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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • वाताग्र जनन की प्रक्रिया की चर्चा करते हुए शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति में वाताग्रों की भूमिका को स्पष्ट कीजिये।

    28 Nov, 2019 वैकल्पिक विषय भूगोल

    उत्तर :

    प्रश्न विच्छेद

    • वाताग्र जनन तथा शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति में इसकी भूमिका।

    हल करने का दृष्टिकोण

    • वाताग्र जनन की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिये।

    • शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति में वाताग्रों की भूमिका को स्पष्ट कीजिये।

    दो वायुराशियाँ जिनके तापमान, आद्रता एवं दाब में पर्याप्त अंतर हो, के अभिसरण से दोनों के बीच निर्मित असांतत्य पृष्ठ अथवा संक्रमण पेटी को वाताग्र कहा जाता है। शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति में वाताग्र महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    वाताग्र एक मौसमी तंत्र है। जब किसी प्रदेश में गर्म एवं ठंडी वायुराशियाँ विपरीत दिशा में प्रवाहित होती हुई एक-दूसरे से अभिसरण करती हैं, तो वे आपस में मिलने का प्रयास करती हैं। इनके बीच एक संक्रमण क्षेत्र निर्मित होता है, जिनमें दोनों वायुराशियों के गुण मौजूद होते हैं। इसी संक्रमण क्षेत्र को वाताग्र प्रदेश कहा जाता है। जब गर्म वायुराशि सक्रिय रूप से शीत वायुराशि से अभिसरण करती है, तो उष्ण वाताग्र का निर्माण होता है। इसके विपरीत, जब शीत वायुराशि सक्रिय होकर गर्म वायुराशि से अभिसरण करती है तो शीत वाताग्र का निर्माण होता है। वाताग्र मध्य अक्षांशों में निर्मित होते हैं तथा इनमें तीव्र वायुदाब एवं तापमान प्रवणता पाई जाती है। वाताग्र धरातलीय सतह से कुछ कोण पर झुका होता है तथा इसकी ढाल पृथ्वी की अक्षीय गति पर आधारित होती है।

    Vatagra pradesh

    शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात की स्थिति दोनों ही गोलार्द्धों में 40° से 60° अक्षाशों के मध्य दो विपरीत प्रकार की वायुराशियों के अभिसरण से बनता है। यह स्थिति ध्रुवीय वाताग्र के साथ-साथ बनते हैं। आरम्भ में वाताग्र स्थिर होता है। वाताग्र के दक्षिण से कोष्ण व उत्तर दिशा से ठंडी हवा प्रवाहित होती है। वाताग्र के साथ वायुदाब कम हो जाने पर कोष्ण वायु उत्तर दिशा की ओर तथा ठंडी वायु दक्षिण दिशा की ओर वामावर्त (घड़ी की सुइयों के विपरीत) चक्रवातीय परिसंचरण करती है, जिससे शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात विकसित होता है। इस चक्रवात में एक उष्ण वाताग्र तथा एक शीत वाताग्र होता है। दक्षिणी गोलार्द्ध में जल की अधिकता के कारण वायुराशियों के तापमान एवं आद्रता में ज़्यादा अंतर नहीं होता है जिसके कारण ये चक्रवात अधिक मज़बूत नहीं बनते। उत्तरी गोलार्द्ध में जल एवं स्थलखंड के वितरण में असमानता के कारण वायुराशियों के मध्य तापीय अंतर अधिक होता है जिसके कारण उत्तरी गोलार्द्ध में ये मज़बूती से बनते हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति से वाताग्रों का गहरा संबंध है।

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