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पीआरएस कैप्सूल्स

विविध

मार्च 2020

  • 23 May 2020
  • 122 min read

PRS के प्रमुख हाइलाइट्स

  • संसद
    • बजट सत्र 2020 समाप्त
  • कोविड-19
    • देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की अधिसूचना 
    • कराधान और अन्य कानून अध्यादेश 
    • कोविड-19 से राहत प्रदान करने के लिये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना 
    • कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न वितीय संकट में RBI की भूमिका
    • COVID-19 परीक्षण प्रयोगशालाएँ खोली गईं
    • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्राएँ बंद, वीज़ा जारी करने का कार्य निरस्त
    • वेंटिलेटर, मास्क, सैनिटाइजर और कुछ दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध
    • प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का कामकाज 
    • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर COVID -19 से संबंधित गलत सूचनाओं पर अंकुश 
    • जनगणना और NPR अगले आदेश तक के लिये स्थगित 
    • COVID-19 पर गठित सशक्त समूह
    • दिवालिया समाधान प्रक्रिया की न्यूनतम सीमा बढ़ाई 
    • EPF निकासी की सीमा बढ़ाई
    • IRDAI कोरोनवायरस के अंतर्गत दावों से निपटारे के लिये दिशा-निर्देश
    • बिजली वितरण कंपनियों के नकदी संकट के समाधान हेतु उपाय 
    • विदेश व्यापार नीति 2015-20 को मार्च 2021 तक बढ़ाया 
    • पर्यावरणीय मंजूरियों और पर्यावरण प्रभाव आकलन की शर्तों में परिवर्तन 
    • DST ने COVID-19 से संबंधित तकनीकी समाधानों की मैपिंग
    • अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की नियत कमीशनिंग की समय-सीमा बढ़ाई 
    • ऊर्जा मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की राज्य सरकारों के लिये एडवाइजरीज़
    • अन्य सेवा प्रदाताओं के लिये नियमों और शर्तों में छूट
  • समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास
    • 2019-20 की तीसरी तिमाही में चालू खाता घाटा GDP का 0.2% 
  • वित्त
    • वित्त विधेयक, 2020 
    • राजकोषीय समेकन की समीक्षा हेतु 15वें वित्त आयोग द्वारा समिति का गठन
    • सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय 
    • सर्वोच्च न्यायालय ने वर्चुअल करेंसियों को रेगुलेट करने वाले RBI के सर्कुलर को रद्द किया
    • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का पुनर्पूंजीकरण 
    • RBI भुगतान एग्रीगेटर्स और गेटवे के नियमन संबंधी दिशा-निर्देश 
  • कॉरपोरेट मामले
    • दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2020 
    • कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2020  
    • निगम सामाजिक दायित्व (CSR) पर मसौदा नियम 
    • NCLAT की न्यायपीठ की स्थापना 
  • स्वास्थ्य
    • मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेन्सी (संशोधन) विधेयक, 2020 
    • राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक, 2019 
    • आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान विधेयक, 2020 
    • राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को शामिल करने को मंजूरी 
  • खनन
    • खनिज कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 
    • खनिज रियायत संशोधन नियम, 2020 
  • परिवहन
    • प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक, 2020 
    • सड़क परिवहन मंत्रालय ने अनेक प्रावधानों में संशोधन हेतु मसौदा नियमों को अधिसूचित किया 
  • गृह मामले 
    • राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2020  
    • राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 
    • संविधान (125वाँ संशोधन) विधेयक, 2019 
    • जम्मू एवं कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश पर 37 राष्ट्रीय कानून लागू 
  • रक्षा
    • रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020 का ड्राफ्ट  
  • महिला एवं बाल विकास
    • बाल यौन अपराध संरक्षण नियम, 2020 
    • महिला सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर स्थायी समिति  
  • ग्रामीण विकास
    • मनरेगा की राज्यवार मजदूरी में संशोधन 
  • पर्यावरण और वन
    • मसौदा पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020
    • पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 में संशोधन 
    • पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 में संशोधन 
  • विदेशी मामले 
    • अप्रवासी भारतीय विवाह पंजीकरण विधेयक, 2019
  • वाणिज्य और उद्योग
    • निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट के लिये योजना 
    • नागरिक उड्डयन में संशोधित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति
  • मीडिया और प्रसारण
    • सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) विधेयक, 2019 पर रिपोर्ट 
  • कपड़ा
    • वर्ष 2014-15 से वर्ष 2018-19 के दौरान कपास के लिये MSP संचालन के अंतर्गत नुकसान की प्रतिपूर्ति 
  • कृषि
    • उर्वरक सब्सिडी प्रणाली
    • खोपरा के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य
  • संचार
    • इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर श्रेणी-I 
  • इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी
    • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के संवर्द्धन के लिये योजना
  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा
    • अटल ज्योति योजना चरण -II

संसद

बजट सत्र 2020 समाप्त

संसद का बजट सत्र 31 जनवरी, 2020 से 23 मार्च, 2020 तक चला जिसमें 12 फरवरी से 1 मार्च, 2020 तक अवकाश रहा। सत्र 3 अप्रैल, 2020 को समाप्त होना था। लेकिन कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य की आपातस्थिति के मद्देनज़र संसद को 23 मार्च, 2020 को अनिश्चित काल के लिये स्थगित कर दिया गया। 

सत्र के दौरान 19 विधेयक पेश किये गए। इनमें बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020, (Banking Regulation (Amendment) Bill, 2020,) कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2020, (Companies (Amendment) Bill, 2020,) गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन (संशोधन) विधेयक, 2020 (Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Bill, 2020) और विमान (संशोधन) विधेयक, 2020 (Aircraft (Amendment) Bill, 2020) शामिल हैं। 

संसद ने (वित्त और विनियोग विधेयकों सहित) 12 विधेयकों को पारित किया। जिन विधेयकों को पारित किया गया, उनमें दिवाला और दिवालियापन संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2020, (Insolvency and Bankruptcy Code (Second Amendment) Bill, 2020,) खनिज कानून (संशोधन) विधेयक , 2020  (Minerals Laws (Amendment) Bill, 2020) और  प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 शामिल हैं। 


कोविड-19

कोरोनावायरस 2019 (COVID-19) एक नए प्रकार के वायरस से फैलने वाला संक्रामक रोग है। यह रोग चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ और फिर विश्व के विभिन्न देशों में फैल गया। 11 मार्च, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने COVID-19 को विश्वव्यापी महामारी (Pandemic) घोषित किया। भारत में पहला मामला 30 जनवरी, 2020 को मिला। इसके बाद से देश में मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। 31 मार्च, 2020 तक भारत में 1,397 मामलों की पुष्टि हुई है। कोविड-19 के फैलने के साथ केंद्र सरकार ने इस महामारी को फैलने से रोकने, प्रभावित होने वाले नागरिकों और व्यवसायों को मदद देने के लिये वित्तीय उपाय संबंधी नीतिगत फैसले किये हैं। इस संबंध में मुख्य घोषणाएँ इस प्रकार हैं: 

देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की अधिसूचना 

कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिये राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority- NDMA) ने केंद्र और राज्य सरकारों, साथ ही विभिन्न राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (State Disaster Management Authorities- SDMA) को निर्देश दिये है कि वे 21 दिनों की सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करने के उपाय करें (इसकी अवधि 25 मार्च, 2020 से प्रारंभ है)। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं। NDMA और SDMA की स्थापना के अतिरिक्त आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन हेतु अधिनियम इन प्राधिकरणों को विशेष शक्तियाँ प्रदान करता है।

कराधान और अन्य कानून अध्यादेश 

कराधान और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश, 2020 जारी किया गया। अध्यादेश विशिष्ट कानूनों के संबंध में कुछ राहत प्रदान करता है जैसे- समय-सीमा को बढ़ाना और सजा से छूट। 

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कोविड-19 से राहत प्रदान करने के लिये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना 

कोविड-19 महामारी के मद्देनज़र वित्त मंत्री ने गरीबों के लिये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana) के अंतर्गत राहत पैकेज की घोषणा की। 

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कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न वितीय संकट में RBI की भूमिका

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुए वित्तीय संकट से निपटने के लिये अनेक उपायों की घोषणा की। 

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COVID-19 परीक्षण प्रयोगशालाएँ खोली गईं

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने निम्नलिखित हेतु अनेक एडवाइजरी और अधिसूचनाएं जारी की हैं: 

(i) नागरिक 
(ii) अस्पताल 
(iii) राज्य सरकार/विभाग/मंत्रालय 
(iv) कर्मचारी। 

मुख्य अधिसूचनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • परीक्षण प्रयोगशालाएँ: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research) ने कोविड-19 के लक्षणों वाले सभी व्यक्तियों के मुफ्त निदान (Diagnosis) की अनुमति दी है। सरकार ने कोविड-19 की जाँच के लिये कुछ निजी प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी है। 27 मार्च तक कोविड-19 के सैंपल्स की जाँच के लिये 111 सरकारी टेस्टिंग सेंटर थे। अन्य 11 परिचालन की प्रक्रिया में थे। इसके अतिरिक्त 11 राज्यों में जांच हेतु 44 निजी प्रयोगशालाएँ थीं। ये राज्य हैं- दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात।
  • मंत्रालय ने उन लोगों के लिये दिशा-निर्देश निर्धारित किये हैं जिनका इन लेबोरेट्रीज़ में परीक्षण किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं: 
    (i) उन लोगों के करीबी जो कि कोविड-19 के लिये पॉजिटिव पाए गए हैं और फिर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के 14 दिनों के भीतर जिनमें श्वास संबंधी लक्षण उभरे हैं। 
    (ii) कोविड-19 प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले व्यक्ति, जिनमें वापसी के बाद 14 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई दिये हैं।
  • सोशल डिस्टेंसिंग के उपाय: केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करने के लिये कुछ पहलें शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इनमें शामिल हैं: 
    (i) सभी शैक्षिक प्रतिष्ठानों (स्कूलों, विश्वविद्यालयों), जिम, संग्रहालयों, सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्रों, स्विमिंग पूल और सिनेमाघरों को बंद करना,
    (ii) आगामी परीक्षाओं को स्थगित करना और वर्तमान में चल रही परीक्षाओं को तभी आयोजित करना, यदि विद्यार्थियों के बीच एक मीटर की शारीरिक दूरी सुनिश्चित की जा सकती हो, 
    (iii) जहाँ भी संभव हो, निजी क्षेत्र के संगठनों/नियोक्ताओं को कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने के लिये प्रोत्साहित करना।

घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्राएँ बंद, वीज़ा जारी करने का कार्य निरस्त

नागरिक उड्डयन: नागरिक उड्डयन महानिदेशक ने 24 मार्च, 2020 से 14 अप्रैल, 2020 के दौरान सभी यात्री घरेलू उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया। देश में आने तथा देश से जाने वाली सभी अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल यात्री उड़ानों को 14 अप्रैल, 2020 की शाम 6.30 बजे तक के लिये प्रतिबंधित कर दिया गया (DGCA द्वारा निर्दिष्ट कार्गो और दूसरी अन्य उड़ानों को छोड़कर)। राजनयिकों, अधिकारियों, संयुक्त राष्ट्र/अंतर्राष्ट्रीय  संगठनों को जारी वीज़ा तथा रोजगार और परियोजना वीजा को छोड़कर किसी भी देश के सभी मौजूदा वीजा 13 मार्च से 15 अप्रैल, 2020 तक रद्द कर दिये गए हैं।

यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध से पहले DGCA ने कई यात्रा और वीजा प्रतिबंध भी जारी किये थे। इनमें चीन, ईरान, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान, फ्राँस, जर्मनी, स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान और कुवैत से भारत आने वाले व्यक्तियों को न्यूनतम 14 दिनों के लिये क्वारंटाइन में रहना जरूरी है। जो लोग 15 फरवरी, 2020 के बाद यूरोपीय संघ के देशों, यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन, तुर्की, ब्रिटेन, अफग़ानिस्तान, फिलीपींस और मलेशिया गए हैं, उन्हें 18 मार्च, 2020 के बाद भारत की यात्रा की अनुमति नहीं है।  

