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07 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 46: आप प्रिया हैं, जो एक पिछड़े ज़िले में जिला आपूर्ति अधिकारी (District Supply Officer) के रूप में नियुक्त हैं जहाँ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) हज़ारों गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों के जीवन-निर्वाह के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
कार्यभार सँभालने के शीघ्र बाद ही आपको कई शिकायतें और व्हिसलब्लोअर रिपोर्टें प्राप्त होती हैं, जिनसे पता चलता है कि कई उचित मूल्य की दुकानों (FPS) के डीलर फर्ज़ी राशन कार्ड और जाली डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग करके सब्सिडी वाले खाद्यान्न की कालाबाज़ारी कर रहे हैं। आपके क्षेत्रीय सत्यापन से यह स्पष्ट होता है कि भारी मात्रा में अनाज का गबन हो रहा है। कुछ विभागीय अधिकारी भी इसमें शामिल हैं।
जैसे ही आप जाँच शुरू करती हैं, वरिष्ठ अधिकारी आपको राजनीतिक संवेदनशीलता और लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए धीमी गति से काम करने की चेतावनी देते हैं।
साथ ही आपको यह भी बताया जाता है कि स्थानीय मंत्री का रिश्तेदार सबसे बड़े FPS ठेकेदारों में से एक है। इस बीच, वास्तविक लाभार्थी अब भी वंचित हैं तथा नागरिक समाज संगठन त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
- इस परिस्थिति में प्रिया के समक्ष कौन-कौन से नैतिक द्वंद्व (ethical dilemmas) उपस्थित हैं?
- उनके पास कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं? प्रत्येक विकल्प के संभावित परिणामों की समालोचनात्मक विवेचना कीजिये।
- आप किस कार्यवाही की अनुशंसा करेंगे? नैतिक दृष्टिकोण से उसका औचित्य स्पष्ट कीजिये।
(250 शब्द)
उत्तर
दृष्टिकोण :
- संक्षेप में स्थिति का परिचय देकर संदर्भ स्थापित करना।
- वर्तमान स्थिति में प्रिया के सामने आने वाली नैतिक दुविधाओं की पहचान करना।
- उपलब्ध विकल्पों और संभावित परिणामों पर चर्चा करना।
- उपयुक्त कार्य योजना की सिफारिश करना।
- नैतिक तर्क के साथ इसका औचित्य सिद्ध करना।
- उपयुक्त आगे की राह के साथ निष्कर्ष प्रस्तुत करना।
प्रिया के रूप में, ज़िला आपूर्ति अधिकारी होने के नाते मैं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की देखरेख करती हूँ, जो गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के परिवारों के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। शिकायतों और व्हिसल ब्लोअर की रिपोर्टों से पता चला कि उचित मूल्य की दुकानों (FPS) के डीलर, नकली राशन कार्ड और जाली रिकॉर्ड का उपयोग कर सब्सिडी वाले अनाज को काले बाज़ार में बेच रहे हैं। मेरे सत्यापन में बड़े पैमाने पर रिसाव और अधिकारिक मिलीभगत की पुष्टि हुई है। वरिष्ठ अधिकारी राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण मुझे धीमी कार्रवाई करने का सुझाव दे रहे हैं, क्योंकि इसमें एक स्थानीय मंत्री का रिश्तेदार शामिल है। इस बीच, वास्तविक लाभार्थी पीड़ित हो रहे हैं और नागरिक समाज त्वरित कार्रवाई की माँग कर रहा है।
मुख्य भाग:
नैतिक दुविधाएँ
- कर्त्तव्य बनाम राजनीतिक दबाव: उसे गरीबों की सेवा करने के अपने कर्त्तव्य को निभाने और राजनीतिक हितों की रक्षा करने के दबाव के बीच चयन करना चाहिये।
- ईमानदारी बनाम करियर जोखिम: सख्त कार्रवाई करने पर उत्पीड़न, प्रतिकूल पदस्थापन और करियर में अवरोध का खतरा रहता है।
