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हवाई यात्रा- आचरण और नियम

  • 04 Feb 2020
  • 18 min read

संदर्भ

पिछले कुछ दशकों में देश ने जहाँ विकास के विभिन्न क्षेत्रों में भारी निवेश को आकर्षित किया है, वहीं बाज़ार के इस उदारीकरण के परिणामस्वरूप हवाई यात्रा जैसी अनेक ऐसी सुविधाओं तक आम जनता की पहुँच बढ़ी है, जिन्हें एक समय तक विलासिता (Luxury) का माध्यम माना जाता था। वर्तमान में हवाई यात्रा का चलन बहुत आम हो गया है और बीते कुछ वर्षों में यात्रियों द्वारा हवाई यात्रा के दौरान अभद्र व्यवहार की अनेक मामले देखने को मिलें हैं। हवाई अड्डों पर यात्रियों के बढ़ते इस दबाव के बीच यात्रियों की सकुशल एवं सुरक्षित यात्रा के लिये कुछ नियम बनाए गए हैं। इनमें से कुछ नियम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये परिचालकों पर जबकि अन्य हवाई जहाज़ या सह-यात्रियों की सुरक्षा में बाधा पहुँचा रहे लोगों पर लागू होते हैं। हवाई यात्रा के दौरान अभद्र व्यवहार या हिंसा करने वाले व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई करने के साथ ही उन्हें नो-फ्लाई लिस्ट में भी डाला जा सकता है। दुनिया के कई देशों में नो-फ्लाई लिस्ट की व्यवस्था है, इस लिस्ट में नामित व्यक्ति को एक निश्चित अवधि के लिये हवाई यात्रा से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

अभद्र यात्रियों पर कार्रवाई हेतु नियम:

हवाई यात्रा के दौरान सह-यात्रियों या चालकदल के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतों से निपटने के लिये नागर विमानन मंत्रालय (Ministry Of Civil Aviation) ने सितंबर 2017 में कुछ नियम जारी किये थे। इसके अंतर्गत हवाई यात्रा के दौरान बुरा बर्ताव करने वाले यात्रियों की एक राष्ट्रव्यापी सूची तैयार करने की अवधारण प्रस्तुत की गई।

नागर विमानन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation-DGCA) ने इसके लिये टोक्यो समझौते (1963) के प्रावधानों के अनुसार, अभद्र व्यवहार करने वाले यात्रियों से निपटने से जुड़े प्रासंगिक नियमों में बदलाव लिये। संशोधित नियम सभी भारतीय एयरलाइंस पर लागू होते हैं, जिसमें हवाई यात्रा और माल ढुलाई सेवाएँ शामिल हैं।

नए नियमों के तहत नो-फ्लाई लिस्ट (No-Fly List) में अभद्र व्यवहार या गलत आचरण को तीन स्तरों (श्रेणियों) में परिभाषित किया गया है-

  • पहली श्रेणी (First Category): पहली श्रेणी में मौखिक अभद्रता शामिल है, जिसमें धमकी भरे इशारे, आपत्तिजनक व्यवहार, वर्बल हैरेसमेंट जैसे-शांति भंग करने वाले बर्ताव को रखा गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर तीन माह तक के प्रतिबंध का प्रावधान है।
  • दूसरी श्रेणी (Second Category): दूसरी श्रेणी में शारीरिक रूप से अभद्रता, जिसमें धक्का देना, पैर मारना, जकड़ लेना, सेक्शुअल हैरेसमेंट या गलत तरीके से छूना आदि शामिल है, ऐसा करने वाले यात्रियों पर 6 माह तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
  • तीसरी श्रेणी (Third Category): इस श्रेणी में ऐसे व्यवहार या गतिविधियों को शामिल किया गया है जिनसे किसी सह-यात्री या चालक-दल के किसी सदस्य के जीवन को खतरा हो। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर (हवाई यात्रा का) दो वर्ष से लेकर आजीवन तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त यात्रा के दौरान उपद्रवी व्यक्ति को गिरफ्तार कर उस पर वायुयान नियम-1937 के नियम 22,23 व 29 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

