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पीआरएस कैप्सूल्स

विविध

फरवरी 2020

  • 27 Apr 2020
  • 46 min read

PRS की प्रमुख हाइलाइट्स

  • संसद
    • केंद्रीय बजट 2020-21 
  • समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास
    • GDP 
    • रेपो रेट और रिवर्स  
    • औद्योगिक उत्पादन 
  • वित्त
    • प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 
    • रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा और कृषि निर्यात 
    • DICGC ने जमाकर्त्ताओं के लिये बीमा 
    • अंब्रेला एंटिटी  
    • फ्लोटिंग रेट पर लोन 
  • परिवहन
    • एयरक्राफ्ट (संशोधन) विधेयक, 2020 
  • स्वास्थ्य
    • सेरोगेसी (रेगुलेशन) विधेयक, 2019 
    • सहायक प्रजनन तकनीक रेगुलेशन विधेयक, 2020  
    • ड्राफ्ट ड्रग और चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) संशोधन विधेयक, 2020 
    • चिकित्सा उपकरणों को ‘औषधि’ के रूप में अधिसूचित
  • आयुष
    • आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान विधेयक, 2020 
  • शिक्षा
    • भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून संस्थान (संशोधन) विधेयक
  • कॉरपोरेट मामले
    • ड्राफ्ट कॉम्पिटीशन (संशोधन) विधेयक, 2020 
  • श्रम और रोजगार 
    • व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता 
  • विधि और न्याय
    • 22वें विधि आयोग 
  • कृषि
    • केंद्रीय फसल बीमा योजना
    • FPO का गठन और प्रोत्साहन  
    • DIDF योजना 
    • फसल उत्पादन
  • जल शक्ति
    • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण–II
  • कपड़ा 
    • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन  
  • रक्षा
    • थलसेना में महिलाओं के लिये स्थायी कमीशन
  • आवासन और शहरी मामले
    • जीवन सुगमता सूचकांक और नगरपालिका कार्य प्रदर्शन सूचकांक-2019
  • पर्यावरण और वन
    • ड्राफ्ट बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2020
  • संचार
    • टेलीकॉम लाइसेंसों के ट्रांसफर/विलय के दिशा-निर्देश 
    • नेशनल ओपन डिजिटल इकोसिस्टम्स  

संसद

केंद्रीय बजट 2020-21 

वित्त मंत्री ने वर्ष 2020-21 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। बजट की मुख्य झलकियाँ इस प्रकार हैं: 

और पढ़ें 

तालिका 1: बजट 2020-21 (करोड़ रुपए में)

मद

संशोधित 19-20

  बजटीय 20-21

परिवर्तन का % 

कुल व्यय

2 6,98,552

3 0,42,230

1 2.7%

कुल प्राप्तियाँ  (उधारियों के बिना) 

1 9,31,706

2 2,45,893

1 6.3%

राजकोषीय घाटा उधारियाँ 

7,66,846

7,96,337

3.8%

GDP का % 

3.8

3.5

       

राजस्व घाटा

4,99,544

6,09,219

 22.0%

GDP का % 

2.4

2.7

 


समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

GDP

वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर से दिसंबर) के दौरान देश का सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) (स्थिर कीमतों पर) पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.7% की दर से बढ़ा। पहली दो तिमाही में वर्ष दर वर्ष वृद्धि दर ऊपर की ओर संशोधित थी: पहली तिमाही में 5.6% (5% से), और दूसरी तिमाही में 5.1% (4.5% से), जिसका मुख्य कारण यह था कि आधार वर्ष को नीचे की ओर संशोधित किया गया था। रेखाचित्र 1 में तिमाही प्रदर्शन को प्रस्तुत किया गया है। 

रेखाचित्र 1: GDP वृद्धि (% में, वर्ष दर वर्ष) 

 GDP

विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में GDP वृद्धि को सकल मूल्य संवर्द्धन (Gross Value Added- GVA) में मापा जाता है। वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही के मुकाबले वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही में सभी क्षेत्रों में संयुक्त GVA 4.5% से कम हो गई। वर्ष 2018-19 में यह 5.6% थी। कृषि, खनन और सेवा क्षेत्र को छोड़कर पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही के मुकाबले सभी क्षेत्रों में GVA की वृद्धि दर में गिरावट देखी गई। कृषि में यह 2% से बढ़कर 3.5% और खनन में -4.4% से बढ़कर 3.2% हो गई। सेवा क्षेत्र में वृद्धि 7.4% पर बरकरार रही। तालिका 2 में क्षेत्रीय GVA वृद्धि का विवरण प्रस्तुत किया गया है। 

तालिका 2: विभिन्न क्षेत्रों में 2019-20 की तीसरी तिमाही में सकल मूल्य संवर्द्धन (वृद्धि % में, वर्ष दर वर्ष)

