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पीआरएस कैप्सूल्स

विविध

अप्रैल 2020

  • 10 Jun 2020
  • 66 min read

PRS के प्रमुख हाइलाइट्स 

  • कोविड-19
    • महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 
    • सांसदों और मंत्रियों के वेतन एवं अन्य भत्तों में कटौती 
    • आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली तत्परता पैकेज के लिये 15,000 करोड़ रुपए मंजूर
    • कोविड-19 से निपटने हेतु RBI द्वारा किये गए उपाय  
    • पड़ोसी देशों की कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिये FDI नीति में संशोधन 
    • कुछ वस्तुओं की निर्यात नीतियों में संशोधन
    • PF खातों में नियोक्ता के अंशदान के भुगतान की योजना प्रस्तावित
    • कोविड-19 के कारण IBC में निर्धारित कुछ समय-सीमाओं में परिवर्तन
    • कोविड-19 के दौरान अदालतों का कामकाज
    • UGC ने विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये
    • विद्युत क्षेत्र पर कोविड-19 और लॉकडाउन के प्रभाव को कम करने के लिये राहत उपायों की घोषणा 
    • गर्भाधान पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक नियम, 1996 के अंतर्गत कुछ प्रावधान निलंबित
    • UIDAI ने आम सेवा केंद्रों के माध्यम से आधार अपडेशन सुविधा की अनुमति दी
    • राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और बाघ अभयारण्यों में कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के लिये एडवाइजरी जारी
    • लॉकडाउन के दौरान सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने से संबंधित एडवाइजरी
    • जल जीवन मिशन के अंतर्गत डेटा अपडेशन के लिये समय-सीमा को बढ़ाया गया
    • वर्क फ्रॉम होम सुविधा के लिये शर्तों और नियमों में छूट को बढ़ाया गया
    • कोविड-19 से संबंधित फेक न्यूज से निपटने के लिये तथ्य जाँच इकाई बनाई गई
  • स्वास्थ्य
    • भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2020 
    • होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2020 
    • सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) संशोधन नियम, 2020 अधिसूचित
  • वित्त
    • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर गठित टास्कफोर्स ने अपनी रिपोर्ट सौंपी
  • विद्युत
    • मसौदा विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020 
  • सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण
    • मसौदा ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 जारी
  • श्रम और रोजगार
    • औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर स्थायी समिति ने रिपोर्ट सौंपी 
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
    • जैव ईंधन समन्वय समिति ने इथेनॉल बनाने के लिये अतिरिक्त चावल के उपयोग को मंजूरी दी 
  • परिवहन
    • रेलवे बोर्ड ने प्रतियोगिता के आधार पर PSU को काम सौंपने की मंजूरी दी
  • गृह मामले
    • अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों और पुलिस स्टेशनों में AFSPA अब भी लागू
  • कृषि
    • IMD ने दक्षिण-पश्चिमी मानसून वर्ष 2020 के लिये पूर्वानुमान जारी किया
    • कैबिनेट ने फॉस्फोरस और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिये संशोधित पोषण आधारित सब्सिडी दर को मंजूरी दी
  • मीडिया और ब्रॉडकास्ट
    • FM रेडियो चैनलों की नीलामी के लिये आरक्षित मूल्य पर TRAI के सुझाव
    • TRAI ने सेट-टॉप बॉक्स की अंतर संचालनीयता पर सुझाव जारी किये
    • TRAI ने टेलीविज़न दर्शकों के प्रबंधन और रेटिंग प्रणाली पर सुझाव जारी किये
  • संचार
    • TRAI ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग के लिये स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क पर टिप्पणियों को आमंत्रित किया 

कोविड-19

महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 

कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हो रही हिंसा में बढ़ोतरी को देखते हुए महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 (Epidemic Diseases (Amendment) Ordinance, 2020) जारी किया गया। यह अध्यादेश महामारी रोग अधिनियम, 1897 (Epidemic Diseases Act, 1897) में संशोधन करता है। अधिनियम में खतरनाक महामारियों की रोकथाम से संबंधित प्रावधान हैं। अध्यादेश इस अधिनियम में संशोधन करता है जिससे महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को संरक्षण प्रदान किया जा सके तथा ऐसी बीमारियों को फैलने से रोकने के लिये केंद्र सरकार की शक्तियों में विस्तार करता है। 

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सांसदों और मंत्रियों के वेतन एवं अन्य भत्तों में कटौती 

कोविड-19 से निपटने के लिये केंद्र के संसाधनों को पूरा करने के लिये सरकार ने संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 में संशोधन के लिये एक अध्यादेश जारी किया था।

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आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली तत्परता पैकेज के लिये 15,000 करोड़ रुपए मंजूर

केंद्र सरकार ने कोविड-19 के आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली तत्परता पैकेज के लिये 15,000 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसमें से 7,774 करोड़ रुपए कोविड-19 के आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिये खर्च किये जाएंगे और शेष राशि का मध्यम अवधि (1 से 4 वर्ष) में सहयोग के लिये उपयोग किया जाएगा। इस राशि का इस्तेमाल निम्नलिखित के लिये किया जाएगा: 

(i) कोविड-19 के निदान और उपचार सुविधाओं को विकसित करने हेतु। 
(ii) अनिवार्य चिकित्सा उपकरण और दवाओं की खरीद। 
(iii) केंद्र और राज्य स्तरीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने हेतु ताकि भविष्य में बीमारियों की रोकथाम एवं उनके लिये तैयारियाँ की जा सकें। 

कोविड-19 से निपटने हेतु RBI द्वारा किये गए उपाय  

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने कोविड-19 के कारण उत्पन्न वित्तीय तनाव को कम करने के लिये अतिरिक्त उपायों की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि RBI ने वित्तीय राहत देने हेतु मार्च 2020 में कुछ उपायों की घोषणा की थी। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 

(i) बाजार में चल निधि बढ़ाना ताकि यह सुनिश्चित हो कि वित्तीय बाजार और संस्थान सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं। 
(ii) लोन चुकाने के लिये उधारकर्त्ताओं को राहत देना। 
(iii) नीतिगत दर अर्थात् रेपो रेट में कटौती करना।

अप्रैल में कुछ अन्य बड़ी घोषणाएँ की गईं जो इस प्रकार हैं:

  • नीति दर और चल निधि प्रबंधन: रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर RBI बैंकों से उधार लेता है) को 4% से घटाकर 3.75% कर दिया गया है। पिछले महीने रिवर्स रेपो दर को 4.9% से घटाकर 4% किया गया था। इसके अतिरिक्त RBI कुल 50,000 करोड़ रुपए की राशि की लंबी अवधि हेतु रेपो परिचालन का लक्ष्य रखेगा।
  • वित्तीय संस्थानों का पुनर्वित्तपोषण: RBI ने कहा कि सभी भारतीय वित्तीय संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development- NABARD), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of India- SIDBI) और राष्ट्रीय हाउसिंग बैंक (National Housing Bank- NHB) को बाजार से संसाधन जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय बैंक इन संस्थानों के लिये 50,000 करोड़ रुपए की राशि प्रदान करेगा (NABARD को 25,000 करोड़ रुपए, SIDBI को 15,000 करोड़ रुपए और NHB को 10,000 करोड़ रुपए)।
  • बैंकिंग प्रणाली: मार्च 2020 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लाभ से बैंकों को अगले किसी निर्देश तक कोई और लाभांश भुगतान नहीं करना चाहिये ताकि कोविड-19 के मद्देनजर बैंकों के पास उपलब्ध पूंजी की पर्याप्त मात्रा बनी रहे। इसके अतिरिक्त सितंबर 2020 तक चल निधि कवरेज अनुपात (Liquidity Coverage Ratio-LCR) को मौजूदा 100% से घटाकर 80% कर दिया गया है। इस अनुपात को अप्रैल 2021 में पूरी तरह से बहाल किया जाएगा। LCR 30 दिनों के लिये कुल नकदी बहिर्वाह (Outflows) की तुलना में उच्च गुणवत्ता की चल संपत्तियों के अनुपात को दर्शाता है, ताकि तनावपूर्ण स्थितियों से निपटा जा सके।
  • म्युचुअल फंड्स के लिये चल निधि: म्युचुअल फंड्स के लिये 50,000 करोड़ रुपए की विशेष चल निधि सुविधा की घोषणा की गई है ताकि म्यूचुअल फंड पर तरलता दबाव को कम किया जा सके। यह सुविधा 27 अप्रैल से 11 मई, 2020 तक उपलब्ध है या जब तक आवंटित राशि का उपयोग किया जाता है।
  • किसानों के लिये ऋण: RBI ने उन किसानों को अल्पावधि के फसल ऋण (तीन लाख रुपए तक) पर ब्याज सहायता और त्वरित पुनर्भुगतान प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ देने का फैसला किया , जिन पर 1 मार्च, 2020 से 31 मई, 2020 के बीच बकाया शेष का था। इन योजनाओं के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों (मत्स्य और पशुपालन करने वालों को भी) को 2% का ब्याज सहायता दी जाती है। इसके अतिरिक्त समय पर ऋण चुकाने पर 3% का प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • केंद्र और राज्यों के लिये अर्थोपाय अग्रिम सीमा में वृद्धि : RBI ने केंद्र और राज्य सरकारों के लिये अर्थोपाय अग्रिम (Ways and Means Advances- WMA) की सीमाओं में बढ़ोतरी की घोषणा की।  WMA वे अस्थायी ऋण होते हैं जो RBI द्वारा केंद्र और राज्यों को दिये जाते हैं ताकि वे अपनी तात्कालिक व्यय संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें और उन्हें तीन महीने के भीतर चुका देना होता है। WMA सीमाओं (कि सरकार किस सीमा तक ऋण ले सकती है) को अप्रैल-सितंबर 2020 की अवधि के लिये बढ़ा दिया गया है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों को कोविड-19 से संबंधित एवं अन्य व्यय के लिये अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करना है। केंद्र सरकार के लिये WMA की सीमा को अप्रैल-सितंबर 2020 के लिये 1.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। राज्य सरकारों हेतु इस सीमा को इसी अवधि के लिये 31 मार्च, 2020 की निर्धारित सीमा से 60% बढ़ा दिया गया है।

पड़ोसी देशों की कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिये FDI नीति में संशोधन 

कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न स्थितियों के मद्देनज़र भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिये केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI) नीति में संशोधन किये हैं। संशोधित नीति भारत की सीमा से लगे देश की कंपनी या नागरिक या निवासी को स्वचालित मार्ग के माध्यम से निवेश करने को प्रतिबंधित करती है। ऐसी कंपनियाँ या व्यक्ति सिर्फ सरकारी मार्ग से ही निवेश कर सकते हैं। स्वचालित मार्ग के अंतर्गत विदेशी निवेशक को FDI के लिये किसी मंजूरी की जरूरत नहीं होती, जबकि सरकारी मार्ग में सरकारी मंजूरी अनिवार्य होती है। इन देशों की कंपनियों या व्यक्तियों की मौजूदा या भविष्य की FDI के ट्रांसफर के लिये भी मंजूरी की आवश्यकता होगी।

पाकिस्तान और बांग्लादेश की कंपनियों और नागरिकों के लिये कुछ अतिरिक्त प्रतिबंध बने रहेंगे। पहले भी पाकिस्तान और बांग्लादेश की कंपनियाँ या नागरिक सरकारी मार्ग से ही निवेश कर सकते थे। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान की कंपनियों या नागरिकों के लिये रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश करना प्रतिबंधित है।

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कुछ वस्तुओं की निर्यात नीतियों में संशोधन

डायग्नोस्टिक किट से संबंधित निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित (Free to Restricted) में परिवर्तित कर दिया गया था। अब कुछ फार्मास्यूटिकल उत्पादों के लिये इसे प्रतिबंध से मुक्त कर दिया गया है।  इसमें कुछ सक्रिय दवा सामग्री (Active Pharmaceutical Ingredients- APIs) और इन APIs से बनने वाले फार्मूलेशन जैसे विटामिन बी1, बी6 और बी12, मेट्रोनाइडाजोल और एरिथ्रोमाइसीन लवण शामिल हैं। प्रतिबंधित निर्यात नीति का तात्पर्य है कि सरकार द्वारा किसी विशिष्ट देश या देशों को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की मात्रा की सीमा तय होगी।

पैरासीटामोल: 17 अप्रैल को पैरासीटामोल से बनने वाले फार्मूलेशन्स से संबंधित निर्यात नीति को प्रतिबंधित से मुक्त में परिवर्तित किया गया। हालाँकि पैरासीटामोल API के निर्यात पर प्रतिबंध जारी है। 3 मार्च को पैरासीटामोल और पैरासीटामोल API से बनने वाले दोनों फार्मूलेशन्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन: हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और उसके फार्मूलेशंस के निर्यात पर 25 मार्च को प्रतिबंध लगाया गए लेकिन कुछ अपवादों को अनुमति दी गई थी जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 

(i) विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और निर्यात करने वाली यूनिट्स से निर्यात को अनुमति ताकि वे निर्यात संबंधित बाध्यताएँ पूरी कर सकें।
(ii) अन्य देशों के लिये मानवीय आधार पर।

4 अप्रैल को इन सभी अपवादों को हटा दिया गया और निर्यात को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। हालाँकि 7 अप्रैल को सरकार ने घोषणा की कि कुछ मामलों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात की अनुमति दी जाएगी।  इसमें पड़ोसी देशों को निर्यात शामिल है जो दवाओं की आपूर्ति के लिये भारत पर निर्भर हैं और वे देश जो कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हैं।

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PF खातों में नियोक्ता के अंशदान के भुगतान की योजना प्रस्तावित

कर्मचारी भविष्य निधि योजना (Employees Provident Funds Scheme), 1952 प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के लिये अंशदान आधारित भविष्य निधि योजना और पेंशन योजना का प्रावधान करती है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस उपाय को लागू करने के लिये एक योजना अधिसूचित की है। यह योजना तीन महीने की अवधि के लिये प्रभावी होगी जो कि मार्च 2020 से शुरू हुई है। 

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कोविड-19 के कारण IBC में निर्धारित कुछ समय-सीमाओं में परिवर्तन

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) के अंतर्गत अधिसूचित विनियम में संशोधन प्रस्तावित किये। संहिता कंपनियों के दिवालियापन के समाधान के लिये समयबद्ध प्रक्रिया का प्रावधान करती है। इसके अतिरिक्त संहिता कंपनी के क्रेडिटर्स को दिवालियापन विनियम की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देती है, अगर देनदार कंपनी के डिफॉल्ट की राशि एक करोड़ रुपए से अधिक है। संहिता कंपनियों के परिसमापन (liquidation) के लिये प्रावधान भी करती है। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • समय सीमा को बढ़ाना: कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन की अवधि को दिवालियापन विनियम या परिसमापन प्रक्रिया के दौरान अपेक्षित समय अवधि में नहीं गिना जाएगा (जैसे दिवालियापन योजना या परिसमापन प्रक्रिया की मंजूरी की समय-सीमा)। यह प्रावधान 29 मार्च, 2020 (विनियम संबंधी प्रावधान) और 17 अप्रैल, 2020 (परिसमापन संबंधी प्रावधान) से प्रभावी होगा।
  • शुल्क भुगतान की समय सीमा में राहत: संहिता के अंतर्गत दिवालियापन पेशेवर  (Insolvency Professionals- IP) और दिवालियापन पेशेवर संस्थाओं (Insolvency Professional Entities- IPE) को पिछले वित्तीय वर्ष में अर्जित (IP द्वारा) व्यावसायिक शुल्क का 0.25% और सेवाओं के टर्नओवर (IPE द्वारा) का 0.25% भाग शुल्क फीस के रूप में चुकाना होता है और वह भी प्रत्येक वर्ष 30 अप्रैल तक। इन विनियम को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिये 30 जून तक बढ़ा दिया गया है। इसके अतिरिक्त IPE के लिये भागीदार या निदेशक की ज्वाइनिंग या उसके पद छोड़ने की जानकारी देने की समय सीमा भी सात दिन से 30 दिन कर दी गई है। IPE ऐसी संस्थाएँ होती है जो कि दिवालियापन पेशेवरों को सहयोग देती है। यह प्रावधान 28 मार्च, 2020 से लागू है।
  • दंड के भुगतान की समय सीमा: संहिता के अंतर्गत दिवालियापन और रेज़ोल्यूशन पेशेवर को क्रमशः दिवालियापन और रेज़ोल्यूशन प्रक्रियाओं के विभिन्न चरणों में फॉर्म फाइल करने होते हैं। इन फॉर्म में संबंधित पक्षों की शुरुआती सहमति से लेकर रेज़ोल्यूशन योजना या परिसमापन क्रम के विवरण तक शामिल हैं। 1 अप्रैल, 2020 के बाद फाइल होने वाले फॉर्म पर विलंब के प्रत्येक महीने के आधार पर जुर्माना भरना पड़ता है। इस तारीख को अप्रैल 2020 के स्थान पर 1 अक्तूबर, 2020 कर दिया गया है। यह प्रावधान 26 मार्च, 2020 से प्रभावी होगा। 

कोविड-19 के दौरान अदालतों का कामकाज

लॉकडाउन के मद्देनज़र उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 के दौरान अदालतों के कामकाज के संबंध में निर्देश जारी किये हैं जिसमे कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय और सभी उच्च न्यायालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीकों के माध्यम से न्यायपालिका का कामकाज करने के लिये अधिकृत हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक उच्च न्यायालय अपने और अपने अधीनस्थ न्यायालयों के लिये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीकों के उपयोग के तौर-तरीकों को निर्धारित करने के लिये अधिकृत है जो इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

UGC ने विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission- UGC) ने कोविड-19 महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के मद्देनज़र विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों की समस्याओं पर विचार करने के लिये एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। समिति ने परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर से संबंधित विषयों पर भी विचार किया। विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

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विद्युत क्षेत्र पर कोविड-19 और लॉकडाउन के प्रभाव को कम करने के लिये राहत उपायों की घोषणा 

राज्य सरकारों को सलाह: ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) ने राज्य सरकारों को निम्नलिखित के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये हैं: 

(i) अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की अनुमति। 
(ii) ट्रांसमिशन प्रणाली और उत्पादन संयंत्रों से संबंधित निर्माण गतिविधियाँ।
(iii) लॉकडाउन की अवधि के दौरान विद्युत उत्पादन उपयोगिताओं (Power Generation Utilities) की परिचालन निरंतरता की अनुमति।

डिस्कॉम्स के भुगतान से संबंधित स्पष्टीकरण: 27 मार्च को विद्युत मंत्रालय ने वितरण कंपनियों (Discoms) को तीन महीने का अधिस्थगन (Moratorium) दिया था ताकि वे उत्पादन कंपनियों को भुगतान कर सकें। 1 अप्रैल को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने उत्पादन कंपनियों को डिस्कॉम द्वारा भुगतान के संबंध में एक स्पष्टीकरण जारी किया। अक्षय ऊर्जा उत्पादन कंपनियों के भुगतान को अधिस्थगन के अंतर्गत कवर नहीं किया जाएगा। अक्षय ऊर्जा उत्पादन चालू स्थिति में होना चाहिये और लॉकडाउन की अवधि के दौरान भी यह जारी रहेगा।

अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ाई गई: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को शुरू करने के लिये समय-सीमा में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। समय सीमा का विस्तार लॉकडाउन की अवधि और इस तरह के लॉकडाउन की समाप्ति के 30 दिन बाद के बराबर होगा।

सौर PV मॉड्यूल और सौर PV कोशिकाओं के स्वीकृत मॉडल और मैन्युफैक्चरर्स की अनुमोदित सूचियों (Approved Lists of Models and Manufacturers-ALMM) के कार्यान्वयन की प्रभावी तिथि छह महीने के लिये बढ़ा दी गई है। पहले यह समय सीमा 31 मार्च, 2020 थी। ALMM ऑर्डर में मॉडल और विनिर्माताओं की सूची दी गई है। आदेश में कहा गया है कि सभी सौर ऊर्जा परियोजनाएँ प्रभावी तारीख के बाद ALMM सूची में शामिल विनिर्माताओं से अनिवार्य रूप से खरीद करेगी। 

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की क्रेडिट सुविधा का उपयोग पत्र: बिजली क्षेत्र के उपभोक्ताओं को राहत देने और कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited- CIL) ने ईंधन आपूर्ति समझौते (Fuel Security Agreement) के तहत अग्रिम नकद भुगतान की बजाय भविष्य में एक निश्चित अवधि में भुगतान की सुविधा वाला (यूजेन्स) ऋण पत्र जारी करने की सुविधा प्रदान की है। इसका उद्देश्य विद्युत उत्पादन कंपनियों के लिये कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। गैर-बिजली क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भी यह सुविधा दी गई है। इससे बाज़ारों में चल निधि बढ़ेगी और कोयला उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

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गर्भाधान पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक नियम, 1996 के अंतर्गत कुछ प्रावधान निलंबित

लॉकडाउन के मद्देनजर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गर्भाधान पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) नियम, 1996 (Preconception and Pre-natal Diagnostic Techniques (Prohibition of Sex Selection) Rules,1996) के अंतर्गत कुछ नियमों को निलंबित कर दिया। इनमें आनुवंशिक परामर्श केंद्रों, आनुवंशिक लैब और क्लीनिकों, अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों और इमेजिंग केंद्रों से निम्नलिखित नियमों का अनुपालन अपेक्षित है: 

(i) पंजीकरण का नवीनीकरण करवाना। 
(ii) सभी पूर्व गर्भाधान या गर्भधारण संबंधी प्रक्रियाओं की मासिक रिपोर्ट फाइल करना। 

कुछ सरकारी प्राधिकारियों को त्रैमासिक रिपोर्ट दर्ज करने और प्रयोगशालाओं एवं क्लीनिकों के पंजीकरण की सूचनाओं का रख रखाव करने के नियमों से भी छूट दी गई है। नियम लॉकडाउन की तारीख से 24 मार्च, 2020 से (पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ) 30 जून, 2020 तक निलंबित रहेंगे।

UIDAI ने आम सेवा केंद्रों के माध्यम से आधार अपडेशन सुविधा की अनुमति दी

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India- UIDAI) ने कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Centres- CSC) जो कि बैंकिंग संवाददाता के रूप में काम करता है, को आधार अपडेशन सुविधा (आधार विवरण को अपडेट करने के लिये) शुरू करने की अनुमति दी है। इससे लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में आधार कार्डधारकों को राहत मिलेगी, चूँकि उन्हें इस काम के लिये बैंक की शाखा या डाकघर के आधार केंद्रों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और बाघ अभयारण्यों में कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के लिये एडवाइजरी जारी

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) ने राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और बाघ अभयारण्यों में कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के संबंध में एक एडवाइजरी जारी की। यह एडवाइजरी संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग की राष्ट्रीय पशु चिकित्सा सेवा प्रयोगशाला द्वारा न्यूयॉर्क के एक चिड़ियाघर में एक टाइगर के कोविड-19 पॉजिटिव होने की पुष्टि करने के परिणामस्वरूप जारी की गई है।

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लॉकडाउन के दौरान सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने से संबंधित एडवाइजरी

जल शक्ति मंत्रालय ने नागरिकों को सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकारों को एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी उच्चतम न्यायालय के उस निर्णय का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु जारी की गई है जिसमे उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि कोविड-19 से संघर्ष में देश के सभी लोगों को साफ पानी मिलना चाहिये। एडवाइजरी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • उन क्षेत्रों में आपूर्ति के लिये उपाय करना जहाँ पानी की कमी है। राहत शिविरों, अस्पतालों, क्वारंटाइन केंद्रों, वृद्धाश्रमों, स्लम्स बस्तियों और समाज के गरीब तबके की विशेष देखभाल की जा सकती है।
  • पेयजल को सुरक्षित करने के लिये रासायनिक उपचार का उपयोग किया जाए।
  • स्रोत से वितरण बिंदुओं तक पानी की आपूर्ति प्रणालियों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिये चौबीस घंटे निगरानी की व्यवस्था करना।
  • जन स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (Public Health Engineering Department) के अधिकारियों के लिये विशेष मास्क और सैनिटाइजर्स जैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय प्रदान करना, विशेष रूप से उन लोगों के लिये जो क्षेत्र में जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव का प्रबंधन कर रहे हैं।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत डेटा अपडेशन के लिये समय सीमा को बढ़ाया गया

जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) ने कोविड-19 महामारी के कारण मौजूदा स्थिति को देखते हुए जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के अंतर्गत डेटा अपडेशन की समय-सीमा 22 अप्रैल, 2020 से बढ़ाकर 5 मई, 2020 कर दी है। इससे पहले यह समय सीमा 31 मार्च, 2020 से 22 अप्रैल, 2020 की गई थी।  

जल जीवन मिशन का लक्ष्य वर्ष 2024 तक ग्रामीण भारत के सभी घरों में व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत आने वाले आँकड़ों में सभी बस्तियों के लिये जनसंख्या और परिवार का डेटा, आवास के कवरेज की जानकारी तथा आधारभूत डेटा का सत्यापन और मासिक शारीरिक एवं वित्तीय प्रगति शामिल है।

मंत्रालय ने कहा है कि समय सीमा बढ़ाने के किसी और अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह कहा गया कि डेटा के अपडेशन में देरी कार्यक्रम के अंतर्गत प्लानिंग की प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसका कारण यह है कि नल कनेक्शन से रहित घरों की संख्या तथा पानी की गुणवत्ता प्रभावित बस्तियों में रहने वाली आबादी से संबंधित डेटा को धनराशि जारी करते समय ध्यान में रखा जाता है।

विलंब से धनराशि का नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिये है क्योंकि मौजूदा निर्देशों के अनुसार, हर महीने कार्यक्रम के लिये अधिकतम 5% बजटीय आवंटन ही जारी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विभाग अपने बजट आवंटन का अधिकतम 15% ही उपयोग कर सकता है।

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वर्क फ्रॉम होम सुविधा के लिये शर्तों और नियमों में छूट को बढ़ाया गया

मार्च में दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने 30 अप्रैल, 2020 तक वर्क फ्रॉम होम के नियम और शर्तों में कुछ छूट दी थी। इस छूट को 31 मई, 2020 तक बढ़ाया गया है। ये नियम और शर्तें अन्य सेवा प्रदाताओं (Other Service Providers- OSP) के लिये अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने पर लागू होते हैं। OSP ऐसी कंपनियाँ हैं जो विभिन्न एप्लीकेशन सेवाएँ प्रदान करती हैं जैसे- टेली-बैंकिंग, टेलीकॉम कॉमर्स, कॉल सेंटर और अन्य IT-सक्षम सेवाएँ। इन छूटों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

(i) पूर्व अनुमति लेने से छूट, और 
(ii) सिक्योरिटी डिपॉजिट और एग्रीमेंट की शर्तों से छूट। 

कोविड-19 से संबंधित फेक न्यूज से निपटने के लिये तथ्य जाँच इकाई बनाई गई

प्रेस सूचना ब्यूरो (Press Information Bureau- PIB) के अंतर्गत तथ्य जाँच इकाई बनाई गई है जो कि कोविड-19 से संबंधित फेक समाचारों से निपटेगी। कोविड-19 से संबंधित सरकारी उपायों और उसकी प्रगति की जानकारी देने वाला दैनिक बुलेटिन 1 अप्रैल, 2019 से PIB द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक नोडल अधिकारी को नियुक्त किया है। यह अधिकारी मंत्रालय की कोविड-19 से संबंधित सभी शिकायतों से निपटेगा।


स्वास्थ्य

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2020 

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2020 (Indian Medicine Central Council (Amendment) Ordinance, 2020) जारी किया गया। यह अध्यादेश भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1970 (Indian Medicine Central Council Act, 1970) में संशोधन करता है। अधिनियम केंद्रीय परिषद के गठन का प्रावधान करता है जो कि भारतीय चिकित्सा प्रणाली (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा सहित) की शिक्षा और अभ्यास को नियंत्रित करता है।

  • केंद्रीय परिषद का सुपरसेशन: अध्यादेश 1970 के अधिनियम में संशोधन करता है और केंद्रीय परिषद के अधिक्रमण (सुपरसेशन) का प्रावधान करता है। केंद्रीय परिषद को सुपरसेशन की तारीख के एक वर्ष के भीतर पुनर्गठित करना होगा। इस अंतरिम अवधि में केंद्र सरकार बोर्ड ऑफ गवर्नर का गठन करेगी जो केंद्रीय परिषद की शक्तियों का प्रयोग करेगा।
  • बोर्ड ऑफ गवर्नर्स: बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में अधिकतम दस सदस्य होंगे। सदस्यों में भारतीय चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति और प्रतिष्ठित प्रशासक शामिल होंगे। वे नामित सदस्य हो सकते हैं या पदेन सदस्य, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। केंद्र सरकार बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में एक सदस्य को चुनेगी।
  • बोर्ड 1970 के अधिनियम के अंतर्गत गठित केंद्रीय परिषद की शक्तियों का प्रयोग करेगा और उसके लिये निर्धारित कार्य करेगा। इनमें भारतीय चिकित्सा का अभ्यास और शिक्षा को विनियमित करना शामिल है।

होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2020 

होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2020 [Homeopathy Central Council (Amendment) Ordinance, 2020] को जारी किया गया। यह अध्यादेश होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 (Homeopathy Central Council Act, 1973) में संशोधन करता है। अधिनियम होम्योपैथिक शिक्षा और अभ्यास को विनियमित करने वाली होम्योपैथी केंद्रीय परिषद की स्थापना करता है।

1973 के अधिनियम को 2018 में संशोधित किया गया था ताकि केंद्रीय परिषद के सुपरसेशन का प्रावधान किया जा सके। केंद्रीय परिषद को सुपरसेशन की तिथि से एक वर्ष के भीतर पुनर्गठित किया जाना था। इस समय अवधि को 2019 में संशोधित करके दो वर्ष किया गया। अंतरिम अवधि में केंद्र सरकार ने केंद्रीय परिषद की शक्तियों के इस्तेमाल के लिये बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किया। अध्यादेश अधिनियम में संशोधन करता है और केंद्रीय परिषद के सुपरसेशन की समय अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करता है।

सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) संशोधन नियम, 2020 अधिसूचित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) संशोधन नियम, 2020 (Cigarettes and other Tobacco Products (Packaging and Labelling) Amendment Rules, 2020) को अधिसूचित किया। यह नियम सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) नियम, 2008 में संशोधन करता है जो कि सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर प्रतिबंध और व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया था। 2020 के नियमों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: 

  • परिभाषाएँ: 2008 के नियम पैकेज को किसी भी प्रकार के पैक के रूप में परिभाषित करते हैं जिसमें सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों को उपभोक्ता बिक्री के लिये पैक किया जाता है। पैकेज में थोक या अर्द्ध-थोक पैकेज शामिल नहीं होते यदि ऐसे पैकेज उपभोक्ता के उपयोग के लिये नहीं हों। 2020 के नियम अधिनियम में प्रदत्त परिभाषा के अनुरूप पैकेज की परिभाषा में संशोधन करते हैं। अधिनियम रैपर, बॉक्स, कार्टन, टिन या अन्य कंटेनर के रूप में पैकेज को परिभाषित करता है।
  • लेबलिंग: 2008 के नियमों में तंबाकू युक्त पैकेजों पर कुछ पाठकीय चेतावनियों को प्रदर्शित करने की अपेक्षा की गई है जैसे कि ‘तंबाकू कैंसर का कारण बनता है’ और ‘तंबाकू दर्दनाक मौत का कारण बनता है’। 2020 के नियम पैकेजिंग पर ‘तंबाकू के कारण कैंसर होता है’ की चेतावनी को हटाते हैं।
  • इसके अतिरिक्त 2008 के नियमों में कहा गया है कि पैकेज के 60% दृश्य क्षेत्र में चित्रात्मक चेतावनी होनी चाहिये। 2020 के नियम दृश्य क्षेत्र के प्रतिशत वाले निर्देश को समाप्त करते हैं। चित्रात्मक स्वास्थ्य चेतावनियों में केंद्र सरकार द्वारा दी गई छवियाँ होनी चाहिये। 2020 के नियमों में इस संबंध में भी परिवर्तन किया गया है कि किन छवियों को चित्रात्मक चेतावनी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

वित्त

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर गठित टास्कफोर्स ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने सितंबर 2019 में 2019-25 की अवधि के लिये 100 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिये राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure Pipeline-NIP) बनाने से संबंधित एक टास्कफोर्स का गठन किया था। टास्कफोर्स ने NIP पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। NIP का उद्देश्य अगले पाँच वर्षों में अवसंरचना में 100 लाख करोड़ रुपए के निवेश के लिये पर्याप्त रूप से परियोजनाएँ तैयार करना है। 

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विद्युत

मसौदा विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020 

ऊर्जा मंत्रालय ने सार्वजनिक परामर्श के लिये विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020 का मसौदा जारी कर दिया। विधेयक विद्युत अधिनियम, 2003 में संशोधन करता है। अधिनियम देश में विद्युत के उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और व्यापार के विनियम का प्रावधान करता है। 

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सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

मसौदा ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 जारी

मसौदा ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिये जारी किया गया। इन नियमों को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। अधिनियम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण और संरक्षण का प्रावधान करता है। मसौदा नियमों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पहचान प्रमाण पत्र जारी करना: अधिनियम के अंतर्गत पहचान प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन करना होगा। नियमों में कहा गया है कि आवेदन पत्र के साथ एक मनोवैज्ञानिक की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। नाबालिग की स्थिति में यह आवेदन बच्चे के माता-पिता या अभिभावक द्वारा किया जाएगा।
  • प्रमाण पत्र 60 दिनों के भीतर जारी होना चाहिये। जिला मेजिस्ट्रेट ट्रांसजेंडर पहचान पत्र भी जारी करेगा। पहचान प्रमाण पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर ट्रांसजेंडर व्यक्ति के जेंडर और नाम (यदि आवश्यक हो) को सभी आधिकारिक दस्तावेजों में बदलना होगा। ट्रांसजेंडर व्यक्ति उन सभी अधिकारों का उपयोग करेंगे जो उन्हें प्रमाण पत्र जारी करने से पहले मिले थे। जिला मजिस्ट्रेट केवल तभी आवेदकों को प्रमाण पत्र जारी कर सकता है, अगर वे आवेदन की तिथि पर एक वर्ष के लिये उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के निवासी हों।
  • यदि कोई व्यक्ति लिंग परिवर्तन सर्जरी कराता है, तो जिस अस्पताल में सर्जरी हुई हो, उसके चिकित्सा अधीक्षक या मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर पहचान का एक संशोधित प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिये, जो स्त्री या पुरुष के रूप में व्यक्ति के जेंडर को दर्शाता है।
  • अपील: अगर पहचान प्रमाण पत्र का आवेदन रद्द हो जाता हो तो आवेदक 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है, जिस तारीख को आवेदन रद्द हुआ हो। उसकी अपील अपीलीय प्राधिकरण को निर्देशित होगी जिसे संबंधित सरकार द्वारा नामित किया जाएगा।
  • झूठा आवेदन: अगर कोई आवेदक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के पहचान प्रमाण पत्र को प्राप्त करने के लिये आवेदन करता है, जबकि वह ट्रांसजेंडर नहीं है तो उसे सजा भुगतनी पड़ सकती है। 
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का कल्याण: नियमों में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शामिल करने के लिये सभी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं जैसे- शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं तथा कानूनों की समीक्षा की जानी चाहिये। इसके अतिरिक्त संबंधित सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से होने वाले भेदभाव को समाप्त करने के उपाय करने चाहिये। संबंधित सरकार को इन नियमों के अधिसूचित होने के दो वर्षों के भीतर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिये पुनर्वास केंद्र और अलग वॉशरूम्स जैसी सुविधाएँ मुहैया करानी चाहिये।  

श्रम और रोजगार

औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर स्थायी समिति ने रिपोर्ट सौंपी 

श्रम संबंधी स्थायी समिति ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।  यह संहिता व्यापार संघ अधिनियम, 1926 व औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 और औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 का स्थान लेती है। यह संघों को मान्यता, स्थायी आदेशों का प्रमाणन और औद्योगिक विवादों को हल करने का प्रावधान करती है।

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

जैव ईंधन समन्वय समिति ने इथेनॉल बनाने के लिये अतिरिक्त चावल के उपयोग को मंजूरी दी 

राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति ने भारतीय खाद्य निगम के पास मौजूद अतिरिक्त चावल का उपयोग कर इथेनॉल बनाने की मंज़ूरी दे दी है। इस प्रकार उत्पादित इथेनॉल का उपयोग अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र बनाने और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol- EBP) कार्यक्रम के अंतर्गत पेट्रोल के साथ मिश्रित करने के लिये किया जाएगा। EBP कार्यक्रम को वैकल्पिक और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2003 में शुरू किया गया था। पेट्रोल के साथ इथेनॉल को मिश्रित करने से वाहन के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता भी कम होती है।

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 के अनुसार, यदि कृषि फसल वर्ष के दौरान खाद्यान्न की अधिक आपूर्ति का अनुमान लगाया जाता है, तो राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की मंजूरी के आधार पर खाद्यान्न की अधिशेष मात्रा को इथेनॉल में परिवर्तित किया जा सकता है।


परिवहन

रेलवे बोर्ड ने प्रतियोगिता के आधार पर PSU को काम सौंपने की मंजूरी दी

रेलवे बोर्ड ने प्रतियोगिता के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र की यूटिलिटीज (Public Sector Utilities- PSU) को कुछ रेलवे कार्य (परियोजनाओं) सौंपने की मंजूरी दी है। रेलवे बोर्ड के अंतर्गत विद्युतीकरण, सिग्नलिंग, पुल जैसे विभिन्न निदेशालयों ने ऐसे कार्यों को चिह्नित किया है जिन्हें सार्वजनिक उपक्रमों को सौंपा जा सकता है। इन कार्यों में रेलवे विद्युतीकरण, सिग्नलिंग, दूरसंचार, पुलों पर सड़क और रोलिंग स्टॉक शामिल हो सकते हैं।


गृह मामले

अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों और पुलिस स्टेशनों के क्षेत्राधिकार में AFSPA अब भी लागू

गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों (तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग) में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम, 1958 (AFSPA) को लागू रखने की तारीख 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ा दी है। इसके अतिरिक्त चार पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में अधिनियम का विस्तार भी किया गया है। ये हैं: 

(i) नामसाई जिले में नामसाई और महादेवपुर स्टेशन। 
(ii) लोअर दिबांग घाटी जिले में रोइंग स्टेशन। 
(iii) लोहित जिले में सुनपुरा स्टेशन।


कृषि

IMD ने दक्षिण पश्चिमी मानसून वर्ष 2020 के लिये पूर्वानुमान जारी किया

भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department- IMD) ने वर्ष 2020 में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी वर्षा के लिये अपना पहला दीर्घावधिक (मौसमी) पूर्वानुमान जारी किया। जून-सितंबर 2020 की अवधि के दौरान मानसून की मौसमी वर्षा +/- 5% की त्रुटि के साथ लंबी अवधि के औसत (Long Period Average- LPA) के 100% होने का अनुमान है। LPA एक क्षेत्र में वर्ष 1961 से वर्ष 2010 की अवधि के दौरान औसत वर्षा है, जो देश के लिये 88 सेमी है। 96-104% के बीच वर्षा को सामान्य वर्षा माना जाता है।

वर्ष 2019 में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी वर्षा का अनुमान LPA का 96% था, जबकि वास्तविक वर्षा LPA का 110% थी।

कैबिनेट ने फॉस्फोरस और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिये संशोधित पोषण आधारित सब्सिडी दर को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2020-21 के लिये P&K उर्वरकों के लिये संशोधित पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी दरों को मंजूरी दी। पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी योजना के अंतर्गत उर्वरक निर्माताओं और आयातकों को उनकी पोषक सामग्री के आधार पर P&K उर्वरकों की बिक्री के लिये सब्सिडी प्रदान की जाती है। वर्ष 2020-21 के लिये अनुमोदित सब्सिडी की दर सभी चार पोषक तत्त्वों के लिये वर्ष 2019-20 की सब्सिडी दरों से कम है।

तालिका 1: 2020-21 में P&K उर्वरकों के लिये पोषण आधारित सब्सिडी दर (प्रति किलो पर रुपए) 

पोषक तत्व

2019-20

2020-21

परिवर्तन (%)

नाइट्रोजन (N)

18.901

18.789

-0.6%

फॉस्फेटिक (P) 

15.216

14.888

-2.2%

पोटाश (K) 

11.124

10.116

-9.1%

सल्फर (S) 

3.562

2.374

-33.4%

P&K उर्वरकों के लिये सब्सिडी प्रदान करने की लागत वर्ष 2020-21 में 22,187 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है जो कि वर्ष 2019-20 में 22,876 करोड़ रुपए से लगभग 3% कम है।


मीडिया और ब्रॉडकास्ट

FM रेडियो चैनलों की नीलामी के लिये आरक्षित मूल्य पर TRAI के सुझाव

  • भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India- TRAI) ने FM रेडियो चैनलों की नीलामी के लिये आरक्षित मूल्य पर सुझाव जारी किये। अक्टूबर, 2019 में TRAI ने इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया था। वर्तमान में FM रेडियो चैनलों के संचालन की अनुमति शहर के आधार पर दी जाती है और एक बार प्रवेश शुल्क के माध्यम से दी जाती है। यह शुल्क नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित एक राशि होती है। यह वर्ष 2011 में घोषित FM रेडियो प्रसारण नीति के नवीनतम चरण (चरण- III) के अंतर्गत किया जा रहा है।  
  • नीति के अंतर्गत नीलामी से पहले शहरवार आरक्षित मूल्य की घोषणा की जाती है। यह नीलामी के अंतर्गत किसी वस्तु की बिक्री के लिये स्वीकार्य न्यूनतम मूल्य है। इसके अतिरिक्त ऑपरेटर वार्षिक लाइसेंस शुल्क का भी भुगतान करते हैं, जो वार्षिक सकल राजस्व के 4% या प्रवेश शुल्क के 2.5% (जो भी अधिक हो) के बराबर होता है। चरण- III नीति में एक लाख से अधिक की आबादी वाले सभी शहरों और जम्मू कश्मीर तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ निर्दिष्ट शहरों में निजी FM रेडियो चैनल स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा 283 शहरों में FM रेडियो चैनलों के लिये नवीनतम दौर की नीलामी आयोजित करना प्रस्तावित है। इसलिये मंत्रालय ने नीलामी के लिये आरक्षित मूल्यों को निर्धारित करने हेतु TRAI से सुझाव मांगे थे। इस संबंध में TRAI के मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं-
    • आरक्षित मूल्य: किसी शहर में रेडियो चैनलों के लिये आरक्षित मूल्य उस शहर में FM रेडियो चैनल के मूल्यांकन के 0.8 गुना पर निर्धारित किया जाना चाहिये। हालाँकि उत्तर-पूर्व, जम्मू कश्मीर और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित शहरों के लिये कीमत 0.4 गुना निर्धारित की जानी चाहिये। 10 सीमावर्ती शहरों के लिये आरक्षित मूल्य 5 लाख रुपए प्रति चैनल होना चाहिये।
    • प्रसारण तकनीक का विकल्प: चरण-III के अंतर्गत चैनलों की नीलामी, प्रसारण के लिये प्रौद्योगिकी के विकल्प को सीमित नहीं करनी चाहिये। जहाँ प्रसारकों ने डिजिटल तकनीक का चयन किया है, उन्हें एकल आवृत्ति पर तकनीकी व्यवहार्यता के अधीन एक से अधिक चैनल प्रसारित करने की अनुमति दी जानी चाहिये।
    • आवृत्ति के स्वामित्व की अधिकतम सीमा हटाना: वर्तमान में किसी भी इकाई को देश में आवंटित कुल FM रेडियो चैनलों का 15% से अधिक रखने की अनुमति नहीं है। TRAI ने इस सीमा को वापस लेने का सुझाव दिया है।

TRAI ने सेट-टॉप बॉक्स की अंतर-संचालनीयता पर सुझाव जारी किये

ट्राई ने सेट-टॉप बॉक्स की अंतर-संचालनीयता (Interoperability) पर सुझाव जारी किये। नवंबर 2019 में TRAI ने इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया था। सेट-टॉप बॉक्स एक ऐसा उपकरण होता है जो डिजिटल सिग्नल प्राप्त करता है इसे डीकोड करता है और टेलीविजन पर प्रदर्शित करता है। वर्तमान में एक सेवा प्रदाता के सेट-टॉप बॉक्स का उपयोग किसी अन्य सेवा प्रदाता की टेलीविजन प्रसारण सेवाओं तक पहुँचने के लिये नहीं किया जा सकता है। यदि कोई ग्राहक अपने सेवा प्रदाता को बदलना चाहता है तो उसे एक नया सेट-टॉप बॉक्स खरीदना होगा। 

सेट-टॉप बॉक्स की अंतर संचालनीयता उपभोक्ताओं को अपने सेट-टॉप बॉक्स को बदले बिना अपने सेवा प्रदाता को बदलने की स्वतंत्रता प्रदान करेगी। सेट-टॉप बॉक्स की अंतर-संचालनीयता पर TRAI के प्रमुख सुझाव हैं:

  • अंतर संचालनीयता की अनिवार्यता: देश के सभी सेट-टॉप बॉक्स को तकनीकी अंतर संचालनीयता को सपोर्ट करना चाहिये। सूचना और प्रसारण मंत्रालय केबल टेलीविज़न से संबंधित नियमों और लाइसेंसिंग शर्तों में संशोधन कर सकता है ताकि सेट-टॉप बॉक्स की अंतर-संचालनीयता को अनिवार्य किया जा सके। तकनीकी बाधाओं के कारण सेट-टॉप बॉक्स की अंतर संचालनीयता डायरेक्ट टू होम सेगमेंट के भीतर और केबल सेगमेंट के भीतर लागू होगी। मंत्रालय द्वारा अधिसूचना की तारीख के छह महीने के भीतर ऑपरेटरों को इंटरऑपरेबल सेट-टॉप बॉक्स अपनाना होगा।
  • डिजिटल टीवी के माध्यम से अंतर-संचालनीयता: TRAI ने भारत में सभी डिजिटल TV सेटों के लिये उपग्रह और केबल प्लेटफॉर्मों दोनों के माध्यम से TV सामग्री के अभिग्रहण हेतु निम्नलिखित को अनिवार्य करने का सुझाव दिया: 
    (i) USB पोर्ट आधारित सामान्य इंटरफेस।
    (ii) अंतर्निहित ट्यूनर।
  • समन्वय और कार्यान्वयन समिति: मंत्रालय द्वारा सदस्यों के साथ एक समन्वय समिति की स्थापना की जा सकती है: 
    (i) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय 
    (ii) TRAI
    (iii) भारतीय मानक ब्यूरो
    (iv) TV निर्माताओं के प्रतिनिधि

TRAI ने टेलीविजन दर्शकों के प्रबंधन और रेटिंग प्रणाली पर सुझाव जारी किये

TRAI ने टेलीविजन दर्शक मापन और रेटिंग प्रणाली पर सुझाव जारी किये जिसे TRP प्रणाली के रूप में भी जाना जाता है। वर्तमान में उद्योग का नेतृत्व करने वाली संस्था ब्रॉडकास्ट ऑडियंस अनुसंधान परिषद (Broadcast Audience Research Council- BARC) देश में व्यावसायिक आधार पर टेलीविजन रेटिंग सेवाओं की एकमात्र प्रदाता है। TRAI ने कहा कि BARC में संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है ताकि हितों के टकराव की आशंका को कम किया जा सके, उसकी साख में सुधार हो और TRP प्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके। TRAI के प्रमुख सुझाव हैं:

  • BARC बोर्ड की संरचना: BARC बोर्ड में कम-से-कम 50% स्वतंत्र सदस्य होने चाहिये, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) मापन प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के रूप में एक सदस्य। 
    (ii) राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त एक सांख्यिकीविद्।
    (iii) सरकार/नियामक के दो प्रतिनिधि। 
    इसके अतिरिक्त संबंधित उद्योग संगठनों को समान मतदान का अधिकार होना चाहिये, भले ही इक्विटी होल्डिंग में उनका अनुपात कितना भी हो। चेयरमैनशिप का प्रत्येक दो वर्ष में संबंधित उद्योग संघों के बीच आवर्तन होना चाहिये।
  • BARC के कार्य: कई डेटा संग्रह और डेटा प्रोसेसिंग एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। BARC का कार्य केवल रेटिंग प्रकाशित करने, कार्यप्रणाली और ऑडिट तंत्र को प्रकाशित करने तक सीमित होना चाहिये।
  • रेटिंग के लिये नमूना आकार: नमूना आकार (उन घरों की संख्या का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ दर्शकों के माप उपकरण को रखा गया है) को मौजूदा 44,000 से बढ़ाकर वर्ष 2020 के अंत तक 60,000 और वर्ष 2022 के अंत तक एक लाख होना चाहिये। TRAI ने कहा कि एक बड़ा नमूना आकार माप रेटिंग को बेहतर बनाता है।
  • डेटा प्रैक्टिस: BARC को कम-से-कम एक वर्ष के लिये सभी प्रासंगिक डेटा रखने चाहिये। BARC को डेटा प्रोसेसिंग को इस तरह से स्वचालित करना चाहिये कि अंतिम TRP रेटिंग निर्धारित करने में किसी भी मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता न हो। सब कुछ मूल्यांकन पद्धति और सैंपल साइज की शर्तों के अनुरूप हो, इसके लिये BARC को एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा वार्षिक ऑडिट कराना चाहिये। 

संचार

TRAI ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग के लिये स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क पर टिप्पणियों को आमंत्रित किया

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India- TRAI) ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग के मामलों में स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (Spectrum Usage Charges-SUC) के आकलन की कार्यप्रणाली पर एक परामर्श पत्र जारी किया।

मोबाइल एक्सेस सेवाएँ प्रदान करने वाले लाइसेंसधारियों को SUC का भुगतान करना होता है जो कि समायोजित सकल राजस्व (Adjusted Gross Revenue- AGR) के प्रतिशत के रूप में होता है। क्वांटम और लाइसेंसधारी द्वारा स्वामित्व वाले स्पेक्ट्रम बैंड के प्रकार के आधार पर ये शुल्क 3% से 8% के बीच होते हैं। सकल राजस्व से कुछ शुल्क और करों जैसे अन्य सेवा प्रदाताओं को सौंपे गये रोमिंग शुल्क और सकल राजस्व में शामिल कोई भी सेवा कर या बिक्री कर को घटा कर AGR का निर्धारण किया जाता है।

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