रेलवे: भारतीय रेलवे ने 14 अप्रैल, 2020 तक सभी यात्री गाड़ियों को रद्द कर दिया। हालाँकि अनिवार्य वस्तुओं का परिवहन जारी रहेगा। रेलवे ने रेलवे पार्सल वैन को ई-कॉमर्स संस्थाओं और राज्य सरकारों सहित अन्य ग्राहकों के लिये त्वरित माल परिवहन के लिये उपलब्ध कराया है। इनमें छोटे पार्सल आकारों में चिकित्सा सामानों की आपूर्ति, चिकित्सा उपकरण, भोजन आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त रेल मंत्रालय ने घोषणा की कि कोविड-19 को काबू करने में रेलवे की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का उपयोग किया जाएगा। रेलवे के पास उपलब्ध उत्पादन सुविधाओं का उपयोग साधारण बेड, मेडिकल ट्रॉलियों, पीपीई जैसे- मास्क और वेंटिलेटर आदि वस्तुओं के निर्माण के लिये किया जा सकता है।

सड़कें: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 30 जून, 2020 तक एक्सपायर्ड ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण की वैधता बढ़ाई है। 

शिपिंग: शिपिंग मंत्रालय ने भारत के बड़े बंदरगाहों पर कोविड-19 से निपटने के लिये अंतर्राष्ट्रीय क्रूज़ जहाज़ों के लिये मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) को जारी किया। इसके अंतर्गत 1 फरवरी, 2020 से कोविड प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले किसी भी यात्री या चालक दल को 31 मार्च, 2020 तक किसी भी भारतीय बंदरगाह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय क्रूज जहाज़ों को केवल उन बंदरगाहों में अनुमति दी जाएगी जहाँ थर्मल स्क्रीनिंग उपलब्ध है।

वेंटिलेटर, मास्क, सैनिटाइजर और कुछ दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) ने निम्नलिखित के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है: 

(i) वेंटिलेटर (किसी भी कृत्रिम श्वसन उपकरण या ऑक्सीजन थेरेपी उपकरण या किसी अन्य श्वास उपकरण सहित) 
(ii) सर्जिकल मास्क 
(iii) जिन कपड़ों से मास्क आदि बनते हैं 
(iv) सैनिटाइज़र
(v) हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) और उसके फॉर्मूलेशन (मलेरिया के इलाज के लिये प्रयुक्त)। देश में इनकी सप्लाई सुनिश्चित करने के लिये यह कदम उठाया गया है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने निर्दिष्ट सक्रिय दवा सामग्री (Active Pharmaceutical Ingredients- API) और इन API के फॉर्मूलेशन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने वाली एक अधिसूचना जारी की है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 

(i) पैरासीटामोल 
(ii) एरिथ्रोमाइसिन सॉल्ट्स 
(iii) विटामिन बी1, बी6 और बी12 
(iv) नियोमाइसिन 

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का कामकाज 

सूचना और प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting ) ने कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनज़र प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का परिचालन सुनिश्चित करने के लिये सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में निम्नलिखित को महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर निर्दिष्ट किया गया है: 

  • समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के प्रिंटिंग प्रेस और वितरण इंफ्रास्ट्रक्चर
  • टीवी चैनल
  • FM रेडियो नेटवर्क्स,
  • ब्रॉडकास्टिंग और केबल ऑपरेटर नेटवर्क्स
  • न्यूज एजेंसियाँ। 

अधिसूचना में कहा गया है कि कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिये लगाए गए प्रतिबंधों के मद्देनज़र, ऐसी महत्त्वपूर्ण सुविधाओं के सभी ऑपरेटरों के साथ-साथ इंटरमीडियरीज़ को भी परिचालन बरकरार रखने की अनुमति दी जानी चाहिये ।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर COVID -19 से संबंधित गलत सूचनाओं पर अंकुश 

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MEitY) ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर कोविड-19 से संबंधित गलत सूचनाओं पर अंकुश लगाने के लिये एक एडवाइजरी जारी की।  

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक तरह के इंटरमीडियरीज़ होते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी दिशा-निर्देश) नियम, 2011 के अंतर्गत ऐसे इंटरमीडियरीज़ को अपने उपयोगकर्त्ताओं को ऐसी सूचनाओं से निपटने की जानकारी देनी चाहिये जो जन व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं और किसी भी तरह से गैर-कानूनी हैं।

एडवाइजरी प्लेटफॉर्म से निम्नलिखित कार्य करने का आग्रह किया जाता है:

  • उपयोगकर्ताओं के लिये जागरूकता अभियान शुरू करें, ताकि जनता के बीच किसी भी तरह की झूठी सूचना को अपलोड न किया जा सके जिससे अशांति पैदा हो,
  • प्राथमिकता के आधार पर ऐसी सामग्री को डिसेबल करने/हटाने के लिये तत्काल कार्रवाई करें, और
  • जहाँ तक संभव हो, प्रामाणिक जानकारी के प्रसार को बढ़ावा देना।

जनगणना और NPR अगले आदेश तक के लिये स्थगित 

दिसंबर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निम्नलिखित प्रस्तावों को मंजूरी दी थी: 

(i) भारत की जनगणना 2021 का संचालन 
(ii) असम राज्य को छोड़कर देश के सभी हिस्सों में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) को अपडेट करना।  

जनगणना दो चरणों में होनी थी: 

(i) अप्रैल और सितंबर 2020 के बीच हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस तथा 20 फरवरी 2021 में जनगणना। 
(ii) NPR को हाउस लिस्टिंग और आवास की जनगणना (Housing Census) के साथ अपडेट किया जाना था (असम को छोड़कर)।

  • NPR देश में सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। सामान्य निवासी उन लोगों को कहा जाता है जो पिछले छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहते हैं, या अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक उस क्षेत्र में निवास करने का इरादा रखते हैं।
  • कोविड-19 महामारी को देखते हुए जनगणना और NPR के अपडेशन को अगले आदेश तक के लिये स्थगित कर दिया गया है।

COVID-19 पर गठित सशक्त समूह

गृह मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी पर प्रतिक्रियात्मक उपाय करने हेतु अधिकारियों के 11 सशक्त समूहों (Empowered Groups) का गठन किया है। इन समूहों को कोविड-19 से निपटने के लिये नीतियों और योजनाओं को तैयार करने तथा रणनीतिक परिचालन एवं उनके कार्यान्वयन के लिये कदम उठाने हेतु सशक्त बनाया गया है।

दिवालिया समाधान की प्रक्रिया की न्यूनतम सीमा बढ़ाई 

दिवालिया और दिवालियापन संहिता-2016 (Insolvency and Bankruptcy Code- 2016) कंपनियों की दिवालिया संबंधी मामलों को हल करने के लिये एक समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करती है। संहिता कंपनी के लेनदारों को दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देती है, अगर देनदार कंपनी द्वारा डिफॉल्ट की राशि कम-से-कम एक लाख रुपए है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस सीमा को एक लाख रुपए से बढ़ाकर एक करोड़ रुपए कर दिया है। कोविड-19 के कारण बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट की आशंका के चलते अधिसंख्य कंपनियों को यह राहत दी गई है।

EPF निकासी की सीमा बढ़ाई

राहत पैकेज के अंतर्गत वित्त मंत्री ने घोषणा की कि कर्मचारियों के भविष्य निधि नियमों को संशोधित किया जाएगा ताकि कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों से गैर-वापसी योग्य अग्रिमों की अनुमति दी जा सके। 

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IRDAI कोरोनवायरस के अंतर्गत दावों से निपटारे के लिये दिशा-निर्देश

  • भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (Insurance Regulatory and Development Authority of India- IRDAI) ने कोविड-19 से संबंधित दावों के निपटारे के लिये दिशा-निर्देश जारी किये।
    • इनमें प्रावधान है कि बीमाकर्त्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि कोविड-19 से संबंधित मामलों का तेजी से निपटान किया जाए, खासतौर से जिन मामलों में बीमा कवर में अस्पताल में भर्ती होना शामिल है।
    • बीमा पॉलिसी को नियम और शर्तों तथा मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के अनुसार उपचार के दौरान मेडिकल खर्चे की लागत को वहन करना चाहिये, जिसमें क्वारंटाइन में रहने के दौरान उपचार भी शामिल है। 
  • इसके अतिरिक्त दावों की समीक्षा समिति (Claims Review Committee) को खारिज करने से पहले कोविड-19 के अंतर्गत दर्ज सभी दावों की समीक्षा करनी चाहिये। IRDAI ने बीमाकर्ताओं को कोरोना वायरस के उपचार की लागत को कवर करने के लिये विशिष्ट उत्पादों को डिज़ाइन करने की सलाह दी।

बिजली वितरण कंपनियों के नकदी संकट के समाधान हेतु उपाय 

ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) ने वितरण कंपनियों (Distribution Companies- Discom) की तरलता (लिक्विडिटी) की समस्या को समाप्त करने के लिये विभिन्न उपायों की घोषणा की। ये इस प्रकार हैं:

  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पादन और हस्तांतरण कंपनियाँ डिस्कॉम को बिजली की आपूर्ति और हस्तांतरण जारी रखेंगी, भले ही उसका बड़ा देय बाकी हो।
  • केंद्रीय बिजली विनियामक आयोग को उत्पादन और हस्तांतरण कंपनियों को बकाया राशि देने के लिये डिस्कॉम को तीन महीने की मोहलत देनी चाहिये। विलंब से भुगतान करने पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा।
  • राज्य सरकारें अपने राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोगों के माध्यम से इसी तरह के निर्देश जारी कर सकती हैं।
  • डिस्कॉम्स को उत्पादक कंपनियों को भुगतान सुरक्षा देनी होती है। 30 जून, 2020 तक भुगतान सुरक्षा को 50% तक कम किया जाएगा।

विदेश व्यापार नीति 2015-20 को मार्च 2021 तक बढ़ाया 

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 2015-20 की अवधि के लिये लागू विदेश व्यापार नीति को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाने की घोषणा की है। कोरोनोवायरस महामारी के कारण मौजूदा स्थिति को देखते हुए नीतिगत व्यवस्था में निरंतरता प्रदान करने की घोषणा की गई है। नीति की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • भारत से सेवा निर्यात योजना (Service Exports from India Scheme- SEIS) को छोड़कर सभी निर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ 31 मार्च, 2021 तक उपलब्ध रहेंगी। SEIS जारी रखने का निर्णय बाद में अधिसूचित किया जाएगा। 
  • GST के भुगतान से छूट और कुछ आयातों पर मुआवजा उपकर (Cess) इस अवधि के दौरान जारी रहेंगे।

पर्यावरणीय मंजूरियों और पर्यावरण प्रभाव आकलन की शर्तों में परिवर्तन 

  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कोविड-19 और अन्य समान लक्षण वाली बीमारियों के मद्देनजर बल्क ड्रग्स और इंटरमीडिएट्स के निर्माण से संबंधित सभी परियोजनाओं या गतिविधियों को ‘बी2’ श्रेणी में रखा है।
    • ‘बी2’ श्रेणी के प्रॉजेक्ट्स को पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment- EIA) की जरूरत नहीं होती।
    • इसलिये इन परियोजनाओं को EIA की शर्तों से छूट मिल जाएगी। यह उपाय 30 सितंबर, 2020 तक लागू रहेगा।
    • इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने सक्रिय दवा सामग्री और थोक दवा मध्यवर्ती से संबंधित परियोजनाओं हेतु पर्यावरणीय मंजूरी में तेजी लाने के लिये आदेश दिये हैं।
  • मंत्रालय ने सभी परियोजनाओं और गतिविधियों के लिये पूर्व में जारी पर्यावरणीय मंजूरी की वैधता को भी 30 जून, 2020 तक बढ़ा दिया है, जो फिलहाल 15 मार्च, 2020 और 30 अप्रैल, 2020 के बीच समाप्त हो रही हैं।