क्षेत्र

तिमाही 3

तिमाही 2

तिमाही 3

2018-19

2019-20

2019-20

कृषि

2.0%

3.1%

3.5%

खनन

-4.4%

0.2%

3.2%

मैन्यूफैक्चरिंग

5.2%

-0.4%

-0.2%

बिजली

9.5%

3.9%

-0.7%

निर्माण

6.6%

2.9%

0.3%

सेवाएँ

7.4%

7.3%

7.4%

GVA 

5.6%

4.8%

4.5%

GDP 

5.6%

5.1%

4.7%

सरकार ने वर्ष 2019-20 में GDP वृद्धि के दूसरे अग्रिम अनुमान भी जारी किये। वर्ष 2019-20 में GDP (स्थिर मूल्यों पर) के 5% की दर से बढ़ने का अनुमान है। वर्ष 2018-19 के लिये अनुमानित 6.1% की वृद्धि दर से कम रहने का अनुमान है।

रेपो रेट और रिवर्स 

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (Monetary Policy Committee- MPC) ने वर्ष 2019-20 का छठा द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया। पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर RBI बैंकों को ऋण देता है) 5.15% पर अपरिवर्तनीय रही। MPC के अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर RBI बैंकों से उधार लेता है) 4.9% पर अपरिवर्तनीय रहा।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर RBI बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 5.4% पर अपरिवर्तनीय रहा।
  • MPC ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

औद्योगिक उत्पादन 

वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production- IIP) में, वर्ष 2018-19 में इसी अवधि के मुकाबले 0.9% की गिरावट रही। बिजली क्षेत्र में 6%, जबकि मैन्यूफैक्चरिंग तथा खनन क्षेत्रों में क्रमशः 0.3% और 0.2% की गिरावट रही। रेखाचित्र 2 में वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक उत्पादन में वर्ष दर वर्ष वृद्धि को प्रदर्शित किया गया है।  

रेखाचित्र 2: 2019-20 की तीसरी तिमाही में IIP में वृद्धि (वर्ष दर वर्ष) 

 IIP


वित्त

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 

लोकसभा में प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 पेश किया गया। विधेयक इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स से संबंधित लंबित टैक्स विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया प्रदान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एपेलेंट (अपीलार्थी): विधेयक के अनुसार, एपेलेंट इनकम टैक्स अथॉरिटी या व्यक्ति या दोनों हो सकते हैं जिनकी अपील 31 जनवरी, 2020 तक एपेलेट फोरम में लंबित है। इन एपेलेट फोरम में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल और कमीशनर्स (अपील) शामिल हैं। 
  • रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया: विधेयक एक रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया का प्रावधान करता है जिसके अंतर्गत एपेलेंट लंबित प्रत्यक्ष कर विवादों का रेज़ोल्यूशन शुरू करने के लिये निर्दिष्ट अथॉरिटी में डिक्लेरेशन (घोषणा) दायर कर सकता है। डिक्लेरेशन दायर करने की अंतिम तारीख केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी। इसके आधार पर निर्दिष्ट अदालत एपेलेंट द्वारा देय राशि निर्धारित कर सकती है और डिक्लेरेशन की प्राप्ति के 15 दिन के अंदर एक सर्टिफिकेट दे सकती है जिसमें देय राशि का विवरण होगा। एपेलेंट को सर्टिफिकेट प्राप्त होने के 15 दिनों के अंदर यह राशि चुकानी होगी और इस भुगतान के बारे में निर्दिष्ट अथॉरिटी को बताना होगा। यह राशि रीफंडेबल नहीं होगी। 
  • रेज़ोल्यूशन के लिये देय राशि: विवादों के रेज़ोल्यूशन के लिये एपेलेंट द्वारा देय राशि का निर्धारण इस आधार पर किया जाएगा कि विवाद टैक्स भुगतान या ब्याज भुगतान, जुर्माने या फीस से संबंधित है। इसके अतिरिक्त उसे अतिरिक्त राशि चुकानी होगी, अगर यह भुगतान 31 मार्च, 2020 के बाद किया जाता है।

और पढ़ें 

रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा और कृषि निर्यात

15वें वित्त आयोग ने संदर्भ की शर्तों के मद्देनज़र रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा तथा कृषि निर्यात पर दो समूहों का गठन किया।  

रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा: यह समूह इस बात की जाँच करेगा कि क्या रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिये कोई अलग फंडिंग मैकेनिज्म स्थापित किया जाना चाहिये और अगर ऐसा किया जाता है तो उसे परिचालित करने का तरीका क्या होगा। इसमें निम्नलिखित सदस्य हैं: (i) ग्रुप के चेयरमैन के तौर पर एन. के. सिंह, (ii) 15वें वित्त आयोग के सदस्य ए. एन. झा, (iii) गृह मामलों के मंत्रालय के सचिव, (iv) रक्षा मंत्रालय के सचिव, और (v) वित्त मंत्रालय के सचिव।

