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07 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 46: आप राहुल हैं, एक भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी, जिन्हें हिमालयी राज्य के एक पहाड़ी ज़िले में ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) समन्वयक के रूप में तैनात किया गया है। यह क्षेत्र भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिये सुभेद्य है।
हाल ही में, ऊपरी घाटी में एक भीषण बादल फटने की घटना हुई, जिसमें कई लोगों की मृत्यु हो गई, घर नष्ट हो गये, वन क्षेत्र तबाह हो गया और एक छोटा जलविद्युत बाँध भी बह गया। प्रारंभिक रिपोर्टों से यह संकेत मिला है कि सुभेद्य ढलानों पर अवैज्ञानिक निर्माण, वनों की कटाई एवं पर्यावरणीय मंज़ूरियों में लापरवाही के कारण इस आपदा की भयावहता और बढ़ गई।
एक गोपनीय रिपोर्ट में स्थानीय भूवैज्ञानिक ने बताया है कि जिन क्षेत्रों को सुभेद्य घोषित किया गया था या बादल फटने की आशंका थी, वहाँ के बारे में चेतावनी दी गई थी, लेकिन प्रशासन ने इन चेतावनियों को राजनेताओं और रियल एस्टेट लॉबी के दबाव में अनदेखा कर दिया।
अब एक केंद्रीय टीम इस क्षेत्र का दौरा करने आ रही है। आपको इस आपदा के कारणों और प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिये कहा गया है। लेकिन आपके वरिष्ठ अधिकारी और राजनीतिक नेतृत्व आपसे यह अपेक्षा कर रहे हैं कि आप पर्यावरणीय लापरवाही को नज़रअंदाज़ करते हुए इस आपदा को ‘प्राकृतिक और अप्रत्याशित कारणों से हुई दुर्घटना’ के रूप में प्रस्तुत करें। आपको चेतावनी दी गई है कि यदि आप प्रशासनिक कमियों को उजागर करेंगे, तो इससे आपकी आगामी पोस्टिंग और पदोन्नति पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर शोक संतप्त ग्रामीण, विस्थापित आदिवासी समुदाय और जलवायु कार्यकर्त्ता पारदर्शिता, जवाबदेही एवं स्थायी पुनर्निर्माण नीतियों की मांग कर रहे हैं।
- इस स्थिति में राहुल को किन नैतिक द्वंद्वों का सामना करना पड़ रहा है?
- विकल्पों का मूल्यांकन कीजिये और प्रत्येक के संभावित परिणाम बताइये।
- राहुल के लिये सर्वोत्तम कार्यवाही का सुझाव दीजिये।
- उचित नैतिक तर्कों और सुशासन के सिद्धांतों के आधार पर इसका समाधान प्रस्तुत कीजिये।
(250 शब्द)
उत्तर
दृष्टिकोण :
- संदर्भ स्थापित करने के लिये संक्षेप में स्थिति का परिचय दीजिये।
- इस मामले में राहुल के सामने आने वाली नैतिक दुविधाओं पर चर्चा कीजिये।
- उसके लिये उपलब्ध विकल्पों और प्रत्येक के परिणामों का मूल्यांकन कीजिये।
- राहुल के लिये सर्वोत्तम कार्यवाही का सुझाव दीजिये।
- नैतिक तर्क और सुशासन के सिद्धांतों के साथ औचित्य सिद्ध कीजिये।
परिचय
एक हिमालयी ज़िले में ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) समन्वयक के रूप में, मेरी भूमिका प्राकृतिक आपदाओं से जान-माल और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ी है। हाल ही में हुई बादल फटने की घटना से व्यापक मानवीय और पर्यावरणीय क्षति हुई है, जो अवैज्ञानिक निर्माण, वनों की कटाई और प्रारंभिक चेतावनियों की अनदेखी के कारण और भी बढ़ गई है। इस स्थिति में प्रशासनिक लापरवाही को छिपाने के लिये राजनीतिक दबाव तथा सत्य, जवाबदेही और सतत् आपदा प्रबंधन के प्रति मेरे कर्त्तव्य के बीच नैतिक संघर्ष उत्पन्न होता है।
मुख्य भाग :
A. नैतिक दुविधाएँ
- कर्त्तव्य बनाम स्वार्थ - सत्य को बनाए रखने से मेरे करियर की संभावनाएँ और पोस्टिंग खतरे में पड़ सकती हैं।
- पारदर्शिता बनाम छिपाना- क्या भूवैज्ञानिक की रिपोर्ट को प्रकट किया जाना चाहिये जिसमें रोकथाम योग्य कारणों का संकेत दिया गया है।
- जन कल्याण बनाम राजनीतिक लाभ- चुनाव से पहले सार्वजनिक छवि बनाए रखने की नेताओं की इच्छा के विरुद्ध पीड़ितों का न्याय पाने का अधिकार।
- अल्पकालिक राहत बनाम दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण - तत्काल पुनर्वास बनाम प्रणालीगत कमियों को दूर करना।
- पर्यावरणीय संरक्षण बनाम आर्थिक हित - अचल संपत्ति और बाँध विकास के दबावों के विरुद्ध संवेदनशील पारिस्थितिकी प्रणालियों की रक्षा करना।