DST ने COVID-19 से संबंधित तकनीकी समाधानों की मैपिंग

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) ने निदान, परीक्षण, स्वास्थ्य देखभाल वितरण समाधान और उपकरणों की आपूर्ति में समाधान के लिये तकनीक की मैपिंग हेतु टास्क फोर्स का गठन किया। 

अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की नियत कमीशनिंग की समय सीमा बढ़ाई 

नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की नियत कमीशनिंग की समय-सीमा बढ़ाएगा। चीन और अन्य देशों में कोविड-19 के फैलने के कारण आपूर्ति शृंखला में व्यवधान की बजह से ऐसा किया जा रहा है। महामारी को प्राकृतिक आपदा का मामला माना जाएगा और ऐसी परिस्थितियों में छूट प्रदान करने के लिये अनुबंध संबंधी प्रावधानों पर विचार किया जाएगा।

ऊर्जा तथा नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालयों ने राज्य सरकारों को एडवाइजरीज़ जारी की

ऊर्जा तथा नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालयों ने राज्य सरकारों को देश में विद्युत् उत्पादन और ट्रांसमिशन का निरंतर परिचालन सुनिश्चित करने के लिये एडवाइजरीज़ जारी की। विद्युत् उत्पादन और ट्रांसमिशन को अनिवार्य सेवाओं में वर्गीकृत किया गया है। इन एडवाइजरीज़ में निम्नलिखित का परिचालन शामिल है: 

(i) अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन नेटवर्क 
(ii) अंतर-राज्यीय बिजली उत्पादन नेटवर्क 
(iii) कुछ अक्षय ऊर्जा उत्पादन स्टेशन 

इन एडवाइजरीज़ में राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे लॉकडाउन, कर्फ्यू के दौरान या किसी स्थान पर लोगों के एकत्र होने की निश्चित सीमा की स्थिति में विद्युतघरों, सब-स्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइनों सहित विभिन्न स्थानों से जुड़े कर्मचारियों, वाहनों और माल की आवाजाही के लिये आवश्यक अनुमति प्रदान करें। 

अन्य सेवा प्रदाताओं के लिये नियमों और शर्तों में छूट

  • दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications- DoT) ने अन्य सेवा प्रदाताओं (Other Service Providers- OSP) के लिये नियमों और शर्तों में कुछ छूट की घोषणा की है। 
    • OSP ऐसी कंपनियाँ होती हैं जो एप्लीकेशन आधारित विभिन्न सेवाएँ प्रदान करती हैं, जैसे टेली-बैंकिंग, टेली-कॉमर्स, कॉल सेंटर्स और अन्य IT-सक्षम सेवाएँ। उदाहरण के लिये एक बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) कंपनी OSP है।
  • उन्हें देश में सेवाएँ प्रदान करने के लिये DoT के साथ पंजीकरण करना आवश्यक है। OSP उन लोगों को भी नियुक्त कर सकती हैं जो घर से काम करते हैं। OSP को वर्क फ्रॉम होम के लिये DoT से अनुमति लेनी होती है और इसके लिये बैंक गारंटी देनी होती है।

वर्क फ्रॉम होम की सुविधा के संबंध में 30 अप्रैल, 2020 तक निम्नलिखित छूट दी गई है:

  • कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा के लिये पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है। हालाँकि OSP को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा शुरू करने से पहले DoT को पूर्व सूचना देना आवश्यक है। 
  • वर्क फ्रॉम होम के लिये एग्रीमेंट और सिक्योरिटी डिपॉजिट की शर्त से छूट दी गई है। 
  • वर्क फ्रॉम होम के लिये कुछ अधिकृत सेवा प्रदाताओं को सुरक्षित VPN के उपयोग की शर्त से छूट दी गई है। 

वर्क फ्रॉम होम सुविधा के नियमों और शर्तों का उल्लंघन करने पर हर वर्क फ्रॉम होम लोकेशन पर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना कंपनी के किसी कर्मचारी या कंपनी द्वारा किसी भी उल्लंघन के लिये लागू होगा।


समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

2019-20 की तीसरी तिमाही में चालू खाता घाटा GDP का 0.2% 

  • वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) की तुलना में वर्ष 2019-20 में इसी अवधि में भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit-CAD) $17.7 बिलियन (GDP का 2.7%) से गिरकर $1.4 बिलियन (GDP का 0.2%) हो गया।
    • पिछली तिमाही, यानी वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में CAD $6.5 बिलियन था, जो कि GDP का 0.9% था।
    • CAD में साल-दर-साल की गिरावट मुख्य रूप से वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही में $34.6 बिलियन के निम्नस्तरीय व्यापार घाटे (निर्यात और आयात के बीच का अंतर) के कारण थी।
  • वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही में विदेशी मुद्रा कोष $21.6 बिलियन बढ़ गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में $4.3 बिलियन का ह्रास हुआ था।
  • निम्नलिखित तालिका में वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही में भुगतान संतुलन (बिलियन USD) प्रदर्शित है।

तिमाही-III

2018-19

तिमाही-II

2019-20

तिमाही-III

2019-20

मौजूदा खाता

-17.7

-6.5

-1.4

पूंजी खाता

13.8

12.0

22.3

भूल-चूक व लेनी देनी

0.3

0.7

-0.7

कोष में परिवर्तन 

-4.3

5.1

21.6


वित्त

वित्त विधेयक, 2020 

संसद के दोनों सदनों ने 23 मार्च, 2020 को वित्त विधेयक, 2020 (Finance Bill, 2020) को पारित किया। विधेयक वर्ष 2020-21 के लिये सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है।

व्यक्तिगत टैक्स की नई दरें

आय

पूर्व दरें

नई दरें

5 लाख रुपए तक

कोई कर नहीं

कोई कर नहीं

5 लाख रुपए से 7.5 लाख रुपए 

20%

10%

7.5 लाख रुपए से 10 लाख रुपए

15%

10 लाख रुपए से 12.5 लाख रुपए

30%

20%

12.5 लाख रुपए से 15 लाख रुपए

25%

15 लाख रुपए से अधिक

30%

  • भारत में निवास: आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961) एक भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के व्यक्ति के निवास की स्थिति का निर्धारण करने के लिये मापदंड निर्दिष्ट करता है, जिसके आधार पर भारत में उनकी आय पर टैक्स लगाया जाता है। ऐसे व्यक्ति को निवासी माना जाता था, यदि वह भारत में एक वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक समय तक रहता था। ऐसे व्यक्तियों के लिये जो उस वर्ष से पहले के चार वर्षों में कुल 365 दिनों के लिये भारत में थे, वित्त अधिनियम न्यूनतम आवश्यकता को 182 दिनों से घटाकर 120 दिन करता है। इसके अतिरिक्त 120 दिनों की निचली सीमा केवल 15 लाख रुपए से अधिक आय वाले व्यक्तियों (विदेशी स्रोतों से आय को छोड़कर) पर लागू होती है। हालाँकि वित्त अधिनियम में यह प्रावधान है कि 15 लाख रुपए से अधिक की आय (विदेशी स्रोतों से आय को छोड़कर) वाले किसी भी भारतीय नागरिक को देश का निवासी माना जाएगा, यदि वह अधिवास या निवास के कारण किसी अन्य देश या क्षेत्र में टैक्स के लिये उत्तरदायी नहीं है। ये प्रावधान आकलन वर्ष 2021-22 (यानी वित्त वर्ष 2020-21) से प्रभावी होंगे
  • लाभांश वितरण कर: आयकर अधिनियम के अंतर्गत कंपनियों को शेयरधारकों को वितरित लाभांश पर 15% कर देना पड़ता था। वित्त अधिनियम अप्रैल 2020 से इस प्रावधान को हटाता है और कहता है कि लाभांश आय प्राप्तकर्त्ता के लिये कर योग्य होगा।
  • विदेश से प्रेषित धन पर कर: वित्त अधिनियम में यह प्रावधान है कि भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत विप्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme) के अंतर्गत भारत के बाहर से प्रेषित धन पर 5% की दर से कर देना होगा। हालाँकि यदि प्रेषित धन शैक्षिक ऋण के रूप में है, तो कर की दर 0.5% होगी। यह 1 अक्तूबर, 2020 से प्रभावी होगा।

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राजकोषीय समेकन की समीक्षा हेतु 15वें वित्त आयोग द्वारा समिति का गठन 

15वें वित्त आयोग ने सामान्य सरकार (यानी केंद्र और राज्य सरकारों) के लिये राजकोषीय समकेन संबंधी रोडमैप की समीक्षा के लिये समिति का गठन किया। राजकोषीय समकेन उन नीतियों को कहा जाता है जो कि सरकार के घाटों और ऋण को कम करने के लिये लक्षित होती हैं। समिति के संदर्भ की शर्तें निम्नलिखित हैं:

  • केंद्र, समग्र राज्यों, सामान्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिये घाटे और ऋण की परिभाषा का सुझाव देना (इस उद्देश्य के लिये समिति को सभी स्पष्ट और औसत दर्जे की देनदारियों को ध्यान में रखना चाहिये और ऋण व घाटे की परिभाषा के बीच स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिये)। 
  • सामान्य सरकार के ऋण और समेकित सार्वजनिक क्षेत्र के ऋण तक पहुँचने के लिये सिद्धांतों को निर्धारित करना, इसके लिये डबल काउंटिंग से बचने हेतु उपयुक्त प्रविधि निर्धारित करना।  
  • आकस्मिक देनदारियों को परिभाषित करना, ऐसी देनदारियों की मात्रात्मक माप प्रदान करना (जहाँ भी संभव हो) और उन शर्तों को निर्दिष्ट करना जिनके अंतर्गत आकस्मिक देनदारियां स्पष्ट देनदारियाँ बनेंगी।
  • इन परिभाषाओं के आधार पर विभिन्न स्तरों पर घाटे और ऋण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना।
  • वर्ष 2021-26 की अवधि के लिये केंद्र, राज्यों और सामान्य सरकार के लिये राजकोषीय समेकन रोडमैप का सुझाव देना तथा निष्कर्षों के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिये परिदृश्यों का निर्माण करना।

समिति में निम्न शामिल हैं: 

(i) श्री एन. के. सिंह अध्यक्ष के रूप में
(ii) डॉ. अनूप सिंह और श्री ए. एन. झा, 15 वें वित्त आयोग के सदस्य 
(iii) नियंत्रक महालेखाकार और कैग में से प्रत्येक का एक प्रतिनिधि 
(iv) संयुक्त सचिव (बजट), वित्त मंत्रालय 
(v) अतिरिक्त मुख्य सचिव, तमिलनाडु 
(vi) प्रमुख सचिव, पंजाब 
(vii) दो बाह्य विशेषज्ञ डॉ. साजिद जेड. चिनॉय और डॉ. प्राची मिश्रा।

सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय 

केंद्रीय कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों (Public Sector Bank- PSB) के चार PSB में विलय को मंजूरी दे दी है। यह विलय 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी होगा। PSBs द्वारा बड़े पैमाने पर उच्च क्षमता हासिल करने हेतु वित्त मंत्री ने अगस्त 2019 में घोषणा की थी।  जिन बैंकों का विलय किया जाना है, वे इस प्रकार हैं: 

  • ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलय किया जाएगा;
  • सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में विलय किया जाएगा;
  • इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय; तथा
  • आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय किया जाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने वर्चुअल करेंसियों को रेगुलेट करने वाले RBI के सर्कुलर को रद्द किया