टोक्यो समझौता-1963: जापान की राजधानी टोक्यो में 14 सितंबर, 1963 को ‘टोक्यो समझौता’ पर हस्ताक्षर किये गए तथा 4 दिसंबर, 1969 से यह समझौता प्रभाव में आया।

  • टोक्यो समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत वायुयान के अंदर यात्रियों द्वारा हिंसा व अन्य अस्वीकार्य गतिविधियों पर कार्रवाई करने के लिये मुख्य विमान चालक (Pilot-in-Command) को कुछ विशेष अधिकार दिये गए हैं।
    • इसके अनुसार विमान का कमांडर विमान में अनुशासन बनाने के लिये आवश्यक कदम उठा सकता है।
    • अभद्र व्यवहार कर रहे व्यक्ति को हिरासत में ले कर संबंधित प्राधिकरण को सौंप सकता है।
  • समझौते के अनुच्छेद 13 के तहत कोई भी देश जिसने इस समझौते में भाग लिया हो, हिरासत में लिये गए व्यक्ति को अपनी कस्टडी में ले सकता है।
  • इस समझौते के तहत गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को अपने प्रतिनिधि से संपर्क करने का अधिकार प्राप्त है।
  • जिस देश में व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है वह देश, मामले की जाँच कर सकता है तथा घटना की जानकारी उन देशों को दी जाएगी-
    • हिरासत में लिया गया व्यक्ति जिस देश का नागरिक है।
    • जिस देश में विमान का पंजीकरण किया है।
  • समझौते के अनुसार, जाँच एजेंसी द्वारा दोनों ही पक्षों को जाँच के सभी तथ्यों को साझा किया जाएगा।
  • इसके साथ ही कार्रवाई में शामिल देश को कार्रवाई के लिये अपने अधिकार क्षेत्र के बारे में बताना आवश्यक है।

इन नियमों के तहत भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों दोनों के मामलों में कार्रवाई की जा सकती है। वर्ष 1963 के टोक्यो समझौते के अनुसार ये नियम विदेशी एयरलाइंस पर भी लागू होते हैं।

अभद्र यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया:

  • वायुयान के अंदर अभद्रता की शिकायत मुख्य विमान चालक (Pilot-in-Command) की ओर से दर्ज कराई जाएगी।
  • दर्ज शिकायत की जाँच विमान कंपनी की ओर से गठित एक आतंरिक समिति (Internal Committee) द्वारा की जाएगी।
  • इस समिति का अध्यक्ष एक सेवानिवृत्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश होगा।
  • इस समिति में विमान कंपनियों, यात्री संगठनों और उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ ज़िला उपभोक्ता परिषद के सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल होंगे।
  • नियमों के अनुसार, समिति को 30 दिनों के अंदर मामले में फैसला लेना होगा और यात्री पर प्रतिबंध की अवधि तय करनी होगी।
  • मामले में फैसला आने तक विमान कंपनी संबंधित यात्री की हवाई यात्रा का प्रतिबंध लगा सकती है।
  • अभद्रता की पुनरावृत्ति की स्थिति में यात्री की सज़ा की अवधि दुगनी (Double) की जा सकती है।
    • इसके साथ ही यदि यात्री का व्यवहार राज्य के किसी आपराधिक कानून (जैसे-CrPC) के अंतर्गत आता है तो संबंधित विमान कंपनी द्वारा आरोपी के खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
  • विमान कंपनी को नो-फ्लाई लिस्ट में प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची साझा करनी होगी और यह सूची विमानन नियामक DGCA की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होगी परंतु अन्य विमान कंपनियाँ इसे मानने के लिये बाध्य नहीं होंगी।

