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विदेश व्यापार नीति (2015-20) की मध्यावधि समीक्षा ज़ारी

  • 08 Dec 2017
  • 3 min read

संदर्भ

हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा विदेश व्यापार नीति (2015-20) की मध्यावधि समीक्षा जारी की गई है। इसके साथ ही वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात तथा देश में रोज़गार की संभावनाओं में वृद्धि के लिये नीतिगत उपाय किये जाने की उम्मीद जताई गई है।  

प्रमुख बिंदु

  • विदेश व्यापार नीति सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्यमों, श्रमोन्मुखी उद्योगों और कृषि क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी।
  • वस्तु निर्यात योजना (MEIS) और सेवा निर्यात योजना (SEIS) का दायरा बढ़ाया जाएगा।
  • श्रम बहुल उद्योगों तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से निर्यात के लिये MEIS के अंतर्गत प्रोत्साहन दर 2 % बढ़ाई गई।
  • सेवा क्षेत्र में भी निर्यात को बल देने के लिये SEIS के अंतर्गत प्रोत्साहन दर 2% बढ़ाई गई। 
  • श्रम बहुल कपड़ा क्षेत्र में तैयार परिधानों तथा मेड-अप्स के लिये एमईआईएस प्रोत्साहनों को दो प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत किया जाएगा।
  • ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स की वैधता अवधि 18 माह से बढ़ाकर 24 माह कर दी गई है तथा स्क्रिप्स के हस्तांतरण/बिक्री पर जीएसटी दरें घटाकर शून्य कर दी गई हैं।
  • वाणिज्य विभाग में एक नया लॉजिस्टिक्स प्रभाग बनाया गया है, ताकि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के एकीकृत विकास में समन्वय स्थापित किया जा सके। इसके लिये नीतिगत बदलाव किये जाएंगे, मौजूदा प्रक्रियाओं को बेहतर किया जाएगा और विभिन्न बाधाओं की पहचान की जाएगी।
  • रेशम के कालीन और जूट से बने सामानों, चमड़ा क्षेत्र, कृषि उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक तथा दूरसंचार उपकरणों, चिकित्सा उपकरणों तथा समुद्री उत्पादों के लिये अतिरिक्त वार्षिक प्रोत्साहन दिया जाएगा।

निष्कर्ष

विदेश व्यापार नीति की मध्यावधि समीक्षा का उद्देश्य व्यापार नियमों को आसान कर निर्यात को बढ़ावा देना, उच्च रोज़गार क्षेत्रों को समर्थन देना, जीएसटी सेवाओं का पर्याप्त लाभ उठाना, सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देना एवं निर्यात निष्पादन की निगरानी करना है। विदेश व्यापार नीति की समीक्षा में कहा गया है कि भारत अब जीएसटी सुविधाओं के जरिये अफ्रीकी तथा लैटिन अमेरिका के बाजारों में निर्यात को बढ़ावा देगा।

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