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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • कार्स्ट स्थलाकृति से आप क्या समझते हैं? इनके विकास के लिये आवश्यक दशाओं का संक्षेप में वर्णन करें।

    01 Aug, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा

    • प्रभावी भूमिका में कार्स्ट स्थलाकृति को स्पष्ट करें।
    • तार्किक एवं संतुलित विषय-वस्तु में इनके विकास के लिये आवश्यक दशाओं का संक्षेप में वर्णन करें।

    चूने के पत्थर वाली चट्टानों के क्षेत्र में भूमिगत जल के द्वारा सतह के ऊपर तथा नीचे विचित्र प्रकार के स्थलरूपों का निर्माण घोलन की क्रिया द्वारा होता है जिन्हें कार्स्ट स्थलाकृति कहा जाता है। ये स्थलरूप अन्य प्रकार की चट्टानों पर अपरदन के अन्य कारकों द्वारा उत्पन्न स्थलरूपों से सर्वथा भिन्न होते हैं।

    कार्स्ट शब्द, पूर्ववर्ती यूगोस्लाविया के पश्चिमी तट पर पूर्वी ऐड्रियाटिक सागर के सहारे स्थित कार्स्ट प्रदेश से लिया गया है। यहाँ चूना पत्थर की चट्टानें अत्यधिक वलित अवस्था में हैं।

    कार्स्ट स्थलाकृति के विकास के लिये आवश्यक दशाएँ :

    कार्स्ट स्थलाकृति के निर्माण तथा विकास के लिये एकमात्र लाइमस्टोन शैल की उपस्थिति ही आवश्यक नहीं है वरन् कई ऐसी आवश्यक दशाएँ हैं, जिनके होने पर ही वास्तविक कार्स्ट स्थलाकृति का विकास हो पाता है। साधारणतौर पर अग्रलिखित दशाएँ कार्स्ट के लिये अधिक आवश्यक होती हैं-

    • कार्स्ट स्थलाकृति के आविर्भाव के लिये विस्तृत किंतु शुद्ध लाइमस्टोन शैल होनी चाहिये। वास्तव में इस स्थलाकृति के लिये सतह या सतह के नीचे घुलनशील चट्टान होनी चाहिये जिसमें जल अपने रासायनिक कार्य द्वारा विभिन्न स्थलरूपों का विकास कर सके। 
    • घुलनशील चट्टान में संधियों का विकास अच्छी तरह होना चाहिये। इस कारण जल शैल की संधियों तथा छिद्रों से होकर चट्टानों को शीघ्र घोलने लग जाता है। चट्टानों की पारगम्यता उसी सीमा तक अनुकूल मानी जाती है जिस सीमा तक उनकी संधियों में अधिक मात्रा में जल समाविष्ट हो जाए। यदि शैल अधिक पारगम्य होती है तो जल शीघ्रता से उसे पार करके नीचे आधार में पहुँच जाता है। इस स्थिति में चट्टानों में घुलन क्रिया ठीक ढंग से नहीं हो पाती है। 
    • कार्स्ट क्षेत्र में विस्तृत तथा गहरी घाटियाँ होनी चाहिये तथा उनके समीप ऐसे उच्च स्थलखंड हों जिनमें ऊपरी सतह के नीचे अधिक विस्तृत रूप में लाइमस्टोन शैल की स्थिति हो। इस दशा में उच्च भाग की ऊपरी सतह से जल रिस कर नीचे लाइमस्टोन में पहुँचता है तथा वहाँ से नीचे उतर कर ढाल के अनुसार नदी की घाटी में पहुँचने का प्रयास करता है। इस प्रक्रिया के दौरान जल रासायनिक कार्य द्वारा लाइमस्टोन शैल में घुलन क्रिया के कारण तरह-तरह के छिद्रों तथा कंदराओं का निर्माण करता है। 
    • चूँकि कार्स्ट स्थलाकृति का निर्माण जल की रासायनिक क्रिया द्वारा होता है, अतः क्षेत्र में भूमिगत जल की पूर्ति के लिये पर्याप्त जल होना चाहिये।

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