कृषि निर्यात पर विशेषज्ञ समूह: यह समूह वर्ष 2021-22 से वर्ष 2015-26 की अवधि के दौरान राज्यों के लिये प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पर सुझाव देगा और इसका लक्ष्य कृषि निर्यात को बढ़ाना और ऐसी फसलों को बढ़ावा देना है जोकि उच्च आय प्रतिस्थापन को सक्षम बनाएं। अन्य संदर्भ की शर्तें निम्नलिखित हैं: (i) भारतीय कृषि उत्पादों के लिये निर्यात और आयात प्रतिस्थापन के अवसरों का आकलन करना और उपयुक्त उपाय सुझाना, (ii) उच्च कृषि उत्पादकता, मूल्य संवर्द्धन और अपशिष्ट कम करने तथा लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिये उपाय सुझाना, और (iii) वैल्यू चेन के साथ निजी निवेश की बाधाओं को चिन्हित करना तथा उपयुक्त नीतियों एवं सुधारों का सुझाव देना। 

DICGC ने जमाकर्त्ताओं के लिये बीमा कवरेज 

डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation- DICGC) ने इंश्योर्ड बैंकों (किसी भी कमर्शियल बैंक या सहकारी बैंक) में जमाकर्त्ताओं के लिये बीमा कवर की सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर पाँच लाख रुपए कर दी है। डिपॉजिट इंश्योरेंस वह बीमा कवर होता है जिसका दावा जमाकर्त्ता बैंक के लिक्विडेशन या उसके लाइसेंस के रद्द होने के बाद कर सकता है।  

अंब्रेला एंटिटी 

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने रीटेल भुगतान प्रणालियों के लिये पैन इंडिया न्यू अंब्रेला एंटिटी के अथॉराइजेशन हेतु ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। यह निकाय भुगतान और निपटान एक्ट, 2007 के अंतर्गत भुगतान प्रणालियों को परिचालित करने के लिये अधिकृत होगा।

यह निकाय निम्नलिखित के लिये जि़म्मेदार होगा: (i) रीटेल क्षेत्र में नई भुगतान प्रणालियों को स्थापित, प्रबंधित और परिचालित करना, (ii) जोखिमों को चिन्हित और प्रबंधित करना, जैसे निपटान, ऋण, लिक्विडिटी और परिचालित जोखिम, (iii) रीटेल भुगतान प्रणालियों से संबंधित घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की निगरानी करना, और (iv) भुगतान प्रणालियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

यह निकाय 500 करोड़ रुपए का न्यूनतम पेड-अप कैपिटल गठित करेगा। 25% से अधिक पेड-अप कैपिटल वाली एंटिटी को प्रमोटर माना जाएगा। पेड-अप कैपिटल में किसी सिंगल प्रमोटर का निवेश 40% से अधिक नहीं होना चाहिये। 

फ्लोटिंग रेट पर लोन 

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने सभी बैंकों के लिये अनिवार्य किया है कि वे मध्यम दर्जे के उपक्रमों को 1 अप्रैल, 2020 से फ्लोटिंग रेट पर दिये जाने वाले लोन्स को बाहरी बेंचमार्क्स से जोड़ें। फ्लोटिंग रेट लोन्स ऐसे लोन होते हैं जिनकी ब्याज की दरें परिवर्तनशील होती है। वर्तमान में बैंकों के ऋण की दरें आंतरिक बेंचमार्क्स पर आधारित होती हैं जैसे बेस रेट या फंड्स की मार्जिनल लागत आधारित दर। RBI के एक स्टडी ग्रुप (2017) ने कहा था कि बेस रेट या फंड्स की मार्जिनल लागत आधारित दर से मौद्रिक नीति का लाभ सब तक नहीं पहुँचता। उसने यथोचित समय पर बाहरी बेंचमार्क्स के इस्तेमाल का सुझाव दिया था। 

सितंबर 2019 में RBI ने बैंकों से कहा था कि वे सूक्ष्म और लघु उद्यमों (Micro and Small Enterprises- MSE) को फ्लोटिंग रेट पर लोन देने के लिये बाहरी बेंचमार्क को अपनाएं। उल्लेखनीय है कि MSE में प्लांट और मशीनरी में पाँच करोड़ रुपए तक निवेश किया जाता है, जबकि मध्यम दर्ज के उपक्रमों में पाँच से दस करोड़ रुपए के बीच निवेश किया जाता है।  

