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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    "स्थानीय पवनों का विशेष सामाजिक-आर्थिक महत्व है।" भारत तथा विश्व के संदर्भ में इस कथन पर चर्चा करें।

    11 Oct, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा-

    • संक्षिप्त रूप से स्थानीय पवनों की अवधारणा का परिचय दें।
    • भारत की प्रमुख स्थानीय पवनों और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के उदाहरण लिखें।
    • विश्व की अन्य स्थानीय पवनों का उदाहरण दें।

    भूमंडलीय पवनों की तुलना में स्थानीय पवनें संकीर्ण क्षेत्र में संचारित होती हैं। तापमान, वायु दाब और नमी में स्थानीय विविधताओं के कारण इनका विकास होता है। स्थानीय पवनों पर स्थानीय भू-भाग का काफी प्रभाव पड़ता है। भू-भाग की विविधता जितनी अधिक होगी, स्थानीय पवन पर उसका प्रभाव भी उतना अधिक होता है।

    भारत में स्थानीय हवाएं-

    आंधी- मानसून पूर्व के मौसम के दौरान, धूल तूफान से मध्य और उत्तर पश्चिमी भारत प्रभावित होता है। ये तेजी से चलती हवाएं हैं जो निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती हैं। ये रोपण फसलों, विशेषकर आम फसलों के लिए हानिकारक हैं।

    कालबैसाखी -स्थानीय भाषा में इसका अर्थ है- बैसाख के महीने में आपदा। यह गर्मी के मौसम के दौरान भारत के पूर्वी हिस्से में बहने वाली शुष्क स्थानीय हवा है। यह उड़ीसा, असम और पश्चिम बंगाल में भारी वर्षा के लिए जिम्मेदार है। इन पवनों से व्यापक क्षति होती है, हालांकि इससे जुड़ी बारिश पूर्वी खरीफ फसलों जैसे कि धान, जूट, सब्जियों और फलों के लिए उपयोगी होती है। ये असम में चाय की फसलों को भी लाभ पहुँचाती हैं।

    लू- यह भारत की उत्तरी मैदानों में चलने वाली एक गर्म, शुष्क हवा है। 

    कॉफी शॉवर- गर्मी के मौसम में कर्नाटक के मध्य भाग में उड़ा और कॉफी की खेती के लिए बेहद फायदेमंद है, अतःयह क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है।

    मैंगो शॉवर- ये पवन तटीय केरल में संचारित होती है। यह आम की खेती के लिए महत्वपूर्ण है और समय से पहले आम को पेड़ों से गिरने से रोकती है।

    अन्य देशों में स्थानीय पवनें-

    फॉन पवन व चिनूक पवन- ये दोनों शुष्क पवनें हैं, जो पहाड़ों के निचले हिस्से पर अनुभव होती हैं। उत्तरी आल्प्स की घाटियों में फॉन पवनों का संचरण होता है, जबकि चिनूक पवनें  सर्दियों में रॉकी पर्वत की पूर्वी ढलानों पर अमेरिका और कनाडा में अनुभव की जाती हैं। ये इतनी शुष्क होती हैं कि इन्हें "बर्फ-भक्षक"(snow-eater) कहा जाता है। वे अक्सर स्थानीय लोगों के लिये माइग्रेन के सिरदर्द का कारण बनती हैं। चिनूक दावानल का कारण भी बन सकती है।

    हरमट्टन: ये शुष्क, धूल भरी पवनें हैं  जो पश्चिमी सहारा क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी की ओर से बहती हैं। हरमट्टन को इस क्षेत्र में डॉक्टर भी कहा जाता है, क्योंकि यह पश्चिम की आर्द्र उष्णकटिबंधीय पवनों से राहत देती है। यह पश्चिमी की नम हवा से राहत प्रदान करती है। यह फसलों के लिये हानिकारक है और अंतर्देशीय नदी परिवहन जैसी आर्थिक गतिविधियों में बाधा डालती है।

    मिस्ट्रल: यह एक कठोर ठंडी पवन है जो दक्षिणी फ्रांस में उत्तर पश्चिम दिशा से उत्तरी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में लियोन की खाड़ी की ओर बहती है।  आम तौर पर इस दौरान मौसम साफ रहता है और यह पर्यटन गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने में  एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शुष्क वायु होने के कारण यह स्थिर जल और कीचड़ को सुखा देती है, अतः इसे mud-eater भी कहा जाता है। यह प्रदूषकों को दूर तक उड़ा ले जाती है, अतः स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है।

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