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) द्वारा अप्रैल 2018 में आनुपातिकता के आधार पर वर्चुअल करेंसियों के संबंध में जारी एक सर्कुलर को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया।
    • सर्कुलर में कंपनियों को वर्चुअल करेंसियों के उपयोग करने या वर्चुअल करेंसियों के लेन-देन हेतु किसी व्यक्ति या कंपनी को सेवाएँ प्रदान करने से प्रतिबंधित किया गया था।
  • वर्चुअल करेंसी किसी वैल्यू का कारोबार करने योग्य डिजिटल प्रारूप है जिसे एक्सचेंज के माध्यम के रूप में या स्टोर ऑफ वैल्यू या यूनिट ऑफ एकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे लीगल टेंडर का दर्जा नहीं दिया गया है।
    • लीगल टेंडर की गारंटी केंद्र सरकार देती है और सभी पक्ष उसे भुगतान के माध्यम के रूप में मानने के लिये कानूनन बाध्य होते हैं। 
  • न्यायालय ने कहा कि जो भी देश की वित्तीय प्रणाली के लिये खतरा हो सकता है, वह RBI की नियामक शक्तियों के दायरे में आता है। भले ही वह गतिविधि क्रेडिट या भुगतान प्रणाली का हिस्सा है या नहीं।
  • न्यायालय ने माना कि RBI ने इस बात का कोई साक्ष्य नहीं दिया है कि वर्चुअल करेंसियों ने इसके द्वारा विनियमित संस्थाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
  • इसके अलावा यह भी कहा गया कि नवंबर 2017 में गठित अंतर-मंत्रालयी समिति का भी यही मानना था कि प्रतिबंध एक अंतिम उपाय हो सकता है और नियामक उपायों के माध्यम से इसे प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  • इन पर विचार करते हुए न्यायालय ने यह माना कि RBI द्वारा वर्चुअल करंसियों से निपटने के लिये रेगुलेटेड संस्थाओं को प्रतिबंधित करने की कार्रवाई आनुपातिक नहीं थी और इसे उपरोक्त निर्देश से अलग रखा जाना चाहिये।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का पुनर्पूंजीकरण 

  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने वर्ष 2020-21 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks- RRB) के पुनर्पूंजीकरण की योजना को जारी रखने को मंजूरी दी। RRB मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत उद्यमों की ऋण और बैंकिंग आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  • वर्ष 2011 में RRB के पुनर्पूंजीकरण के लिये एक योजना को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था और वर्ष 2019-20 तक इसके लिये 2,900 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई थी।

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RBI भुगतान एग्रीगेटर्स और गेटवे के नियमन संबंधी दिशा-निर्देश 

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने देश में भुगतान समूहक (Payment Aggregator) और गेटवेज़ के विनियमन के लिये दिशा-निर्देश जारी किये।
  • भुगतान समूहक वे इकाइयाँ होती हैं जो व्यापारियों और ग्राहकों के बीच भुगतान की सुविधा प्रदान करती हैं। इस प्रक्रिया में वे ग्राहकों से भुगतान प्राप्त करती हैं और एक अवधि के बाद इन भुगतानों के समूहन को व्यापारियों को हस्तांतरित करती हैं। भुगतान समूहक एक बैंक या एक गैर-बैंकिंग इकाई हो सकती है।
  • पेमेंट गेटवे ऐसी संस्थाएँ हैं जो ऑनलाइन भुगतान की सुविधा के लिये प्रौद्योगिकी ढाँचा प्रदान करती हैं। वे किसी भी तरह के फंड को संभालने में संलग्न नहीं होतीं।

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कॉरपोरेट मामले

दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2020 

संसद ने दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2020 [Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2020] पारित कर दिया। यह दिसंबर 2019 में दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 में संशोधन हेतु जारी अध्यादेश का स्थान लेता है। विधेयक की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • प्रस्ताव की प्रक्रिया को शुरू करने के लिये क्रेडिटर्स हेतु न्यूनतम सीमा: संहिता के अंतर्गत लेनदार (Creditors) दिवालियापन समाधान की प्रक्रिया की शुरुआत कर सकते हैं, अगर देनदार की बकाया राशि न्यूनतम एक लाख रुपए है। वित्तीय लेनदारों की कुछ विशेष श्रेणियों के लिये न्यूनतम सीमा तय करने हेतु इस प्रावधान में संशोधन करता है। रियल एस्टेट परियोजनाओं के मामले में रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया शुरू करने के लिये किसी परियोजना के कम-से-कम 100 एलॉटीज़ (जिन व्यक्तियों को प्लॉट, अपार्टमेंट या बिल्डिंग अलॉट हुई है या बेची गई है) या कुल एलॉटीज़ के 10% सदस्यों (इनमें से जो भी कम हो) को संयुक्त रूप से आवेदन करना होगा
  • पूर्व के अपराधों के लिये लायबिलिटी: विधेयक में कहा गया है कि यदि NCLT एक बार किसी दिवालिया (Insolvent) कंपनी के लिये प्रस्ताव योजना को मंज़ूर कर देता है तो उसे दिवाला समाधान की प्रक्रिया से पहले के अपराधों के लिये जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। विधेयक में उसे उसकी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार भी दिया गया है (जैसे संपत्ति की कुर्की या उसे जब्त करना, रिटेंशन या सीजर)। यह अधिकार तभी मिलेगा, जब प्रस्ताव योजना के कारण कंपनी के प्रबंधन या नियंत्रण में कोई परिवर्तन होता है। डिफॉल्ट करने वाले अधिकारियों या अपराध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कंपनी से जुड़े लोगों को ही जिम्मेदार माना जाएगा। 
  • महत्त्वपूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति को रोका नहीं जाएगा: विधेयक में कहा गया है कि रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल यह आदेश दे सकता है कि उन विशिष्ट वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति स्थगन अवधि के दौरान रोकी नहीं जा सकती, जो कि कॉरपोरेट देनदार के कामकाज के लिये महत्त्वपूर्ण है (स्थगन अवधि उस समय अवधि को कहते हैं जब NCLT लोगों को कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक सकती है, जैसे मुकदमे दायर करना या मुकदमे जारी रहना, अदालती आदेशों का पालन या संपत्ति की रिकवरी)। ये प्रावधान उन वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होंगे, जिन्हें कंपनी की वैल्यू को संरक्षित रखने और उसके कामकाज करने के लिये महत्त्वपूर्ण माना जाता है। महत्त्वपूर्ण वस्तुओं और सेवाओं के आपूर्तिकर्त्ता आपूर्ति रोक सकते हैं, अगर: 
    (i) अगर कंपनी ने स्थगन अवधि के दौरान आपूर्ति के बकाया का भुगतान नहीं किया है, या
    (ii) कुछ विशेष स्थितियों में जिन्हें निर्दिष्ट किया जा सकता है। 

संसद में विधेयक के पारित होने से पहले वित्त संबंधी स्थायी समिति ने 4 मार्च, 2020 को विधेयक पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समिति ने सुझाव दिया था कि विधेयक से महत्त्वपूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति वाले प्रावधान को हटा दिया जाना चाहिये। उसने कहा कि हालाँकि इस प्रावधान का उद्देश्य IBC की प्रक्रिया को सहज बनाना और कंपनी को पुनर्जीवित करना है, फिर भी ऐसा करने के लिये आपूर्तिकर्त्ता पर प्रतिबंधक शर्तें नहीं लगाई जा सकतीं। उल्लेखनीय है कि समिति के इस सुझाव को संसद ने विधेयक को पारित करने के दौरान मंजूर नहीं किया। 

कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2020  

लोकसभा में प्रस्तुत कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2020 (Companies (Amendment) Bill, 2020), कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) में संशोधन करता है। विधेयक की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • उत्पादक कंपनियाँ: 2013 के अधिनियम के अंतर्गत, कंपनी अधिनियम, 1956 (Companies Act, 1956) के कुछ प्रावधान उत्पादक कंपनियों पर लागू होते हैं। इनमें उनकी सदस्यता, बैठकों के संचालन और लेखाओं के रखरखाव से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। उत्पादक कंपनियों में ऐसी कंपनियाँ शामिल हैं जो कि कृषि उत्पादों का उत्पादन, विपणन और बिक्री करती हैं तथा कुटीर उद्योगों के उत्पादों की बिक्री करती हैं। विधेयक इन प्रावधानों को हटाता है और अधिनियम में उत्पादक कंपनियों के लिये ऐसे ही प्रावधानों वाला एक नया अध्याय जोड़ता है। 
  • अपराधों में परिवर्तन: विधेयक तीन परिवर्तन करता है।
    • पहला, वह कुछ अपराधों के लिये जुर्माने को हटाता है। उदाहरण के लिये वह अधिनियम का उल्लंघन करते हुए एक श्रेणी के शेयर होल्डर्स के अधिकारों में बदलाव करने पर लगने वाले जुर्माने को हटाता है। उल्लेखनीय है कि जहाँ किसी निर्दिष्ट जुर्माने का उल्लेख नहीं है, वहाँ अधिनियम 10,000 रुपए तक के जुर्माने को निर्दिष्ट करता है जो कि डीफॉल्ट जारी रखने तक प्रतिदिन 1,000 रुपए तक बढ़ाया जा सकता है।
    • दूसरा, वह कुछ अपराधों पर कैद की सजा को हटाता है। उदाहरण के लिये विधेयक उन कंपनियों पर लागू होने वाले तीन साल के कारावास को हटाता है जो कि अधिनियम का अनुपालन किये बिना अपने शेयर्स को बाय-बैक करती हैं।
    • तीसरा, वह कुछ अपराधों में देय जुर्माने की राशि को कम करता है। उदाहरण के लिये अब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनियों में वार्षिक रिटर्न फाइल न करने पर पाँच लाख रुपए की बजाय दो लाख रुपए का जुर्माना भरना होगा। 
  • निगम सामाजिक दायित्त्व (CSR): अधिनियम के अंतर्गत एक निर्दिष्ट राशि के संपति, कारोबार या लाभ कमाने वाली कंपनियों से निगम सामाजिक दायित्त्व (Corporate Social Responsibility- CSR) समिति बनाने और पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अपने औसत शुद्ध लाभ का 2% अपनी CSR नीति पर खर्च करने की अपेक्षा की जाती है। विधेयक उन कंपनियों को CSR समितियाँ बनाने से छूट देता है जिनकी CSR देनदारी प्रतिवर्ष अधिकतम 50 लाख रुपए है। इसके अतिरिक्त किसी वित्तीय वर्ष में अपनी CSR बाध्यता से अधिक धनराशि खर्च करने पर अगले वित्तीय वर्ष की CSR बाध्यता में इसे समायोजित कर सकती है।  
  • विदेशी क्षेत्राधिकारों में प्रत्यक्ष लिस्टिंग: विधेयक केंद्र सरकार को इस बात का अधिकार देता है कि वह सार्वजनिक कंपनियों की कुछ श्रेणियों को विदेशी क्षेत्राधिकारों में प्रतिभूतियों की श्रेणियों में लिस्टेट करने की अनुमति दे सकती है। 

