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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • अवस्थिति विश्लेषण की अवधारणा की आलोचना के आधारों को स्पष्ट कीजिये। (200 शब्द)

    24 Oct, 2019 वैकल्पिक विषय भूगोल

    उत्तर :

    प्रश्न विच्छेद

    • अवस्थिति विश्लेषण की अवधारणा की आलोचना के आधारों को बताएँ।

    हल करने का दृष्टिकोण

    • अवस्थिति विश्लेषण की अवधारणा का संक्षिप्त परिचय देें।
    • अवधारणा की आलोचना के आधारों को स्पष्ट करें।

    अवस्थिति विश्लेषण स्थानिक विज्ञान से जुड़ी विधि है, जो प्रत्यक्षवाद के दार्शनिक विचार पर आधारित है। स्थानिक व्यवस्था के प्रारूपों के सिद्धांतों की चर्चा के कारण यह मात्रात्मक क्रांति का ही अंग है। यह अवधारणा आर्थिक भूगोल में सर्वाधिक व्यवहार्य है। इस अवधारणा के अनुसार मानव न्यूनतम लागत वाले स्थान के समीप संबंधित क्रियाओं की पूर्ति करता है। परंतु हमें यह ध्यान रखना चाहिये कि भिन्न-भिन्न समाज अपने व्यवहार के अनुकूल स्थान का निर्धारण करते हैं। इसी के आधार पर इसकी आलोचना के आधारों को समझा जा सकता है।

    आलोचना के आधार-

    • इसका प्रत्यक्षवाद पर आधारित होना इसकी आलोचना के कारणों में से एक है। मानव और वातावरण से संबंधित नीति, प्रासंगिक, नियामक और आदर्श प्रश्नों का इसमें अभाव है।
    • व्यावहारिक रूप में इस अवधारणा की वास्तविकता संदिग्ध है।
    • पूंजीवाद से इसका संबंध इसकी आलोचना का एक कारण है। पूंजीवाद ने सामाजिक सहजता एवं सहयोग की भावना को नष्ट कर दिया है।
    • इस अवधारणा से मनुष्य मशीनवत् कार्य करने वाला तथा मात्रात्मक समीकरणों में फँसा निर्जीव प्राणी बन गया है।
    • इसमें उत्पादन पर किसी प्रकार के नियंत्रण के अभाव में औद्योगीकरण सीमोल्लंघन की स्थिति में पहुँच जाता है।
    • वास्तव में विश्व की जटिलताओं के प्रति उदासीनता इसकी आलोचना का एक अन्य आधार है।
    • भूमंडलीकरण के दौर में समाजों में आर्थिक अंतर्निर्भरता वातावरणीय निर्भरता को औचित्यहीन बनाती है।

    अपनी तमाम कमियों के बावजूद इस अवधारणा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने अर्थशास्त्र एवं भूगोल के बीच की खाई को पाटा है।

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