बाहरी बेंचमार्क के लिये बैंक निम्नलिखित दरों को चुन सकते हैं: (i) रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई कमर्शियल बैंको को उधार देता है), (ii) फाइनांशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Financial Benchmarks India Private Limited- FBIL) द्वारा प्रकाशित तीन महीने का ट्रेजरी बिल यील्ड, (iii) FBIL द्वारा प्रकाशित छह महीने का ट्रेजरी बिल यील्ड, या (iv) FBIL द्वारा प्रकाशित कोई दूसरा बेंचमार्क मार्केट इंटरेस्ट रेट। बैंकों को बेंचमार्क रेट से कम पर उधार देने की अनुमति नहीं है।


परिवहन

एयरक्राफ्ट (संशोधन) विधेयक, 2020 

एयरक्राफ्ट (संशोधन) विधेयक, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया। विधेयक एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 में संशोधन का प्रयास करता है। अधिनियम सिविल एयरक्राफ्ट्स की मैन्यूफैक्चरिंग, उनके कब्जे, इस्तेमाल, परिचालन, बिक्री, आयात और निर्यात तथा एयरोड्रोम्स की लाइसेंसिंग को रेगुलेट करता है। विधेयक के मुख्य प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अथॉरिटीज़: विधेयक नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत तीन मौजूदा निकायों को एक्ट के अंतर्गत वैधानिक निकाय बनाता है। ये अथॉरिटीज़ हैं: (i) नागर विमानन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation- DGCA), (ii) नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (Bureau of Civil Aviation Security- BCAS), और (iii) विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (Aircraft Accidents Investigation Bureau- AAIB)। इनमें से प्रत्येक निकाय का एक डायरेक्टर जनरल होगा, जिसकी नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी।
  • DGCA विधेयक के अंतर्गत आने वाले मामलों में सुरक्षा चौकसी तथा रेगुलेटरी काम करेगा। BCAS नागरिक उड्डयन सुरक्षा से संबंधित रेगुलेटरी निगरानी का काम करेगा। AAIB एयरक्राफ्ट्स की दुर्घटनाओं और हादसों से संबंधित जाँच करेगा। अगर जनहित में जरूरी हुआ तो केंद्र सरकार इन अथॉरिटीज़ के कामकाज से संबंधित मामलों में दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। 
  • अपराध और सज़ा: एक्ट के अंतर्गत विभिन्न अपराधों के लिये अधिकतम दो वर्षों की सज़ा, या 10 लाख रुपए तक का जुर्माना, या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। इन अपराधों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एयरक्राफ्ट में हथियार, विस्फोटक या दूसरी खतरनाक वस्तुएँ ले जाना, (ii) एक्ट के अंतर्गत किसी निर्दिष्ट नियम का उल्लंघन करना, और (iii) एयरोड्रोम रेफ्रेंस प्वाइंट के इर्द-गिर्द के रेडियस में बिल्डिंग बनाना या दूसरे कंस्ट्रक्शन करना। बिल इन सभी अपराधों पर जुर्माने को बढ़ाकर 10 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए के बीच करता है।
  • विधेयक एक्ट के अंतर्गत आने वाले अपराधों या नियमों की कंपाउंडिंग की अनुमति देता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिये उड़ान, और (ii) तीनों निकायों में से किसी एक के डायरेक्टर जनरल द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन। डायरेक्टर जनरल्स केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट तरीकों से इन अपराधों की कंपाउंडिंग कर सकते हैं। बार-बार अपराध करने पर अपराधों की कंपाउंडिंग की अनुमति नहीं है। 

स्वास्थ्य

सेरोगेसी (रेगुलेशन) विधेयक, 2019 

सेरोगेसी (विनिमयन) विधेयक, 2019 पर सिलेक्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। सेरोगेसी में कोई महिला किसी इच्छुक दंपत्ति के लिये बच्चे को जन्म देती है और जन्म के बाद उस इच्छुक दंपत्ति को बच्चा सौंप देती है। कमेटी के मुख्य निष्कर्षों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कमर्शियल बनाम निस्वार्थ (Altruistic) सेरोगेसी: विधेयक कमर्शियल सेरोगेसी को प्रतिबंधित करता है और निस्वार्थ सेरोगेसी की अनुमति देता है। निस्वार्थ सेरोगेसी में सेरोगेट माता को गर्भावस्था के दौरान दिये जाने वाले मेडिकल व्यय और बीमा कवरेज के अतिरिक्त कोई मौद्रिक मुआवजा नहीं दिया जाता। कमेटी ने निस्वार्थ सेरोगेसी के स्थान पर मुआवज़े के आधार पर सेरोगेसी मॉडल का सुझाव दिया।   