- जवाबदेही बनाम संगठनात्मक निष्ठा- जनता के प्रति कर्त्तव्य और वरिष्ठ नौकरशाहों के प्रति निष्ठा में संतुलन।
B. विकल्प और परिणाम
विकल्प A – अनुपालन करें और कम महत्त्व दें
- लाभ: टकराव से बचाव, राजनीतिक सद्भावना सुरक्षित।
- हानि: ईमानदारी का उल्लंघन, असुरक्षित प्रथाओं को बढ़ावा, भविष्य में आपदाओं का जोखिम, जनता का विश्वास खत्म होना।
विकल्प B - सार्वजनिक रूप से सूचना देना
- लाभ: पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई को गति प्रदान कर सकता है।
- हानि: उच्च व्यक्तिगत जोखिम, संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई, राहत प्रयासों का संभावित राजनीतिकरण।
विकल्प C – केंद्रीय टीम को तथ्यात्मक, रचनात्मक रिपोर्ट प्रदान करें (संतुलित दृष्टिकोण)
- लाभ: सत्य को बनाए रखता है, तथ्यों को कूटनीतिक ढंग से प्रस्तुत करता है, व्यक्तियों को दोष दिये बिना समाधान तैयार करता है, राजनीतिक प्रतिक्रिया को कम करता है।
- हानि: अभी भी प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है; सावधानीपूर्वक रिपोर्ट तैयार करने और साक्ष्य-आधारित भाषा की आवश्यकता है।
विकल्प D– स्वतंत्र समीक्षा तक प्रकटीकरण में विलंब
- लाभ: अनेक कई विशेषज्ञों की सलाह से मामला अधिक मज़बूत बनता है।
- हानि: तत्काल नीति सुधार में देरी, इसे निष्क्रियता के रूप में देखा जा सकता है।
C. अनुशंसित कार्यवाही
मैं विकल्प C का पालन करूँगा, जिसमें ईमानदारी और कूटनीतिक व्यवहार का संयोजन होगा:
- साक्ष्य-आधारित रिपोर्ट - इसमें भूवैज्ञानिक के निष्कर्ष, मानचित्रित आपदा क्षेत्र और फोटोग्राफिक साक्ष्य शामिल करें, जिससे वैज्ञानिक निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
- आधिकारिक प्रस्तुति- परिशिष्टों के साथ केंद्रीय टीम को रिपोर्ट भेजें तथा रिकॉर्ड के लिये राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को प्रतिलिपि भेजें।
- तत्काल राहत उपाय - पीड़ितों के लिये चिकित्सा सहायता, अस्थायी आश्रय, भोजन और नकद मुआवज़े का समन्वय करना।
- स्वतंत्र तकनीकी जाँच का अनुरोध- पर्यावरण और निर्माण संबंधी कारकों का आकलन करने के लिये एक तटस्थ विशेषज्ञ पैनल की माँग करें।
- स्थायी पुनर्निर्माण - ढलान स्थिरीकरण, पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रीकरण, पुनर्वनीकरण अभियान और सख्त भवन मानदंडों की सिफारिश करें।
- हितधारक सहभागिता - ग्रामीणों, आदिवासियों और कार्यकर्त्ताओं से मिलकर उन्हें कार्रवाई समझाएँ, उनकी चिंताओं को सुनें और उन्हें पारदर्शी पुनर्वास का आश्वासन दें।
- दबाव का दस्तावेज़ीकरण- भविष्य में आरोपों से बचाव के लिये किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप का लिखित रिकॉर्ड रखें।
- प्रोटोकॉल के तहत संज्ञान- यदि महत्त्वपूर्ण निष्कर्षों को हटाने का निर्देश दिया जाता है, जो जीवन को जोखिम में डालते हैं, तो कानूनी माध्यमों से उच्च अधिकारियों को सूचित करें।
D. नैतिक तर्क और शासन सिद्धांत
- कर्त्तव्य नैतिकता- सार्वजनिक अधिकारी का यह नैतिक दायित्व है कि वह जीवन की रक्षा करे, चाहे इसके लिये व्यक्तिगत मूल्य ही क्यों न चुकाना पड़े।
- उपयोगितावाद - दीर्घकालिक सुरक्षा और आपदा निवारण से अधिकतम लोगों को लाभ मिलता है।
- सदाचार नैतिकता - साहस, ईमानदारी और विवेक निर्णय लेने में मार्गदर्शन करते हैं।
- सुशासन सिद्धांत - पारदर्शिता, जवाबदेही, विधि का शासन, समानता, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण।
निष्कर्ष:
अरस्तू ने निर्णय लेने में सद्गुण, विशेष रूप से व्यावहारिक ज्ञान (फ्रोनेसिस), साहस और न्याय के महत्त्व पर ज़ोर दिया। पर्यावरणीय जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिये राजनीतिक दबावों का सामना करने का साहस, परस्पर विरोधी हितों के बीच संतुलन बनाने के लिये व्यावहारिक ज्ञान और कमज़ोर समुदायों की रक्षा के लिये न्याय आवश्यक है। राहुल के अनुसार, सद्गुणी कार्य करने का अर्थ है सर्वहित को प्राथमिकता देना और हिमालयी क्षेत्र के भविष्य के लिये स्थायी पुनर्निर्माण सुनिश्चित करना।