निगम सामाजिक दायित्व (CSR) पर मसौदा नियम 

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने सार्वजनिक टिप्पणियों के लिये कंपनी (निगम सामाजिक दायित्व नीति) संशोधन नियम, 2020 (Companies (Corporate Social Responsibility Policy) Amendment Rules, 2020) जारी किये। ये नियम कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) के अंतर्गत जारी किये गए 2014 के नियमों में संशोधन करते हैं। अधिनियम के अंतर्गत कुछ कंपनियों को अपनी CSR नीतियों पर पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अपने औसत शुद्ध लाभ का 2% खर्च करना पड़ता है। मसौदा नियमों की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • CSR की परिभाषा: 2014 के नियमों के अनुसार, निगम सामाजिक दायित्व (Corporate Social Responsibility- CSR) अधिनियम की अनुसूची 7 के अंतर्गत की गई गतिविधियों से संबंधित परियोजनाएँ होती हैं (जैसे प्रधानमंत्री राहत कोष)। मसौदा नियम उन गतिविधियों को CSR गतिविधियों के दायरे से बाहर करता है जिनसे कंपनी के कर्मचारी और उनके परिवार लाभान्वित होते हैं। हालाँकि कंपनी के अधिकतम 25% कर्मचारियों को लाभान्वित करने वाली गतिविधियाँ CSR के लिये पात्र होंगी
  • CSR का कार्यान्वयन: 2014 के नियमों के अंतर्गत एक कंपनी: 
    (i) स्वयं अपने द्वारा 
    (ii) एक धर्मार्थ कंपनी (अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत), पंजीकृत ट्रस्ट या कंपनी द्वारा स्थापित सोसायटी, या 
    (iii) एक धर्मार्थ कंपनी, पंजीकृत ट्रस्ट या सरकार द्वारा अथवा कानून के जरिये स्थापित पंजीकृत सोसायटी के माध्यम से CSR गतिविधियाँ संचालित कर सकती है। यदि बोर्ड किसी अन्य धर्मार्थ कंपनी, पंजीकृत ट्रस्ट या पंजीकृत सोसायटी का उपयोग करने का निर्णय लेता है, तो उस संस्था के पास ऐसी CSR परियोजना को शुरू करने का तीन साल का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिये ।
    • मसौदा नियम के अनुसार, कंपनी केवल पंजीकृत धर्मार्थ कंपनी के माध्यम से, या कानून द्वारा स्थापित इकाई के माध्यम से ही CSR गतिविधियों का संचालन कर सकती है। ये प्रावधान उन CSR परियोजना पर लागू नहीं होंगे जिन्हें प्रस्तावित मसौदा नियमों से पहले अनुमोदित किया गया था
  • बोर्ड द्वारा निगरानी: मसौदा नियम, एक और नियम जोड़ते हैं और कहते हैं कि  कंपनी के बोर्ड को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि CSR गतिविधियों के अंतर्गत वितरित धन का उपयोग अनुमोदित योजनाओं के अनुसार किया जाता है। यह भी सुनिश्चित करना चाहिये  कि CSR परियोजना तीन वर्षों के भीतर कार्यान्वित की जाए
  • CSR व्यय: 2014 के नियम यह निर्दिष्ट करते हैं कि किसी कंपनी द्वारा अपनी CSR गतिविधियों के माध्यम से उत्पन्न अधिशेष को व्यावसायिक लाभ नहीं माना जाएगा। मसौदा नियमों में कहा गया है कि CSR परियोजना से प्राप्त किसी भी अधिशेष को या तो उसी परियोजना के लिये रखा जाना चाहिये  या अनस्पेंड CSR खाते में हस्तांतरित किया जाना चाहिये ।

उल्लेखनीय है कि एक अधिसूचना द्वारा सरकार ने अनुसूची 7 की गतिविधियों की सूची का विस्तार किया है और उसमें कोविड-19 से संबंधित गतिविधियों पर व्यय को शामिल किया है (स्वास्थ्य सेवा और आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने सहित)। इसमें नए गठित आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं राहत कोष के योगदान भी शामिल हैं।

NCLAT की न्यायपीठ की स्थापना 

  • कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (National Company Law Tribunals- NCLT) के पास कंपनियों से जुड़े किसी भी विवाद को सुनने और अन्य मामलों को तय करने की शक्ति है, जैसे याचिकाओं को निपटाना।
  • न्यायाधिकरण दिवालिया और दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) के अंतर्गत मामलों की भी सुनवाई करता है। NCLT के आदेश के विरुद्ध राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (National Company Law Appellate Tribunal- NCLAT) में अपील की जा सकती है।
  • केंद्र सरकार ने चेन्नई मे NCLAT की एक पीठ की स्थापना हेतु अधिसूचना जारी की है। पीठ NCLT के आदेशों के विरुद्ध मामलों की सुनवाई करेगी, जिसके अधिकार क्षेत्र में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, लक्षद्वीप और पुद्दुचेरी क्षेत्र शामिल हैं। अन्य NCLAT के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई दिल्ली स्थित NCLAT की मुख्य पीठ द्वारा की जाएगी।

स्वास्थ्य

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेन्सी (संशोधन) विधेयक, 2020 

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेन्सी (संशोधन) विधेयक, 2020 लोकसभा में पारित कर दिया गया। विधेयक मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेन्सी अधिनियम, 1971 में संशोधन करता है। इस एक्ट में पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टीशनर्स द्वारा कुछ स्थितियों में गर्भपात से संबंधित प्रावधान हैं। विधेयक गर्भावस्था को समाप्त करने की परिभाषा को इसमें शामिल करता है। इसका अर्थ चिकित्सा या शल्य चिकित्सा पद्धतियों से गर्भावस्था को समाप्त करने की प्रक्रिया है।

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राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक, 2019 

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक, 2019 (National Commission for Homoeopathy Bill, 2019) को राज्यसभा ने मार्च, 2020 में पारित कर दिया। यह विधेयक होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 (Homoeopathy Central Council Act, 1973) को रद्द करता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति ने नवंबर 2019 में विधेयक की समीक्षा की और अपनी रिपोर्ट सौंपी। राज्यसभा द्वारा पारित विधेयक में स्थायी समिति के कुछ सुझावों को शामिल किया गया है।

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आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान विधेयक, 2020 

आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान विधेयक, 2020 (Institute of Teaching and Research in Ayurveda Bill, 2020) लोकसभा में मार्च में पारित कर दिया गया। विधेयक तीन आयुर्वेद संस्थानों का विलय कर एक संस्थान- आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान बनाने का प्रयास करता है। विधेयक इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करता है। विधेयक की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विलय: जिन मौजूदा संस्थानों का विलय किया जाएगा, वे हैं:
    (i) स्नातकोत्तर शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, जामनगर 
    (ii) श्री गुलाब कुंवर बा आयुर्वेद महाविद्यालय, जामनगर 
    (iii) भारतीय आयुर्वेदिक फार्मास्यूटिकल्स विज्ञान संस्थान, जामनगर। प्रस्तावित संस्थान गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर के परिसर में स्थित होगा।
  • संस्थान का उद्देश्य: विधेयक के अनुसार, संस्थान के निम्नलिखित उद्देश्य होंगे: 
    (i) आयुर्वेद और फार्मेसी की मेडिकल शिक्षा में शिक्षण के पैटर्न विकसित करना। 
    (ii) आयुर्वेद की सभी शाखाओं में लोगों को प्रशिक्षित करने के लिये शिक्षण केंद्रों को एक साथ लाना। 
    (iii) आयुर्वेद की स्नातकोत्तर शिक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करना ताकि इस क्षेत्र में विशेषज्ञों और मेडिकल शिक्षक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों। 
    (iv) आयुर्वेद के क्षेत्र में गहन अध्ययन और अनुसंधान करना।
  • संस्थान के कार्य: संस्थान के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) आयुर्वेद की स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा (फार्मेसी सहित) का प्रावधान। 
    (ii) आयुर्वेद में स्नातक और स्नातकोत्तर अध्ययन के लिये पाठ्यक्रम और करिकुलम निर्दिष्ट करना। 
    (iii) आयुर्वेद की विभिन्न शाखाओं में अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना। 
    (iv) आयुर्वेद और फार्मेसी में परीक्षाएँ संचालित करना, डिग्री, डिप्लोमा और दूसरे डिस्टिंक्शंस और टाइटिल देना। 
    (v) आयुर्वेद के सपोर्टिंग स्टाफ जैसे नर्सों के लिये उत्तम दर्जे के कॉलेज और अस्पताल चलाना।

राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को शामिल करने को मंजूरी 

केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों (आयुष्मान भारत का घटक) को शामिल करने को मंजूरी दी। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सरकार 1.5 लाख मौजूदा उप स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में अपग्रेड करेगी। इनमें से 10% केंद्रों का संचालन आयुष मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। वर्ष 2019-20 से वर्ष 2023-24 तक की अवधि में इन आयुष केंद्रों के संचालन के लिये कुल व्यय 3,399 करोड़ रुपए होगा।

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खनन

खनिज कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 

खनिज कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 [Mineral Laws (Amendment) Bill, 2020] संसद में पारित कर दिया गया। यह विधेयक 10 जनवरी, 2020 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है। यह खान और खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) अधिनियम, 1957 [Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957] और कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 [Coal Mines (Special Provisions) Act, 2015] में संशोधन करता है।

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खनिज रियायत संशोधन नियम, 2020 

खान मंत्रालय ने खनिज (परमाणु और हाइड्रो कार्बन्स ऊर्जा खनिजो को छोड़कर) रियायत संशोधन नियम, 2020 (Minerals Concession Amendment Rules, 2020) अधिसूचित किये। नियम खनिज (परमाणु और हाइड्रो कार्बन्स एनर्जी मिनरल्स को छोड़कर) रियायत नियम, 2016 में संशोधन का प्रयास करते हैं।

संशोधनों में खनिज कानून (संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्रावधानों को प्रभावी करने का प्रस्ताव है। अधिनियम में प्रावधान है कि समाप्त होने वाले खनन पट्टों के नए पट्टेदार (Lessee) को दो वर्षों के लिये वैधानिक मंजूरियों का हस्तांतरण किया जाएगा। यह प्रावधान कोयला, लिग्नाइट और परमाणु खनिजों के अलावा अन्य खनिजों पर लागू होता है। यह इन खनिजों के उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित करना चाहता है। 


परिवहन

प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक, 2020 

प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक, 2020 (Major Port Authorities Bill, 2020) लोकसभा में पेश किया गया। विधेयक भारत में प्रमुख बंदरगाहों के विनियमन, संचालन और उनकी योजना से संबंधित प्रावधान बनाने तथा उन्हें अधिक स्वायत्तता देने का प्रयास करता है। बिल प्रमुख बंदरगाह ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (Major Port Trusts Act, 1963) का स्थान लेता है। विधेयक की प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एप्लीकेशन: विधेयक चेन्नई, कोच्चि, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, कांडला, कोलकाता, मुंबई, न्यू मैंगलोर, मोरमुगाव, पारादीप, वी.ओ. चिदंबरनार और विशाखापट्टनम के प्रमुख बंदरगाहों पर लागू होगा। 
  • प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण बोर्ड: 1963 के अधिनियम के अंतर्गत सभी प्रमुख बंदरगाहों का प्रबंधन संबंधित बंदरगाह ट्रस्ट बोर्ड द्वारा किया जाता है जिसके सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किये जाते हैं। बिल में प्रत्येक प्रमुख बंदरगाह पर प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण बोर्ड के गठन का प्रावधान किया गया है। ये बोर्ड मौजूदा पोर्ट ट्रस्ट का स्थान लेंगे।
  • बोर्ड के वित्तीय अधिकार: 1963 के अधिनियम के अंतर्गत बोर्ड को कोई भी ऋण लेने के लिये केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी लेनी होती है। विधेयक के अंतर्गत अपने पूंजीगत और कार्यशील व्यय की जरूरतों को पूरा करने के लिये बोर्ड निम्नलिखित से ऋण प्राप्त कर सकता है:  
    1. भारत का अधिसूचित बैंक या वित्तीय संस्थान, या
    2. भारत के बाहर का कोई वित्तीय संस्थान जो कि सभी कानूनों का अनुपालन करता हो। हालाँकि अपने पूंजीगत रिजर्व के 50% से अधिक के ऋणों के लिये बोर्ड को केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति लेनी होगी। 
  • दरों का निर्धारण: वर्तमान में प्रमुख बंदरगाहों हेतु 1963 के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित टैरिफ प्राधिकरण, बंदरगाहों पर उपलब्ध परिसंपत्तियों और सेवाओं की दर निर्धारित करता है। विधेयक के अंतर्गत बोर्ड या बोर्ड द्वारा नियुक्त समिति इन दरों को निर्धारित करेगी। वे निम्नलिखित के लिये दरों को निर्धारित कर सकते हैं:
    (i) सेवाएँ जो बंदरगाहों पर संपन्न की जाती हैं। 
    (ii) बंदरगाहों की परिसंपत्तियों तक पहुंच और उनका उपयोग। 
    (iii) विभिन्न श्रेणियों की वस्तुएँ और पोत इत्यादि।
  • न्याय निर्णयन बोर्ड: विधेयक केंद्र सरकार द्वारा एड्जुकेटरी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव रखता है। बोर्ड में एक पीठासीन अधिकारी और दो सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी।