सहायक प्रजनन तकनीक विनिमयन विधेयक, 2020  

केंद्रीय कैबिनेट ने सहायक प्रजनन तकनीक विनिमयन विधेयक, 2020 (Assisted Reproductive Technology Regulation Bill, 2020) को मंज़ूरी दी। बिल देश में सहायक प्रजनन तकनीक सेवाओं को रेगुलेट करने का प्रयास करता है। 

ड्राफ्ट ड्रग और चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) संशोधन विधेयक, 2020 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने ड्राफ्ट ड्रग और चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) संशोधन विधेयक, 2020 (Draft Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Amendment Bill, 2020) को जारी किया। विधेयक ड्रग और चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 (Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954) में संशोधन करता है। प्रस्तावित मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • अधिनियम के अनुसार, 54 बीमारियों, विकारों और स्थितियों की दवाओं के विज्ञापनों पर प्रतिबंध है।
  • ड्राफ्ट अधिनियम 24 अन्य बीमारियों और विकारों को इस अनुसूची में शामिल करता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) यौन ताकत को बढ़ाने वाली दवा या उपचार, (ii) त्वचा का गोरापन, (iii) समय से पहले बुढ़ापा आना, और (iv) बच्चों और वयस्कों का कद बढ़ाना।
  • सज़ा: अधिनियम के अंतर्गत पहली बार अपराध करने पर छह महीने तक की सज़ा हो सकती है तथा जुर्माना भरना पड़ सकता है। दोबारा अपराध करने पर एक साल तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है।
  • ड्राफ्ट विधेयक सज़ा को बढ़ाता है। पहली बार अपराध करने पर दो साल तक सज़ा और 10 लाख तक का जुर्माना भरना होगा। दोबारा अपराध करने पर पाँच साल तक की सज़ा और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।

चिकित्सा उपकरणों को ‘औषधि’ के रूप में अधिसूचित 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही मानव या पशुओं पर इस्तेमाल होने वाले सभी मेडिकल उपकरणों को ड्रग और कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के अंतर्गत ‘ड्रग’ के रूप में अधिसूचित किया। यह 1 अप्रैल, 2020 से लागू होगा।

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आयुष

आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक, 2020 

आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान विधेयक, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया। बिल तीन आयुर्वेद संस्थानों का विलय कर एक संस्थान- आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान बनाने का प्रयास करता है। बिल इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करता है।   

  • विलय: जिन मौजूदा संस्थानों का विलय किया जाएगा, वे हैं: (i) स्नातकोत्तर शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, जामनगर, (ii) श्री गुलाब कुंवर बा आयुर्वेद महाविद्यालय, जामनगर और (iii) भारतीय आयुर्वेदिक फार्मास्यूटिकल्स विज्ञान संस्थान, जामनगर। प्रस्तावित संस्थान गुजरात आर्युवेद विश्वविद्यालय, जामनगर के परिसर में स्थित होगा
  • संस्थान का उद्देश्य: विधेयक के अनुसार, संस्थान का निम्नलिखित उद्देश्य होगा: (i) आयुर्वेद और फार्मेसी की मेडिकल शिक्षा में शिक्षण के पैटर्न विकसित करना, (ii) आयुर्वेद की सभी शाखाओं में लोगों को प्रशिक्षित करने के लिये शिक्षण केंद्रों को एक साथ लाना, (iii) आयुर्वेद की स्नातकोत्तर शिक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करना ताकि इस क्षेत्र में विशेषज्ञों और मेडिकल शिक्षक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों, और (iv) आयुर्वेद के क्षेत्र में गहन अध्ययन और अनुसंधान करना।
  • संस्थान के कार्य: संस्थान के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आयुर्वेद की स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा (फार्मेसी सहित) का प्रावधान, (ii) आयुर्वेद में स्नातक और स्नातकोत्तर अध्ययन के लिये पाठ्यक्रम और करिकुलम निर्दिष्ट करना, (iii) आयुर्वेद की विभिन्न शाखाओं में अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना, (iv) आयुर्वेद और फार्मेसी की शिक्षा की परीक्षाएँ संचालित करना, डिग्री, डिप्लोमा और दूसरे डिस्टिंक्शंस और टाइटिल देना, और (v) आयुर्वेद के सपोर्टिंग स्टाफ जैसे नर्सों के लिये उत्तम दर्जे के कॉलेज और अस्पताल चलाना। 

शिक्षा

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2020 

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2020 (Indian Institutes of Information Technology Laws (Amendment) Bill, 2020) को पेश करने को मंज़ूरी दी। 

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कॉरपोरेट मामले

ड्राफ्ट कॉम्पिटीशन (संशोधन) विधेयक, 2020  

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने पब्लिक फीडबैक के लिये ड्राफ्ट कॉम्पिटीशन (संशोधन) विधेयक, 2020 को जारी किया। जुलाई 2019 में कॉम्पिटीशन लॉ रिव्यू कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कॉम्पिटीशन एक्ट, 2002 में संशोधनों पर सुझाव दिये थे। ड्राफ्ट विधेयक में कमिटी के सुझावों के आधार पर एक्ट में अनेक संशोधन प्रस्तावित किये गए हैं। 


