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Mains Marathon

  • 31 Jul 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़

    दिवस 40: आप कौशल विकास मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रतिष्ठित सरकारी विभाग में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। एक सुबह, एक कनिष्ठ महिला अधिकारी आपके कार्यालय में आती है और एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराती है, जिसमें वह बार-बार अश्लील टिप्पणियों, अनुचित टेक्स्ट संदेशों व असहज व्यवहार के रूप में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाती है। वह बताती है कि हालाँकि वह अपनी नौकरी को महत्त्व देती है तथा संस्थान का सम्मान करती है, लेकिन अब वह भावनात्मक तनाव एवं असुरक्षा की भावना के कारण कार्यालय जाने से डरती है।

    जिस अधिकारी पर आरोप लगाया गया है, उसकी पेशेवर छवि अच्छी मानी जाती है और मंत्रालय में उसके प्रभावशाली संपर्क भी हैं। जब उससे इस विषय में बात की जाती है, तो वह आरोपों को पूरी तरह नकार देता है और यह संकेत देता है कि शिकायतकर्त्ता ने संभवतः सामान्य बातचीत को गलत समझा होगा या वह पेशेवर प्रतिद्वंद्विता के कारण ऐसा कर रही हो। विभाग में आंतरिक शिकायत समिति ( ICC) कार्यरत है, लेकिन शिकायतकर्त्ता औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने से झिझक रही है क्योंकि उसे सामाजिक बदनामी, पेशेवर नुकसान और कार्यस्थल पर अकेले पड़ जाने का डर है।

    जैसे-जैसे घटना की खबर अनौपचारिक रूप से फैलती है, आपको अन्य कर्मचारियों में बेचैनी महसूस होने लगती है। शिकायतकर्त्ता गोपनीयता की गुहार लगाती है, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिये तत्काल कार्रवाई की भी माँग करती है।

    A. इस स्थिति में मुख्य नैतिक मुद्दे क्या हैं?
    B. आप शिकायतकर्त्ता और अभियुक्त, दोनों के प्रति निष्पक्षता सुनिश्चित करते हुए इस स्थिति से कैसे निपटेंगे?
    C. इस मामले में आपके निर्णय लेने में कौन-से नैतिक मूल्य मार्गदर्शन करेंगे?
    D. कार्यस्थल संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिये आप कौन-से दीर्घकालिक निवारक एवं सुधारात्मक उपायों का सुझाव देंगे?

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • कार्यस्थल पर निष्पक्षता, निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे परस्पर विरोधी नैतिक मूल्यों का अभिनिर्धारण कीजिये।
    • वस्तुनिष्ठता, सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता बनाए रखते हुए प्रत्येक कार्य के परिणामों पर विचार प्रस्तुत कीजिये।
    • एक ऐसा समाधान प्रस्तावित कीजिये जो निष्पक्षता, निजता, जवाबदेही और न्याय के बीच संतुलन बनाए रखे तथा शिकायतकर्त्ता की गरिमा एवं अभियुक्त के निष्पक्ष प्रक्रिया के अधिकार, दोनों को बनाए रखे।

    परिचय:

    आप एक सरकारी विभाग के निदेशक हैं, जिस पर एक कनिष्ठ महिला अधिकारी द्वारा एक वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्त्ता पेशेवर और सामाजिक प्रतिक्रिया के डर से तत्काल कार्रवाई चाहती है, जिससे एक चुनौतीपूर्ण नैतिक स्थिति उत्पन्न होती है जहाँ निष्पक्षता, निजता एवं सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

    हितधारक:

    हितधारक

    भूमिका/हित

    शिकायतकर्त्ता (कनिष्ठ अधिकारी)

    न्याय और सुरक्षा की मांग, व्यावसायिक और सामाजिक परिणामों का डर।

    आरोपी (वरिष्ठ अधिकारी)

    आरोपों से इनकार करते हुए प्रतिष्ठा और कॅरियर को नुकसान पहुँचने की आशंका जताना।

    आप (निदेशक)

    निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने और एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाए रखने के लिये ज़िम्मेदार हैं।

    आंतरिक शिकायत समिति (ICC)

    उत्पीड़न-विरोधी नीतियों की जाँच और उनका अनुपालन सुनिश्चित करने का कार्यभार।

    अन्य कर्मचारी

    कार्यस्थल के वातावरण को लेकर चिंतित होना, असहजता या अनिश्चितता महसूस करना।

    मंत्रालय

    एक पेशेवर और सम्मानजनक वातावरण बनाए रखने में रुचि।

    मुख्य भाग:

    A. शामिल मुख्य नैतिक मुद्दे:

    • उत्पीड़न बनाम प्रतिष्ठा: यौन उत्पीड़न के आरोप वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिष्ठा के साथ टकराव उत्पन्न करते हैं, जिससे विश्वसनीयता, पूर्वाग्रह और संभावित प्रतिशोध के प्रश्न उठते हैं।
    • निष्पक्षता और उचित प्रक्रिया: कार्यस्थल में न्याय और जवाबदेही बनाए रखने के लिये शिकायतकर्त्ता एवं आरोपी दोनों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण है।
    • निजता बनाम पारदर्शिता: उचित जाँच सुनिश्चित करने के लिये संबंधित अधिकारियों (जैसे: ICC) को सूचित करने और शामिल करने की आवश्यकता के साथ शिकायतकर्त्ता के निजता के अनुरोध को संतुलित करना।
    • सुरक्षा और भावनात्मक संकट: शिकायतकर्त्ता द्वारा महसूस किया गया भावनात्मक संकट और असुरक्षा कार्यस्थल के वातावरण तथा कर्मचारियों को उत्पीड़न से बचाने के कर्त्तव्य के बारे में चिंताएँ उत्पन्न करते हैं।