सड़क परिवहन मंत्रालय ने अनेक प्रावधानों में संशोधन हेतु मसौदा नियमों को अधिसूचित किया 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन नियम, 1989 (Motor Vehicles Rules, 1989) में विभिन्न संशोधनों के संबंध में सुझाव आमंत्रित किये हैं। इन नियमों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Rules, 1988) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। प्रस्तावित मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • ड्राइविंग लाइसेंस और मोटर वाहन का राष्ट्रीय रजिस्टर: केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस के राष्ट्रीय रजिस्टर और मोटर वाहनों के राष्ट्रीय रजिस्टर के लिये एक पोर्टल को अधिसूचित और मेनटेन करेगी।
    • लाइसेंस संबंधी पोर्टल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का एक भंडार होगा जिसमें प्रत्येक राज्य में जारी और नवीनीकृत लाइसेंस से संबंधित सभी विवरण होंगे।
    • वाहन संबंधी पोर्टल प्रत्येक राज्य में पंजीकृत मोटर वाहनों से संबंधित सभी विवरणों वाले इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का भंडार होगा।
    • दोनों पोर्टल्स पर डेटा एक मशीन रीडेबल इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट करने योग्य, साझा करने योग्य प्रारूप में होगा, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए। ये रिकॉर्ड ऐसे संगठनों द्वारा एक्सेस किये जा सकते हैं जिन्हें सरकार उपयुक्त माने।
  • लर्नर्स लाइसेंस: मसौदा नियमों में लर्नर्स लाइसेंस लेने का तरीका बदल गया है। नए प्रावधान के अनुसार, ऐसे लाइसेंस के लिये इलेक्ट्रॉनिक रूप में आवेदन करना होगा। उदाहरण के लिये आवेदक अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से सुरक्षित ड्राइविंग पर एक ट्यूटोरियल ले सकता है।
  • डिफेक्टिव वाहन और रिकॉल: एक मोटर वाहन का मालिक, एक परीक्षण एजेंसी या कोई अन्य व्यक्ति, जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, एक विशेष प्रकार के मोटर वाहन को 'डिफेक्टिव मोटर वाहन' के रूप में निर्दिष्ट करने के लिये नामित अधिकारी को आवेदन कर सकता है। इनमें ऐसे वाहन शामिल हैं जिनमें एक डिफेक्टिव घटक या सॉफ्टवेयर है। यदि नामित अधिकारी के पास यह मानने के लिये उचित आधार हैं कि मोटर वाहन डिफेक्टिव है तो वह मोटर वाहन के निर्माता, आयातक या रेट्रोफिटर को रीकॉल संबंधी नोटिस जारी कर सकता है
  • डिफेक्ट का मतलब किसी भी वाहन, घटक या सॉफ्टवेयर में दोष है जो सड़क सुरक्षा या पर्यावरण के लिये जोखिम पैदा करता है या जोखिम पैदा कर सकता है। यह एक ही डिज़ाइन या विनिर्माण के वाहनों के समूह या एक ही प्रकार और विनिर्माण के उपकरण में मौजूद होना चाहिये। यह डिज़ाइन, विनिर्माण या संयोजन चरण में उत्पन्न होना चाहिये 
  • जांच: सभी वाहन जांच एजेंसियों को निर्दिष्ट मानकों, विशेष रूप से स्वचलित वाहन उद्योग मानकों (Automotive Industry Standards- AIS) के प्रकाशन की तारीख से एक वर्ष के भीतर उनका अनुपालन करना चाहिये । जाँच एजेंसियों की मान्यता, पंजीकरण और विनियम AIS में निर्धारित गुणवत्ता नियंत्रण और प्रक्रिया के अनुसार होगा, जैसा कि अधिसूचित है। 

गृह मामले 

राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2020  

लोकसभा में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 (National Forensic Sciences University Bill, 2020) पेश किया गया। विधेयक की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विश्वविद्यालय की स्थापना: विधेयक गुजरात फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधी नगर (गुजरात फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2008 के अंतर्गत स्थापित) और लोकनायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंसेज़, नई दिल्ली को गुजरात स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज़ विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करता है। विधेयक इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करता है। विधेयक 2008 के अधिनियम को रद्द करता है। विश्वविद्यालय के परिसरों में दोनों विश्वविद्यालयों के परिसर और दूसरे अन्य परिसर को अधिसूचित किया जा सकता है।
  • संयोजन: विधेयक में विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकार का प्रावधान है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) विश्वविद्यालय का कुलाधिपति, जो कि प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा। 
    (ii) न्यायालय, जो कि विश्वविद्यालय की व्यापक नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा। 
    (iii) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, जो कि मुख्य कार्यकारी निकाय होगी। 
    (iv) शैक्षणिक परिषद, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नीतियों को निर्दिष्ट करेगी
  • उद्देश्य: विश्वविद्यालय के मुख्य उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: 
    • भारत में आपराधिक न्याय संस्थानों को मजबूत करने के लिये एप्लाइड बिहेवियरल साइंस स्टडीज़, कानून और दूसरे संबद्ध क्षेत्रों के सहयोग से फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में एकेडमिक लर्निंग को आसान बनाना और उसे बढ़ावा देना। 
    • फॉरेंसिक साइंस, एप्लाइड बिहेवियरल साइंस स्टडीज़ और कानून में अनुसंधान और एप्लाइड एप्लीकेशंस को बढ़ावा देना। 
    • केंद्र और राज्य सरकारों के साथ सहयोग करना ताकि अनुसंधानों के जरिये जाँच, अपराध की पहचान करने और उसकी रोकथाम में सुधार किया जा सके।
    • अपराधों की जाँच के लिये नेशनल फॉरेंसिक डेटाबेस बनाने और उसके रखरखाव में केंद्र सरकार की मदद करना जिसमें DNA, फिंगरप्रिंट्स और साइबर सुरक्षा शामिल हैं।  

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 

लोकसभा में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 (Rashtriya Raksha University Bill, 2020) पेश किया गया। विधेयक की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विश्वविद्यालय की स्थापना: विधेयक रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, गुजरात [रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय विधेयक, 2009 (Raksha Shakti University Act, 2009) के अंतर्गत स्थापित] को गुजरात में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करता है। विधेयक इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करता है। विधेयक 2009 के अधिनियम को रद्द करता है
  • संयोजन: विधेयक में विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकारी का प्रावधान है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) शासी निकाय, जो कि विश्वविद्यालय की व्यापक नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करेगी। 
    (ii) कार्यकारी परिषद जो मुख्य कार्यकारी निकाय होगी। 
    (iii) शैक्षणिक परिषद जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नीतियों को निर्दिष्ट करेगी। 
  • उद्देश्य: विश्वविद्यालय के प्रमुख उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) सीखने और अनुसंधान में गतिशील औऱ उच्च मानदंड प्रदान करना। 
    (ii) कार्यशील वातावरण प्रदान करना जो कि पुलिसिंग में शैक्षणिक अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को समर्पित हो। 
    (iii) सार्वजनिक सुरक्षा प्रदान करना और उसे बढ़ावा देना। 

संविधान (125वाँ संशोधन) विधेयक, 2019 

गृह मामलों संबंधी स्थायी समिति ने संविधान (125वाँ संशोधन) विधेयक, 2019 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। विधेयक संविधान की छठी अनुसूची से संबंधित प्रावधानों में संशोधन करता है। छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है। मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सदस्यता: छठी अनुसूची असम (3), मेघालय (3), त्रिपुरा (1) और मिजोरम (3) के दस आदिवासी क्षेत्रों की सूची प्रदान करती है। इनमें से प्रत्येक आदिवासी क्षेत्र एक स्वायत्त जिला है। प्रत्येक स्वायत्त जिले में एक स्वायत्त जिला परिषद (Autonomous District Council- ADC) है। छठी अनुसूची के अनुसार प्रत्येक ADC में कम-से-कम 30 सदस्य होने चाहिये ।
    • विधेयक असम में बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद को छोड़कर सभी ADC की सदस्यता बढ़ाता है। उदाहरण के लिये विधेयक असम में कार्बी आंगलोंग जिला परिषद की सदस्यता को 30 से बढ़ाकर 50 करता है। 
  • असम, मिजोरम और त्रिपुरा के संबंध में समिति ने कहा कि सदस्यता में बढ़ोतरी किसी भी निष्पक्ष मानदंड पर आधारित नहीं है जैसे- जनसंख्या या क्षेत्र। समिति ने कहा कि परिषदों की सदस्यता में वृद्धि या कमी कुछ तर्कसंगत मानदंडों के आधार पर होनी चाहिये ।
  • ग्राम और नगर परिषद: छठी अनुसूची में कहा गया है कि राज्यपाल एक स्वायत्त जिले को स्वायत्त क्षेत्रों में विभाजित कर सकता है जिनमें से प्रत्येक में एक क्षेत्रीय परिषद होती है। ऐसे जिलों और क्षेत्रों का प्रशासन क्रमशः जिला और क्षेत्रीय परिषदों द्वारा किया जाएगा। विधेयक इसमें  संशोधन करके, ग्राम परिषद (ग्रामीण क्षेत्रों के लिये) और नगर परिषद (शहरी क्षेत्रों के लिये) का भी प्रावधान करता है।
  • इसके अतिरिक्त जिला परिषद विभिन्न मुद्दों पर कानून बना सकती है जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं: 
    • कितनी ग्राम और निगम परिषदों की स्थापना की जाएगी और उनका गठन।
    • उनकी शक्तियाँ और कार्य। ये प्रावधान मेघालय पर लागू नहीं होंगे।
  • विधेयक में यह भी कहा गया है कि जिला, क्षेत्रीय, ग्राम और नगर परिषदों के सभी चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित किये जाएंगे। ये प्रावधान मेघालय में ग्राम या नगर परिषदों के लिये लागू नहीं होंगे, जब तक कि राज्यपाल द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाता है। समिति ने मेघालय सरकार के इस स्पष्टीकरण पर विचार किया कि ग्राम सभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के माध्यम से नहीं होते हैं। उसने कहा कि यह बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है और यह सुझाव दिया कि एक समय सीमा बताई जाए जिसमें मेघालय के लिये यह छूट हटा दी जाए।

जम्मू एवं कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश पर 37 राष्ट्रीय कानून लागू 

गृह मंत्रालय ने 37 केंद्रीय कानूनों (कुछ संशोधनों के साथ) को केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के लिये अधिसूचित किया। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 

(i) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (Civil Procedure Code, 1908)
(ii) आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973)
(iii) आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961)
(iv) भारतीय दंड संहिता, 1860 (Indian Penal Code, 1860)
(v) दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code,2016) 
(vi) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act, 1988) 
(vii) जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of People Act, 1950)। 

आदेश को जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है जो कि पूर्व जम्मू एवं कश्मीर राज्य को जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करता है। 


रक्षा

रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020 का ड्राफ्ट 

रक्षा मंत्रालय ने रक्षा खरीद प्रक्रिया, 2020 (Defence Procurement Procedure, 2020) का मसौदा जारी किया। DPP भारतीय रक्षा बलों के लिये हथियारों और उपकरणों की खरीद को अभिशासित करती है। मसौदा DPP, 2016 के DPP में संशोधन करती है जिसका लक्ष्य स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ाना और रक्षा उपकरणों की खरीद की समय-सीमा को कम करना है। 