श्रम और रोज़गार 

व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2019 

श्रम संबंधी स्टैंडिंग कमिटी ने व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2019 (Code on Occupational Safety, Health and Working Conditions Bill, 2019) पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। संहिता स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्य स्थितियों से संबंधित 13 मौजूदा श्रम कानूनों को रद्द करती है और उनका स्थान लेती है।  

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विधि और न्याय

22वें विधि आयोग 

केंद्रीय कैबिनेट ने तीन वर्षों की अवधि के लिये 22वें विधि आयोग के गठन को मंज़ूरी दी। इसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे: (i) चेयरपर्सन, (ii) चार सदस्य, (iii) पदेन के सदस्य के रूप में लेजिसलेटिव विभाग और कानूनी मामलों के विभाग के सचिव, और (iv) अधिकतम पाँच पार्ट टाइम सदस्य। 

आयोग की ज़िम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ऐसे कानूनों को चिन्हित करना, जो अब प्रासंगिक नहीं, (ii) ऐसे कानूनों के संबंध में सुझाव देना जोकि राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों को लागू करने के लिये जरूरी हैं, (iii) सरकार द्वारा संदर्भित मामलों पर अपने विचार प्रकट करना, और (iv) महत्त्वपूर्ण केंद्रीय कानूनों को संशोधित करना ताकि उन्हें सरल बनाया जा सके। 


कृषि

केंद्रीय फसल बीमा योजना

केंद्रीय कैबिनेट ने केंद्रीय फसल बीमा योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana- PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के लिये संशोधित दिशा-निर्देशों को मंज़ूरी दी ताकि उनके कार्यान्वयन से संबंधित मौजूदा चुनौतियों से निपटा जा सके।

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FPO के गठन और प्रोत्साहन

केंद्रीय कैबिनेट ने ‘किसान उत्पादक संगठनों का गठन और प्रोत्साहन’ (Formation and Promotion of Farmer Producer Organizations) नामक केंद्रीय योजना को मंज़ूरी दी जिसका लक्ष्य 2023-24 तक 10,000 नए FPO का गठन और प्रोत्साहन है। FPOs (Farmer Producer Organizations- FPOs) किसानों के ऐसे समूह होते हैं जिनका उद्देश्य इनपुट, ऋण, तकनीक एवं मार्केटिंग तक बेहतर पहुँच और बेहतर आय प्राप्त करना है।

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DIDF योजना 

केंद्रीय कैबिनेट ने डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास कोष (Dairy Processing and Infrastructure Development Fund- DIDF) योजना के अंतर्गत प्रदत्त ब्याज सब्सिडी पर अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी को मंज़ूरी दी। यह फंड डेयरी क्षेत्र (दुग्ध सहकारी संघ, और यूनियन, दुग्ध उत्पादक कंपनियां) को दुग्ध खरीद प्रणाली में सुधार करने के लिये सब्सिडी पर ऋण प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया है। दूध और दूध आधारित मूल्य वर्द्धित उत्पादों की जाँच, स्टोर करने, प्रोसेसिंग और मैन्यूफैक्चरिंग के लिये जरूरी उपकरणों और इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने में निवेश हेतु ऋण का उपयोग किया जा सकता है। योजना के अंतर्गत नाबार्ड बाज़ार से धनराशि जुटाता है और 6% की ब्याज दर पर ऋण देता है। सरकार इस ऋण पर नाबार्ड को ब्याज सब्सिडी देती है जोकि 6% की दर और बाज़ार से नाबार्ड द्वारा लिये गए उधार की ब्याज दर के बीच के फर्क के बराबर होता है। यह ब्याज सब्सिडी 2% की अधिकतम सीमा के अधीन है और उधार की शेष लागत का वहन लाभार्थी द्वारा किया जाता है। कैबिनेट ने ब्याज सब्सिडी की अधिकतम सीमा को 2% से 2.5% कर दिया। ब्याज सब्सिडी देने के लिये मंज़ूर राशि को 864 करोड़ से 1,167 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2019-20 तक योजना के अंतर्गत ऋण देना प्रस्तावित था, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2022-23 कर दिया गया है। 

फसल उत्पादन 

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers) ने वर्ष 2019-20 के लिये खाद्यान्न और कमर्शियल फसलों के उत्पाद के दूसरे अग्रिम अनुमान जारी किये। तालिका 4 में वर्ष 2018-19 के उत्पादन के साथ वर्ष 2019-20 के दूसरे अग्रिम अनुमानों की तुलना की गई है। यहाँ मुख्य विशेषताएँ प्रस्तुत हैं: 