    B. दोनों पक्षों के प्रति निष्पक्षता के साथ स्थिति को संभालना:

    • तत्काल कार्रवाई: शिकायतकर्त्ता की निजता सुनिश्चित की जानी चाहिये, उसकी परेशानी को स्वीकार कर उसे एक सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाना चाहिये। उसे ICC में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिये प्रोत्साहित किआ जाना चाहिये, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना चाहिये कि यह बिना किसी दबाव के किया जाए तथा कलंक और प्रतिशोध की उसकी चिंताओं का सम्मान किया जाए।
    • अंतरिम सुरक्षा: जब तक जाँच चल रही है, शिकायतकर्त्ता को अस्थायी राहत प्रदान करने पर विचार करने की आवश्यकता है, जैसे कि उसकी रिपोर्टिंग संरचना में बदलाव या अस्थायी स्थानांतरण, ताकि उसके कॅरियर को नुकसान पहुँचाए बिना उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
    • निष्पक्ष जाँच: यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि ICC एक गहन और निष्पक्ष जाँच करे, दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करे तथा यह सुनिश्चित करे कि पूरी प्रक्रिया गोपनीय, निष्पक्ष और न्यायसंगत ढंग से संचालित हो।  
    • मंत्रालय की भागीदारी: मैं इस प्रक्रिया का समर्थन करने और यह सुनिश्चित करने में मंत्रालय को शामिल करूँगा कि आंतरिक संबंधों या प्रतिष्ठा को परिणाम में हस्तक्षेप किये बिना त्वरित, प्रभावी जाँच के लिये आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।

    C. निर्णय लेने में मार्गदर्शन हेतु नैतिक मूल्य:

    • न्याय और निष्पक्षता: यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि शिकायतकर्त्ता और अभियुक्त, दोनों के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया जाए, उनके अधिकारों का सम्मान किया जाए तथा झूठे आरोपों या उत्पीड़न से किसी को भी अनुचित रूप से नुकसान न पहुँचे।
    • सत्यनिष्ठा और जवाबदेही: प्रक्रिया की शुचिता की रक्षा करते हुए निर्णय लेने में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि बिना किसी भय या पक्षपात के न्याय किया जाए।
    • निजता और गरिमा: दोनों पक्षों की निजता का सम्मान किया जाना चाहिये और संवेदनशील जानकारी को अत्यंत सावधानी से संभालने की आवश्यकता है,साथ ही शिकायतकर्त्ता की गरिमा सुनिश्चित करते हुए अभियुक्त को अपना बचाव करने का उचित अवसर प्रदान किया जाना चाहिये।
    • सहानुभूति और करुणा: शिकायतकर्त्ता के संभावित भावनात्मक कष्ट और भय को स्वीकार किया जाना चाहिये और इस तरह से प्रक्रिया का संचालन किया जाना चाहिये जिससे उसकी भलाई के प्रति समझ एवं सम्मान प्रदर्शित हो।

    D. दीर्घकालिक निवारक और सुधारात्मक उपाय:

    • प्रशिक्षण और जागरूकता: सम्मान की संस्कृति बनाने, उचित आचरण के महत्त्व पर ज़ोर देने और उत्पीड़न के परिणामों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने हेतु सभी कर्मचारियों के लिये नियमित यौन उत्पीड़न प्रशिक्षण लागू किया जाना चाहिये।
    • स्पष्ट रिपोर्टिंग तंत्र: आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को सुदृढ़ किया जाना चाहिये तथा उसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाना चाहिये, ताकि कर्मचारी प्रतिशोध के भय के बिना घटनाओं की रिपोर्ट करने की प्रक्रिया से भली-भाँति अवगत हों।
    • सहायता प्रणालियाँ: उत्पीड़न के पीड़ितों की सहायता करने और मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिये परामर्श सेवाएँ और कर्मचारी सहायता कार्यक्रम की शुरुआत की जानी चाहिये। 
    • शून्य सहनशीलता नीति: यौन उत्पीड़न के प्रति शून्य सहनशीलता नीति सुनिश्चित की जानी चाहिये, जिसमें अपराधियों के लिये स्पष्ट परिणाम हों और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि इसे बिना किसी पूर्वाग्रह या पक्षपात के लागू किया जाए।

    निष्कर्ष:

    जैसा कि अरस्तू ने उचित ही कहा है, “मनुष्य का परम शुभ वह क्रिया है जो आत्मा के सद्गुण के अनुसार हो।” निदेशक को इस सद्गुण-आधारित मार्गदर्शक सिद्धांत का पालन करना चाहिये, ताकि उत्पीड़न की जाँच निष्पक्षता, सम्मान एवं नैतिक निष्ठा के साथ की जा सके तथा सभी पक्षों की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित हो।

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