हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • शहरीकरण के अनेक लाभ होने के बावजूद इससे जुड़ी समस्याओं से इंकार नहीं किया जा सकता, संतुलित शहरीकरण के विकास हेतु सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालें।

    12 Aug, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भूमिका

    • शहरीकरण के अनेक लाभ 

    • इससे जुड़ी समस्याओं सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास

    • निष्कर्ष

    विश्व की आधे से अधिक आबादी आज शहरों में निवास करती है। ये आबादी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 80% का योगदान करती है और दो-तिहाई वैश्विक ऊर्जा का उपभोग करती है, दूसरी ओर 70% ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिये भी जिम्मेदार भी है। शहरीकरण के कारण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।

    शहरीकरण और शिक्षा के विकास के कारण जाति-प्रथा जैसी व्यवस्थाएँ अब ध्वस्त हो रही हैं। प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी के चलते लोगों रहन-सहन का स्तर बेहतर होता है। उत्पादकता को बढ़ाता है और विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करता है।

    इस प्रकार किसी भी देश में शहरों को विकास का इंजन माना जाता है तो सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि इससे कई समस्याओं का भी जन्म होता है जैसे-

    • आज भारत के अधिकांश शहर अतिशहरीकरण के शिकार हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि जब शहरी आबादी इतना बढ़ जाए की शहर अपने निवासियों को अच्छा जीवनशैली देने में असफल हो जाए तो वह स्थिति अतिशहरीकरण कहलाती हैं।
    • शहरी जनसंख्या में हो रही वृद्धि ने अनेक समस्याओं को जन्म दिया है जिसमें आवास की समस्या प्रमुख है। यह समस्या आवास की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में देखने को मिलती है।
    • ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों में आने वाले लोग अधिकतर गरीब होते हैं, उनके पास किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा का अभाव होता है।
    • शहरीकरण के परिणामस्वरूप बड़े परिवार छोटे परिवारों में विभक्त हो गए हैं। इसके अतिरिक्त परिवारों में विवाह-विच्छेद, विधवाओं का शोषण, वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
    • ग्रामीण भारत गरीबी को छिपाने और उससे निपटने में ज़्यादा सक्षम है। जबकि शहरी भारत में ऐसा संभव नहीं हैं। शहरी गरीबी बढ़ती जा रही है, क्योंकि लोग रोज़गार की तलाश में अपना गाँव छोड़ रहे हैं।
    • शहरी केंद्रों में जनसंख्या के लगातार बढ़ते रहने एवं औद्योगीकरण के फलस्वरूप पर्यावरण प्रदूषण तथा अवनयन की कई समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। महानगरों और शहरों में प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों एवं औद्योगिक संस्थानों द्वारा निकला विषैला रसायन है।
    • नृजातीय विविधता और सामुदायिक एकीकरण की समस्या- शहर की सामाजिक संरचना ऐसी होती है कि लोगों के एकीकृत होने की समस्या सदैव विद्यमान रहती है।
    • भारतीय शहरों में आर्थिक असमानता विकसित देशों की तुलना में अधिक है। महानगरों पर खर्च की गई आय ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक होती है। इस आर्थिक अंतर के परिणामस्वरूप ग्रामीण शहरों की ओर आकर्षित होते हैं।
    • भारत में पश्चिमी देशों की तुलना में शहर प्रवास की प्रवृत्ति पुरुषों में ज़्यादा है। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादक पुरुष जनसंख्या में कमी आ रही है।

    शहरीकरण की समस्या से निपटने के लिये सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास

    • सरकार द्वारा शहरों के ठीक प्रकार से नियोजन के लिये स्मार्ट सिटी मिशन की अवधारणा को अपनाया गया है।
    • केंद्र सरकार ने मेट्रो, मोनोरेल और बस रैपिड टांजिट जैसे बड़े सार्वजनिक परिवहन गलियारों के पास बसनेे को बढ़ावा देने के लिये एक नीति तैयार की है, जिसका उद्देश्य शहरीकरण की चुनौतियों का निदान करना है।
    • देश के आधे से अधिक लोगों का जीवन खेती पर निर्भर है, इसलिये यह कल्पना करना बेमानी होगा कि गाँव के विकास के बिना देश का विकास किया जा सकता है। ग्रामीण विकास के ज़रिये ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान के लिये सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है कि आवास और बुनियादी सुविधाएँ आर्थिक विकास के मुख्य वाहक हैं।
    • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अभिनव एवं आधुनिक निर्माण प्रौद्योगिकी के उपयोग की सुविधा प्रदान करने के लिये प्रौद्योगिकी सब-मिशन भी शुरू किया गया है।
    • जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन के अंतर्गत शहरों का कायाकल्प करने का प्रयास किया जा रहा है।
    • कायाकल्प और शहरी रूपान्तरण के लिये अटल मिशन यानी अमृत योजना के अंतर्गत शहरों की अवसंरचना को मज़बूत किया जा रहा है।

    शहरीकरण से उपजी समस्याओं से निपटने हेतु आज आवश्यकता है संतुलित विकास की है इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के साथ-साथ पलायन को कम करने के लिये ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था का विविधीकरण करने की ज़रूरत है। इस संदर्भ में, मनरेगा ने गावों से शहरों की ओर पलायन कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

    PURA और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास पर ज़ोर देने की आवश्यकता है। साथ ही पर्यावरणीय रूप से धारणीय शहरीकरण का बेहतर प्रबंधन, ग्रीन पैचेज का विकास, आर्द्रभूमि, उचित अपशिष्ट प्रबंधन करने का प्रयास करना चाहिये।

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close