  • वर्ष 2018-19 की तुलना में वर्ष 2019-20 में खाद्यान्न उत्पादन में 2.4% की वृद्धि का अनुमान है। यह वृद्धि अनाज के उत्पाद में 2.2% की वृद्धि के कारण है। चावल और गेहूं के उत्पादन में क्रमशः 0.8% और 2.5% की वृद्धि का अनुमान है। 
  • वर्ष 2019-20 में मोटे अनाज के उत्पादन में 5.1% की वृद्धि और दालों के उत्पादन में 4.3% की वृद्धि का अनुमान है। 
  • वर्ष 2019-20 में तिलहन के उत्पादन में 8.5% की वृद्धि का अनुमान है। सोयाबीन के उत्पादन में 2.7% और मूंगफली के उत्पादन में 22.6% की वृद्धि अनुमानित है।  
  • वर्ष 2019-20 में कपास के उत्पादन में 24.4% की बढ़ोतरी का अनुमान है। दूसरी ओर गन्ने का उत्पादन 12.7% घटकर 354 मिलियन रहने का अनुमान है।

तालिका 4: वर्ष 2019-20 में फसल उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान (मिलियन टन में) 

  फसल

अंतिम 2018-19

दूसरे अग्रिम 
अनुमान 2019-20

2018-19 में 
परिवर्तन का %

खाद्यान्न (क+ख)

285.2

292.0

2.4%

ख. अनाज

263.1

268.9

2.2%

चावल

116.5

117.5

0.8%

गेहूं

103.6

106.2

2.5%

मोटे अनाज

43.1

45.2

5.1%

ख. दालें

22.1

23.0

4.3%

चना

9.9

11.2

12.9%

तुअर

3.3

3.7

11.1%

तिलहन

31.5

34.2

8.5%

सोयाबीन

13.3

13.6

2.7%

मूंगफली

6.7

8.2

22.6%

कपास*

28.0

34.9

24.4%

गन्ना

405.4

353.8

-12.7%


जल शक्ति

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण–II 

केंद्रीय कैबिनेट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [Swachh Bharat Mission (Grameen)- SBM (G)] के चरण II को मंज़ूरी दी। कार्यक्रम खुले में शौच मुक्त (ODF) प्लस पर केंद्रित है। इसे राज्यों द्वारा लागू किया जाता है जिन्हें केंद्र सरकार परिचालनगत दिशा-निर्देश जारी करती है।

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कपड़ा 

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन 

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (National Technical Textiles Mission) को मंज़ूरी दी। इस मिशन को 1480 करोड़ रुपए के परिव्यय से वर्ष 2020-21 से वर्ष 2023-24, यानी चार वर्षों के लिये लागू किया जाएगा। मिशन के मुख्य घटकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

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रक्षा

थलसेना में महिलाओं के लिये स्थायी कमीशन 

सर्वोच्च न्यायालय ने थलसेना की नॉन-कॉम्बैट सेवाओं में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने के पक्ष में फैसला दिया। थलसेना में तीन प्रकार की सेवाएँ होती हैं: (i) कॉम्बैट, (ii) कॉम्बैट सपोर्ट, और (iii) सर्विस। वर्तमान में महिलाएँ सभी प्रकार की नॉन-कॉम्बैट सेवाओं में लघु सेवा आयोग (Short Services Commission- SSC) (SSC, 14 वर्षों के लिये) पर कार्य कर सकती हैं। फरवरी 2019 में रक्षा मंत्रालय ने थलसेना की 10 सेवाओं, जैसे सिग्नल्स, इंजीनियर्स और आर्मी एविएशन में SSC वाली महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया था। 

न्यायालय ने यह कहा कि 14 वर्ष तक काम करने वाली महिला अधिकारियों को पेंशन या रिटायरमेंट लाभ नहीं मिलते। इसके अतिरिक्त यह पाया गया कि सरकार के सबमिशंस महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं क्योंकि यह परंपरागत सोच और स्त्रियों की तथाकथित सामाजिक भूमिका पर आधारित हैं। 

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आवासन और शहरी मामले

जीवन सुगमता सूचकांक और नगरपालिका कार्य प्रदर्शन सूचकांक-2019

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने दो एसेसमेंट फ्रेमवर्क्स: जीवन सुगमता सूचकांक 2019 (Ease of Living Index 2019) और नगरपालिका कार्य प्रदर्शन सूचकांक 2019 (Municipal Performance Index 2019) को लॉन्च किया। इनसे 100 स्मार्ट सिटीज़ और 14 अन्य मिलियन प्लस शहरों के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा।

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पर्यावरण और वन

ड्राफ्ट बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2020 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Climate and Forest Change) ने ड्राफ्ट बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2020 (Draft Battery Waste Management Rules, 2020) जारी किया। ड्राफ्ट नियम बैटरी (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 2001 का स्थान लेते हैं जोकि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) के अंतर्गत बैटरियों की हैंडलिंग और प्रबंधन का विवरण प्रस्तुत करते हैं। यह अधिनियम पर्यावरण के संरक्षण और सुधार को रेगुलेट करता है।


संचार

टेलीकॉम लाइसेंसों के ट्रांसफर/विलय 

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India- TRAI) ने टेलीकॉम लाइसेंसों के ट्रांसफर/विलय के दिशा-निर्देशों में सुधार से संबंधित सुझाव जारी किये। सुझाव दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications- DoT) द्वारा जारी विलय और अधिग्रहण दिशा-निर्देश, 2014 (Guidelines for Mergers and Acquisitions, 2014) में परिवर्तन करते हैं। सितंबर, 2019 में इस संबंध में परामर्थ पत्र जारी किया गया था। 

  • लाइसेंस के ट्रांसफर/विलय के लिये समय अवधि: मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, विभिन्न सेवा क्षेत्रों में विभिन्न लाइसेंसों के ट्रांसफर/विलय के लिये अनुमति अवधि एक वर्ष है। इस समय अवधि को ट्रिब्यूनल की मंज़ूरी के बाद गिना जाता है। TRAI ने सुझाव दिया कि किसी भी मुकदमे को आगे बढ़ाने में लगने वाला समय, जिसके कारण विलय की अंतिम मंज़ूरी में देरी होती है, को एक साल की अवधि की गणना से बाहर रखा जाना चाहिये
  • मार्केट शेयर का कैलकुलेशन: दिशा-निर्देशों के अनुसार, इच्छुक पक्षों के मार्केट शेयर के आधार पर विलय या अधिग्रहण पर कुछ प्रतिबंध हैं। लाइसेंसी के मार्केट शेयर को निर्धारित करने के दौरान उसके सबस्क्राइबर बेस और समायोजित सकल राजस्व (Adjusted Gross Revenue- AGR) को ध्यान में रखा जाना चाहिये। TRAI ने सुझाव दिया कि: (i) मोबाइल, टेलीफोन और इंटरनेट सेवाओं जैसे कुछ प्रकार के लाइसेंसों के लिये सबस्क्राइबर की संख्या और एजीआर को ध्यान में रखा जाना चाहिये, और (ii) दूसरे किस्म के लाइसेंसों जैसे नेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (National Long Distance- NLD) सेवा और इंटरनेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (International Long Distance- ILD) सेवा के लिये सिर्फ AGR पर विचार किया जाना चाहिये।

AGR सर्विस प्रोवाइडर के सकल राजस्व का मूल्य होता है, जिसमें से कुछ चार्ज और टैक्स शामिल नहीं होता, जैसे दूसरे सर्विस प्रोवाइडर को दिया जाने वाला रोमिंग चार्ज, और कोई दूसरा सर्विस टैक्स और सेल्स टैक्स, जोकि सकल राजस्व में शमिल है।  

नेशनल ओपन डिजिटल इकोसिस्टम्स  

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) ने ‘नेशनल ओपन डिजिटल इकोसिस्टम्स (National Open Digital Ecosystems- NODE) की रणनीति’ पर परामर्श श्वेतपत्र जारी किया। यह पत्र डिजिटल गवर्निंग के लिये राष्ट्रीय रणनीति को संदर्भित है। ऐसे इकोसिस्टम के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं: (i) पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं जैसे आधार और GST नेटवर्क, (ii) डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और डोमेन-विशिष्ट नीतियों और मानकों के संबंध में बुनियादी ढाँचे को नियंत्रित करने के कानून, और (iii) इस इंफ्रास्ट्रक्चर को लाभप्रद बनाना ताकि सभी के लिये यह महत्त्वपूर्ण साबित हो। 

NODE का एक उदाहरण है, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) के अंतर्गत ई-ट्रांसपोर्ट मिशन मोड प्रॉजेक्ट।  इसके दो एप्लीकेशंस शामिल हैं- वाहन और सारथी जो कि क्रमशः वाहन रजिस्ट्रेशन और ड्राइवर लाइसेंसिंग ऑपरेशन को ऑटोमेट करते हैं। ऐसे डिजिटलीकृत डेटा की उपलब्धता से प्लेटफॉर्म नागरिकों, ऑटोमोबाइल डीलर्स, बीमा कंपनियों और पुलिस को सेवाएँ प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करता है कि डेटा दूसरे सिस्टम्स में एकीकृत हो सके, जैसे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से चोरी हुए वाहनों का डेटा और बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (Insurance Regulatory and Development Authority) से बीमा संबंधी डेटा। 

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