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‘अनिवासी भारतीय (प्रवासी) विवाह पंजीकरण विधेयक,  2019’

  • 14 Feb 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अप्रवासी भारतीयों के विवाह के पंजीकरण पर एक पथ प्रवर्तक विधेयक ‘अनिवासी भारतीय (प्रवासी) विवाह पंजीकरण विधेयक,  2019’ (Registration of Marriage of Non-Resident Indian (NRI) Bill, 2019) राज्यसभा में पेश किया गया।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • इस विधेयक का उद्देश्‍य अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ अप्रवासी भारतीय (Non-Resident Indian: NRI) पति द्वारा भारतीय महिला के शोषण के खिलाफ अधिक सुरक्षा प्रदान करना है।
  • प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, किसी भी NRI द्वारा भारतीय युवती (चाहे वह युवती भारत में रह रही हो अथवा स्वयं भी NRI हो) से विवाह का पंजीयन शादी की तारीख से 30 दिन के भीतर करवाना अनिवार्य होगा।

  • यह विधेयक अप्रवासी भारतीय की संपत्ति की कुर्की का भी प्रावधान करता है, यदि वह अदालत के सामने पेश नहीं होता है और अदालत द्वारा अपराधी घोषित किया जाता है।
  • विधेयक पारित हो जाने पर निम्‍नलिखित में आवश्‍यक बदलाव करने होंगे-

♦ पासपोर्ट अधिनियम, 1967 (Passports Act, 1967) में
♦ धारा 86A को शामिल करते हुए फौजदारी या दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Code of Criminal Procedure 1973) में

महत्त्व

  • विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, भारत या विदेश में शादी के 30 दिनों के भीतर विवाह का पंजीकरण किया जाना अनिवार्य है, इस प्रकार विभिन्न पारिवारिक कानूनों के तहत परित्यक्त पति या पत्नी के अधिकारों का बेहतर ढंग से प्रवर्तन संभव होगा।

  • इसी तरह पासपोर्ट अधिनियम में संशोधन करने से पासपोर्ट प्राधिकरण को उस स्थिति में अप्रवासी भारतीय के पासपोर्ट को ज़ब्त करने या रद्द करने का अधिकार होगा, जब यह ध्यान में लाया जाए कि अप्रवासी भारतीय ने शादी की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपनी शादी का पंजीकरण नहीं कराया है।
  • फौजदारी अथवा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में संशोधन के फलस्‍वरूप अनिवासी भारतीयों से वि‍वाह करने वाली भारतीय महिलाओं को अपेक्षाकृत ज़्यादा संरक्षण मिलेगा। CRPC में संशोधन, 1973 विदेश मंत्रालय के विशेष रूप से नामित वेबसाइट के माध्यम से सम्मन, वारंट जारी करने के लिये न्यायालयों को सशक्त करेगा।
  • इसके साथ ही यह विधेयक जीवनसाथी का उत्‍पीड़न करने वाले अनिवासी भारतीयों पर लगाम लगाएगा।

निष्कर्ष

  • यह विधेयक विदेश मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा कानून एवं न्याय मंत्रालय की एक संयुक्त पहल का परिणाम है। विदेश मंत्रालय द्वारा भारतीय नागरिकों, ज़्यादातर महिलाओं जो कि अप्रवासी भारतीय पतियों द्वारा परित्यक्त या उत्पीड़ित की गई हैं, से प्राप्त कई शिकायतों के कारण इस विधेयक का प्रस्तुतीकरण आवश्यक था।
  • इससे दुनिया भर में अप्रवासी भारतीयों से शादी करने वाली सभी भारतीय महिलाओं को काफी राहत मिलेगी।

स्रोत : पी.आई.बी एवं विदेश मंत्रालय की वेबसाइट

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