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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    संगमयुगीन समाज तथा अर्थव्यवस्था के स्वरूप की चर्चा कीजिये।

    13 Sep, 2019 रिवीज़न टेस्ट्स इतिहास

    उत्तर :

    प्रश्न विच्छेद

    कथन संगमयुगीन समाज तथा अर्थव्यवस्था के स्वरूप की चर्चा से संबंधित है।

    हल करने का दृष्टिकोण

    • संगम युग के संदर्भ में संक्षिप्त उल्लेख के साथ परिचय लिखिये।

    • संगमयुगीन समाज तथा अर्थव्यवस्था के स्वरूप की चर्चा कीजिये।

    • उचित निष्कर्ष लिखिये।

    संगम युग के दौरान तमिल देश पर चोल, चेर और पांड्य तीन राजवंशों का शासन था। संगम तमिल कवियों का संघ या सम्मलेन था जो किसी सामंत या राजा के आश्रय में आयोजित होता था। संगम पांड्यों के शाही संरक्षण के अंतर्गत विकसित हुआ। संगम साहित्य से राजनीतिक जीवन, राज्यों के गठन एवं राजनीतिक गतिविधियों के विषय में भले ही यथेष्ट जानकारी न मिलती हो लेकिन इससे सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक जीवन पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है।

    संगमयुगीन समाज एवं अर्थव्यवस्था का स्वरूप निम्नलिखित रूपों से वर्णित है-

    • तोलकाप्पियम अरासर (Arasar), अन्थानर (Anthanar), वेनिगर (Vanigar) और वेल्लालर (Vellalar) चार जातियों को संदर्भित करता है। शासक वर्ग को अरासर कहा जाता था, वेनिगर द्वारा व्यापार एवं वाणिज्य का संचालन किया जाता था, अन्थानर ने राजनीति और धर्म में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • आरंभिक तमिल संगम साहित्य में भी गाँवों में रहने वाले विभिन्न वर्गों के लोगों का उल्लेख है, वेल्लालर या बड़े जमींदार; हलवाहा या उणवर (Uzhavars) और दास अदिमई नैर कडौसियार (Adimai)।
    • अन्य आदिवासी समूह, जैसे-परतावर, पानार, आइनेर, कादंबर, मारवाड़ और पुलाइयार थे, जो संगम समाज में भी पाए गए। प्राचीन आदिम जनजातियाँ, जैसे-थॉडस (Thodas), इरुलास (Irulas), नागा (Nagas) और वेदार (Vedars) इस अवधि में यहाँ रहती थीं।
    • तोलकाप्पियम में भूमि का पाँच-स्तरीय विभाजन-कुरुन्जी/ Kurinji (पहाड़ी), मुल्लै/ Mullai (देहाती), मरुदम/ Marudam (कृषि), नेथल/ Neithal (तटीय) और पालै/ Palai (रेगिस्तान) के रूप में किया गया है। इसी के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपना मुख्य व्यवसाय करते थे।
    • संगम युग के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि कार्य था। चेर देश में कटहल फल और काली मिर्च प्रसिद्ध थे, जबकि धान चोल और पांड्य देश में मुख्य फसल थी।
    • संगम काल के हस्तशिल्प लोकप्रिय थे जिनमें बुनाई, धातु का काम और बढ़ईगिरी, जहाज निर्माण तथा मोतियों, पत्थरों एवं हाथी दांत का उपयोग करके गहने बनाना सम्मिलित है। कपास और रेशम के कपड़ों की कताई और बुनाई ने उच्च गुणवत्ता को प्राप्त किया।
    • आंतरिक एवं विदेशी व्यापार दोनों अच्छी तरह से संगठित थे और इन्हें संगम युग में तीव्र गति से संचालित किया जाता था। दक्षिण भारत एवं यूनानी राज्यों के बीच बाह्य व्यापार किया जाता था। रोमन साम्राज्य के प्रभुत्व के बाद, रोमन व्यापार को महत्त्व मिला।
    • सूती कपड़े, मसाले जैसे- काली मिर्च, अदरक, इलायची, दालचीनी और हल्दी, हाथी दांत के उत्पाद, मोती एवं कीमती पत्थर मुख्य निर्यातक वस्तुएँ थीं। सोना, घोड़े और मीठी मदिरा मुख्य आयातक वस्तुएँ थीं।

    संगम युग कृषि, शिल्प एवं व्यापार-वाणिज्य की दृष्टि से काफी समृद्ध था, यहाँ के समाज पर भौगोलिक एवं आर्थिक गतिविधियों का महत्त्वपूर्ण प्रभाव परिलक्षित होता है। हालाँकि, तीसरी सदी के अंत में संगम युग में धीरे धीरे गिरावट देखी गई। इसके पश्चात् कलभ्रों ने तमिल देश पर कब्जा कर लगभग ढाई शतक तक राज किया।

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