्ट्रव्यापी सामूहिक औषधि वितरण (MDA) अभियान की शुरुआत की।
मुख्य बिंदु:
- सामूहिक औषधि वितरण (MDA) अभियान: लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (LF) के संचरण को रोकने और इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के उद्देश्य से।
- रणनीति: गर्भवती महिलाओं, निर्धारित आयु से कम बच्चों और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़ते हुए, शेष सभी पात्र लोगों को प्रतिवर्ष एंटी-फाइलेरियल दवाएँ दी जाती हैं।
- प्रयुक्त दवाएँ: सामान्यतः डायइथाइलकार्बामाज़ीन (DEC), एल्बेंडाज़ोल तथा चयनित ज़िलों में आइवरमेक्टिन (त्रि-दवा उपचार – IDA) का उपयोग किया जाता है।
- लक्षित राज्य: यह अभियान 12 स्थानिक राज्यों आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में लागू किया जा रहा है।
- लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (LF): यह एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) है, जो परजीवी कृमियों (Wuchereria bancrofti, Brugia malayi) के कारण होता है।
- इसका संचरण संक्रमित मच्छरों के काटने से होता है।
- दीर्घकालिक संक्रमण से हाथीपाँव (Elephantiasis), हाइड्रोसील और दीर्घकालिक दिव्यांगता जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
- LF के वैश्विक बोझ का एक बड़ा हिस्सा भारत में पाया जाता है।
- समय से पहले लक्ष्य: भारत का वर्ष 2027 का लक्ष्य सतत विकास लक्ष्य (SDG 3) को निर्धारित समय से पहले प्राप्त करने के प्रति देश के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
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निवेदिता दुबे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की पहली महिला सदस्य बनीं
चर्चा में क्यों?
निवेदिता दुबे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के बोर्ड में नियुक्त होने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। यह नियुक्ति भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र में नेतृत्व और लैंगिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक नियुक्ति: निवेदिता दुबे ने सदस्य (मानव संसाधन) के रूप में पदभार ग्रहण किया है, जो भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) बोर्ड में दूसरा सबसे बड़ा पद है। इसके साथ ही वह AAI के बोर्ड में शामिल होने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।
- संगठन: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) एक वैधानिक निकाय है, जो भारत में नागरिक उड्डयन अवसंरचना के निर्माण, उन्नयन, रखरखाव और प्रबंधन के लिये उत्तरदायी है।
- पृष्ठभूमि: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1995 में AAI में प्रबंधन प्रशिक्षु (Management Trainee) के रूप में की थी।
- वर्षों के दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे में एयरपोर्ट मैनेजर सहित विभिन्न भूमिकाएँ निभाईं और क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) के रूप में भी सेवा दी।
- भूमिका एवं दायित्व: AAI बोर्ड में सदस्य (मानव संसाधन) के रूप में वह नीति निर्माण, कार्मिक प्रबंधन, औद्योगिक संबंधों और संगठन के प्रशासन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
- महत्त्व: उनकी नियुक्ति को भारत में महिलाओं और युवाओं के लिये एक प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में व्यापक रूप से सराहा जा रहा है, विशेष रूप से विमानन क्षेत्र में, जहाँ ऐतिहासिक रूप से वरिष्ठ शासन स्तरों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व सीमित रहा है।
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हरियाणा Switch to English
हरियाणा में कुत्तों के लिये समर्पित दाह संस्कार केंद्र
चर्चा में क्यों?
