हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:
झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 2016 -परीक्षाफलछत्तीसगढ़ पीसीएस प्रश्नपत्र 2019छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा, 2019 (महत्त्वपूर्ण अध्ययन सामग्री).छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा – 2019 सामान्य अध्ययन – I (मॉडल पेपर )
हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स (Hindi Literature: Pendrive Course)
मध्य प्रदेश पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा , 2019 (महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री)मध्य प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा मॉडल पेपर.Download : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा 2019 - प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजीअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.UPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • झंझा-नीर (storm water) प्रबंधन कृषि भूमि के कटाव और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की बाढ़ को रोकने के लिये आवश्यक है। भारत के विविध भौगोलिक क्षेत्रों के संदर्भ में झंझा-नीर प्रबंधन की चुनौतियों का परीक्षण करें।

    22 Oct, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा-

    • झंझा नीर का संक्षिप्त परिचय दें।
    • झंझा नीर प्रबंधन के लिये किये जा सकने वाले उपाय बताएँ।
    • झंझा नीर प्रबंधन से होने वाले संभावित लाभ लिखें।
    • निष्कर्ष

    झंझा-नीर’ (storm water) को तीव्र वर्षा, स्लीट या पिघली हुई बर्फ से प्राप्त किया जाता है, जो भू-धरातल पर तीव्र गति से बहता है। प्राकृतिक रूप में बहुत कम झंझा-नीर धरातल पर बहता है, क्योंकि अधिकांश जल भू-गर्भ में चला जाता है। लेकिन विकास कार्यों के कारण, जैसे भूमि विकास, कंक्रीट की छतें, पार्किंग, सड़कें आदि के निर्माण ने भूमि को अप्रवेश्य बना दिया है, इस कारण सतही अपवाह की गति तीव्र हो गई है, जिससे मृदा कटाव और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ गई हैं। 

    झंझा-नीर प्रबंधन के द्वारा झंझा-नीर, जिसे अपनी प्रकृति के कारण नकारात्मक माना जाता है, को महत्त्वपूर्ण संसाधन में बदला जा सकता है। क्योंकि इसके द्वारा भू-जलपुनर्भरण आदि संभव हो पाता है। झंझा-नीर प्रबंधन के निम्नलिखित घटक हैं-

    • वाहित जल की तीव्रता को कम करके उसे परंपरागत नदी एवं नालों की तरफ उन्मुख करना। 
    • भू-जल को गहरे पाइपों के माध्यम से भू-गर्भ में जलभृत (aquifers) में छोड़ना। 
    • कृत्रिम तालाब या नहरें बनाकर वाहित जल को कृषि कार्यों एवं पेय जल हेतु प्रयोग करना। 
    • वनीकरण को बढ़ावा देकर वाहित जल की तीव्रता को कम करना। 
    • बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर उपयुक्त पूर्व प्रबंधन करना। 
    • नदी द्रोणी आदि के निर्माण कार्यों को रोकना। 
    • शहरी क्षेत्रों के निर्माण कार्यों में जल संग्रहण तकनीकों को बढ़ावा देना। 

    इस प्रकार, उपर्युक्त उपाय अपनाकर झंझा-नीर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा सकता है। यह कृषि भूमि के कटाव और बाढ़ को नियंत्रित करने में भी निम्नलिखित रूप से सहायक हो सकता है-

    • इसके द्वारा वाहित जल की तीव्रता और बारंबारता को नियंत्रित किया जाना संभव है। 
    • इसमें अपवाहित जल को गहरे पाइपों द्वारा भू-गर्भ में छोड़ दिया जाता है, जिससे बाढ़ की तीव्रता कम होती है और भू-जल का पुनर्भरण भी हो जाता है। 
    • वनीकरण के द्वारा वाहित जल अपने साथ मृदा को बहाकर नहीं ले जा पाता, फलस्वरूप मृदा अपरदन को रोकने में मदद  मिलती है। 
    • शहरी निर्माण कार्यों में जल संग्रहण तकनीक को बढ़ावा देने से शहरी बाढ़ को रोका जा सकता है। 
    • नदियों के अपवाह-क्षेत्र में निर्माण कार्यों को रोकने से तीव्र वाहित जल से जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। 

    इस प्रकार, हम देखते हैं कि झंझा-नीर प्रबंधन, झंझा-नीर को नकारात्मक संसाधन से सकारात्मक संसाधन के रूप में बदलने में महत्त्वपूर्ण हैं। इसके द्वारा न केवल कृषि भूमि के कटाव और बाढ़ को नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि भू-गर्भ पुनर्भरण, नदी, तालाब एवं पेयजल सुविधाओं को भी बढ़ाया जा सकता है।

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close