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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • भारत की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता पर चर्चा करें। आप इस बात से कहाँ तक सहमत हैं कि नवीकरणीय ऊर्जा ही भविष्य का एकमात्र विकल्प हो सकती है। विश्लेषण करें।

    14 Aug, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 3 पर्यावरण

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    भूमिका
    भारत में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता
    नवीकरणीय ऊर्जा ही भविष्य का एकमात्र विकल्प
    निष्कर्ष

    विकास की दौड़ में शामिल अर्थव्यवस्थाओं में भारत एक अग्रणी अर्थव्यवस्था है। इस अग्रणी अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की उच्च मांग प्राथमिक आवश्यकता है। ऊर्जा की उच्च मांग की पूर्ति के लिये परमाणु ऊर्जा (परंपरागत ऊर्जा स्रोत का एक उदाहरण) और नवीकरणीय ऊर्जा का विकल्प उपलब्ध है। किसी परमाणु के नाभिक की ऊर्जा को ‘परमाणु ऊर्जा’ कहा जाता है, तो वहीं प्राकृतिक अक्षय ऊर्जा स्रोतों जैसे- सूर्य, पवन, जल, भूगर्भ और पादपों से प्राप्त ऊर्जा को नवीकरणीय ऊर्जा कहा जाता है। नवीकरणीय ऊर्जा का विश्लेषण करते हुए हम यह पाते हैं कि यह ऊर्जा का ऐसा स्थायी स्रोत है जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिये हानिकारक नहीं है। वर्तमान में विश्व की लगातार बढ़ रही जनसंख्या के कारण ईंधन की लागत में भी वृद्धि हो रही है और इसके समानांतर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों में भी निरंतर कमी देखी जा रही है। ऐसे में सभी लोग ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत खोजने में जुट गए हैं। वस्तुतः जहाँ एक ओर भविष्य की अपार संभावनाओं से युक्त नवीकरणीय ऊर्जा आज की आवश्यकता बनती जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर परमाणु ऊर्जा से हुई आपदाओं के उदाहरण भी सामने आते रहते हैं।

    भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिति-

    • पृथ्वी को स्वच्छ रखने की ज़िम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए भारत ने संकल्प लिया है कि वर्ष 2030 तक बिजली उत्पादन की हमारी 40 फीसदी स्थापित क्षमता ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों पर आधारित होगी। साथ ही यह भी निर्धारित किया गया है कि वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जाएगी। इसमें सौर ऊर्जा से 100 गीगावाट, पवन ऊर्जा से 60 गीगावाट, बायोमास से 10 गीगावाट और छोटी पनबिजली परियोजनाओं से 5 गीगावाट क्षमता प्राप्त करना शामिल है।
    • इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के साथ ही भारत विश्व के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा उत्पादकों की कतार में शामिल हो जाएगा। यहाँ तक कि वह कई विकसित देशों से भी आगे निकल जाएगा।
    • वर्ष 2018 में देश की कुल स्थापित क्षमता में तापीय ऊर्जा की 63.84 फीसदी, नाभिकीय ऊर्जा की 1.95 फीसदी, पनबिजली की 13.09 फीसदी और नवीकरणीय ऊर्जा की 21.12 फीसदी हिस्सेदारी थी।
    • भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिये अलग मंत्रालय गठित है और ‘राष्ट्रीय पवन-सौर स्वच्छता नीति-2018’ के अनुसार, पवन-सौर ऊर्जा उत्पादन के वर्तमान लक्ष्य 80 गीगावाट को वर्ष 2022 तक दोगुने से भी ज्यादा अर्थात 225 गीगावाट तक पहुँचाने का लक्ष्य है।

    नवीकरणीय ऊर्जा ही भविष्य का एकमात्र विकल्प क्यों है?

    • पिछले कुछ दशकों में विश्व की निरंतर बढ़ रही औसत जनसंख्या, आधुनिक तकनीकी विकास और विद्युतीकरण की बढ़ती दर के कारण विश्व स्तर पर ऊर्जा की मांग भी उतनी ही तेजी से बढ़ी है। पर्यावरण विशेषज्ञों का विश्वास है कि इस मांग को नवीकरणीय ऊर्जा के विभिन्न विकल्पों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।
    • लोगों के बेहतर स्वास्थ्य, कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन के बढ़ते खर्च पर नियंत्रण, विश्वव्यापी ऊष्णता तथा अम्लीय वर्षा और कार्बन - डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करके पर्यावरण की सुरक्षा के लिये अब नवीकरणीय ऊर्जा ही भविष्य का
    • एकमात्र विकल्प रह गया है।
    • उपरोक्त के अलावा हम देखें तो विश्व में सौर ऊर्जा से लेकर समुद्र तटीय क्षेत्रों में पवन और जल ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ भू-तापीय ऊर्जा से विद्युत उत्पादन द्वारा दुनिया की अधिकतम बिजली की ज़रूरत को पूरा किया जा सकता है।
    • नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने से वैश्विक स्तर पर पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार से वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। इसके लिये नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर उपयोग के साथ-साथ इसकी भंडारण क्षमता के सशक्तीकरण की भी आवश्यकता है।

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