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महिला एवं बाल विकास

बाल यौन अपराध संरक्षण नियम, 2020 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल यौन अपराध संरक्षण नियम, 2020 (Protection of Children from Sexual Offences Rules, 2020) के नियमों को अधिसूचित किया है। नियमों को बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Rules, 2012) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। अधिनियम यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से बच्चों के संरक्षण का प्रयास करता है। 

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महिला सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर स्थायी समिति  

मानव संसाधन विकास संबंधी स्थायी समिति ने महिला सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। समिति के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • कानून को मजबूत बनाना: समिति ने कहा कि महिलाओं के कल्याण के लिये कई कानून बनाए गए हैं। किंतु विधायी ढाँचों के बावजूद महिलाओं को असमानता, भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। समिति ने सुझाव दिये कि महिलाओं की सुरक्षा के लिये कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिये। कुछ तरीके जिनमें कानूनों के कार्यान्वयन में सुधार किया जा सकता है, उनमें शामिल हैं: 
    (i) 30 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना। 
    (ii) अभियुक्तों को जमानत देने से इनकार करना। 
    (iii) छह महीने के भीतर लंबित मामलों की सुनवाई
  • महिलाओं का प्रतिनिधित्व: समिति ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध का कारण यह है कि निर्णायक स्थितियों में उनका प्रतिनिधित्व कम है। उसने सरकार के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिये 33% आरक्षण का सुझाव दिया
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट: समिति ने कहा कि अगर समय पर न्याय मिले तो महिलाओं के खिलाफ अपराधों को कम किया जा सकता है। उसने कहा कि आंध्र प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के संबंध में कोई पुष्टि नहीं की है। समिति ने सुझाव दिया कि विधि विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिये  कि 1,800 फास्ट ट्रैक कोर्ट जल्द-से-जल्द चालू हों। इसके अतिरिक्त राज्यों में न्यायालयों का संतुलित बँटवारा होना चाहिये 
  • मानव तस्करी: समिति ने कहा कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिये कोई व्यापक कानून नहीं है। यह सुझाव दिया गया कि एक राष्ट्रीय तस्करी विरोधी ब्यूरो की स्थापना की जाए। यह पुलिस, गैर सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों से मिलकर बनाया जाना चाहिये । इसमें अंतर-राज्यीय तस्करी मामलों की जांच करने और अंतर्राष्ट्रीय निकायों के साथ तस्करी विरोधी प्रयासों को समन्वित करने की शक्ति होनी चाहिये। इसके अतिरिक्त तस्करी के शिकार लोगों को राहत व पुनर्वास प्रदान करने के लिये एक तस्करी राहत और पुनर्वास समिति का गठन किया जाना चाहिये
  • निर्भया फंड: समिति ने कहा कि निर्भया फंड के अंतर्गत देश में 32 परियोजनाओं और योजनाओं के लिये कुल राशि 7,436 करोड़ रुपए है। हालाँकि परियोजनाओं और योजनाओं के कार्यान्वयन के लिये संबंधित निकायों को केवल 2,647 रुपए का वितरण किया गया है। उसने सुझाव दिया कि परियोजनाओं और योजनाओं को समय पर लागू किया जाना चाहिये तथा धन का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिये। इसके अलावा फंड के अंतर्गत परियोजनाओं और योजनाओं की देखरेख कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जानी चाहिये ।

ग्रामीण विकास

मनरेगा की राज्यवार मजदूरी में संशोधन 

ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005) के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों के लिये राज्य-वार मजदूरी दर में संशोधन किया। यह अधिसूचना 1 अप्रैल, 2020 से लागू होगी। यह मजदूरी अंतिम बार मार्च 2019 में संशोधित की गई थी। उदाहरण के लिये आंध्र प्रदेश में मजदूरी की दर में 26 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जो वर्ष 2019 में 211 रुपए प्रतिदिन से बढ़कर वर्ष 2020 में 237 रुपए प्रतिदिन हो गई है। अरुणाचल प्रदेश में मजदूरी की दर में 13 रुपए की बढ़ोतरी हुई है जो कि वर्ष 2019 में 192 रुपए प्रतिदिन थी और वर्ष 2020 में 205 रुपए प्रतिदिन हो गई है।

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पर्यावरण और वन

मसौदा पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) ने मसौदा पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 (Draft Environment Impact Assessment Notification, 2020) जारी की। यह पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 का स्थान लेता है। यह नई अवसंरचना परियोजनाओं और मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार या आधुनिकीकरण पर कुछ शर्तों और नियमों को प्रस्तावित करती है। इन परियोजनाओं में बांध, खान, हवाई अड्डे और राजमार्ग शामिल हैं। प्रस्तावित अधिसूचना की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं: 

  • परियोजनाओं और गतिविधियों का वर्गीकरण: सभी अवसंरचना परियोजनाओं और गतिविधियों को उनके संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों तथा इस तरह के प्रभाव की सीमा के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। सभी परियोजनाओं को किसी भी निर्माण, इंस्टॉलेशन, इस्टैबलिशमेंट या ऐसी किसी भी गतिविधि को शुरू करने से पहले संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी लेनी होगी।
  • छूट: 2006 की अधिसूचना ‘सार्वजनिक परामर्श’ को उस प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करती है जिसके द्वारा परियोजना को डिज़ाइन करते समय स्थानीय प्रभावित व्यक्तियों और अन्य हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाता है। मसौदा अधिसूचना सार्वजनिक परामर्श से कुछ परियोजनाओं को छूट देती है। इनमें सभी भवन, निर्माण और क्षेत्र विकास परियोजनाएँ, अंतर्देशीय जलमार्ग, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार या चौड़ीकरण और सिंचाई परियोजनाओं का आधुनिकीकरण शामिल हैं
  • उल्लंघन: मसौदा अधिसूचना पर्यावरण उल्लंघन के संज्ञान के लिये चार तरीके प्रदान करती है। ये हैं: 
    (i) परियोजना प्रवर्तक का आवेदन। 
    (ii) किसी भी सरकारी प्राधिकरण द्वारा रिपोर्टिंग। 
    (iii) अप्रेज़ल समिति द्वारा मूल्यांकन के दौरान मिलने पर।
    (iv) विनियामक प्राधिकरण द्वारा आवेदन की प्रोसेसिंग के दौरान पाया गया कोई उल्लंघन।
  • उल्लंघन की रिपोर्ट एप्रेजल समिति को दी जाएगी, जो यह आकलन करेगी कि उल्लंघन के मामले पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन के अंतर्गत लगातार चलाए जा सकते हैं या नहीं। यदि मूल्यांकन नकारात्मक है, तो परियोजना बंद हो जाएगी। अन्यथा पारिस्थितिक क्षति के लिये परियोजना का मूल्यांकन किया जाएगा। इन परियोजनाओं को विलंब शुल्क देना होगा और कंपनी को पाँच वर्ष के लिये वैध बैंक गारंटी जमा करनी होगी। यह गारंटी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रेमेडिएल प्लान (पारिस्थितिक क्षति के लिये) की राशि के बराबर होगी। 

पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 में संशोधन 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 में संशोधन किया। अधिसूचना में संशोधन इस प्रकार हैं:

  • पर्यावरण मंजूरी का हस्तांतरण: खनिज कानून (संशोधन) अधिनियम, 2020 के साथ अधिसूचना से संबंधित प्रावधानों को अनुरूप बनाने हेतु उसमें कुछ संशोधन किये गए हैं। खनिज कानून (संशोधन) अधिनियम, 2020 वैधानिक पर्यावरणीय मंजूरियों (पूर्व पट्टेदार के पास) के हस्तांतरण का प्रावधान करता है। यह हस्तांतरण खनन लीज़ के प्राप्तकर्ता को किया जा सकता है जो कि खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत संपन्न होता है तथा नीलामी के माध्यम से चुना जा सकता है। यह दो साल की अवधि के लिये वैध होगा। इस प्रावधान को प्रभावी करने के लिये पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 में संशोधन किया गया है
  • पर्यावरणीय मंजूरी की शर्त से छूट: परंपरागत समुदायों के विचारों के मद्देनजर कुछ मामलों में पर्यावरणीय मंजूरी की शर्त से छूट दी गई है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) सड़क और पाइपलाइन्स जैसे प्रॉजेक्ट्स के लिये उत्खनन, सोर्सिंग या उधारी। 
    (ii) गाँव में व्यक्तिगत उपयोग या सामुदायिक कार्य के लिये ग्राम पंचायत में स्थित स्रोतों से रेत और मिट्टी निकालना। 
    (iii) सिंचाई या पेयजल के लिये कुएँ खोदना।

पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 में संशोधन 

पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 (Environment (Protection) Rules, 1986) में प्रावधान है कि केंद्र सरकार किसी उद्योग के स्थान या किसी क्षेत्र में कार्य करने पर प्रतिबंध लगा सकती है। हालाँकि सरकार इस बारे में सूचित करेगी और अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से 120 दिनों के भीतर सभी आपत्तियों पर विचार करेगी। इसके बाद केंद्र सरकार 545 दिनों के भीतर ऐसे उद्योगों के स्थान और किसी भी क्षेत्र में किसी भी प्रक्रिया या कार्य पर प्रतिबंध लगा सकती है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील जोन्स और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित अधिसूचना की वैधता की अवधि बढ़ाने के लिये पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 में संशोधन किया। अधिसूचना की वैधता 545 दिनों से बढ़ाकर 725 दिन कर दी गई है।  


विदेशी मामले 

अप्रवासी भारतीय विवाह पंजीकरण विधेयक, 2019 

विदेशी मामलों से संबंधित स्थायी समिति ने अप्रवासी भारतीय विवाह पंजीकरण विधेयक, 2019 (Registration of Marriage of Non-Resident Indian Bill, 2019) पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। विधेयक अप्रवासी भारतीयों के विवाह के पंजीकरण का प्रावधान करता है। 

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वाणिज्य और उद्योग

निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट के लिये योजना

(Remission of Duties or Taxes on Export Products-RoDTEP)

केंद्रीय कैबिनेट ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्कों व करों में छूट देने की योजना को मंजूरी दे दी है। योजना निर्यातित उत्पादों की विनिर्माण और वितरण की प्रक्रिया में लगने वाले करों और शुल्कों (केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों सहित) की प्रतिपूर्ति के लिये एक प्रणाली तैयार करती है। योजना विशेष रूप से उन करों और शुल्कों को कवर करेगी जो वर्तमान में किसी अन्य प्रणाली के अंतर्गत रिफंड नहीं किये जा रहे हैं। एक अंतर-मंत्रिस्तरीय समिति का गठन दरों और वस्तुओं के निर्धारण के लिये किया जाएगा, जिसके लिये योजना के अंतर्गत करों और शुल्कों की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

नागरिक उड्डयन में संशोधित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति 

केंद्रीय कैबिनेट ने नागरिक उड्डयन पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI) नीति में कुछ संशोधनों को मंजूरी दी है। वर्तमान में घरेलू अधिसूचित यात्री विमानों में 100% FDI की अनुमति है। अप्रवासी भारतीय (Non-Resident Indian- NRI) के लिये घरेलू अधिसूचित यात्री विमानों में ऑटोमैटिक रूट से 100% FDI की अनुमति है, जबकि अन्य के लिये यह सीमा अधिकतम 49% है। एयर इंडिया लिमिटेड के लिये FDI प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 49% से अधिक नहीं हो सकती। यह इस शर्त के अधीन है कि एयर इंडिया लिमिटेड पर भारतीय नागरिकों का स्वामित्व और प्रभावी नियंत्रण है। संशोधनों में ऑटोमैटिक रूट से एयर इंडिया लिमिटेड में NRI को 100% FDI  की अनुमति दी गई है। 