- न्याय बनाम भ्रष्टाचार: उन्हें सहकर्मियों और राजनेताओं से जुड़े प्रणालीगत भ्रष्टाचार के खिलाफ वंचित लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिये।
- पारदर्शिता बनाम छिपाव: यह निर्णय लेना कि रिसाव को खुले तौर पर उजागर किया जाए या प्रशासनिक सामंजस्य बनाए रखने के लिये उसे छिपाया जाए।
- जवाबदेही बनाम निष्ठा: जनता के प्रति उत्तरदायित्व और प्रशासन के प्रति निष्ठा में संतुलन बनाना।
B. विकल्प और परिणाम
विकल्प A: आदेशों का पालन और धीमी गति से काम करें।
- लाभ: राजनीतिक सुरक्षा और प्रशासनिक शांति।
- हानि: भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, गरीबों को पीड़ित करता है, जनता के विश्वास को कम करता है और नैतिक कर्त्तव्य का उल्लंघन करता है।
विकल्प B: तत्काल, सख्त कार्रवाई
- लाभ: ईमानदारी और न्याय को बनाए रखने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सशक्त करने और लाभार्थियों की मदद करने में सहायक।
- हानि: राजनीतिक प्रतिक्रिया, उत्पीड़न और व्यक्तिगत सुरक्षा संबंधी चिंताओं का जोखिम।
विकल्प C: कार्रवाई से पहले गोपनीय जाँच
- लाभ: इससे ठोस सबूत और कानूनी मामला बनता है।
- हानि: इससे न्याय में देरी होती है, लाभार्थियों की पीड़ा बढ़ती है और भ्रष्टाचार जारी रहता है।
विकल्प D: नागरिक समाज और मीडिया के साथ सहयोग
- लाभ: इससे जन जागरूकता बढ़ेगी और सुधार के लिये दबाव बनेगा।
- हानि: राजनीतिकरण और प्रशासनिक प्रतिक्रिया का जोखिम।
C. अनुशंसित कार्यवाही
मैं एक संतुलित दृष्टिकोण (विकल्प C के साथ B और D के तत्त्व शामिल हों) की सिफारिश करता हूँ:
- ठोस साक्ष्यों और संलिप्तता का दस्तावेज़ीकरण करते हुए विस्तृत, साक्ष्य-आधारित जाँच शुरू करना।
- निष्कर्षों को निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित करने के लिये उच्चाधिकारियों और सतर्कता निकायों को औपचारिक रूप से भेजना।
- रिसाव को रोकने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग जैसे तकनीकी सुरक्षा उपायों को लागू करना।
- जनजागरूकता और निगरानी तंत्र विकसित करने के लिये नागरिक समाज संगठनों के साथ सहयोग करना।
- वास्तविक लाभार्थियों के लिये खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु तत्काल राहत उपाय शुरू करना।
- राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव का विस्तृत रिकॉर्ड रखना ताकि कानूनी सुरक्षा मिल सके।
- यदि अवरोध जारी रहे तो मामले को कानूनी या भ्रष्टाचार-निरोधी एजेंसियों तक पहुँचाना।
D. नैतिक औचित्य
- यह दृष्टिकोण कर्त्तव्य नैतिकता के अनुरूप है, जो जोखिम के बावजूद कमज़ोर आबादी की सेवा करने और ईमानदारी बनाए रखने के नैतिक दायित्व पर ज़ोर देता है।
- इसमें उपयोगितावाद को शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य अधिकतम लाभार्थियों की सुरक्षा करके कल्याण को अधिकतम करना है।
- इसमें सुशासन के सिद्धांत- पारदर्शिता, जवाबदेही, संवेदनशीलता और समानता भी समाहित हैं।
निष्कर्ष:
जैसा कि जॉन रॉल्स का न्याय सिद्धांत प्रतिपादित करता है, सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं का गठन इस प्रकार होना चाहिये कि वे समाज के सबसे कमज़ोर वर्गों को अधिकतम लाभ पहुँचाएँ। प्रिया की ज़िम्मेदारी है कि वितरण प्रणाली को न्यायपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखते हुए सबसे गरीब वर्ग को बिना किसी भेदभाव के खाद्य सुरक्षा प्रदान करे। नैतिक और साहसिक आचरण अपनाकर, उसे अज्ञान के आवरण के सिद्धांत का पालन करना चाहिये, जिससे सभी लाभार्थियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो।