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पेंच टाइगर रिज़र्व में बाघ की मौत: COVID-19 संबंधी आशंका

  • 07 Apr 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

पेंच टाइगर रिर्व, पशु स्वास्थ्य संस्थान

मेन्स के लिये:

बाघ संरक्षण 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘पेंच टाइगर रिज़र्व’ में (Pench Tiger Reserve) में 10 वर्षीय बाघ की मौत के बाद ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (National Tiger Conservation Authority- NTCA) के अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या बाघ में COVID- 19 महामारी का परीक्षण किया जाना चाहिये।

मुख्य बिंदु:

  • एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका के एक चिड़ियाघर में बाघ की मौत निश्चित रूप से COVID- 19 महामारी के संक्रमण के कारण हुई है। 
  • इसके बाद ‘केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण’ (Central Zoo Authority- CZA) और NTCA ने दिशा-निर्देश जारी किये है कि चिड़ियाघरों में अधिकतम सतर्कता बरती जाए तथा बाघ के व्यवहार और लक्षणों पर 24/7 बंद सर्किट कैमरों से निगरानी रखी जाए।

बाघ की मौत के संभावित कारण:  

  • बाघ को तेज़ बुखार होने के बाद एंटीबायोटिक्स दी गई, लेकिन उसकी सेहत में सुधार नहीं हुआ तथा बाद में बाघ की मृत्यु हो गई। यद्यपि अभी भी बाघ की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।
  • अभी बाघ के सैंपल का राइनोट्रेकाइटिस (Rhinotracheitis) का परीक्षण किया जाएगा जो बाघ में वायरल संक्रमण तथा श्वसन संबंधी विकार का कारण बनता है। 
  • जो लोग मृत बाघ को संभालने तथा इसके पोस्टमार्टम में शामिल थे, उनका COVID- 19 संक्रमण का परीक्षण किया जाएगा। 

आगे की राह:

  • कैट फैमिली के मांसाहारी जानवरों, गंधबिलाव (Ferret), प्राइमेट्स जैसे स्तनधारियों की सावधानीपूर्वक निगरानी की जानी चाहिये।  
  • बीमार जानवरों का सैंपल लेकर COVID- 19 संक्रमण का परीक्षण किया जाना चाहिये।
  • COVID-19 के लक्षणों के अनुरूप बाघों का अवलोकन किया जाना चाहिये जैसे कि नाक से पानी बहना, खांसी आना और सांस फूलना आदि 
  • बाघों को संभालने वाले कर्मियों का भी नियमित परीक्षण किया जाना चाहिये ताकि उनमें COVID- 19 संक्रमण का पता लग सके।

पशु स्वास्थ्य संस्थान: 

पशु स्वास्थ्य संस्थान  अवस्थिति 
राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (National Institute of High Security Animal Disease)  भोपाल (मध्य प्रदेश)
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (National Research Centres on Equines) हिसार (हरियाणा)
रोग अनुसंधान और निदान केंद्र (Centre for Animal Disease Research And Diagnosis (CADRAD) इज्जतनगर, (उत्तर प्रदेश)

पेंच टाईगर रिज़र्व:

संरक्षित क्षेत्र का नाम

• पेंच टाईगर रिज़र्व (मध्य प्रदेश)

वनमंडल का नाम

• कोर जोन (इंदिरा प्रियदर्शनी पेंच राष्ट्रीय उद्यान, पेंच मोगली अभयारण्य) एवं बफर जोन (पेंच टाइगर रिज़र्व)

जैव विविधता संरक्षण का इतिहास

• पेंच टाईगर रिज़र्व एवं इसके आसपास का क्षेत्र रूडियार्ड किपलिंग के प्रसिद्ध ‘द जंगल बुक’ का वास्तविक कथा क्षेत्र है।
• वर्ष 1977 में पेंच अभ्यारण्य क्षेत्र तथा वर्ष 1983 में पेंच राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
• वर्ष 1992 में भारत सरकार द्वारा पेंच राष्ट्रीय उद्यान, पेंच अभ्यारण्य एवं कुछ अन्य वन क्षेत्रों को सम्मिलित करके देश का 19वाँ प्रोजेक्ट टाइगर रिज़र्व बनाया गया।
• वर्ष 2002 में पेंच राष्ट्रीय उद्यान एवं पेंच अभ्यारण्य का नाम क्रमशः इंदिरा प्रियदर्शनी पेंच राष्ट्रीय उद्यान एवं पेंच मोगली अभ्यारण्य रखा गया। 

वनों के प्रकार

• पेंच टाइगर रिज़र्व में पाये जाने वाले वनों को निम्नानुसार तीन भागों में बाँटा गया है : 
  • ऊष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन।  
  • ऊष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती सागौन वन। 
  • ऊष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती मिश्रित वन।

स्रोत: द हिंदू

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