मीडिया और प्रसारण

सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) विधेयक, 2019 पर रिपोर्ट  

सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) विधेयक, 2019 [Cinematograph (Amendment) Bill, 2019] पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। यह विधेयक सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1954 [Cinematograph (Amendment) Bill, 2019] में संशोधन करता है। विधेयक निर्माता की लिखित अनुमति के बिना किसी फिल्म की प्रति बनाने या उसे प्रसारित करने के लिये रिकॉर्डिंग उपकरण के प्रयोग  करने पर प्रतिबंध लगाता है। अनुमति के बिना फिल्म की प्रतियाँ बनाने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष तक का कारावास या 10 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों भुगतने होंगे। समिति ने निम्नलिखित निष्कर्ष और सुझाव दिये:

  • विधेयक की जरूरत: फिल्मों की पायरेसी कॉपीराइट अधिनियम, 1957 (Copyright Act, 1957) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। कॉपीराइट अधिनियम के अंतर्गत ऐसे अपराधों की सजा में छह महीने से लेकर तीन वर्ष तक का कारावास शामिल है। समिति ने कहा कि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तावित संशोधनों की जरूरत नहीं थी क्योंकि ऐसे अपराध पहले ही दूसरे मौजूदा कानूनों के दायरे में आते हैं। इसके अतिरिक्त समिति ने फिल्म पायरेसी से निपटने के लिये कॉपीराइट एक्ट के मौजूदा प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन पर चिंता जाहिर की।
  • सजा की न्यूनतम अवधि और न्यूनतम जुर्माना: विधेयक में निर्दिष्ट अपराध के लिये तीन वर्ष तक के कारावास या 10 लाख रुपए तक के जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। समिति ने सुझाव दिया कि सजा की न्यूनतम अवधि और न्यूनतम जुर्माने को विधेयक में निर्दिष्ट किया जाना चाहिये ।
  • जुर्माने की अधिकतम राशि: समिति ने कहा कि विधेयक के अंतर्गत प्रस्तावित अधिकतम 10 लाख रुपए का जुर्माना बहुत मामूली है और इसे बढ़ाया जाना चाहिये। समिति ने अधिकतम जुर्माने की राशि को फिल्म की ऑडिटेड ग्रॉस प्रोडक्शन कॉस्ट का 5% से 10% तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। 
  • अपराध की प्रकृति: विधेयक में निर्दिष्ट अपराध की सजा में उस अपराध की प्रकृति (क्या वह अपराध जमानती है अथवा गैर जमानती) का उल्लेख नहीं है। समिति ने सुझाव दिया कि अस्पष्टता को दूर करने के लिये मंत्रालय को इस क्लॉज में अपराध की प्रकृति को निर्दिष्ट करने पर विचार करना चाहिये ।
  • उचित उपयोग का प्रावधान: उचित उपयोग से कॉपीराइट होल्डर की अनुमति लिये बिना कॉपीराइट वाली सामग्री का सीमित उपयोग किया जा सकता है। समिति ने कहा कि उचित उपयोग कॉपीराइट अधिनियम, 1952 के दायरे में आता है, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1954 के दायरे में नहीं। इसलिये उसने सुझाव दिया कि विधेयक में उचित उपयोग का प्रावधान शामिल होना चाहिये। ऐसे प्रावधान से उन लोगों को सुरक्षा मिलेगी जो कि गैर-व्यावसायिक उद्देश्य से फिल्मों की शॉर्ट क्लिप्स का इस्तेमाल करते हैं (जैसे सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिये)।

कपड़ा

कपास के लिये MSP संचालन के अंतर्गत नुकसान की प्रतिपूर्ति 

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने भारतीय कपास निगम (Cotton Corporation of India- CCI) (311 करोड़ रुपए) और महाराष्ट्र राज्य सहकारी कपास उत्पादक विपणन महासंघ लिमिटेड (Maharashtra State Co­operative Cotton Growers Marketing Federation Limited- MSCCGMFL) (1.6 करोड़ रुपए) को हुए नुकसान की भरपाई के लिये 313 करोड़ रुपए के खर्च को मंजूरी दी है। वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price- MSP) के अंतर्गत खरीदे गए कपास की बिक्री पर यह नुकसान हुआ था। MSCCGMFL को इसलिये मुआवजा दिया जा रहा है क्योंकि वह MSP संचालन के लिये महाराष्ट्र में CCI हेतु एक उप-एजेंट के रूप में काम कर रहा था। 


कृषि

उर्वरक सब्सिडी की प्रणाली

रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थायी समिति ने ‘उर्वरक सब्सिडी की प्रणाली’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। केंद्र सरकार उर्वरकों के विनिर्माण और आयातकों को सब्सिडी प्रदान करती है ताकि किसान सस्ती कीमतों पर उर्वरक खरीद सकें। समिति के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सब्सिडी नीति में परिवर्तन: समिति ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी के कारण कृषि उत्पादकता को बढ़ाकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिली है। हालाँकि इसका नकारात्मक असर भी हुआ, जैसे उर्वरकों के अत्यधिक और असंतुलित प्रयोग से भू-क्षरण हुआ। समिति ने कहा कि सरकार सब्सिडी की व्यवस्था और उस प्रणाली पर विचार कर रही है जो कि इस नीति में सुधार कर सके। इस संबंध में नीति आयोग ने विभिन्न हितधारकों को मसौदा रिपोर्ट दी है। 
  • समिति ने कहा कि मौजूदा उर्वरक सब्सिडी नीति में बहुत अधिक परिवर्तन करने से देश की खाद्य सुरक्षा पर काफी असर होगा। उसने निम्नलिखित सुझाव दिये: 
    • ऐसा कोई भी कठोर परिवर्तन करने से पहले गहन अध्ययन किया जाना चाहिये और संबंधित केंद्रीय एवं राज्य सरकार के विभागों, उर्वरक उद्योग व किसान तथा उनके संगठनों सहित सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिये। 
    • जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिये। 
    • छोटे और सीमांत किसानों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिये। 
    • सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिये।
    • उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर किसानों की जानकारी और उनकी जागरूकता को इस नीति का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिये । 
  • किसानों को प्रत्यक्ष सब्सिडी: समिति ने कहा कि उर्वरक बनाने वाले बहुत से संयंत्र पुरानी तकनीक और प्रणाली का प्रयोग कर रहे हैं, और उनकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो रहा। सरकार उच्च सब्सिडी देकर उनकी अक्षमता की कीमत चुका रही है। समिति ने सुझाव दिया कि कंपनियों को अपने अनुसार उर्वरकों को बनाने, सप्लाई करने और बेचने के लिये स्वतंत्र कर दिया जाना चाहिये। किसानों को विभिन्न ब्रांड्स से अपनी पसंद के उर्वरक को खरीदने की छूट होनी चाहिये और सब्सिडी को उनके बैंक खातों में सीधे भेजा जाना चाहिये। इस प्रणाली से मैन्युफैक्चरर्स को लागत प्रभावी तरीके से उर्वरक बनाने और खरीदने का मौका मिलेगा और इस प्रक्रिया में अक्षम संयंत्र बाहर हो जाएंगे। उसने यह सुझाव भी दिया कि सरकार को ऐसी प्रणाली अपनाने के लिये एक स्पष्ट और सुदृढ़ रोडमैप तैयार करना चाहिये, जहाँ किसानों को सीधे सब्सिडी मिले तथा उर्वरकों के विनिर्माण व आयात को बाजार की शक्तियों से मुक्त किया जाए। 

खोपरा के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2020के लिये खोपरा हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price- MSP) को मंजूरी दी। मिलिंग खोपरा के लिये MSP में 4.6% की वृद्धि की गई है, जो कि 9,521 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 9,960 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। बॉल खोपरा के लिये MSP 3.8% बढ़ाई गई है और यह 9,920 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 10,300 रुपए प्रति क्विंटल कर दी गई है।

भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India- NAFED) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड (National Cooperative Consumers Federation of India Limited- NCCF) नारियल उत्पादक राज्यों में खोपरा की खरीद के लिये जिम्मेदार केंद्रीय नोडल एजेंसियाँ है।


संचार

इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर श्रेणी-I 

  • भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India- TRAI) ने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर श्रेणी-I ( IP-I) पंजीकरण के दायरे को बढ़ाने पर सुझाव जारी किये। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना और रखरखाव करते हैं और दूरसंचार सेवा प्रदाता (Telecom Service Providers- TSP) को इनका किराया देते हैं। दूरसंचार टावर कंपनियाँ इस श्रेणी के तहत पंजीकृत हैं।  
  • वर्तमान में IP-I पंजीकरण धारकों को निष्क्रिय अवसंरचना प्रदान करने की अनुमति है। निष्क्रिय अवसंरचना शेयरिंग में टेलीकॉम नेटवर्क्स के नॉन-इलेक्ट्रिकल और सिविल इंजीनियिरंग एलिटमेंट्स शामिल हैं। इसमें राइट ऑफ वे, टावर साइट्स, टावर्स, पोल्स, उपकरणों के लिये कमरे, पावर सप्लाई और एयर कंडीशनिंग सुविधाएँ शामिल हैं।  

इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण प्रोत्साहन योजना

केंद्रीय कैबिनेट ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण प्रोत्साहन हेतु निम्नलिखित योजनाओं का अनुमोदन किया:

  • बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण हेतु उत्पादन प्रोत्साहन योजना: यह योजना मोबाइल फोन निर्माण और एसेंबल, टेस्टिंग, मार्केटिंग व पैकिंग इकाइयों सहित निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों में उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों का प्रस्ताव रखती है। योजना का उद्देश्य ऐसी इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना है। इस योजना के तहत आधार वर्ष से पाँच साल तक भारत में निर्मित वस्तुओं के इनक्रिमेंटल विक्रय पर कुछ कंपनियों को 4%-6% का प्रोत्साहन (Incentive) मिलेगा। योजना की कुल लागत 40,995 करोड़ रुपए होने का अनुमान है
  • संशोधित इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टर (EMC 2.0) योजना: EMC 2.0 योजना EMC योजना का स्थान लेगी जिसे वर्ष 2012 में घोषित किया गया था और जिसके लिये अक्तूबर 2017 तक आवेदन करना था। पूर्ववर्ती EMC योजना के अंतर्गत 20 इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (Electronics Manufacturing Clusters- EMC) और तीन सामान्य सुविधा केंद्र (Common Facility Centres- CFC) अनुमोदित किये गए थे। 
  • यह योजना EMC और CFC दोनों की स्थापना के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। EMC और CFC इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और विनिर्माण क्षेत्र को सामान्य सुविधाएँ प्रदान करने के साथ-साथ विश्वस्तरीय अवसंरचना प्रदान करेंगे। EMC 2.0 योजना की कुल लागत आठ वर्षों की अवधि में 3,762 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अर्द्धचालकों के विनिर्माण संवर्द्धन हेतु योजना: योजना निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के विनिर्माण के लिये 25% पूंजीगत व्यय का वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करेगी। योजना के अंतर्गत अनुसंधान और विकास सहित संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और प्रौद्योगिकी पर पूंजीगत व्यय को कवर किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं:  
    (i) मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स। 
    (ii) उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स। 
    (iii) मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स। 
    (iv) दूरसंचार उपकरण। योजना की कुल लागत 3,285 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा

अटल ज्योति योजना चरण -II 

  • अटल ज्योति योजना चरण-II (Atal Jyoti Yojana Phase-II) को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया गया। इस योजना को दिसंबर 2018 में शुरू किया गया था और इसे दिसंबर 2019 तक जारी रहना था। 
  • इस योजना के अंतर्गत निर्दिष्ट क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम्स लगाए जाने का प्रावधान था। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार 75% लागत का वहन करती है और शेष 25% को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कोष (Member of Parliament Local Area Development  Fund- MPLAD) द्वारा प्रदान किया जाता है। योजना के चरण-II के अंतर्गत कुल 3.04 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएंगी। 
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