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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    'भारतीय संस्कृति उदारता तथा समन्वयवादी गुणों के साथ अन्य संस्कृतियों को अपने में समाहित कर परंपरागत अस्तित्व के साथ आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है।' विवेचना करें।

    19 Jun, 2021 रिवीज़न टेस्ट्स इतिहास

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण-

    • भूमिका
    • मिस्र, मेसोपोटामिया और ग्रीस की सभ्यता
    • भारत की प्राचीन सभ्यता की तुलना
    • भारतीय सभ्यता की अक्षुण्णता के कारण
    • निष्कर्ष

    मिस्र, मेसोपोटामिया, ग्रीस तथा भारतीय की प्राचीन सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में प्रमुख हैं। भारत की प्राचीन सभ्यता से इतर विश्व की ये प्राचीन सभ्यताएँ आज या तो नष्ट हो गईं या फिर प्रतिस्थापित कर दी गईं हैं। वहीं इसके विपरीत भारतीय उपमहाद्वीप की सभ्यता आज भी परिवर्तन के साथ निरंतरता को बनाए रखते हुए अमिट, अक्षुण्ण बनी हुई हैं।

    यदि मिस्र की प्राचीन सभ्यता की बात करें तो हम पाते हैं कि पहले यहाँ के लोग प्रकृति-पूजक और बहुदेववादी थे, लेकिन वर्तमान में यहाँ इस्लामी एकेश्वरवाद आ चुका है। इसी प्रकार ‘ममी’ के रूप में शवों को संरक्षित करने की विधि तथा अन्य कलाएँ आज लुप्त हो चुकी हैं; दूसरी तरफ भारत में सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वर्तमान समय तक मातृदेवी, पशुपति शिव जैसे देवताओं की पूजा अनवरत जारी है। साथ ही वैदिक सभ्यता के धार्मिक कर्मकांड जैसे- यज्ञ और हवन आज भी प्रचलित हैं।

    सूक्ष्म परीक्षण करने पर हम पाते हैं कि सामाजिक व्यवस्था के रूप में वर्ण व्यवस्था भी किसी-न-किसी रूप में आज भी विद्यमान है। साथ ही पर्यावरण के विभिन्न उपागम जैसे- सूर्य, वृक्ष, पशु-पक्षी, नदी आदि की पूजा तथा शवाधान की प्राचीन परंपराएँ आज भी अनवरत रूप से जारी हैं।

    मिस्र व अन्य सभ्यताओं की प्राचीन भाषाएँ आज लगभग विलुप्त हो गई हैं, लेकिन भारत में संस्कृत व तमिल जैसी प्राचीन भाषाएँ आज भी प्रयोग की जा रही हैं, साथ ही भारत की वर्तमान लिपियों का आधार आज भी ब्राह्मी लिपि ही है। इस प्रकार हम देखते हैं कि भाषा और लिपि के स्तर पर भी भारतीय संस्कृति में निरंतरता का भाव है।

    भारतीय सभ्यता में धर्म, रीति-रिवाज व परंपरा में अद्भुत समन्वय है। भारत में प्राचीनकाल के खान-पान, पहनावे व शृंगार की विभिन्न पद्धतियों की वर्तमान भारतीय संस्कृति पर अमिट छाप है। ये रीति-रिवाज और परंपराएँ लोगों की जीवनशैली के भाग हैं। इसी कारण विदेशी लोगों, धर्मों व परंपराओं से भी सामंजस्य स्थापित कर यह उनको अपने में समाहित कर लेती है। इसी तरह यूनानी, मंगोल, इस्लामी आदि विदेशी के रूप में भारत आए लेकिन भारतीय संस्कृति ने उन्हें भी अपने में समाहित कर लिया।

    इसी प्रकार मेसोपोटामिया की सभ्यता जो कि विश्व की सर्वाधिक उन्नत सभ्यताओं में से एक थी, अब नष्ट हो चुकी है। इसी तरह ईसाई धर्म के उदय ने यूनानी सभ्यता के बहुदेववादी स्वरूप व संस्कृति में व्यापक परिवर्तन कर संस्कृति की तारतम्यता को खंडित कर दिया है। लेकिन भारत में आज भी गुप्त काल से पहले प्रारंभ हुई मंदिर निर्माण की कला और संस्कृति न सिर्फ संरक्षित है बल्कि अविरल है।

    निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं भारतीय संस्कृति उदारता तथा समन्वयवादी गुणों के साथ अन्य संस्कृतियों को अपने में समाहित कर परंपरागत अस्तित्व के साथ अक्षुण्ण बनी हुई है।

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