हरियाणा में फरीदाबाद नगर निगम (FMC) ने मृत, आवारा और पालतू कुत्तों के सम्मानजनक एवं वैज्ञानिक निपटान को सुनिश्चित करने के लिये एक समर्पित दाह संस्कार घाट स्थापित किया है। यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता संबंधी चिंताओं के समाधान और पशु अवशेषों के मानवीय उपचार को ध्यान में रखकर की गई है।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: यह सुविधा आवारा और पालतू दोनों प्रकार के कुत्तों के दाह संस्कार के लिये एक व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराती है। इससे पहले शवों के अनियोजित निपटान के कारण अस्वच्छ परिस्थितियाँ, दुर्गंध, स्वास्थ्य जोखिम और पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती थीं, जिन्हें यह व्यवस्था समाप्त करती है।
- निर्माण एवं संचालन: यह श्मशान नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत स्थानीय हितधारकों के सहयोग से तैयार किया गया है और इसके शीघ्र ही संचालित होने की उम्मीद है।
- यह सुविधा कुत्तों के शवों का पारंपरिक चिता विधि से दाह संस्कार करने में सक्षम बनाती है, जिसे स्वच्छ और पशुओं के प्रति सम्मानजनक माना जाता है।
- मृत पशुओं को मृत्यु स्थल से श्मशान तक सुरक्षित रूप से पहुँचाने के लिये एक मर्च्युरी वैन सेवा की व्यवस्था की गई है, जिससे शवों का समय पर और सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
- प्रभाव: पहले ऐसी सुविधा के अभाव में आवारा कुत्तों के शव खुले स्थानों में सड़ते रहते थे, जिससे दुर्गंध फैलती थी और रोग प्रसार व पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता था।
- महत्त्व: फरीदाबाद में कुत्तों के लिये समर्पित दाह संस्कार घाट की स्थापना नागरिक स्वच्छता, पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
- यह पशु शवों के मानवीय और वैज्ञानिक प्रबंधन को संस्थागत रूप देता है, स्वास्थ्य जोखिमों को कम करता है और पालतू व आवारा दोनों पशुओं के लिये सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करता है।
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भारत पहली BRICS शेरपा बैठक 2026 की मेज़बानी करेगा
चर्चा में क्यों?
भारत ने BRICS समूह की 2026 अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली में पहली BRICS शेरपा और सू-शेरपा बैठक की मेज़बानी की।
मुख्य बिंदु:
- अध्यक्षता एवं प्रतिनिधि: बैठक की अध्यक्षता भारत के BRICS शेरपा और सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने की, जबकि शंभू एल. हक्की, भारत के BRICS सू-शेरपा भी इसमें शामिल रहे।
- प्रतिभागी: ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित BRICS के सदस्य व साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी तथा शेरपा चर्चा में सम्मिलित हुए।
- थीम: प्राथमिकताओं को “अनुकूलन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिये निर्माण (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability)” थीम के तहत प्रस्तुत किया गया, जो BRICS नेतृत्व के प्रति भारत के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- फोकस: स्वास्थ्य, कृषि, श्रम, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, नवाचार, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), सुरक्षा तथा आर्थिक और वित्तीय क्षेत्रों में सहयोग पर ज़ोर दिया गया।
- महत्त्व: इस बैठक ने आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले सहयोग, अनुकूलन, नवाचार और सततता को बढ़ावा देकर भारत के 2026 BRICS एजेंडा की आधारशिला रखी।
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छत्तीसगढ़ Switch to English
छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने धान किसानों के लिये ₹10,000 करोड़ मंज़ूर किये
चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषक उन्नति योजना के तहत धान किसानों के लिये ₹10,000 करोड़ के एक बड़े वित्तीय राहत पैकेज को मंज़ूरी दी है।
मुख्य बिंदु:
- निर्णय प्राधिकरण: यह निर्णय रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
- योजना: कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान किसानों को राज्य की प्रभावी खरीद दर और केंद्र के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बीच के अंतर की राशि का भुगतान किया जाता है।
- राज्य सरकार धान की खरीद ₹3,100 प्रति क्विंटल (प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल तक) की दर से करती है, जो वर्तमान में देश में सबसे अधिक समर्थन मूल्य है।
- भुगतान कवरेज: यह ₹10,000 करोड़ की राशि MSP से अधिक वाले मूल्य अंतर की पूर्ति करती है, जिससे किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित उच्च दर का लाभ सुनिश्चित होता है।
- यह राशि एकमुश्त भुगतान के रूप में सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी।
- समग्र सहायता: इस वितरण के साथ, पिछले वर्षों में कृषक उन्नति योजना के तहत धान मूल्य समर्थन के लिये राज्य सरकार का कुल भुगतान लगभग ₹35,000 करोड़ तक पहुँचने की संभावना है।
- महत्त्व: धान किसानों को वित्तीय स्थिरता और तरलता प्रदान करना, राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को मान्यता देना तथा ग्रामीण आय को समर्थन देना।
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