मामले की गंभीरता के आधार पर सूची का विभाजन:

इस लिस्ट में दो तरह के यात्रियों को सूचीबद्ध किया जाएगा-

1. जिन्हें अवधि विशेष के लिये प्रतिबंधित किया गया है।

2. जिन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा माना गया हो।

  • दूसरी सूची को DGCA की वेबसाइट पर जारी नहीं किया जाता है।

प्रतिबंधों के फैसलों के खिलाफ अपील:

  • संशोधित नियमों में प्रतिबंध के खिलाफ अपील का भी प्रावधान किया गया है
  • पीड़ित व्यक्ति द्वारा प्रतिबंध लगने के 60 दिनों के अंदर नागर विमानन मंत्रालय के अपीलीय अधिकरण में अपील दायर की जा सकती है।
    • अपीलीय अधिकरण की अध्यक्षता उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेगा।
    • अपील के प्रावधान गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित व्यक्ति पर लागू नहीं होते हैं।

भारत में नागरिक उड्डयन क्षेत्र की सर्वोच्च संस्थाएँ:

नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA):

नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA ) नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) के क्षेत्र में एक नियामक संस्था है, जो हवाई सुरक्षा, दुर्घटना आदि मामलों की जाँच करती है।

नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो

(Bureau of Civil Aviation Security-BCAS):

  • सितंबर 1976 में इंडियन एयरलाइंस के एक विमान के अपहरण की घटना के बाद नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा कमियों को दूर करने और नए सुरक्षा मानकों की स्थापना के उद्देश्य से पांडे कमेटी (Pande Committee) की स्थापना की गई।
  • इस कमेटी की सिफारिशों के आधार पर देश में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डों पर नागरिक उड़ानों के संबंध में मानकों और उपायों को निर्धारित करने के लिये जनवरी 1778 में नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की स्थापना की गई।
  • नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की स्थापना नागरिक विमानन महानिदेशालय के तहत एक प्रकोष्ठ के रूप में की गई थी।
  • 1 अप्रैल, 1997 को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो को नागर विमानन मंत्रालय (Ministry Of Civil Aviation) के अंतर्गत एक स्वतंत्र विभाग के रूप में पुनर्स्थापित किया गया।

इसके अतिरिक्त भारत में हवाई यात्रा और हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिये कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन किया जाता है, इनमें से कुछ नियम निम्नलिखित हैं-

  • एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934
  • एयरलाइंस नियम,1937
  • टोक्यो कन्वेंशन एक्ट, 1963
  • टोक्यो कन्वेंशन एक्ट, 1975
  • एंटी हाइजैकिंग एक्ट, 1982
  • एंटी हाइजैकिंग एक्ट, 1994
  • द सप्रेशन ऑफ अनलाॅफुल एक्ट्स अगेंस्ट सेफ्टी ऑफ सिविल एविएशन एक्ट, 1994
  • एयर क्राफ्ट सुरक्षा नियम, 2011

उड्डयन क्षेत्र के नियम दो प्रकार के होते हैं। पहले, वे जो उड्डयन क्षेत्र में कार्यरत सेवा प्रदाताओं (विमान कंपनियों, केटरिंग आदि) पर लागू होते हैं तथा दूसरे, वे नियम जो गलत आचरण या गैर-कानूनी गतिविधियों के लिये यात्रियों पर लागू होते हैं।

हाल ही में विमानन क्षेत्र में यात्रियों और हवाई जहाज़ की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इनके प्रति यात्रियों की ज़िम्मेदारी तय करने के लिये कई नियम लाए गए हैं।

