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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • "कृषि उत्पाद बाज़ार समिति (APMC) की स्थापना कृषकों के हित के लिये की गई, परंतु यह अपेक्षित उद्देश्य पूर्ण करने में असफल रही।" इस कथन के संदर्भ में हाल ही में कृषि उत्पाद विनिमय संबंधी प्रयासों पर प्रकाश डालिये।

    05 Apr, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 3 अर्थव्यवस्था

    उत्तर :

    कृषि राज्य का विषय है और अधिकांश राज्य सरकारों ने पारदर्शिता और व्यापारियों के विवेकाधिकार को समाप्त करने के लिये 1950 या उसके बाद APMC अधिनियम को लागू किया। यह समग्र रूप में सरकारी नीतियों का विस्तार है, जो खाद्य सुरक्षा, किसानों के लाभकारी मूल्य और उपभोक्ताओं के उचित मूल्य को निर्देशित करता है। हालाँकि, इस अधिनियम के संबंध में यह व्यापक धारणा रही है कि हाल के दिनों में इसने घोषित लक्ष्यों के विपरीत काम किया है।

    असफलताएँ:
    APMC का एकाधिकारः यह एक तरफ किसान को बेहतर ग्राहकों से वंचित करता है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ता प्रभावित।

    कार्टेलाइज़ेशन-APMC के एजेंटों द्वारा संगठित होकर उत्पादों की कम बोली लगाई जाती है और बाद में इसे उच्च कीमतों पर बेचा जाता है जिससे किसानों के हित प्रभावित होते हैं।

    प्रवेश बाधाएँ:  इनमें लाइसेंस शुल्क अत्यधिक है तथा अनेक APMC में किसानों को संचालन की अनुमति नहीं। साथ ही दुकानों का किराया अत्यधिक, जो प्रतियोगिता से दूर करता है।

    हितों का टकरावः APMC नियामक और बाज़ार की दोहरी भूमिका निभाते हैं। बाज़ार की बजाय नियमन को अधिक महत्त्व, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा।

    उच्च कमीशन, कर और लेवी-किसान कमीशन, कर विपणन शुल्क और सेस का भुगतान करते हैं, जो उत्पादों की कीमतों को अत्यधिक बढ़ा देता है।

    इसके अलावा एजेंट बिना कारण या बिना स्पष्टीकरण के भुगतान का एक हिस्सा रोक लेते हैं। किसानों को कभी-कभी भुगतान पर्ची देने से मना कर दिया जाता है, जो ऋण प्राप्त करने के लिये आवश्यक है।

    उपर्युक्त समस्याओं को देखते हुए सरकार ने कृषि उत्पाद विनिमय संबंधी अनेक प्रयास किये हैं, जो निम्न हैं-

    ए.पी.एम.सी. एक्ट, 2003: इसके अंतर्गत किसानों को APMC मंडी से बाहर उत्पादों को बेचने की छूट प्रदान की गई है, साथ ही APMCs के उत्तरदायित्त्व को बढ़ाया गया है।

    ई-नाम (e-NAM): यह एक ऑनलाइन ट्रेड पोर्टल है जहाँ किसान देश के किसी भी कोने से अपने उत्पादों के लिये खरीदारों से संबंध स्थापित कर सकता है। इससे न केवल किसानों को उचित मूल्य की प्राप्ति हो सकेगी बल्कि उपभोक्ताओं के हितों को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके अलावा NAM, APMC संबंधित समस्त जानकारी और सेवाओं के लिये एकल खिड़की के रूप में कार्य करेगा।

    स्पष्ट है कि सरकार ने कृषि उत्पाद विनिमय के संबंध में हर संभव प्रयास किया है लेकिन ये प्रयास भी अनेक चुनौतियों से घिरे हैं जिसके अंतर्गत किसानों में जागरूकता का अभाव, अपर्याप्त अवसंरचनात्मक ढाँचा, निरक्षरता व गरीबी, बिचौलियों की उपस्थिति आदि प्रमुखता से है जिनको दूर कर किसानों के हितों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    अन्य महत्त्वपूर्ण सूचनाः 2014-15 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 10 से कम राज्यों ने APMC एक्ट में बदलाव किये हैं।

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