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हरियाणा स्टेट पी.सी.एस.

  • 13 Jan 2026
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राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

‘आशा वैन’ मोबाइल यूनिट

चर्चा में क्यों?

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में कैंसर की प्रारंभिक पहचान के लिये एक मोबाइल ‘आशा वैन’ का उद्घाटन किया।

मुख्य बिंदु:

  • सुविधा: आशा वैन एक मोबाइल डायग्नोस्टिक यूनिट है, जो  
    • EVA‑प्रो डायग्नोस्टिक्स, एक मैमोग्राफी मशीन और
    • विशेषज्ञ मार्गदर्शन के लिये  टेली-कंसल्टेशन सेवाओं से सुसज्जित है।।
  • स्क्रीन किये जाने वाले कैंसर के प्रकार: यह अल्ट्रा-आधुनिक उपकरणों की सहायता से फेफड़े, मुँह, रक्त, गर्भाशय ग्रीवा, अग्न्याशय, यकृत, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर का ऑन-साइट स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाता है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्य में समर्थन: यह पहल प्रधानमंत्री के ‘हेल्थ एंड वैलनेस फॉर ऑल’ विज़न  को सहयोग प्रदान करती है, जिससे प्रारंभिक निदान और उपचार के परिणामों में सुधार होता है।
  • रेड क्रॉस को सुपुर्दगी: आशा वैन को इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की भावनगर शाखा को सौंप दिया गया।
  • ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान: यह पहल उन्नत कैंसर स्क्रीनिंग सेवाओं को गाँवों और दूरदराज़ के क्षेत्रों तक पहुँचाती है, जिससे दूरी तथा सीमित स्वास्थ्य सुविधा की बाधाओं को कम किया जा सकता है।

और पढ़ें: कैंसर, रेड क्रॉस


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IIT मद्रास में सुपरकंप्यूटर परम शक्ति लॉन्च किया

चर्चा में क्यों?

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IIT मद्रास में परम शक्ति सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन किया।

मुख्य बिंदु:

  • क्षमता: यह 3.1 पेटाफ्लॉप प्रणाली है, जो प्रति सेकंड 3.1 क्वाड्रिलियन से अधिक गणनाएँ कर सकती है।
  • स्वदेशी तकनीक: इसे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत C-DAC की RUDRA सर्वर शृंखला और स्वदेशी सॉफ्टवेयर स्टैक (AlmaLinux) का उपयोग करके बनाया गया है।
  • अनुप्रयोग: इसका उपयोग जलवायु मॉडलिंग, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, दवा खोज और उन्नत निर्माण में अनुसंधान के लिये किया जाएगा।
  • NSM की उपलब्धि: यह भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित 37वाँ  सुपरकंप्यूटर है।
  • कुशलता: इसमें 1.2 से 1.4 का पावर यूसेज एफेक्टिवनेस (PUE) है, जो इसे अत्यंत ऊर्जा-कुशल बनाता है।
  • शीर्ष समकक्ष: जबकि PARAM SHAKTI शक्तिशाली है, भारत का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर अभी भी C-DAC पुणे में AIRAWAT-PSAI (13.17 PF) है।

और पढ़ें: राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM), C-DAC


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अकासा एयर IATA में पाँचवीं भारतीय सदस्य के तौर पर शामिल

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अकासा एयर ने आधिकारिक रूप से इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की सदस्यता प्राप्त की।

मुख्य बिंदु:

  • पूर्वापेक्षा: इस एयरलाइन ने दिसंबर 2025 में अनिवार्य IATA ऑपरेशनल सेफ्टी ऑडिट (IOSA) को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो एयरलाइनों के लिये एक सख्त, अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सुरक्षा और परिचालन मानक है।
  • समान समूह: अकासा एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो और स्पाइसजेट के साथ केवल भारतीय IATA सदस्यों में शामिल हुई।
  • लाभ: सदस्यता से वैश्विक विश्वसनीयता, डिजिटल परिवर्तन में भागीदारी और भविष्य में इंटरलाइन/कोडशेयर व्यवस्था की सुविधा मिलती है।
  • स्केल: वर्ष 2022 में लॉन्च के बाद अकासा ने 31 बोइंग 737 मैक्स विमानों के बेड़े के साथ 23 मिलियन से अधिक यात्रियों की सेवा की है।
  • IATA पहुँच: यह लगभग 360 एयरलाइनों का प्रतिनिधित्व करता है, जो वैश्विक हवाई यातायात का 80% हिस्सा हैं।
  • आर्थिक प्रभाव: भारत में विमानन क्षेत्र 7.7 मिलियन नौकरियों का समर्थन करता है और GDP में लगभग $53.6 बिलियन का योगदान देता है।

और पढ़ें: इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA)


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अरुणाचल प्रदेश में 1720 मेगावाट कमला जलविद्युत परियोजना

चर्चा में क्यों?

कमला नदी (सुबनसिरी की एक सहायक नदी) पर 1720 मेगावाट का कमला प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश को भारत का ‘पावर हाउस’ बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बिंदु:

  • क्षमता: 1720 मेगावाट का उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रिड को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान करना है। 
  • परियोजना का स्वरूप: यह एक स्टोरेज-कम-रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है, जिसे ब्रह्मपुत्र बेसिन की उच्च हाइड्रोइलेक्ट्रिक क्षमता का उपयोग करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • रणनीतिक लक्ष्य: यह वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिये केंद्र सरकार के विज़न का एक हिस्सा है।
  • नदी बेसिन: यह परियोजना कामले ज़िले में स्थित है।
  • उत्तर-पूर्व ग्रिड: यह परियोजना, सुबनसिरी लोअर परियोजना के साथ क्षेत्रीय बुनियादी अवसंरचना के लिये महत्त्वपूर्ण है और उत्तर भारत की उच्चतम विद्युत मांग को पूरा करने में सहायक है।
  • पर्यावरणीय मंज़ूरी: सभी प्रमुख हिमालयी परियोजनाओं की तरह इसे भूकंपीय सुरक्षा और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव के लिये कड़ी निगरानी के अधीन रखा गया है।

और पढ़ें: सुबनसिरी लोअर परियोजना, ब्रह्मपुत्र बेसिन


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