  • एंटी हाइजैकिंग एक्ट, 1982 को प्रतिस्थापित करने के लिये देश में अपहरण-रोधी अधिनियम, 2016 लाया गया। इस अधिनियम का उद्देश्य ‘हेग हाइजैकिंग कन्वेंशन’ और ‘बीजिंग प्रोटोकॉल सप्लीमेंट्री- 2010’ को लागू करना है।
    • अपहरण-रोधी अधिनियम, 2016 की धारा 3(1) के तहत विमान अपहरण के अपराध को परिभाषित किया गया है।
    • यह अधिनियम तब लागू होता है, जब कोई घटना भारत के बाहर घटित हो परंतु विमान भारत में पंजीकृत हो या विमान किसी भारतीय द्वारा पट्टे (कॉन्ट्रैक्ट) पर लिया गया हो।
    • यह अधिनियम तब भी लागू होगा यदि अपराधी अवैध रूप से भारत में रह रहा हो या हमले में भारतीयों को क्षति पहुँचाने की कोशिश करता हो।

विमान अपहरण या इसकी अफवाह फैलाने पर सज़ा :

  • विमान अपहरण की अफवाह फैलाने पर उम्रकैद की सज़ा का प्रावधान किया गया है।
  • यदि विमान अपहरण के दौरान किसी यात्री की मौत हो जाती है तो उस स्थिति में अपहरणकर्ता को उम्रकैद या मौत की सज़ा हो सकती है।
  • जून 2019 में अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने एक व्यक्ति को अपहरण-रोधी अधिनियम, 2016 के तहत आजीवन कारावास की सज़ा दी साथ ही उस पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया।

हवाई यात्रा के लिये ज़रूरी आचरण और नियम:

देश में स्थानीय एवं अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को सुरक्षित बनाने के लिये यात्रियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे सुरक्षा एजेंसियों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन और जाँच प्रक्रिया में सुरक्षा कर्मियों का सहयोग करेंगे। यात्रियों की सुरक्षा के लिये नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो द्वारा सुरक्षा विनियम जारी किये जाते हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

  • नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो के नियमों के तहत यात्रियों को प्रस्थान के समय (Departure Time) से दो घंटे पहले एयरपोर्ट पर पहुँचने, अपने टिकट की एक प्रति व अपने पहचान-पत्र को साथ रखना आवश्यक है।
  • इसके साथ ही इन नियमों के अंतर्गत यात्रा के दौरान केबिन के अंदर और बैगेज के रूप में ले जाए जाने वाले सामानों के संबंध में कुछ निर्देश जारी किये गए हैं-
    • हवाई जहाज़ के केबिन में ड्राई सेल बैटरी, नुकीले उपकरण, बंदूक व हथियार (Firearm) तथा इन आकारों में बने खिलौने, ई-सिगरेट आदि ले जाने पर प्रतिबंध है।
    • हालाँकि एल्कोहलिक पेय पदार्थ, परफ्यूम, दवाइयाँ या प्रशाधन का सामान, चिकित्सा कारणों से ऑक्सीजन के छोटे सिलेंडर व कृत्रिम अंगों के प्रचालन के लिये यात्री द्वारा उपयोग किये जा रहे कार्बन डाईऑक्साइड के छोटे सिलेंडर पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होते।

चेक-इन बैगेज के रूप में प्रतिबंधित सामान:

कई हानिकारक सामानों को केबिन बैगेज या चेक-इन सामान के साथ भी नहीं ले जाया जा सकता।

  • इनमें विस्फोटक सामग्री, कंप्रेस्ड गैस, ज्वलनशील पदार्थ, ऑक्सीकारक सामग्री (Oxidizing Material) आदि शामिल हैं।
  • इसके साथ ही ज़हर, संक्रामक पदार्थ व रेडियोएक्टिव पदार्थों जैसी सामग्रियों को हवाई यात्रा के दौरान ले जाने पर प्रतिबंध है।

अभ्यास प्रश्न: वर्तमान समय में हवाई यात्रा में लोगों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए, भारत में नागरिक उड्डयन सुरक्षा से संबंधित नियमों और संस्थाओं की कार्यप्रणाली तथा इनके महत्त्व की विवेचना कीजिये।

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