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ध्यान दें:

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • ‘चार्टिस्ट आंदोलन में न सिर्फ राजनीतिक सुधारों के अपितु सामाजिक क्रांति के भी बीज तत्त्व निहित थे।’ विश्लेष्ण करें।

    20 Jun, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 1 इतिहास

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • चार्टिस्ट आंदोलन की पृष्ठभूमि से उत्तर प्रारंभ करें।

    • चार्टिस्ट आंदोलन के स्वरूप का परिचय दें।

    • राजनीतिक मांगों के सामाजिक आधार को स्पष्ट करते हुए निष्कर्ष लिखें।

    19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में इंग्लैंड में मज़दूर वर्ग के हितों के संरक्षण के लिये चलाया गया आंदोलन ही चार्टिस्ट आंदोलन कहलाता है। औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप इंग्लैंड में अनेक नवीन औद्योगिक केंद्रों की स्थापना हुई जिससे ब्रिटेन के विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहाँ आकर बसने लगे। किंतु सामाजिक-आर्थिक विषमता के कारण श्रमिकों की स्थिति गंभीर से गंभीरतम होती गई। इसी दुरावस्था को दूर करने के लिये श्रमिक वर्ग ने संसद के समक्ष अपनी मांगें रखीं। चूँकि ये मांगें एक चार्टर के रूप में थीं, अत: यह आंदोलन चार्टिस्ट आंदोलन कहलाया।

    आंदोलनकारियों ने मांगों का एक दस्तावेज़ तैयार किया, जिसे ‘जनता का आज्ञापत्र’ कहा गया। इसमें छ: मांगें थीं।

    • सभी को वयस्क मताधिकार प्राप्त हो।
    • निचले सदन की सदस्यता के लिये न्यूनतम संपत्ति की शर्त समाप्त हो।
    • संसद का वार्षिक चुनाव हो।
    • मतदान गुप्त हो।
    • संसद सदस्यों को वेतन दिया जाए।
    • संसद क्षेत्र समान हों।

    उपर्युक्त मांगों से यह पूर्णतया स्पष्ट हो गया कि यह एक राजनीतिक कार्यक्रम था। किंतु इन राजनीतिक सुधारों की मांग के पीछे आर्थिक और सामाजिक विषमता ही उत्तरदायी थी।

    चूंकि नगरीय क्रांति के फलस्वरूप स्थापित औद्योगिक नगरों में मज़दूर वर्ग अनेक समस्याओं से ग्रसित था। अत: वयस्क मताधिकार और निचले सदन की सदस्यता प्राप्त कर वे अपने अधिकारों को सुनिश्चित कर सकते थे। राजनीतिक हिस्सेदारी के माध्यम से समाज विशेषकर मज़दूर वर्ग में जागरूकता आती और उनमें समता (संसद क्षेत्र समान हो) की भावना स्थापित होती। इससे सामाजिक क्रांति का आविर्भाव होता है।

    निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि चार्टिस्ट आंदोलन एक ऐसा प्रयत्न था, जिसके अंतर्गत राजनैतिक सुधारों के माध्यम से सामाजिक क्रांति लाने का उद्देश्य निहित था। इसका उद्देश्य समाज में आमूल-चूल परिवर्तन करके मज़दूरों की दशा में सुधार करना था। यद्यपि यह आंदोलन असफल रहा तथापि इसके दूरगामी परिणाम रहे।

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